MP Board Class 12 Chemistry Electrolytic Cell and Electrolysis: विद्युत अपघटनी सेल और विद्युत अपघटन – विस्तृत अध्ययन

Class 12 Chemistry Electrolytic Cell and Electrolysis : कक्षा 12 रसायन विज्ञान (Chemistry) के लिए ‘विद्युत अपघटनी सेल’ (Electrolytic Cell) और ‘विद्युत अपघटन’ (Electrolysis) का संपूर्ण नोट्स। Class 12 Chemistry Electrolytic Cell and Electrolysis में फैराडे के विद्युत अपघटन के नियम (Faraday’s Laws), गणितीय सूत्र, विद्युत अपघटन के उत्पाद और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हल सहित संख्यात्मक प्रश्न (Numericals) शामिल हैं।

Class 12 Chemistry Electrolytic Cell and Electrolysis

1. प्रस्तावना (Introduction)

वैद्युतरसायन (Electrochemistry) में हम दो प्रकार के सेलों का अध्ययन करते हैं। पहला गैल्वैनी सेल (Galvanic Cell) जो स्वतः होने वाली रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है। दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण सेल विद्युत अपघटनी सेल (Electrolytic Cell) है।

विद्युत अपघटनी सेल एक ऐसी युक्ति है जिसमें विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) का उपयोग करके किसी स्वतः अप्रवर्तित रासायनिक अभिक्रिया (Non-spontaneous chemical reaction) को संपन्न कराया जाता है। इस सेल में होने वाली पूरी प्रक्रिया को विद्युत अपघटन (Electrolysis) कहा जाता है।

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सरल शब्दों में, जब किसी वैद्युत अपघट्य (Electrolyte) के गलित अवस्था (molten state) या जलीय विलयन (aqueous solution) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह अपने अवयवों (आयनों) में टूटकर इलेक्ट्रोडों पर रासायनिक परिवर्तन उत्पन्न करता है। इसी प्रक्रिया को विद्युत अपघटन कहते हैं। औद्योगिक रूप से इसका उपयोग धातुओं के निष्कर्षण (Extraction of metals) और शुद्धिकरण (Purification) में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

2. विद्युत अपघटनी सेल की संरचना और कार्यप्रणाली (Construction and Working)

गैल्वैनी सेल की तुलना में विद्युत अपघटनी सेल की संरचना काफी सरल होती है।

संरचना (Structure):

  • पात्र (Container): इसमें एक ही कांच या कुचालक पदार्थ का पात्र होता है जिसे वोल्टामीटर (Voltameter) भी कहते हैं।
  • विद्युत अपघट्य (Electrolyte): पात्र में वैद्युत अपघट्य (जैसे NaCl, CuSO_4) का गलित (pighla hua) रूप या जलीय विलयन भरा होता है।
  • इलेक्ट्रोड (Electrodes): इस विलयन में दो धात्विक या ग्रेफाइट की छड़ें डुबोई जाती हैं जिन्हें बाह्य बैटरी से जोड़ा जाता है।
    • ऐनोड (Anode): बैटरी के धनात्मक (+) सिरे से जुड़े इलेक्ट्रोड को ऐनोड कहते हैं। (ध्यान दें: गैल्वैनी सेल में ऐनोड ऋणात्मक होता है, लेकिन विद्युत अपघटनी सेल में यह धनात्मक होता है)। यहाँ ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है।
    • कैथोड (Cathode): बैटरी के ऋणात्मक (–) सिरे से जुड़े इलेक्ट्रोड को कैथोड कहते हैं। यहाँ अपचयन (Reduction) होता है।

कार्यप्रणाली (Mechanism):

जब बैटरी से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो विलयन में उपस्थित आयन विपरीत आवेश वाले इलेक्ट्रोडों की ओर गति करने लगते हैं।

  • धनायन (Cations – धनावेशित आयन) कैथोड (–) की ओर जाते हैं और वहां इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचित (reduced) हो जाते हैं।
  • ऋणायन (Anions – ऋणावेशित आयन) ऐनोड (+) की ओर जाते हैं और वहां इलेक्ट्रॉन त्यागकर ऑक्सीकृत (oxidized) हो जाते हैं।

