MP Board Class 12 Chemistry: Factors Affecting Rate of Reaction रासायनिक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारक – विस्तृत अध्ययन

MP Board Class 12 Chemistry: Factors Affecting Rate of Reaction : कक्षा 12 रसायन विज्ञान (Chemistry) के अध्याय ‘रासायनिक बलगतिकी’ के अंतर्गत ‘रासायनिक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारकों’ का संपूर्ण विश्लेषणात्मक अध्ययन। MP Board Class 12 Chemistry: Factors Affecting Rate of Reaction में सांद्रता, तापमान, आरेनियस समीकरण, उत्प्रेरक का प्रभाव, संघट्ट सिद्धांत और महत्वपूर्ण हल सहित संख्यात्मक प्रश्न (Numericals) शामिल हैं।

MP Board Class 12 Chemistry: Factors Affecting Rate of Reaction

1. प्रस्तावना: अभिक्रिया वेग और उसकी परिवर्तनशीलता (Introduction to Reaction Rate)

रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics) के अंतर्गत हमने यह जाना है कि किसी रासायनिक अभिक्रिया का वेग (Rate of Reaction) एकांक समय में अभिकारकों या उत्पादों की सांद्रता में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। परंतु, सभी रासायनिक अभिक्रियाएं समान गति से संपन्न नहीं होती हैं। कुछ अभिक्रियाएं पलक झपकते ही पूरी हो जाती हैं (जैसे आयनिक अभिक्रियाएं), जबकि कुछ में वर्षों का समय लगता है (जैसे लोहे पर जंग लगना)।

इसके अतिरिक्त, किसी एक ही अभिक्रिया का वेग भी हमेशा स्थिर नहीं रहता है; यह अभिक्रिया के दौरान समय के साथ घटता जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि रासायनिक अभिक्रिया का वेग कई आंतरिक और बाह्य कारकों पर निर्भर करता है। संघट्ट सिद्धांत (Collision Theory) के अनुसार, कोई भी रासायनिक अभिक्रिया तभी होती है जब अभिकारकों के अणु आपस में टकराते हैं और यह टक्कर ‘प्रभावी’ (Effective) होती है। जो भी कारक इन प्रभावी संघट्टों की संख्या को बढ़ाते हैं, वे अभिक्रिया के वेग को भी बढ़ा देते हैं।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

इस लेख में हम उन सभी प्रमुख कारकों का विस्तृत वैज्ञानिक और गणितीय अध्ययन करेंगे जो किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं।

2. रासायनिक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक (Key Factors Affecting the Rate of Reaction)

किसी भी रासायनिक अभिक्रिया के वेग को मुख्य रूप से निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं:

2.1 अभिकारकों की सांद्रता का प्रभाव (Effect of Concentration of Reactants)

किसी भी रासायनिक अभिक्रिया का वेग सीधे तौर पर अभिकारकों की सांद्रता (Concentration) पर निर्भर करता है।

  • सिद्धांत: जैसे-जैसे अभिकारकों की सांद्रता बढ़ाई जाती है, प्रति एकांक आयतन (Per unit volume) में उपस्थित अभिकारक अणुओं की संख्या में वृद्धि हो जाती है। अणुओं की संख्या बढ़ने से उनके बीच आपस में टकराने की संभावना (Collision frequency) भी बढ़ जाती है। संघट्टों की संख्या में वृद्धि होने के कारण प्रभावी संघट्ट भी बढ़ते हैं, जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।
  • समय के साथ प्रभाव: जैसे-जैसे अभिक्रिया आगे बढ़ती है, अभिकारक खर्च होते जाते हैं और उनकी सांद्रता लगातार घटती जाती है। यही कारण है कि शुरुआत में अभिक्रिया का वेग अधिकतम होता है और समय के साथ धीरे-धीरे कम होता जाता है।
  • वेग नियम (Rate Law): सांद्रता और वेग के बीच के इस प्रायोगिक संबंध को वेग नियम द्वारा दर्शाया जाता है:

        \[\text{Rate} = k [A]^x [B]^y\]

    जहाँ [A] और [B] अभिकारकों की सांद्रता हैं, और k वेग स्थिरांक (Rate constant) है।

2.2 तापमान का प्रभाव (Effect of Temperature)

