नाडेप संरचना द्वारा गोबर की खाद (एफ.वाय.एम.) तैयार करना: preparation of FYM by NADEP

preparation of FYM by NADEP :परीक्षा की तैयारी कर रहे सभी विद्यार्थियों के लिए यहाँ प्रस्तुत अध्ययन सामग्री (Study Notes) को बहुत ही सरल, द्विभाषी (Bilingual – Hindi/English) और व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया है। इन नोट्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि आप परीक्षा में पूछे जाने वाले दीर्घ उत्तरीय (Long Answer) और वस्तुनिष्ठ (Objective) दोनों प्रकार के प्रश्नों को आसानी से हल कर सकें।

नाडेप संरचना द्वारा गोबर की खाद तैयार करना -preparation of FYM by NADEP

1. कृत्रिम गोबर की खाद (Artificial or Synthetic F.Y.M.)

कृत्रिम गोबर की खाद एक स्थूल जैविक खाद (Bulky organic manure) होती है, जो दिखने में बिल्कुल सामान्य गोबर की खाद जैसी ही लगती है । परीक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस खाद को पशुओं के मलमूत्र के बिना भी तैयार किया जा सकता है

मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics):

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  • इस खाद को कृषि अपशिष्टों जैसे भूसा अथवा अन्य किसी भी वनस्पति पदार्थ के अवशेषों (Plant residues) से तैयार किया जा सकता है ।
  • इन वानस्पतिक पदार्थों को सड़ाने (Decomposition) के लिए अमोनियम सल्फेट (Ammonium Sulphate) अथवा कैल्सियम सायनेमाइड (Calcium Cyanamide) जैसे नाइट्रोजनी यौगिकों के घोल का प्रयोग किया जाता है ।
  • सूक्ष्म जीवाणुओं (Micro-organisms) द्वारा उपयुक्त नमी, उचित तापमान एवं वायु मिलने पर नाइट्रोजन की उपस्थिति में जैव पदार्थों का बहुत तेजी से विघटन होता है ।
  • इसे फसलों के लिए अधिक सन्तुलित बनाने के लिए इस खाद में घुलनशील नाइट्रोजन के साथ फॉस्फेट और पोटाश भी मिला दिया जाता है ।

कृत्रिम खाद बनाने की विधि (Method of Preparation)

परीक्षा में इसकी प्रक्रिया चरणबद्ध (Step-by-step) तरीके से लिखने पर अच्छे अंक मिलते हैं:

preparation of FYM by NADEP

  1. सामग्री बिछाना (Laying Materials): सबसे पहले भूसा, ज्वार एवं मक्का के डण्ठल, गन्ने की पत्तियों अथवा केले की पत्तियों एवं तनों को किसी सख्त और समतल स्थान पर 15-20 सेमी मोटी तह (Layer) में बिछा लिया जाता है ।
  2. नमी देना (Adding Moisture): इस तह को थोड़ा दबाकर इसके ऊपर पानी छिड़क दिया जाता है ।
  3. प्रवर्तक का छिड़काव (Adding Starter): इसके ऊपर अमोनियम सल्फेट, कैल्सियम सायनेमाइड इत्यादि किसी प्रवर्तक (Starter) का एकसार छिड़काव कर दिया जाता है । ब्लडमील, बोनमील तथा खलियों को भी प्रवर्तक के रूप में प्रयोग करना लाभदायक होता है ।
  4. परत दर परत निर्माण (Layering): इसके ऊपर पुनः भूसे इत्यादि जैव पदार्थ की एक और तह बिछाई जाती है, पानी छिड़का जाता है और प्रवर्तक डाला जाता है । इस प्रकार परत लगाते-लगाते लगभग 1.50 मीटर ऊँचा ढेर तैयार कर लिया जाता है जिसे सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है ।
  5. किण्वन (Fermentation): किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के साथ ही ढेर का तापमान बढ़ने लगता है ।
  6. पलटाई प्रक्रिया (Turning Process): * लगभग 4 सप्ताह के बाद उस ढेर को पलट दिया जाता है तथा उस पर पानी का छिड़काव किया जाता है ।
    • इसके बाद इस ढेर को पुनः पहली दशा में लगाकर सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है ।
    • इसके 3-4 सप्ताह बाद खाद की दूसरी पलटाई की जाती है ।
    • दूसरी पलटाई के लगभग एक माह के बाद तीसरी पलटाई की जाती है । प्रत्येक पलटाई के बाद खाद पर पानी छिड़क दिया जाता है ।
  7. खाद की तैयारी: इस सम्पूर्ण प्रक्रिया से लगभग 5-6 महीने में खाद बनकर तैयार हो जाती है । इस खाद को गड्ढे (Pits) बनाकर भी तैयार किया जा सकता है ।