3. विद्युत अपघटन का उदाहरण (Example of Electrolysis)

गलित सोडियम क्लोराइड (Molten NaCl) का विद्युत अपघटन:

जब गलित NaCl में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह \text{Na}^+ और \text{Cl}^- आयनों में वियोजित रहता है।

  • कैथोड (–) पर अभिक्रिया (अपचयन):\text{Na}^+ आयन कैथोड की ओर जाते हैं और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके सोडियम धातु में बदल जाते हैं।

        \[\text{Na}^+ + \text{e}^- \rightarrow \text{Na(s)}\]

  • ऐनोड (+) पर अभिक्रिया (ऑक्सीकरण):\text{Cl}^- आयन ऐनोड की ओर जाते हैं और इलेक्ट्रॉन त्यागकर क्लोरीन गैस बनाते हैं।

        \[\text{Cl}^- \rightarrow \frac{1}{2}\text{Cl}_2\text{(g)} + \text{e}^-\]

  • समग्र अभिक्रिया (Overall Reaction):

        \[\text{Na}^+ + \text{Cl}^- \rightarrow \text{Na(s)} + \frac{1}{2}\text{Cl}_2\text{(g)}\]

    इस प्रकार गलित NaCl के विद्युत अपघटन से कैथोड पर सोडियम धातु और ऐनोड पर क्लोरीन गैस प्राप्त होती है।

4. फैराडे के विद्युत अपघटन के नियम (Faraday’s Laws of Electrolysis – Mathematical Generations)

विद्युत अपघटन के मात्रात्मक (Quantitative) पहलुओं को समझाने के लिए माइकल फैराडे (Michael Faraday) ने 1834 में दो महत्वपूर्ण नियम दिए। बोर्ड परीक्षा के लिए ये नियम और इनके गणितीय सूत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

4.1 फैराडे का प्रथम नियम (Faraday’s First Law)

नियम: विद्युत अपघटन के दौरान किसी भी इलेक्ट्रोड पर मुक्त होने वाले (या जमा होने वाले) पदार्थ की मात्रा (w), उसमें प्रवाहित की गई विद्युत आवेश की मात्रा (Q) के सीधे समानुपाती होती है।

गणितीय रूप:

    \[w \propto Q\]

चूँकि हम जानते हैं कि विद्युत आवेश (Q) = विद्युत धारा (I) \times समय (t) होता है, अर्थात् Q = I \times t

अतः,

    \[w \propto I \times t\]

समानुपाती चिह्न हटाने पर एक स्थिरांक Z आता है:

    \[w = Z \cdot I \cdot t \quad \dots (1)\]

जहाँ:

  • w = निक्षेपित या मुक्त पदार्थ का द्रव्यमान (ग्राम में)
  • I = विद्युत धारा (एम्पियर में)
  • t = समय (सेकंड में)
  • Z = विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Electrochemical Equivalent)

Z और फैराडे नियतांक (F) में संबंध:

किसी पदार्थ के एक ग्राम तुल्यांक (1 Equivalent weight) को मुक्त करने के लिए 1 फैराडे (1 \text{ F} \approx 96487 \text{ C mol}^{-1}) आवेश की आवश्यकता होती है।

अतः, Z = \frac{E}{F}, जहाँ E पदार्थ का तुल्यांकी भार (Equivalent weight) है। E = \frac{M}{n} (जहाँ M मोलर द्रव्यमान है और n इलेक्ट्रॉनों की संख्या या संयोजकता है)।

इसलिए प्रथम नियम का सबसे उपयोगी सूत्र निम्नलिखित है:

    \[w = \frac{M \cdot I \cdot t}{n \cdot F} \quad \dots (2)\]

4.2 फैराडे का द्वितीय नियम (Faraday’s Second Law)

नियम: जब श्रेणीक्रम (Series) में जुड़े हुए विभिन्न विद्युत अपघट्यों के विलयनों में विद्युत धारा की समान मात्रा समान समय के लिए प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोडों पर मुक्त होने वाले पदार्थों की मात्राएं (w) उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों (E) के समानुपाती होती हैं।