तापमान रासायनिक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक है।

  • सामान्य नियम: लगभग सभी रासायनिक अभिक्रियाओं (चाहे वे ऊष्माक्षेपी हों या ऊष्माशोषी) का वेग तापमान बढ़ाने पर तेजी से बढ़ता है। एक सामान्य प्रायोगिक नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया का तापमान प्रत्येक 10^\circ \text{C} (या 10 K) बढ़ाने पर उसका वेग लगभग दोगुना या तिगुना हो जाता है।
  • ताप गुणांक (Temperature Coefficient, \mu):308 \text{ K} (35^\circ \text{C}) और 298 \text{ K} (25^\circ \text{C}) पर किसी अभिक्रिया के वेग स्थिरांकों के अनुपात को ताप गुणांक कहते हैं।

        \[\text{ताप गुणांक } (\mu) = \frac{\text{वेग स्थिरांक } 308 \text{ K पर } (k_{308})}{\text{वेग स्थिरांक } 298 \text{ K पर } (k_{298})} \approx 2 \text{ से } 3\]

  • वैज्ञानिक कारण (मैक्सवेल-बोल्ट्ज़मान वितरण): तापमान बढ़ाने पर अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) बढ़ जाती है। लेकिन वेग के दोगुना होने का मुख्य कारण यह नहीं है कि अणु तेजी से टकराते हैं; बल्कि इसका मुख्य कारण यह है कि तापमान बढ़ाने पर उन अणुओं के अंश (fraction of molecules) में बहुत अधिक (लगभग दोगुनी) वृद्धि हो जाती है जिनकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy, E_a) के बराबर या उससे अधिक होती है। जब अधिक अणुओं के पास सक्रियण ऊर्जा होगी, तो प्रभावी संघट्टों की संख्या दोगुनी हो जाएगी और वेग भी दोगुना हो जाएगा।

2.3 उत्प्रेरक का प्रभाव (Effect of Catalyst)

उत्प्रेरक (Catalyst) एक ऐसा बाह्य पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया में स्थायी रूप से बिना कोई रासायनिक परिवर्तन सहे, अभिक्रिया के वेग को परिवर्तित (प्रायः बढ़ा) देता है।

  • सकारात्मक उत्प्रेरक (Positive Catalyst): यह अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है।
  • नकारात्मक उत्प्रेरक (Negative Catalyst): यह अभिक्रिया के वेग को कम करता है।
  • उत्प्रेरक की कार्यप्रणाली (Mechanism of Catalyst): उत्प्रेरक अभिकारकों के साथ जुड़कर एक अस्थायी मध्यवर्ती संकुल (Intermediate complex) बनाता है। यह उत्प्रेरक अभिक्रिया के लिए एक वैकल्पिक पथ (Alternative pathway) प्रदान करता है। इस नए पथ की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy, E_a) वास्तविक पथ की तुलना में बहुत कम होती है।
  • ऊर्जा अवरोध (Energy barrier) के कम हो जाने के कारण, अब सामान्य ऊर्जा वाले बहुत से अणु भी इस अवरोध को पार कर उत्पाद बना लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप अभिक्रिया का वेग असाधारण रूप से बढ़ जाता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: उत्प्रेरक अभिक्रिया की एन्थैल्पी (\Delta H), गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (\Delta G) और साम्यावस्था स्थिरांक (K_c) को परिवर्तित नहीं करता है। यह केवल साम्यावस्था प्राप्त करने के समय को कम कर देता है।

2.4 अभिकारकों का पृष्ठीय क्षेत्रफल (Surface Area of Reactants)

यह कारक मुख्य रूप से उन अभिक्रियाओं में महत्वपूर्ण होता है जिनमें कम से कम एक अभिकारक ठोस अवस्था (Solid state) में होता है।

  • सिद्धांत: किसी ठोस अभिकारक का आकार जितना छोटा होगा, उसका कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (Total Surface Area) उतना ही अधिक होगा। पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक होने पर, दूसरे अभिकारक के अणुओं को संपर्क में आने और टकराने के लिए अधिक स्थान मिलता है।
  • उदाहरण: लकड़ी के एक बड़े टुकड़े की तुलना में लकड़ी का बुरादा (Sawdust) बहुत तेजी से जलता है। इसी प्रकार, रासायनिक प्रयोगशालाओं और उद्योगों में उत्प्रेरकों (जैसे निकेल, प्लैटिनम) को हमेशा बारीक चूर्ण (Finely powdered) के रूप में लिया जाता है ताकि उनका पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिकतम हो और अभिक्रिया तेजी से हो।

