MP Board Class 12 Chemistry Batteries Fuel Cells बैटरियाँ और ईंधन सेल – संपूर्ण अध्ययन एवं रासायनिक अभिक्रियाएं

MP Board Class 12 Chemistry Batteries Fuel Cells : कक्षा 12 रसायन विज्ञान (Chemistry) के लिए ‘बैटरियाँ’ (Batteries) और ‘ईंधन सेल’ (Fuel Cells) का विस्तृत नोट्स। Class 12 Chemistry Batteries Fuel Cells में प्राथमिक सेल (शुष्क और मर्करी सेल), द्वितीयक सेल (सीसा संचायक बैटरी), रासायनिक अभिक्रियाएं, ईंधन सेल की दक्षता का गणितीय विश्लेषण और हल सहित महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं। बोर्ड परीक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ गाइड।

MP Board Class 12 Chemistry Batteries Fuel Cells

1. बैटरियों का परिचय (Introduction to Batteries)

दैनिक जीवन में हम टॉर्च, मोबाइल फोन, कैलकुलेटर, घड़ियों और इन्वर्टर को चलाने के लिए जिन ‘सेलों’ या ‘बैटरियों’ का उपयोग करते हैं, वे मूल रूप से गैल्वैनी सेल (Galvanic Cells) ही होते हैं।

रसायन विज्ञान के दृष्टिकोण से, बैटरी (Battery) एक या एक से अधिक गैल्वैनी सेलों का श्रेणीक्रम (series) में संयोजन होती है, जहाँ रासायनिक अभिक्रियाओं (रेडॉक्स अभिक्रियाओं) के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy) को विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) में परिवर्तित किया जाता है।

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एक अच्छी बैटरी की आवश्यक शर्तें (Characteristics of a Good Battery):

  • यह आकार में हल्की (Lightweight) और सुगठित (Compact) होनी चाहिए।
  • उपयोग के दौरान इसका वोल्टेज (Voltage) स्थिर रहना चाहिए, अर्थात् इसमें बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होना चाहिए।
  • इसकी आयु (Life span) लंबी होनी चाहिए।

बैटरियों को मुख्य रूप से दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जाता है: प्राथमिक बैटरियाँ (Primary Batteries) और द्वितीयक बैटरियाँ (Secondary Batteries)।

2. प्राथमिक बैटरियाँ (Primary Batteries)

प्राथमिक बैटरियाँ वे होती हैं जिनमें रासायनिक अभिक्रिया केवल एक ही बार संपन्न होती है। कुछ समय तक प्रयोग करने के बाद ये बैटरियाँ निष्क्रिय (Dead) हो जाती हैं और इन्हें दोबारा चार्ज (Recharge) करके उपयोग में नहीं लाया जा सकता।

कक्षा 12वीं के पाठ्यक्रम में दो प्रमुख प्राथमिक सेलों का अध्ययन किया जाता है:

2.1 शुष्क सेल (Dry Cell / Leclanché Cell)

शुष्क सेल (लेक्लांशे सेल) हमारे दैनिक जीवन में सबसे अधिक उपयोग होने वाला सेल है, जिसका प्रयोग ट्रांजिस्टर, घड़ियों और टॉर्च में होता है।

  • संरचना (Structure): इस सेल में एक जिंक (Zn) का बेलनाकार बर्तन होता है जो ऐनोड (Anode) का कार्य करता है। इसके ठीक मध्य में एक ग्रेफाइट (कार्बन) की छड़ होती है, जो कैथोड (Cathode) का कार्य करती है।
  • वैद्युतअपघट्य (Electrolyte): ग्रेफाइट की छड़ के चारों ओर मैंगनीज डाइऑक्साइड (\text{MnO}_2) और कार्बन चूर्ण का मिश्रण भरा होता है। इसके शेष खाली स्थान में अमोनियम क्लोराइड (\text{NH}_4\text{Cl}) और जिंक क्लोराइड (\text{ZnCl}_2) का एक गाढ़ा पेस्ट (Paste) भरा होता है।
Dry Cell / Leclanché Cell

रासायनिक अभिक्रियाएं (Chemical Reactions):