गणितीय रूप:

    \[w \propto E\]

यदि दो अलग-अलग सेल (जैसे \text{CuSO}_4 और \text{AgNO}_3) श्रेणीक्रम में जुड़े हों:

    \[\frac{w_1}{w_2} = \frac{E_1}{E_2} \quad \dots (3)\]

(जहाँ w_1, w_2 द्रव्यमान हैं और E_1, E_2 उनके तुल्यांकी भार हैं)।

5. जलीय विलयनों में विद्युत अपघटन के उत्पाद (Products of Electrolysis in Aqueous Solutions)

गलित अवस्था में विद्युत अपघटन सरल होता है क्योंकि केवल एक धनायन और एक ऋणायन होता है। लेकिन जलीय विलयन (Aqueous solution) में, वैद्युत अपघट्य के आयनों के साथ-साथ जल (\text{H}_2\text{O}) के आयन (\text{H}^+ और \text{OH}^-) भी उपस्थित होते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रोड पर कौन सा आयन मुक्त होगा, यह उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential) पर निर्भर करता है।

उदाहरण: जलीय NaCl का विद्युत अपघटन (Electrolysis of Aqueous NaCl):

जलीय NaCl में \text{Na}^+, \text{Cl}^-, \text{H}^+ और \text{OH}^- आयन होते हैं।

  • कैथोड (–) पर प्रतिस्पर्धा (Competition):कैथोड पर \text{Na}^+ और \text{H}^+ (जल से) दोनों अपचित होना चाहते हैं।

        \[\text{Na}^+(\text{aq}) + \text{e}^- \rightarrow \text{Na(s)} \quad (E^\circ = -2.71 \text{ V})\]

        \[\text{H}^+(\text{aq}) + \text{e}^- \rightarrow \frac{1}{2}\text{H}_2\text{(g)} \quad (E^\circ = 0.00 \text{ V})\]

    जिस अभिक्रिया का मानक अपचयन विभव अधिक होता है, वह कैथोड पर प्राथमिकता से होती है। अतः \text{H}^+ का अपचयन होता है और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस (\text{H}_2) मुक्त होती है, न कि सोडियम।
  • ऐनोड (+) पर प्रतिस्पर्धा:ऐनोड पर \text{Cl}^- और जल (\text{H}_2\text{O} से \text{O}_2 बनना) के बीच ऑक्सीकरण की प्रतिस्पर्धा होती है।

        \[\text{Cl}^- \rightarrow \frac{1}{2}\text{Cl}_2 + \text{e}^- \quad (E^\circ = +1.36 \text{ V})\]

        \[2\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{O}_2 + 4\text{H}^+ + 4\text{e}^- \quad (E^\circ = +1.23 \text{ V})\]

    ऑक्सीकरण के लिए कम E^\circ वाले मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए (यानी \text{O}_2 बननी चाहिए)। परंतु, ऑक्सीजन के निर्माण के लिए गतिकीय रूप से उच्च सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे अधिविभव (Overpotential) कहा जाता है। इस अधिविभव के कारण, ऐनोड पर क्लोरीन गैस (\text{Cl}_2) मुक्त होती है।

इस प्रकार, जलीय NaCl के विद्युत अपघटन से कैथोड पर \text{H}_2 गैस, ऐनोड पर \text{Cl}_2 गैस मिलती है, और विलयन में \text{NaOH} (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) शेष रह जाता है।

6. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हल सहित संख्यात्मक प्रश्न (Solved Numericals)

उदाहरण 1: फैराडे के प्रथम नियम पर आधारित

कॉपर सल्फेट (\text{CuSO}_4) के विलयन में 1.5 एम्पियर की धारा 10 मिनट तक प्रवाहित की गई। कैथोड पर निक्षेपित कॉपर के द्रव्यमान की गणना कीजिए। (Cu का परमाणु द्रव्यमान = 63.5 g/mol, F = 96487 \text{ C/mol})