2. नाडेप संरचना (NADEP Structure)

nadep compost (नाडेप कम्पोस्ट) बनाने के लिए एक विशेष प्रकार के टाँके (Tank) का निर्माण किया जाता है। परीक्षा में इसका आकार और निर्माण सामग्री अक्सर पूछी जाती है।

पक्के नाडेप टाँके का निर्माण (Construction of NADEP Tank)

  • आकार (Dimensions): नाडेप टाँके का आकार सामान्यतः 12 फीट लम्बा, 5 फीट चौड़ा एवं 3 फीट ऊँचा होता है, या फिर इसे 10 फीट लम्बा, 6 फीट चौड़ा एवं 3 फीट ऊँचा भी बनाया जा सकता है ।
  • दीवारें (Walls): जमीन के ऊपर ईंटों की सहायता से 9 इंच मोटाई की दीवारें उक्त आकार में बनाई जाती हैं । ध्यान रहे कि दीवार की मोटाई 4 इंच भी रखी जा सकती है ।
  • वायु संचार (Aeration): ईंटों को जोड़ते समय तीसरे, आठवें एवं नवें रद्दे (Layers of bricks) में हवा के आवागमन हेतु छेद (Holes) छोड़े जाते हैं । 6 इंच व्यास के कुल छिद्रों की संख्या 68 होती है ।
  • मजबूती (Strength): टाँके में अन्दर एवं बाहर से प्लास्टर करने से मजबूती बनी रहती है । टांके के चारों कोनों एवं लम्बाई वाली दीवारों के मध्य में ईंटों के पिलर दिये जाते हैं जिससे टाँका और अधिक मजबूत बनता है ।
  • उत्पादन क्षमता (Production Capacity): इस प्रकार के टाँके से वर्ष भर में तीन बार खाद बनाई जा सकती है, जिससे लगभग 9 टन अच्छी गुणवत्ता की खाद प्राप्त होती है ।

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छिद्रों का विवरण (Details of Holes)

नाडेप संरचना में कुल 68 छिद्र होते हैं । इसका विवरण इस प्रकार है:

लाइन क्रम (Row Level)लम्बाई वाली दीवार पर (On Length Wall)चौड़ाई वाली दीवार पर (On Width Wall)कुल संख्या (Total)
सबसे नीचे वाली लाइन (Bottom row)8412
मध्यम वाली लाइन (Middle row)7310
ऊपरी लाइन (Top row)8412
कुल (Total)231134
  • लम्बाई वाली दोनों दीवारों पर कुल छिद्र: 2 x 23 = 46
  • चौड़ाई वाली दोनों दीवारों पर कुल छिद्र: 2 x 11 = 22
  • कुल छिद्र संख्या = 68

आवश्यक सामग्री एवं लागत (Required Material & Cost)

नाडेप टाँका निर्माण हेतु सामग्री:

  • सीमेन्ट: 4 बैग (50 किलो प्रति बैग) । (अन्य निर्माण विधि में 2 बैग का भी उल्लेख है )।
  • गिट्टी: 50 तगाड़ी ।
  • रेत: 50 तगाड़ी ।
  • सरिया: 10 किलोग्राम (6 मिमी) ।
  • पतला जी.आई. तार: 1 किलोग्राम ।
  • ईंट: 1000 नग ।

अन्य आवश्यकताएं: * टाँका निर्माण हेतु फ्रेम (तरापे): 3 x 2 फीट के 16 नग, 3 x 1 फीट के 2 नग (अन्दर की तरफ), 6 x 1 फीट के 18 नग (बाहर की तरफ)

  • छिद्र छोड़ने हेतु 68 गोल रिंग (6 इंच व्यास जी.आई. शीट) ।
  • श्रमिक: मिस्त्री 1, मजदूर 2 ।
  • निर्माण अवधि: 1 दिन ।
  • अनुमानित लागत राशि: लगभग 1600/- से 1800/- रुपये ।

3. नाडेप कम्पोस्ट बनाने की विधि (preparation of FYM by NADEP )

यह विषय परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। nadep compost आधुनिक जैविक खेती का एक अहम हिस्सा है।

इतिहास और लोकप्रियता (History and Popularity):

  • यह विधि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के ग्राम पुसद के श्री नारायण देवराव पण्ढरी द्वारा विकसित की गई थी, इसीलिए इस विधि का नाम ‘नाडेप विधि’ रखा गया है ।
  • यह विधि बहुत लोकप्रिय है क्योंकि इससे मात्र 90 से 120 दिनों (Days) में अच्छी गुणवत्ता की खाद तैयार हो जाती है ।
  • यह बहुत सरल है; इसमें कम से कम गोबर की आवश्यकता होती है। मात्र 1 किलो गोबर से 30 किलो खाद बनायी जा सकती है ।

