MP Board Class 12 Crop Production Mixed Fertilizers : कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए मिश्रित उर्वरक (Mixed Fertilizers) पर एक विस्तृत और संपूर्ण लेख। इस लेख में मिश्रित उर्वरकों के प्रकार (Types), उपयोग (Uses), महत्व (Importance), लाभ और हानियां (Advantages and Disadvantages) और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) का गहन अध्ययन किया गया है। यह लेख बोर्ड परीक्षाओं और कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं (Agricultural Competitive Exams) के लिए अत्यंत उपयोगी है।
MP Board Class 12 Crop Production Mixed Fertilizers
1. प्रस्तावना (Introduction)
भारतीय कृषि (Indian Agriculture) में फसलों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए उर्वरकों (Fertilizers) का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। जैसे-जैसे कृषि का आधुनिकीकरण हुआ है, मिट्टी से पोषक तत्वों (Nutrients) का दोहन तेजी से बढ़ा है। एक फसल अपने जीवन चक्र को पूरा करने के लिए मिट्टी से कई प्रकार के आवश्यक पोषक तत्व ग्रहण करती है। जब हम खेत में लगातार एक ही प्रकार का एकल उर्वरक (Straight Fertilizer) डालते हैं, तो मिट्टी में अन्य पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसी समस्या के समाधान और फसलों को संतुलित पोषण (Balanced Nutrition) प्रदान करने के लिए मिश्रित उर्वरकों (Mixed Fertilizers) का विकास किया गया।
कृषि विज्ञान (Agricultural Science) के कक्षा 12 के पाठ्यक्रम में मिश्रित उर्वरक एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस लेख में हम मिश्रित उर्वरक की परिभाषा, इसके प्रकार, महत्व, उपयोग की विधियाँ, और इसे तैयार करते समय रखी जाने वाली सावधानियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
2. मिश्रित उर्वरक क्या है? (What is Mixed Fertilizer?)
जब दो या दो से अधिक एकल उर्वरकों (Straight Fertilizers) को भौतिक या यांत्रिक रूप (Physically or Mechanically) से आपस में मिला दिया जाता है, तो इस प्रकार तैयार किए गए मिश्रण को मिश्रित उर्वरक (Mixed Fertilizer) कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में, यह विभिन्न उर्वरक पदार्थों का एक भौतिक मिश्रण (Physical Mixture) होता है, जिसमें नाइट्रोजन (Nitrogen – N), फॉस्फोरस (Phosphorus – P), और पोटैशियम (Potassium – K) में से कम से कम दो या तीनों प्राथमिक पोषक तत्व (Primary Nutrients) मौजूद होते हैं। इस मिश्रण में कोई रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) नहीं होती है, बल्कि यह केवल एक यांत्रिक मिश्रण होता है।
उदाहरण के लिए: यदि किसान यूरिया (Urea – नाइट्रोजन का स्रोत), सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP – फॉस्फोरस का स्रोत) और म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP – पोटैशियम का स्रोत) को एक निश्चित अनुपात में फावड़े या मशीन की सहायता से भौतिक रूप से मिलाता है, तो यह मिश्रित उर्वरक कहलाएगा।
3. प्राथमिक पोषक तत्वों की भूमिका (Role of Primary Nutrients)
मिश्रित उर्वरकों के महत्व को समझने के लिए प्राथमिक पोषक तत्वों (N, P, K) की भूमिका को समझना आवश्यक है:
- नाइट्रोजन (Nitrogen – N): यह पौधों की वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth) के लिए उत्तरदायी है। यह क्लोरोफिल (Chlorophyll) का मुख्य घटक है, जो प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में मदद करता है।
- फॉस्फोरस (Phosphorus – P): यह जड़ों के विकास (Root Development), फूलों और बीजों के बनने, और ऊर्जा हस्तांतरण (Energy Transfer – ATP) के लिए आवश्यक है।