2.5 अभिकारकों की प्रकृति (Nature of Reactants)

विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारकों के पुराने बंध (Bonds) टूटते हैं और उत्पादों के नए बंध बनते हैं।

  • बंधों की ऊर्जा: यदि अभिकारकों के अणुओं के बीच के बंध बहुत मजबूत हैं, तो उन्हें तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जिससे अभिक्रिया का वेग धीमा हो जाएगा।
  • भौतिक अवस्था (Physical State): अभिकारकों की भौतिक अवस्था भी वेग को प्रभावित करती है। गैस अवस्था में अणु स्वतंत्र रूप से गति करते हैं, इसलिए गैसीय अभिक्रियाएं तीव्र होती हैं। वेग का क्रम सामान्यतः इस प्रकार होता है: गैस > द्रव > ठोस।
  • रासायनिक प्रकृति (आयनिक बनाम सहसंयोजक): आयनिक अभिक्रियाएं (Ionic reactions) अत्यंत तीव्र होती हैं क्योंकि विलयन में आयन पहले से ही मौजूद होते हैं और उन्हें केवल आपस में जुड़ना होता है। इसके विपरीत, सहसंयोजक यौगिकों (Covalent compounds) की अभिक्रियाएं धीमी होती हैं क्योंकि उनमें पुराने सहसंयोजक बंधों को टूटने में समय लगता है।

2.6 विकिरण या प्रकाश का प्रभाव (Effect of Radiation or Light)

कुछ विशिष्ट रासायनिक अभिक्रियाएं सामान्य ताप और अंधेरे में बिल्कुल नहीं होतीं, या बहुत धीमी गति से होती हैं। परंतु, जब उन पर एक निश्चित तरंगदैर्घ्य (Wavelength) का प्रकाश या विकिरण (Radiation) डाला जाता है, तो उनका वेग बहुत अधिक बढ़ जाता है। ऐसी अभिक्रियाओं को प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाएं (Photochemical Reactions) कहते हैं।

  • कारण: अभिकारकों के अणु प्रकाश के फोटॉनों (Photons) को अवशोषित करते हैं और उत्तेजित (Excited) हो जाते हैं। यह अवशोषित ऊर्जा उन्हें सक्रियण ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे वे तुरंत उत्पाद में बदल जाते हैं।
  • उदाहरण: हाइड्रोजन और क्लोरीन गैस का मिश्रण अंधेरे में कोई अभिक्रिया नहीं करता, लेकिन सूर्य के प्रकाश में यह विस्फोटक रूप से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) बनाता है।

        \[H_2(g) + Cl_2(g) \xrightarrow{h\nu} 2HCl(g)\]

2.7 दाब का प्रभाव (Effect of Pressure)

दाब का प्रभाव मुख्य रूप से गैसीय अभिक्रियाओं (Gaseous reactions) पर पड़ता है। ठोस और द्रव पदार्थों पर दाब का कोई विशेष प्रभाव नहीं होता।

  • सिद्धांत: गैसों के लिए, सांद्रता (C) सीधे तौर पर आंशिक दाब (P) के समानुपाती होती है (आदर्श गैस समीकरण P = CRT के अनुसार)। जब हम किसी गैसीय निकाय का दाब बढ़ाते हैं, तो गैस का आयतन कम हो जाता है। आयतन कम होने से प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या (अर्थात् सांद्रता) बढ़ जाती है। सांद्रता बढ़ने से अणुओं के बीच संघट्ट बढ़ जाते हैं, जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

3. आरेनियस समीकरण (Arrhenius Equation): तापमान और वेग का गणितीय संबंध

तापमान और अभिक्रिया के वेग (या वेग स्थिरांक, k) के बीच के सटीक मात्रात्मक (Quantitative) संबंध को सन् 1889 में स्वीडिश रसायनज्ञ स्वान्ते आरेनियस (Svante Arrhenius) ने एक गणितीय समीकरण द्वारा प्रस्तुत किया। इसे आरेनियस समीकरण कहा जाता है।

आरेनियस समीकरण का मूल रूप:

    \[k = A e^{-E_a / RT} \quad \dots (1)\]

जहाँ:

  • k = अभिक्रिया का वेग स्थिरांक (Rate constant)
  • A = आरेनियस गुणक (Arrhenius factor) या पूर्व-घातांकी गुणक (Pre-exponential factor) या आवृत्ति गुणक (Frequency factor)।
  • E_a = सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy), जिसे जूल प्रति मोल (\text{J mol}^{-1}) में मापा जाता है।
  • R = गैस नियतांक (Gas Constant) = 8.314 \text{ J K}^{-1} \text{ mol}^{-1}
  • T = परम ताप (Absolute Temperature, केल्विन में)
  • e^{-E_a / RT} = उन अणुओं का अंश (fraction of molecules) जिनकी गतिज ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा (E_a) के बराबर या उससे अधिक है।

3.1 आरेनियस समीकरण का लघुगणकीय रूप (Logarithmic Form)

समीकरण (1) के दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक (Natural logarithm, \ln) लेने पर:

    \[\ln k = \ln A - \frac{E_a}{RT} \quad \dots (2)\]

प्राकृतिक लघुगणक (\ln) को आधार-10 वाले सामान्य लघुगणक (\log_{10}) में बदलने के लिए समीकरण को 2.303 से गुणा करते हैं:

    \[2.303 \log k = 2.303 \log A - \frac{E_a}{RT}\]

संपूर्ण समीकरण को 2.303 से भाग देने पर हमें आरेनियस समीकरण का सबसे उपयोगी रूप प्राप्त होता है:

    \[\log k = \log A - \frac{E_a}{2.303 RT} \quad \dots (3)\]

3.2 ग्राफीय निरूपण (Graphical Representation)

समीकरण (3) एक सरल रेखा के समीकरण (y = mx + c) के समतुल्य है।

यदि हम \log k (y-अक्ष पर) और \frac{1}{T} (x-अक्ष पर) के बीच ग्राफ खींचते हैं, तो हमें एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जिसका ढाल ऋणात्मक होता है।

  • ढाल (Slope, m):= -\frac{E_a}{2.303 R}
  • y-अक्ष पर अंतःखंड (Intercept, c):= \log Aइस ग्राफ के ढाल को मापकर हम किसी भी अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (E_a) की गणना कर सकते हैं: E_a = -2.303 R \times \text{Slope}

3.3 दो भिन्न तापमानों पर आरेनियस समीकरण (Arrhenius Equation at Two Different Temperatures)

यदि किसी अभिक्रिया का वेग स्थिरांक तापमान T_1 पर k_1 और तापमान T_2 पर k_2 है, तो:

तापमान T_1 के लिए:

    \[\log k_1 = \log A - \frac{E_a}{2.303 RT_1} \quad \dots (4)\]

तापमान T_2 के लिए:

    \[\log k_2 = \log A - \frac{E_a}{2.303 RT_2} \quad \dots (5)\]

समीकरण (5) में से समीकरण (4) को घटाने पर:

    \[\log k_2 - \log k_1 = \left( \log A - \frac{E_a}{2.303 RT_2} \right) - \left( \log A - \frac{E_a}{2.303 RT_1} \right)\]

    \[\log \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left( \frac{1}{T_1} - \frac{1}{T_2} \right)\]

इसे इस प्रकार भी लिखा जा सकता है:

    \[\log \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left[ \frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2} \right] \quad \dots (6)\]

यह सूत्र परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी सहायता से यदि हमें दो अलग-अलग तापमानों पर वेग स्थिरांक ज्ञात हों, तो हम सक्रियण ऊर्जा (E_a) की गणना कर सकते हैं।

4. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हल सहित संख्यात्मक प्रश्न (Solved Numericals)

बोर्ड परीक्षा में आरेनियस समीकरण और वेग नियम पर आधारित 3 या 4 अंक के संख्यात्मक प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

उदाहरण 1: आरेनियस समीकरण पर आधारित सक्रियण ऊर्जा की गणना

किसी रासायनिक अभिक्रिया का तापमान 298 \text{ K} से बढ़ाकर 308 \text{ K} करने पर उसका वेग दोगुना हो जाता है। इस अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (E_a) की गणना कीजिए। (R = 8.314 \text{ J K}^{-1} \text{ mol}^{-1}, \log 2 = 0.3010)

हल:

दिया गया है:

  • प्रारंभिक ताप (T_1) = 298 \text{ K}
  • अंतिम ताप (T_2) = 308 \text{ K}
  • चूँकि वेग दोगुना हो जाता है, अतः वेग स्थिरांक भी दोगुना हो जाएगा। इसलिए, \frac{k_2}{k_1} = 2
  • R = 8.314 \text{ J K}^{-1} \text{ mol}^{-1}

आरेनियस समीकरण का दो तापमान वाला सूत्र प्रयोग करने पर:

    \[\log \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left[ \frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2} \right]\]

मान रखने पर:

    \[\log 2 = \frac{E_a}{2.303 \times 8.314} \left[ \frac{308 - 298}{298 \times 308} \right]\]

    \[0.3010 = \frac{E_a}{19.147} \left[ \frac{10}{91784} \right]\]

समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर:

    \[E_a = \frac{0.3010 \times 19.147 \times 91784}{10}\]

    \[E_a = \frac{576.32 \times 917.84}{10} \times 10 \text{ (Simplified multiplication)}\]

    \[E_a = \frac{528974}{10} = 52897.4 \text{ J mol}^{-1}\]

इसे किलो जूल (kJ) में बदलने के लिए 1000 से भाग दें:

    \[E_a = 52.897 \text{ kJ mol}^{-1} \approx 52.9 \text{ kJ mol}^{-1}\]

उत्तर: इस अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा 52.9 \text{ kJ mol}^{-1} होगी।

उदाहरण 2: आरेनियस ग्राफ के ढाल (Slope) पर आधारित प्रश्न

एक रासायनिक अभिक्रिया के लिए \log k और \frac{1}{T} के बीच खींचे गए ग्राफ का ढाल (Slope) -5.0 \times 10^3 \text{ K} प्राप्त हुआ। इस अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा की गणना जूल प्रति मोल (\text{J mol}^{-1}) में कीजिए।

हल:

हम जानते हैं कि आरेनियस ग्राफ (\log k बनाम \frac{1}{T}) का ढाल निम्नलिखित होता है:

    \[\text{Slope} = -\frac{E_a}{2.303 R}\]

दिया गया है: \text{Slope} = -5.0 \times 10^3 \text{ K}

अतः,

    \[-5.0 \times 10^3 = -\frac{E_a}{2.303 \times 8.314}\]

ऋणात्मक चिह्न कट जाएगा:

    \[E_a = 5.0 \times 10^3 \times 2.303 \times 8.314\]

    \[E_a = 5.0 \times 10^3 \times 19.147\]

    \[E_a = 95.735 \times 10^3 \text{ J mol}^{-1}\]

    \[E_a = 95735 \text{ J mol}^{-1}\]

उत्तर: अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा 95735 \text{ J mol}^{-1} (या 95.73 \text{ kJ mol}^{-1}) है।

उदाहरण 3: सांद्रता और वेग नियम पर आधारित प्रश्न

एक अभिक्रिया A + B \rightarrow P के लिए वेग नियम इस प्रकार है: \text{Rate} = k [A]^2 [B]^1

(i) यदि A की सांद्रता स्थिर रखते हुए B की सांद्रता को तिगुना (3 times) कर दिया जाए, तो वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

(ii) यदि A और B दोनों की सांद्रता दोगुनी कर दी जाए, तो नया वेग प्रारंभिक वेग का कितने गुना हो जाएगा?

हल:

प्रारंभिक वेग: \text{Rate}_1 = k [A]^2 [B]

(i) B की सांद्रता तिगुनी करने पर ([B]' = 3[B]):

नया वेग \text{Rate}_2 = k [A]^2 [3B]

    \[\text{Rate}_2 = 3 \times k [A]^2 [B] = 3 \times \text{Rate}_1\]

उत्तर (i): वेग 3 गुना हो जाएगा।

(ii) दोनों की सांद्रता दोगुनी करने पर ([A]' = 2[A] और [B]' = 2[B]):

नया वेग \text{Rate}_3 = k [2A]^2 [2B]

    \[\text{Rate}_3 = k \times 4[A]^2 \times 2[B]\]

    \[\text{Rate}_3 = 8 \times k [A]^2 [B] = 8 \times \text{Rate}_1\]

उत्तर (ii): वेग प्रारंभिक वेग का 8 गुना हो जाएगा।

5. कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए परीक्षा टिप्स (Exam Tips for Class 12 Students)