नाडेप खाद के लाभ एवं विशेषताएँ (Advantages and Features):

  • इस विधि में वायु एवं नमी की उपस्थिति में जैविक कचरे का अपघटन (Decomposition) सूक्ष्म जीवाणुओं (Micro-organisms) द्वारा होता है ।
  • पोषक तत्वों (Nutrients) का हवा में उड़कर नुकसान नहीं होता है ।
  • इसमें मुख्य पोषक तत्वों के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्व भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं ।
  • लाभदायक सूक्ष्म जीवांश जैसे राइजोबियम स्पेसीज, स्फुरघोलक, माइकोराइजा, ट्रायकोडर्मा स्पेसीज इत्यादि अच्छी संख्या में पाए जाते हैं ।
  • इसमें ह्यूमस (Humus) की मात्रा अच्छी होती है जो खेत की उर्वरा शक्ति (Soil Fertility) को बढ़ाने में मदद करता है ।
  • पोषक तत्वों की मात्रा: नाइट्रोजन 0.5 से 1.5 प्रतिशत, स्फुर (Phosphorus) 0.5 से 0.9 प्रतिशत एवं पोटाश 1.2 से 1.4 प्रतिशत तक पाया जाता है ।

नाडेप कम्पोस्ट हेतु आवश्यक सामग्री (Ingredients Required)

सामग्री (Materials)मात्रा (Quantity)
जैविक कचरा (खरपतवार, फसल अवशिष्ट, पशु बाड़े से प्राप्त कचरा इत्यादि)1400 से 1600 किलो
गोबर (Cow dung)कम-से-कम 100 किलो या 8-10 टोकनी
मिट्टी (भुरभुरी, छनी हुई)600 से 1800 किलो
पानी (Water)1600 से 2000 लीटर (लगभग 8-10 ड्रम या 120 टोकनी)

टाँका भरने की विधि (Tank Filling Process)

परीक्षा में इसे इसी क्रम में लिखें:

  1. प्रथम उपचार (Initial Treatment): सबसे पहले पक्के ईंटों के बने टाँके की दीवारों एवं फर्श को गोबर के घोल से अच्छी तरह तर (wet) करें ।
  2. प्रथम परत (First Layer – Biological Waste): प्रक्षेत्र या अन्य स्थानों से उपलब्ध जैविक कचरे की 6 इंच मोटी परत लगावें । यदि कचरा बड़ा है तो उसे कुट्टी मशीन या अन्य साधन से काटकर छोटे टुकड़े बना लें ताकि विघटन (Decomposition) शीघ्र हो सके ।
  3. द्वितीय परत (Second Layer – Cow Dung Slurry): 4 से 5 किलोग्राम गोबर या गोबर गैस स्लरी को लगभग 125 से 150 लीटर पानी में घोलकर कचरे की परत पर छिड़कें जिससे कचरा गोबर के घोल से अच्छी तरह सन जाए ।
  4. तृतीय परत (Third Layer – Soil): साफ छनी हुई मिट्टी (जिसमें से कंकड़, पत्थर, प्लास्टिक एवं काँच निकाल दिए गए हों) की लगभग 50-60 किलो मात्रा को गोबर से भीगे हुए कचरे पर बिछा दें ।
  5. परतों की पुनरावृत्ति (Repeating Layers): उपर्युक्त तीनों परतों के क्रम को तब तक दोहराते रहें जब तक टाँके से एक से डेढ़ फीट ऊँचाई तक झोपड़ीनुमा आकार में परत न भर जाए ।
  6. अंतिम चरण (Final Sealing): टाँका लगभग 11-12 परतों में पूरा भर जाता है। ध्यान रहे कि टाँके को एक ही दिन में भरना आवश्यक है, इसलिए सामग्री पहले से एकत्रित कर लें । पूरा भरने के पश्चात् मिट्टी एवं गोबर के घोल द्वारा ऊपर से लेप करके इसे बंद कर देना चाहिए ।

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4. वर्मी कम्पोस्ट अथवा केंचुए की खाद (Vermicompost)

परीक्षा में वर्मी कम्पोस्ट की परिभाषा और इसके पोषक तत्वों के बारे में बहुत पूछा जाता है।

परिचय (Introduction):