जब सेल से विद्युत धारा ली जाती है, तो निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रियाएं होती हैं:

  • ऐनोड पर (ऑक्सीकरण): जिंक बर्तन ऑक्सीकृत होकर इलेक्ट्रॉन त्यागता है।

        \[\text{Zn(s)} \rightarrow \text{Zn}^{2+}\text{(aq)} + 2\text{e}^-\]

  • कैथोड पर (अपचयन): ग्रेफाइट छड़ पर \text{MnO}_2 का अपचयन होता है।

        \[\text{MnO}_2\text{(s)} + \text{NH}_4^+\text{(aq)} + \text{e}^- \rightarrow \text{MnO(OH)} + \text{NH}_3\text{(g)}\]

महत्वपूर्ण तथ्य: कैथोड अभिक्रिया में मैंगनीज की ऑक्सीकरण अवस्था +4 से +3 में परिवर्तित होती है। इस अभिक्रिया में उत्पन्न होने वाली अमोनिया (\text{NH}_3) गैस बाहर नहीं निकलती, बल्कि यह ऐनोड पर उत्पन्न \text{Zn}^{2+} आयनों के साथ क्रिया करके एक संकुल (Complex) आयन [\text{Zn(NH}_3)_4]^{2+} बना लेती है, जिससे सेल फटने से बच जाता है।

शुष्क सेल का विभव (Voltage) लगभग 1.5 V होता है।

2.2 मर्करी सेल (Mercury Cell)

मर्करी सेल उन उपकरणों के लिए उपयुक्त है जिनमें कम परंतु स्थिर विद्युत धारा की आवश्यकता होती है, जैसे— श्रवण यंत्र (Hearing aids), घड़ियाँ (Watches) और पेसमेकर (Pacemaker)।

  • ऐनोड: जिंक-मर्करी अमलगम (\text{Zn-Hg})
  • कैथोड: मर्क्यूरिक ऑक्साइड (\text{HgO}) और कार्बन का पेस्ट
  • वैद्युतअपघट्य: पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (\text{KOH}) और जिंक ऑक्साइड (\text{ZnO}) का पेस्ट
Mercury Cell

रासायनिक अभिक्रियाएं (Chemical Reactions):

  • ऐनोड पर:

        \[\text{Zn(Hg)} + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{ZnO(s)} + \text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^-\]

  • कैथोड पर:

        \[\text{HgO} + \text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Hg(l)} + 2\text{OH}^-\]

  • समग्र अभिक्रिया (Overall Reaction):

        \[\text{Zn(Hg)} + \text{HgO(s)} \rightarrow \text{ZnO(s)} + \text{Hg(l)}\]

महत्वपूर्ण तथ्य: मर्करी सेल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके संपूर्ण जीवनकाल में इसका सेल विभव 1.35 V पर स्थिर रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसकी समग्र अभिक्रिया में विलयन का कोई भी ऐसा आयन शामिल नहीं है जिसकी सांद्रता समय के साथ बदलती हो।

3. द्वितीयक बैटरियाँ (Secondary Batteries)

द्वितीयक बैटरियाँ वे होती हैं जिन्हें उपयोग के बाद विपरीत दिशा में विद्युत धारा प्रवाहित करके पुनः चार्ज (Recharge) किया जा सकता है। एक अच्छी द्वितीयक बैटरी कई बार डिस्चार्ज और चार्ज के चक्र से गुजर सकती है।

3.1 सीसा संचायक बैटरी (Lead Storage Battery)

यह सबसे महत्वपूर्ण द्वितीयक बैटरी है, जिसका उपयोग ऑटोमोबाइल (Automobiles) और इन्वर्टर (Inverters) में बहुतायत से किया जाता है। यह कई वोल्टीय सेलों (2V प्रत्येक) का श्रेणीक्रम संयोजन होती है। (जैसे 12V बैटरी में ऐसे 6 सेल लगे होते हैं)।