हल:

दिया गया है:

  • धारा (I) = 1.5 A
  • समय (t) = 10 मिनट = 10 \times 60 = 600 सेकंड
  • कॉपर का मोलर द्रव्यमान (M) = 63.5 g/mol\text{CuSO}_4 में कॉपर की संयोजकता (n) = 2 (\text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu})

सूत्र:

    \[w = \frac{M \cdot I \cdot t}{n \cdot F}\]

मान रखने पर:

    \[w = \frac{63.5 \times 1.5 \times 600}{2 \times 96487}\]

    \[w = \frac{57150}{192974} \approx 0.296 \text{ g}\]

उत्तर: कैथोड पर 0.296 ग्राम कॉपर निक्षेपित होगा।

उदाहरण 2: फैराडे के द्वितीय नियम पर आधारित

तीन विद्युत अपघटनी सेल A, B और C जिनमें क्रमशः \text{ZnSO}_4, \text{AgNO}_3 और \text{CuSO}_4 के विलयन हैं, श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। सेल B में 1.45 ग्राम सिल्वर जमा होने तक 1.5 एम्पियर की धारा प्रवाहित की गई। विद्युत धारा कितने समय तक प्रवाहित हुई? कॉपर और जिंक के निक्षेपित द्रव्यमान भी ज्ञात कीजिए। (Ag = 108, Cu = 63.5, Zn = 65.3)

हल:

चरण 1: समय (t) ज्ञात करना (सिल्वर के लिए)

Ag के लिए, n = 1 (\text{Ag}^+ + \text{e}^- \rightarrow \text{Ag})

    \[w_{\text{Ag}} = \frac{M \cdot I \cdot t}{n \cdot F}\]

    \[1.45 = \frac{108 \times 1.5 \times t}{1 \times 96487}\]

    \[t = \frac{1.45 \times 96487}{108 \times 1.5} = \frac{139906.15}{162} \approx 863.6 \text{ सेकंड}\]

(या लगभग 14 मिनट 24 सेकंड)

चरण 2: कॉपर का द्रव्यमान ज्ञात करना (फैराडे का द्वितीय नियम)

    \[\frac{w_{\text{Cu}}}{w_{\text{Ag}}} = \frac{E_{\text{Cu}}}{E_{\text{Ag}}}\]

E_{\text{Cu}} = \frac{63.5}{2} = 31.75 और E_{\text{Ag}} = \frac{108}{1} = 108

    \[\frac{w_{\text{Cu}}}{1.45} = \frac{31.75}{108}\]

    \[w_{\text{Cu}} = \frac{31.75 \times 1.45}{108} \approx 0.426 \text{ g}\]

चरण 3: जिंक का द्रव्यमान ज्ञात करना

    \[\frac{w_{\text{Zn}}}{w_{\text{Ag}}} = \frac{E_{\text{Zn}}}{E_{\text{Ag}}}\]

E_{\text{Zn}} = \frac{65.3}{2} = 32.65

    \[w_{\text{Zn}} = \frac{32.65 \times 1.45}{108} \approx 0.438 \text{ g}\]

उत्तर: समय = 863.6 सेकंड, कॉपर का द्रव्यमान = 0.426 g, जिंक का द्रव्यमान = 0.438 g.

7. विद्युत अपघटनी सेल का चित्र (Image of Electrolytic Cell)

आप नीचे दिए गए योजनाबद्ध आरेख (Schematic Diagram) का उपयोग परीक्षा में चित्र बनाने के लिए कर सकते हैं:

       विद्युत धारा (I) 
       <-----------------
       
         (+) बैटरी (Battery) (–)
          |                   |
          |                   |
         (+)                 (–)
       +-----+             +-----+
       | ऐनोड|             |कैथोड|
       |  +  |             |  -  |
       |     |             |     |
     __|     |_____________|     |__
    |  |     |             |     |  |
    |  |     |             |     |  |
    |  |   Cl⁻             Na⁺   |  |
    |  |  <---             --->  |  |
    |  |     |             |     |  |
    |  |     |             |     |  |
    |  *---*                 *---*  |
    |                               |
    |       विद्युत अपघट्य          |
    |    (जैसे: गलित NaCl विलयन)    |
    |                               |
    +-------------------------------+
       ऑक्सीकरण               अपचयन