  1. कारक वाले प्रश्नों का उत्तर लिखने का तरीका: यदि परीक्षा में 3 या 4 अंक का प्रश्न आता है कि “अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले किन्हीं चार कारकों को समझाइए”, तो केवल नाम लिखकर न छोड़ें। प्रत्येक कारक के लिए 2-3 पंक्तियों में उसका वैज्ञानिक कारण (जैसे सांद्रता बढ़ने पर संघट्ट बढ़ते हैं) अवश्य लिखें।
  2. आरेनियस समीकरण का सूत्र: सूत्र \log \frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303 R} \left[ \frac{T_2 - T_1}{T_1 T_2} \right] में तापमान T_1 और T_2 को हमेशा केल्विन (Kelvin) में ही रखें। यदि प्रश्न में तापमान सेल्सियस (^\circ\text{C}) में दिया हो, तो उसमें 273 जोड़ना कभी न भूलें।
  3. उत्प्रेरक का ऊर्जा आरेख (Energy Profile Diagram): उत्प्रेरक का प्रभाव समझाते समय एक ग्राफ अवश्य बनाएं जिसमें y-अक्ष पर ‘स्थितिज ऊर्जा’ और x-अक्ष पर ‘अभिक्रिया की प्रगति’ हो। इसमें बिना उत्प्रेरक के ऊंचे पहाड़ (अधिक E_a) और उत्प्रेरक के साथ निचले पहाड़ (कम E_a) को दर्शाएं। इससे परीक्षक पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  4. लघुगणक (Logarithms) का अभ्यास: आरेनियस समीकरण के संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने के लिए \log 2 (0.3010), \log 3 (0.4771) और \log 5 (0.6990) के मान जुबानी याद रखें।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: देहली ऊर्जा (Threshold Energy) और सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) में क्या संबंध है?

उत्तर: देहली ऊर्जा वह न्यूनतम कुल ऊर्जा है जो अभिकारकों के अणुओं के पास होनी चाहिए ताकि वे टकराकर उत्पाद बना सकें। अभिकारकों के पास पहले से कुछ सामान्य गतिज ऊर्जा होती है। देहली ऊर्जा तक पहुँचने के लिए उन्हें जो अतिरिक्त ऊर्जा बाहर से देनी पड़ती है, उसे सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।

सूत्र:\text{देहली ऊर्जा} = \text{अणुओं की सामान्य ऊर्जा} + \text{सक्रियण ऊर्जा (} E_a \text{)}

प्रश्न 2: क्या कोई उत्प्रेरक किसी अभिक्रिया की एन्थैल्पी (\Delta H) को बदल सकता है?

उत्तर: नहीं। उत्प्रेरक अभिकारकों और उत्पादों की प्रारंभिक और अंतिम ऊर्जा स्थितियों में कोई परिवर्तन नहीं करता है। यह केवल ऊर्जा अवरोध (सक्रियण ऊर्जा) की ऊंचाई को कम करता है। अतः अभिक्रिया की एन्थैल्पी (\Delta H) और गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (\Delta G) उत्प्रेरक की उपस्थिति में अपरिवर्तित रहती हैं।

प्रश्न 3: चूर्ण अवस्था (Powdered form) में ठोस अभिकारक तेजी से क्यों अभिक्रिया करते हैं?

उत्तर: चूर्ण अवस्था में ठोस पदार्थ का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (Surface area) बहुत अधिक बढ़ जाता है। पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ने से दूसरे अभिकारक के अणुओं को संपर्क में आने के लिए अधिक जगह मिलती है, जिससे संघट्टों की संख्या बढ़ती है और अभिक्रिया का वेग तीव्र हो जाता है।

प्रश्न 4: शून्य सक्रियण ऊर्जा (E_a = 0) वाली अभिक्रियाओं पर तापमान का क्या प्रभाव होगा?

उत्तर: आरेनियस समीकरण (k = A e^{-E_a/RT}) के अनुसार, यदि E_a = 0 हो जाए, तो e^0 = 1 हो जाएगा, अर्थात् k = A। इसका अर्थ है कि वेग स्थिरांक (k) तापमान से पूरी तरह स्वतंत्र हो जाएगा और ऐसी अभिक्रियाओं के वेग पर तापमान बढ़ाने या घटाने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। (हालांकि व्यावहारिक रूप से लगभग सभी अभिक्रियाओं की कुछ न कुछ सक्रियण ऊर्जा अवश्य होती है)।