  • ऐनोड: स्पंजी लेड (Lead – Pb) का बना ग्रिड।
  • कैथोड: लेड डाइऑक्साइड (\text{PbO}_2) से भरा हुआ लेड का ग्रिड।
  • वैद्युतअपघट्य: सल्फ्यूरिक अम्ल (\text{H}_2\text{SO}_4) का 38% (द्रव्यमान अनुसार) जलीय विलयन, जिसका घनत्व 1.30 g/mL होता है।

(A) उपयोग के समय (Discharging) होने वाली अभिक्रियाएं:

जब बैटरी से विद्युत धारा ली जाती है, तो यह गैल्वैनी सेल की तरह कार्य करती है।

  • ऐनोड पर (ऑक्सीकरण):

        \[\text{Pb(s)} + \text{SO}_4^{2-}\text{(aq)} \rightarrow \text{PbSO}_4\text{(s)} + 2\text{e}^-\]

  • कैथोड पर (अपचयन):

        \[\text{PbO}_2\text{(s)} + \text{SO}_4^{2-}\text{(aq)} + 4\text{H}^+\text{(aq)} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{PbSO}_4\text{(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)}\]

  • समग्र डिस्चार्जिंग अभिक्रिया:

        \[\text{Pb(s)} + \text{PbO}_2\text{(s)} + 2\text{H}_2\text{SO}_4\text{(aq)} \rightarrow 2\text{PbSO}_4\text{(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)}\]

ध्यान दें: डिस्चार्जिंग के दौरान सल्फ्यूरिक अम्ल (\text{H}_2\text{SO}_4) का उपभोग होता है और उसका घनत्व कम होने लगता है।

(B) चार्जिंग के समय (Charging) होने वाली अभिक्रियाएं:

जब बैटरी को चार्ज किया जाता है, तो इसमें बाहर से दिष्ट धारा (DC) प्रवाहित की जाती है। इस समय यह एक विद्युत अपघटनी सेल (Electrolytic Cell) की तरह व्यवहार करती है। अभिक्रियाएं पूर्णतः विपरीत दिशा में होती हैं।

  • समग्र चार्जिंग अभिक्रिया:

        \[2\text{PbSO}_4\text{(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{Pb(s)} + \text{PbO}_2\text{(s)} + 2\text{H}_2\text{SO}_4\text{(aq)}\]

    चार्जिंग के दौरान \text{PbSO}_4 ऐनोड पर \text{Pb} में और कैथोड पर \text{PbO}_2 में परिवर्तित हो जाता है, और सल्फ्यूरिक अम्ल पुनः बन जाता है।

3.2 निकेल-कैडमियम सेल (Nickel-Cadmium Cell)

यह एक अन्य महत्वपूर्ण द्वितीयक बैटरी है। इसकी कार्य अवधि सीसा संचायक बैटरी से अधिक होती है, परंतु इसके निर्माण की लागत बहुत अधिक होती है। इसका उपयोग कैलकुलेटर और कॉर्डलेस फोन में होता है।

  • समग्र अभिक्रिया:

        \[\text{Cd(s)} + 2\text{Ni(OH)}_3\text{(s)} \rightarrow \text{CdO(s)} + 2\text{Ni(OH)}_2\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)}\]

    इसका विभव लगभग 1.4 V होता है।

4. ईंधन सेल (Fuel Cells)

सामान्य गैल्वैनी सेलों में अभिकारक (Reactants) सेल के अंदर ही रखे होते हैं, जो एक समय बाद समाप्त हो जाते हैं। परंतु ईंधन सेल (Fuel Cell) एक ऐसा गैल्वैनी सेल है जिसमें अभिकारकों (ईंधन) की आपूर्ति बाहर से निरंतर की जाती है।

परिभाषा: वे गैल्वैनी सेल जो ईंधन (जैसे— हाइड्रोजन, मीथेन, मेथेनॉल आदि) की दहन ऊर्जा (Energy of combustion) को सीधे ही विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देते हैं, ईंधन सेल कहलाते हैं।

हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल (H₂ – O₂ Fuel Cell)

यह सबसे सफल ईंधन सेल है। इसका उपयोग अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम (Apollo Space Program) में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विद्युत और जल की आपूर्ति के लिए किया गया था।