- पोटैशियम (Potassium – K): यह पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease Resistance) बढ़ाता है, तनों को मजबूती प्रदान करता है, और रंध्रों (Stomata) के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करता है।
4. मिश्रित उर्वरकों के प्रकार (Types of Mixed Fertilizers)
मिश्रित उर्वरकों को उनमें मौजूद पोषक तत्वों की संख्या और उनके निर्माण के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
(A) पोषक तत्वों की उपस्थिति के आधार पर (Based on presence of Nutrients):
- पूर्ण मिश्रित उर्वरक (Complete Mixed Fertilizer):जिस मिश्रित उर्वरक में तीनों प्राथमिक पोषक तत्व—नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटैशियम (K)—उपस्थित होते हैं, उसे पूर्ण मिश्रित उर्वरक कहते हैं।जैसे: NPK 12:32:16, NPK 10:26:26 आदि।
- अपूर्ण मिश्रित उर्वरक (Incomplete Mixed Fertilizer):जिस मिश्रित उर्वरक में तीन प्राथमिक पोषक तत्वों (N, P, K) में से केवल दो ही तत्व मौजूद होते हैं, उसे अपूर्ण मिश्रित उर्वरक कहा जाता है। इसमें या तो N और P होगा, या P और K होगा, या N और K होगा।जैसे: DAP (Di-Ammonium Phosphate) – 18% N और 46% P (यद्यपि यह एक जटिल उर्वरक है, लेकिन इसे अपूर्ण उर्वरक की श्रेणी में भी गिना जाता है यदि मिश्रण के रूप में तैयार किया जाए)।
(B) निर्माण और व्यापारिक आधार पर (Based on Manufacturing and Trade):
- खुली संस्तुति वाले मिश्रित उर्वरक (Open Formula Mixed Fertilizers):इस प्रकार के मिश्रित उर्वरकों के बोरे या बैग पर यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि इस मिश्रण को बनाने के लिए किन-किन उर्वरकों (Ingredients) का उपयोग किया गया है और उनकी कितनी मात्रा मिलाई गई है। इसमें निर्माता कोई भी बात किसानों से नहीं छिपाता है। इससे किसान को पता चलता है कि मिश्रण में यूरिया है, या अमोनियम सल्फेट है।
- बंद संस्तुति वाले मिश्रित उर्वरक (Closed Formula Mixed Fertilizers):इन उर्वरकों के बैग पर केवल पोषक तत्वों की कुल मात्रा (Total Nutrients – जैसे 20% N, 20% P, 20% K) लिखी होती है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि मिश्रण बनाने के लिए किन उर्वरकों (Source Materials) का उपयोग किया गया है। निर्माता इसे अपना व्यावसायिक रहस्य (Trade Secret) मानकर गुप्त रखता है।
5. मिश्रित उर्वरक के घटक (Components of Mixed Fertilizers)
एक आदर्श मिश्रित उर्वरक को तैयार करने में मुख्य रूप से तीन प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जाता है:
- पोषक तत्व प्रदायक (Nutrient Suppliers): ये वे मुख्य एकल उर्वरक हैं जो नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम प्रदान करते हैं। (जैसे- यूरिया, अमोनियम सल्फेट, सुपर फॉस्फेट)।
- पूरक या भराव पदार्थ (Fillers): जब मिश्रित उर्वरक का ग्रेड (Grade) तैयार किया जाता है, तो आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा मिलाने के बाद यदि 100 किलोग्राम वजन पूरा नहीं होता है, तो वजन पूरा करने के लिए कुछ निष्क्रिय पदार्थों (Inert Materials) का उपयोग किया जाता है। इन्हें पूरक (Fillers) कहते हैं।जैसे: बालू (Sand), राख (Ash), सूखी मिट्टी, लकड़ी का बुरादा (Sawdust)।
- सुधारक या कंडीशनर (Conditioners): कुछ उर्वरक आद्रताग्राही (Hygroscopic) होते हैं (यानी वे हवा से नमी सोख लेते हैं) जिससे उर्वरक में ढेले (Caking) बन जाते हैं। इसे रोकने के लिए कंडीशनर का प्रयोग किया जाता है।जैसे: हड्डी का चूरा (Bone meal), मूंगफली की खली (Groundnut cake), तंबाकू की डंठल।