AI से चित्र बनाने के लिए Image Prompt:

A clear, scientific vector line diagram of an Electrolytic Cell. A single glass beaker contains a liquid electrolyte, labeled 'Molten NaCl Electrolyte'. Two solid rectangular electrodes are partially submerged in the liquid. The left electrode is labeled 'Anode (Positive, +)' and the right electrode is labeled 'Cathode (Negative, -)'. A wire connects the top of both electrodes to a DC battery symbol at the top center. Arrows show Anion (Cl⁻) migrating towards the Anode and Cation (Na⁺) migrating towards the Cathode. Electron flow is indicated from the Anode through the battery to the Cathode. Clean, educational, textbook-style illustration on a white background.

8. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण टिप्स (Exam Tips for 12th Students)

  1. संकेतों में भ्रम (Confusion in signs): यह सबसे आम गलती है। हमेशा याद रखें, गैल्वैनी सेल में ऐनोड ऋणात्मक (-) होता है, लेकिन विद्युत अपघटनी सेल में ऐनोड धनात्मक (+) होता है। हालांकि, दोनों ही सेलों में ऐनोड पर हमेशा ऑक्सीकरण (Oxidation) ही होता है।
  2. अधिविभव (Overpotential) का सिद्धांत: जलीय NaCl के विद्युत अपघटन में \text{O}_2 गैस के बजाय \text{Cl}_2 गैस का ऐनोड पर निकलना ‘अधिविभव’ के कारण होता है। यह एक महत्वपूर्ण सैद्धांतिक प्रश्न (Reasoning question) है जो अक्सर 2 अंकों में पूछा जाता है।
  3. फैराडे के नियम के सूत्र: संख्यात्मक प्रश्नों (Numericals) में n (इलेक्ट्रॉनों की संख्या) का मान सही ढंग से निकालें। जैसे \text{Ag}^+ के लिए n=1, \text{Cu}^{2+} के लिए n=2 और \text{Al}^{3+} के लिए n=3 होता है।

9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: गैल्वैनी सेल और विद्युत अपघटनी सेल में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: गैल्वैनी सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है (स्वतः अभिक्रिया)। जबकि विद्युत अपघटनी सेल विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके रासायनिक अभिक्रिया संपन्न कराता है (स्वतः अप्रवर्तित अभिक्रिया)।

प्रश्न 2: 1 फैराडे (1 F) आवेश से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: 1 मोल इलेक्ट्रॉनों पर उपस्थित कुल आवेश को 1 फैराडे कहा जाता है। 1 इलेक्ट्रॉन का आवेश 1.602 \times 10^{-19} \text{ C} होता है, अतः 1 मोल (6.022 \times 10^{23}) इलेक्ट्रॉनों का कुल आवेश 96487 \text{ C mol}^{-1} (लगभग 96500 \text{ C}) होता है।

प्रश्न 3: जलीय कॉपर सल्फेट (\text{CuSO}_4) के विलयन का अक्रिय इलेक्ट्रोड (Pt) द्वारा विद्युत अपघटन करने पर कैथोड और ऐनोड पर क्या प्राप्त होता है?

उत्तर: कैथोड पर \text{Cu}^{2+} आयनों का अपचयन होता है जिससे कॉपर (Cu) धातु प्राप्त होती है। ऐनोड पर \text{SO}_4^{2-} की तुलना में जल (\text{H}_2\text{O}) का ऑक्सीकरण आसानी से होता है, जिससे ऑक्सीजन (\text{O}_2) गैस प्राप्त होती है।

प्रश्न 4: विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Z) किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी विद्युत अपघट्य में 1 एम्पियर की धारा 1 सेकंड तक (यानी 1 कूलम्ब आवेश) प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड पर मुक्त हुए पदार्थ की मात्रा को उस पदार्थ का विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Z) कहते हैं।