  • संरचना: इसमें सरंध्र (Porous) कार्बन के दो इलेक्ट्रोड होते हैं, जिनमें उत्प्रेरक (जैसे प्लैटिनम या पैलेडियम) भरा होता है। इन इलेक्ट्रोडों के बीच में सांद्र जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\text{NaOH}) या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (\text{KOH}) का विलयन वैद्युतअपघट्य के रूप में भरा होता है। एक इलेक्ट्रोड से हाइड्रोजन (\text{H}_2) और दूसरे से ऑक्सीजन (\text{O}_2) गैस प्रवाहित की जाती है।

रासायनिक अभिक्रियाएं:

  • ऐनोड पर (हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण):

        \[2\text{H}_2\text{(g)} + 4\text{OH}^-\text{(aq)} \rightarrow 4\text{H}_2\text{O(l)} + 4\text{e}^-\]

  • कैथोड पर (ऑक्सीजन का अपचयन):

        \[\text{O}_2\text{(g)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} + 4\text{e}^- \rightarrow 4\text{OH}^-\text{(aq)}\]

  • समग्र अभिक्रिया (Overall Reaction):

        \[2\text{H}_2\text{(g)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow 2\text{H}_2\text{O(l)}\]

ईंधन सेल के लाभ (Advantages of Fuel Cells):

  1. उच्च दक्षता (High Efficiency): साधारण तापीय संयंत्रों (Thermal power plants) की दक्षता लगभग 40% होती है, जबकि ईंधन सेलों की दक्षता 70% से 75% तक होती है।
  2. प्रदूषण मुक्त (Pollution Free): इस सेल का उप-उत्पाद केवल जल (\text{H}_2\text{O}) होता है, इसलिए यह पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। अंतरिक्ष अभियानों में इसी जल का उपयोग पीने के लिए किया गया था।
  3. निरंतर ऊर्जा आपूर्ति: जब तक अभिकारकों की आपूर्ति होती रहती है, यह सेल कभी “डेड” (Dead) नहीं होता।

5. बैटरियों और ईंधन सेलों का गणितीय एवं ऊष्मागतिकीय विश्लेषण (Mathematical Analysis)

कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए बैटरियों की दक्षता (Efficiency) और उनकी क्षमता (Capacity) की गणितीय गणना को समझना आवश्यक है।

5.1 ईंधन सेल की दक्षता (Efficiency of a Fuel Cell, \eta)

ऊष्मागतिकी के अनुसार, किसी ईंधन के दहन से उत्पन्न होने वाली कुल ऊर्जा, एन्थैल्पी परिवर्तन (\Delta H) होती है। परंतु इस ऊर्जा का केवल वह हिस्सा ही विद्युत कार्य (Electrical Work) में बदला जा सकता है जो गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा (\Delta G) के रूप में उपलब्ध हो।

दक्षता (\eta) का सूत्र है:

    \[\eta = \frac{\text{उपयोगी कार्य}}{\text{कुल उत्पन्न ऊर्जा}} = \frac{\Delta G}{\Delta H}\]

प्रतिशत दक्षता (Percentage Efficiency):

    \[\eta \% = \frac{\Delta G}{\Delta H} \times 100\]

हम जानते हैं कि \Delta G = -nFE_{\text{cell}} होता है। अतः यदि हमें सेल का विभव E_{\text{cell}} ज्ञात हो, तो हम सेल की दक्षता निकाल सकते हैं।

उदाहरण (हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल के लिए):

जल के निर्माण के लिए मानक एन्थैल्पी (\Delta H^\circ) = -285.8 kJ/mol

जल के निर्माण के लिए मानक गिब्ज़ ऊर्जा (\Delta G^\circ) = -237.1 kJ/mol

    \[\eta \% = \frac{-237.1}{-285.8} \times 100 \approx 83\%\]

सैद्धांतिक रूप से H₂-O₂ ईंधन सेल की दक्षता 83% है, जो व्यावहारिक रूप से लगभग 70% प्राप्त होती है।

5.2 बैटरी की क्षमता (Battery Capacity – Ampere-hour, Ah)