6. उर्वरक ग्रेड और उर्वरक अनुपात (Fertilizer Grade and Fertilizer Ratio)
कक्षा 12 कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए ‘ग्रेड’ और ‘अनुपात’ के बीच अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है।
- उर्वरक ग्रेड (Fertilizer Grade): यह मिश्रित उर्वरक में उपलब्ध प्राथमिक पोषक तत्वों (N, P, K) के न्यूनतम गारंटीकृत प्रतिशत (Minimum Guaranteed Percentage) को दर्शाता है। इसे हमेशा N-P-K के क्रम में लिखा जाता है।उदाहरण: एक मिश्रित उर्वरक का ग्रेड 12-24-12 है। इसका अर्थ है कि 100 किलो के बैग में 12 किलो नाइट्रोजन, 24 किलो फॉस्फोरस (
), और 12 किलो पोटैशियम (
) है। - उर्वरक अनुपात (Fertilizer Ratio): यह मिश्रित उर्वरक में मौजूद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम का आपस में सरल अनुपात (Simple Proportion) है।उदाहरण: यदि ग्रेड 12-24-12 है, तो इसका अनुपात 1:2:1 होगा।
7. मिश्रित उर्वरक तैयार करते समय रखी जाने वाली सावधानियाँ / सिद्धांत (Principles and Precautions in Mixing Fertilizers)
सभी उर्वरकों को एक साथ नहीं मिलाया जा सकता, क्योंकि उनमें अवांछनीय रासायनिक प्रतिक्रियाएं (Undesirable Chemical Reactions) हो सकती हैं। उर्वरकों को मिलाते समय निम्नलिखित बातों (Compatibility) का ध्यान रखना चाहिए:
- अमोनिया के वाष्पीकरण का खतरा (Risk of Ammonia Volatilization):अमोनिया युक्त उर्वरकों (Ammoniacal Fertilizers – जैसे अमोनियम सल्फेट, अमोनियम क्लोराइड) को कभी भी क्षारीय उर्वरकों (Basic/Alkaline Fertilizers – जैसे चूना, बेसिक स्लैग, रॉक फॉस्फेट) के साथ नहीं मिलाना चाहिए। ऐसा करने से रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और अमोनिया गैस (Ammonia Gas) बनकर उड़ जाती है, जिससे नाइट्रोजन का भारी नुकसान होता है।
- फॉस्फोरस के अघुलनशील होने का खतरा (Risk of Phosphate Reversion):जल में घुलनशील फॉस्फेट उर्वरकों (Water-soluble Phosphates – जैसे सिंगल सुपर फॉस्फेट) को चूने (Lime) या कैल्शियम युक्त उर्वरकों के साथ नहीं मिलाना चाहिए। चूने के साथ मिलने पर जल में घुलनशील फॉस्फेट, अघुलनशील फॉस्फेट (Insoluble Phosphate / Reverted Phosphate) में बदल जाता है, जिसे पौधे आसानी से ग्रहण नहीं कर पाते।
- नमी सोखने की समस्या (Hygroscopic Problems):अत्यधिक नमी सोखने वाले (Highly Hygroscopic) उर्वरकों, जैसे यूरिया (Urea) और अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate), को एक साथ नहीं मिलाना चाहिए। यदि इन्हें मिलाया जाता है, तो मिश्रण बहुत जल्दी गीला और चिपचिपा (Sticky) हो जाता है, जिसे खेत में बिखेरना (Broadcasting) मुश्किल हो जाता है।
- अम्लता उत्पन्न करने वाले उर्वरक (Acidity Producing Fertilizers):अत्यधिक अम्लीय उर्वरकों को मिलाते समय उचित मात्रा में भराव पदार्थ (Fillers) का प्रयोग करना चाहिए ताकि मिश्रण का भौतिक स्वरूप खराब न हो।
8. मिश्रित उर्वरकों की विशेषताएँ (Characteristics of Mixed Fertilizers)
- संतुलित पोषक तत्व (Balanced Nutrients): यह फसलों को एक ही समय में सभी आवश्यक तत्व प्रदान करता है।
- दानेदार रूप (Granular Form): अधिकांश मिश्रित उर्वरक दानेदार रूप में बनाए जाते हैं, जिससे खेत में इनका प्रयोग (Application) आसान हो जाता है और हवा से उड़ने का डर नहीं रहता।
- समान वितरण (Uniform Distribution): इसे मशीन या हाथ से खेत में समान रूप से बिखेरा जा सकता है।
- मृदा स्वास्थ्य पर प्रभाव (Effect on Soil Health): यह मिट्टी के पीएच (pH) संतुलन को बनाए रखने में एकल उर्वरकों की तुलना में अधिक सुरक्षित होते हैं, क्योंकि अम्लीय और क्षारीय उर्वरकों का संतुलन किया जा सकता है।
9. मिश्रित उर्वरकों का महत्व और लाभ (Importance and Advantages of Mixed Fertilizers)
कृषि में मिश्रित उर्वरकों का उपयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- श्रम, समय और धन की बचत (Saves Labor, Time, and Money):यदि किसान N, P, और K को अलग-अलग खेत में डालेगा, तो उसे तीन बार श्रम करना पड़ेगा। मिश्रित उर्वरक डालने से एक ही बार में तीनों तत्व खेत में पहुँच जाते हैं, जिससे मजदूरी (Labor Cost) और समय की बचत होती है।
- संतुलित आहार (Balanced Diet for Plants):पौधों को उत्तम वृद्धि के लिए संतुलित मात्रा में भोजन चाहिए। मिश्रित उर्वरकों का ग्रेड फसल की आवश्यकता के अनुसार तैयार किया जाता है, जिससे पौधों को संतुलित पोषण (Balanced Nutrition) मिलता है।
- फसलों को कम नुकसान (Less Mechanical Damage to Crops):खड़ी फसल (Standing Crop) में बार-बार उर्वरक डालने से पौधों को यांत्रिक क्षति (Mechanical Damage) पहुँचती है। मिश्रित उर्वरक के एकमुश्त प्रयोग से इस नुकसान से बचा जा सकता है।
- अम्लता व क्षारीयता का नियंत्रण (Control of Acidity and Alkalinity):एकल उर्वरकों (जैसे अमोनियम सल्फेट) के लगातार प्रयोग से मिट्टी अम्लीय (Acidic) हो जाती है। मिश्रित उर्वरक बनाते समय अम्लीय और क्षारीय उर्वरकों को इस प्रकार मिलाया जाता है कि मिट्टी पर उनका हानिकारक प्रभाव (Residual Effect) शून्य या बहुत कम हो।
- सूक्ष्म पोषक तत्वों का समावेश (Inclusion of Micronutrients):मिश्रित उर्वरक बनाते समय इसमें जस्ता (Zinc), लोहा (Iron), और तांबा (Copper) जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) और कीटनाशक (Pesticides) भी आसानी से मिलाए जा सकते हैं।
- उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि (Increased Fertilizer Use Efficiency):जब विभिन्न पोषक तत्व एक साथ मौजूद होते हैं, तो वे एक-दूसरे के अवशोषण (Absorption) को बढ़ावा देते हैं (Synergistic Effect)। इससे उर्वरक की दक्षता बढ़ती है।
10. मिश्रित उर्वरकों की हानियाँ और सावधानियां (Disadvantages and Precautions)
लाभ के साथ-साथ मिश्रित उर्वरकों के कुछ नुकसान भी हैं, जिन्हें जानना कृषि छात्रों के लिए आवश्यक है:
- फसल विशेष के लिए हमेशा उपयुक्त नहीं (Not Always Crop Specific):प्रत्येक फसल और मिट्टी की आवश्यकता अलग-अलग होती है। बाजार में उपलब्ध पूर्व-निर्मित (Pre-mixed) उर्वरक ग्रेड हो सकता है कि किसी विशेष मिट्टी (Specific Soil) की आवश्यकता से मेल न खाए।
- लागत का अधिक होना (Higher Cost):कंपनियों द्वारा जब मिश्रित उर्वरक तैयार किया जाता है, तो मिश्रण, छनाई, और पैकिंग (Mixing, Screening, and Packing) का खर्च बढ़ जाता है, जिससे प्रति इकाई पोषक तत्व की लागत (Cost per unit nutrient) एकल उर्वरकों की तुलना में थोड़ी अधिक हो सकती है।
- टॉप ड्रेसिंग में असुविधा (Inconvenience in Top Dressing):टॉप ड्रेसिंग (Top Dressing – खड़ी फसल में उर्वरक देना) में मुख्य रूप से केवल नाइट्रोजन (Nitrogen) की आवश्यकता होती है। यदि खड़ी फसल में मिश्रित उर्वरक डालेंगे, तो नाइट्रोजन के साथ फॉस्फोरस और पोटाश भी व्यर्थ जाएगा, क्योंकि वे मिट्टी की ऊपरी सतह पर पड़े रहेंगे (P and K immobile होते हैं)।
- ढीले बनने की समस्या (Problem of Caking):यदि मिश्रण बनाने के बाद इसे लंबे समय तक भंडारित (Stored) किया जाए, तो यह नमी सोखकर पत्थर की तरह कठोर हो सकता है।
11. मिश्रित उर्वरकों के उपयोग एवं प्रयोग विधि (Uses and Methods of Application)
मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग फसल के प्रकार, बुवाई के समय और मिट्टी की नमी के आधार पर किया जाता है:
- आधार उर्वरक के रूप में (Basal Application):मिश्रित उर्वरकों का सबसे अच्छा उपयोग बुवाई के समय (At the time of sowing) खेत की तैयारी करते समय किया जाता है। इसे मिट्टी में बीज के नीचे या बगल में रखा जाता है। चूँकि इसमें फॉस्फोरस और पोटैशियम होता है, जो मिट्टी में कम गतिशील (Immobile) होते हैं, इसलिए इन्हें जड़ क्षेत्र (Root Zone) में डालना अनिवार्य है।
- संस्थापन विधि (Placement Method):इस विधि में सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल (Seed-cum-Fertilizer Drill) का उपयोग किया जाता है। मशीन द्वारा मिश्रित उर्वरक को बीज से 2-3 सेंटीमीटर नीचे और बगल में स्थापित (Placing) किया जाता है, जिससे पौधों की जड़ें आसानी से पोषक तत्व ग्रहण कर लेती हैं।
- छिड़काव विधि (Broadcasting):बुवाई से पहले पूरे खेत में हाथ से मिश्रित उर्वरक को समान रूप से बिखेर दिया जाता है और फिर पाटा (Planking) लगाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है।
- बैंड प्लेसमेंट (Band Placement):पंक्तियों (Rows) में बोई जाने वाली फसलों (जैसे गन्ना, मक्का, आलू) में मिश्रित उर्वरक को पौधों की पंक्तियों के साथ एक पट्टी (Band) के रूप में मिट्टी के अंदर दिया जाता है।
12. मिश्रित उर्वरक और जटिल उर्वरक में अंतर (Difference Between Mixed and Complex Fertilizers)
कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है। इसे स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है:
| क्र.सं. | विशेषता (Feature) | मिश्रित उर्वरक (Mixed Fertilizer) | जटिल या यौगिक उर्वरक (Complex/Compound Fertilizer) |
| 1. | निर्माण (Manufacturing) | यह दो या दो से अधिक उर्वरकों का भौतिक या यांत्रिक मिश्रण (Physical mixture) होता है। | यह कारखानों में रासायनिक प्रतिक्रियाओं (Chemical reactions) द्वारा बनाया जाता है। |
| 2. | कणों का स्वरूप (Nature of Granules) | मिश्रण में अलग-अलग उर्वरकों के कणों को ध्यान से देखा या पहचाना जा सकता है। | इसके प्रत्येक दाने (Granule) का रासायनिक संगठन (Chemical composition) एक समान होता है। |
| 3. | पोषक तत्व (Nutrients) | इसमें पोषक तत्वों की मात्रा को किसान अपनी आवश्यकतानुसार (Custom mix) बदल सकता है। | इसमें पोषक तत्वों का प्रतिशत कारखाने द्वारा निश्चित होता है, किसान उसे बदल नहीं सकता। |
| 4. | ग्रेड (Grade) | इसके ग्रेड में भिन्नता हो सकती है। | यह उच्च विश्लेषण (High analysis) वाले होते हैं (जैसे DAP – 18:46:0)। |
| 5. | पृथक्करण (Separation) | इसके घटकों को भौतिक विधियों द्वारा अलग (Separate) किया जा सकता है। | इसके घटकों को रासायनिक बंध (Chemical bonds) टूटे बिना अलग नहीं किया जा सकता। |
13. निष्कर्ष (Conclusion)
आधुनिक कृषि (Modern Agriculture) और टिकाऊ खेती (Sustainable Agriculture) के दृष्टिकोण से मिश्रित उर्वरक एक क्रांति के समान हैं। ये न केवल किसानों का समय और धन बचाते हैं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य (Soil Health) और पर्यावरण को भी एकल उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले नुकसान से बचाते हैं।
कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए मिश्रित उर्वरक की संकल्पना, इसके रासायनिक सिद्धांत, और इसके सही उपयोग का ज्ञान होना एक कुशल कृषि विशेषज्ञ (Agriculture Expert) बनने की पहली सीढ़ी है। सही समय, सही मात्रा और सही विधि से किया गया मिश्रित उर्वरक का प्रयोग फसल उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
14. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: मिश्रित उर्वरक (Mixed Fertilizer) किसे कहते हैं?