बैटरी की क्षमता फैराडे के नियमों (Faraday’s Laws) से निर्धारित होती है। बैटरी की क्षमता को सामान्यतः एम्पियर-घंटा (Ah) में मापा जाता है।

    \[1 \text{ Ampere-hour (Ah)} = 1 \text{ A} \times 3600 \text{ s} = 3600 \text{ C (कूलम्ब)}\]

1 मोल इलेक्ट्रॉन का आवेश 1 फैराडे (F = 96487 \text{ C}) होता है, जो कि \frac{96487}{3600} \approx 26.8 \text{ Ah} के बराबर होता है।

अर्थात्, यदि किसी बैटरी की रासायनिक अभिक्रिया में 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान होता है, तो वह सैद्धांतिक रूप से 26.8 Ah की क्षमता प्रदान कर सकती है।

6. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हल सहित प्रश्न (Solved Numericals and Questions)

प्रश्न 1: सीसा संचायक बैटरी (Lead Acid Battery) को चार्ज करते समय क्या होता है? रासायनिक समीकरण लिखिए।

उत्तर: जब सीसा संचायक बैटरी को चार्ज किया जाता है, तो यह एक विद्युत अपघटनी सेल की तरह कार्य करती है। दोनों इलेक्ट्रोडों पर जमा हुआ लेड सल्फेट (\text{PbSO}_4) वापस अपनी मूल अवस्था में आने लगता है। ऐनोड पर \text{Pb} और कैथोड पर \text{PbO}_2 पुनः बन जाता है, तथा सल्फ्यूरिक अम्ल का घनत्व वापस बढ़ जाता है।

समग्र चार्जिंग अभिक्रिया:

    \[2\text{PbSO}_4\text{(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} \xrightarrow{\text{विद्युत धारा}} \text{Pb(s)} + \text{PbO}_2\text{(s)} + 2\text{H}_2\text{SO}_4\text{(aq)}\]

प्रश्न 2: ईंधन सेल क्या है? अन्य बैटरियों की तुलना में इसके दो लाभ लिखिए।

उत्तर: ईंधन सेल वे गैल्वैनी सेल हैं जो बाह्य रूप से आपूर्ति किए गए ईंधन (जैसे \text{H}_2) की दहन ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं।

लाभ:

  1. इनकी दक्षता बहुत उच्च (लगभग 70%) होती है।
  2. ये प्रदूषण मुक्त होते हैं (H₂-O₂ सेल का उत्पाद केवल शुद्ध जल होता है)।

प्रश्न 3: मर्करी सेल का वोल्टेज उसके पूरे जीवनकाल में स्थिर क्यों रहता है?

उत्तर: मर्करी सेल का सेल विभव (1.35 V) स्थिर रहता है क्योंकि इसकी समग्र सेल अभिक्रिया (\text{Zn(Hg)} + \text{HgO(s)} \rightarrow \text{ZnO(s)} + \text{Hg(l)}) में विलयन का कोई भी ऐसा आयन शामिल नहीं है जिसकी सांद्रता सेल के उपयोग के दौरान बदलती हो। सांद्रता स्थिर रहने के कारण नेर्न्स्ट समीकरण के अनुसार विभव भी स्थिर रहता है।

प्रश्न 4: एक लेड-एसिड बैटरी के डिस्चार्ज होने के दौरान 0.1 मोल H₂SO₄ खर्च होता है। फैराडे के नियम के अनुसार ज्ञात कीजिए कि परिपथ में कितने फैराडे आवेश प्रवाहित हुआ होगा?