उत्तर: जब दो या दो से अधिक एकल उर्वरकों (Straight Fertilizers) को बिना किसी रासायनिक प्रतिक्रिया के केवल भौतिक या यांत्रिक विधि से मिलाया जाता है, तो उस मिश्रण को मिश्रित उर्वरक कहा जाता है। इसमें कम से कम दो प्राथमिक पोषक तत्व (N, P, K) मौजूद होते हैं।
प्रश्न 2: उर्वरक ग्रेड (Fertilizer Grade) और उर्वरक अनुपात (Fertilizer Ratio) में क्या अंतर है?
उत्तर: ‘उर्वरक ग्रेड’ मिश्रण में मौजूद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के न्यूनतम गारंटीकृत प्रतिशत (वजन के अनुसार) को दर्शाता है (जैसे 10-20-10)। जबकि ‘उर्वरक अनुपात’ उसी ग्रेड का सरल गणितीय अनुपात होता है (जैसे 10-20-10 का अनुपात 1:2:1 होगा)।
प्रश्न 3: यूरिया (Urea) को सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) के साथ मिलाकर तुरंत क्यों प्रयोग कर लेना चाहिए?
उत्तर: यूरिया एक आद्रताग्राही (Hygroscopic) उर्वरक है और SSP में मुक्त क्रिस्टलीय जल (Water of crystallization) होता है। जब दोनों को मिलाया जाता है, तो प्रतिक्रिया के कारण पानी मुक्त होता है और मिश्रण गीला, चिपचिपा व लेई (Paste) जैसा बन जाता है। इसलिए इन्हें मिलाकर तुरंत खेत में डाल (Application) देना चाहिए, अन्यथा इसे बिखेरना मुश्किल हो जाएगा।
प्रश्न 4: मिश्रित उर्वरक में ‘पूरक’ (Fillers) और ‘कंडीशनर’ (Conditioners) का क्या कार्य है?
उत्तर: ‘पूरक’ (Fillers) जैसे बालू या राख का उपयोग उर्वरक मिश्रण का वजन (Bulk) बढ़ाकर एक विशिष्ट ग्रेड तैयार करने के लिए किया जाता है। ‘कंडीशनर’ (Conditioners) जैसे हड्डी का चूरा या लकड़ी का बुरादा, उर्वरक को हवा से नमी सोखने से रोकते हैं और उसे ढेले (Caking) बनने से बचाकर भुरभुरा (Free-flowing) बनाए रखते हैं।
प्रश्न 5: मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग खड़ी फसल (Top Dressing) में क्यों नहीं करना चाहिए?
उत्तर: मिश्रित उर्वरकों में फॉस्फोरस और पोटाश (Phosphorus and Potash) होता है, जो मिट्टी में बहुत कम गतिशील (Immobile) होते हैं। यदि इन्हें खड़ी फसल में ऊपर से (Top Dressing) छिड़का जाए, तो ये मिट्टी की सतह पर ही रह जाएंगे और पौधों की जड़ों तक नहीं पहुँच पाएंगे, जिससे उर्वरक व्यर्थ हो जाएगा। इन्हें बुवाई के समय आधार उर्वरक (Basal Dose) के रूप में जड़ों के पास देना चाहिए।
प्रश्न 6: बंद संस्तुति वाले मिश्रित उर्वरक (Closed Formula Mixed Fertilizers) का क्या अर्थ है?
उत्तर: ये वे उर्वरक होते हैं जिनके बोरे (Bag) पर केवल कुल पोषक तत्वों का प्रतिशत छपा होता है, लेकिन निर्माता यह नहीं बताता कि यह मिश्रण किन-किन उर्वरक सामग्रियों (Sources) को मिलाकर बनाया गया है। यह कंपनी का व्यावसायिक रहस्य (Trade Secret) होता है।