उत्तर:

समग्र डिस्चार्जिंग अभिक्रिया:

\text{Pb} + \text{PbO}_2 + 2\text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow 2\text{PbSO}_4 + 2\text{H}_2\text{O}

इस अभिक्रिया में 2 मोल \text{H}_2\text{SO}_4 खर्च होने पर 2 मोल इलेक्ट्रॉनों (2F आवेश) का स्थानांतरण होता है।

अतः, 1 मोल \text{H}_2\text{SO}_4 खर्च होने पर 1F आवेश प्रवाहित होगा।

इसलिए, 0.1 मोल \text{H}_2\text{SO}_4 खर्च होने पर प्रवाहित आवेश = 0.1F (या 0.1 \times 96487 = 9648.7 \text{ C}) होगा।

7. परीक्षा टिप्स (Exam Tips for Class 12 Students)

  1. समीकरणों का अभ्यास: बैटरियों वाले भाग से अधिकांश प्रश्न कैथोड और ऐनोड की रासायनिक अभिक्रियाओं (Reactions) को लिखने के लिए आते हैं। विशेषकर सीसा संचायक बैटरी की डिस्चार्जिंग और चार्जिंग अभिक्रियाओं का लिखकर अभ्यास करें, क्योंकि इनमें छात्र अक्सर भ्रमित होते हैं।
  2. डायग्राम: यद्यपि परीक्षा में बैटरी का विस्तृत डायग्राम कम ही पूछा जाता है, लेकिन H₂-O₂ ईंधन सेल का चित्र बहुत महत्वपूर्ण है। इसे साफ और नामांकित (Labeled) बनाने का अभ्यास करें।
  3. तुलनात्मक अध्ययन: प्राथमिक और द्वितीयक सेलों के बीच कम से कम 3 अंतर स्पष्ट रूप से याद रखें (पुनः चार्ज होने की क्षमता, रासायनिक अभिक्रिया की उत्क्रमणीयता, और उदाहरण)।
  4. ऑक्सीकरण और अपचयन की पहचान: ऐनोड पर हमेशा ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन का निकलना) और कैथोड पर हमेशा अपचयन (इलेक्ट्रॉन का जुड़ना) होता है। इसे समीकरण में e^- को सही तरफ लिखकर स्पष्ट करें।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: शुष्क सेल में ग्रेफाइट की छड़ के चारों ओर \text{MnO}_2 क्यों भरा जाता है?

उत्तर:\text{MnO}_2 एक विध्रुवक (Depolarizer) का कार्य करता है। यह कैथोड पर उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन गैस या अन्य अपचयन उत्पादों को ऑक्सीकृत करता है, जिससे इलेक्ट्रोड पर गैस के बुलबुले जमा नहीं होते और सेल का आंतरिक प्रतिरोध नहीं बढ़ता।

प्रश्न 2: गैल्वैनी सेल और ईंधन सेल में क्या मूलभूत अंतर है?

उत्तर: गैल्वैनी सेल (जैसे शुष्क सेल) में अभिकारक सेल के भीतर ही सीमित मात्रा में होते हैं, जिनके खत्म होने पर सेल काम करना बंद कर देता है। जबकि ईंधन सेल में अभिकारकों (ईंधन) की आपूर्ति बाहर से निरंतर की जाती है, जिससे यह तब तक कार्य करता रहता है जब तक ईंधन मिलता रहे।

प्रश्न 3: इन्वर्टर की बैटरी (सीसा संचायक बैटरी) में डिस्टिल्ड वाटर (आसुत जल) क्यों डाला जाता है?

उत्तर: उपयोग के दौरान (विशेषकर ओवरचार्जिंग के समय), बैटरी के अंदर का जल टूटकर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस बनकर उड़ने लगता है, जिससे सल्फ्यूरिक अम्ल की सांद्रता बढ़ जाती है। अम्ल का सही घनत्व (1.30 g/mL) बनाए रखने के लिए उसमें अशुद्धि-रहित आसुत जल डालना आवश्यक होता है।

प्रश्न 4: द्वितीयक बैटरी को चार्ज करते समय क्या उसे विपरीत ध्रुवता (opposite polarity) से जोड़ा जाता है?

उत्तर: हाँ, बैटरी को चार्ज करने के लिए दिष्ट धारा (DC) स्रोत के धनात्मक सिरे को बैटरी के धनात्मक सिरे (कैथोड) से और ऋणात्मक सिरे को बैटरी के ऋणात्मक सिरे (ऐनोड) से जोड़ा जाता है, लेकिन बाह्य स्रोत का वोल्टेज बैटरी के वोल्टेज से अधिक होना चाहिए, ताकि अभिक्रिया विपरीत दिशा में हो सके।