  • केंचुआ (Earthworm) को कृषि के लिए कृषक का मित्र जीव (Farmer’s Friend) कहा जाता है ।
  • केंचुओं की गतिविधियों से तैयार होने वाली उत्तम गुणवत्ता वाली खाद को केंचुए की खाद या Vermicompost कहते हैं ।
  • यह महँगे रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizers) का एक बेहतरीन जैविक विकल्प है ।

पोषक तत्व (Nutritional Value):

  • केंचुए की खाद में अन्य कार्बनिक खादों की अपेक्षा पोषक तत्वों की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है ।
  • इसमें 2.5 से 3.0% नाइट्रोजन (Nitrogen) तथा 1.5 से 2.0% फास्फोरस (Phosphorus) एवं पोटाश (Potash) पाया जाता है ।
  • इसके अलावा, इसमें कैल्सियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, कॉपर व बोरॉन जैसे सूक्ष्म तत्व (Micro-nutrients) संतुलित मात्रा में पाये जाते हैं ।

प्रयुक्त पदार्थ (Materials Used): प्रायः सभी प्रकार के कार्बनिक व्यर्थ (Organic wastes) पदार्थ जो जैवीय रूप से विच्छेदनीय (Biodegradable) हों, वे केंचुए की खाद बनाने के लिये प्रयुक्त किये जा सकते हैं

परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर (Frequently Asked Questions – FAQs)

प्रश्न 1: कृत्रिम गोबर की खाद (Artificial FYM) में वानस्पतिक पदार्थों को सड़ाने के लिए किस रसायन का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर: कृत्रिम खाद बनाने के लिए प्रयुक्त वानस्पतिक पदार्थों को सड़ाने हेतु अमोनियम सल्फेट अथवा कैल्सियम सायनेमाइड आदि नाइट्रोजनी यौगिकों के घोल का प्रयोग प्रवर्तक (Starter) के रूप में किया जाता है

प्रश्न 2: नाडेप (nadep compost) टाँके का मानक आकार क्या होता है और इसमें कुल कितने छिद्र होते हैं?

उत्तर: नाडेप टाँके का मानक आकार 12 फीट लम्बा, 5 फीट चौड़ा एवं 3 फीट ऊँचा होता है । हवा के आवागमन के लिए इसमें 6 इंच व्यास के कुल 68 छिद्र छोड़े जाते हैं

प्रश्न 3: नाडेप कम्पोस्ट विधि का आविष्कार किसने किया था?

उत्तर: नाडेप कम्पोस्ट बनाने की यह विधि महाराष्ट्र राज्य के यवतमाल जिले के ग्राम पुसद के निवासी श्री नारायण देवराव पण्ढरी द्वारा विकसित की गई थी

प्रश्न 4: नाडेप खाद को तैयार होने में कितना समय लगता है और 1 किलो गोबर से कितनी खाद बन सकती है?

उत्तर: इस विधि से खाद तैयार होने में लगभग 90 से 120 दिन का समय लगता है । इस विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मात्र 1 किलो गोबर से 30 किलो उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाई जा सकती है

प्रश्न 5: वर्मी कम्पोस्ट (केंचुए की खाद) में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की कितनी प्रतिशत मात्रा पाई जाती है?

उत्तर: वर्मी कम्पोस्ट में 2.5 से 3.0% नाइट्रोजन तथा 1.5 से 2.0% फास्फोरस एवं पोटाश पाया जाता है

MCQs Depend on नाडेप संरचना द्वारा गोबर की खाद (एफ.वाय.एम.) तैयार करना: preparation of FYM by NADEP

दी गई अध्ययन सामग्री के आधार पर विद्यार्थियों की परीक्षा की तैयारी के लिए 20 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ चार विकल्प और सही उत्तर भी दिया गया है:

1. कृत्रिम गोबर की खाद बनाने के लिए मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?

A) केवल गोबर का

B) वनस्पति अवशेषों (भूसा, डंठल आदि) का

C) केवल रासायनिक उर्वरकों का

D) प्लास्टिक कचरे का

सही उत्तर: B) वनस्पति अवशेषों (भूसा, डंठल आदि) का

2. कृत्रिम खाद बनाने में वानस्पतिक पदार्थों को सड़ाने के लिए ‘प्रवर्तक’ (Starter) के रूप में किस रसायन का प्रयोग किया जाता है?

A) सोडियम क्लोराइड

B) अमोनियम सल्फेट या कैल्सियम सायनेमाइड

C) कॉपर सल्फेट

D) पोटेशियम परमैंगनेट

सही उत्तर: B) अमोनियम सल्फेट या कैल्सियम सायनेमाइड

3. कृत्रिम गोबर की खाद लगभग कितने समय में पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाती है?

A) 1-2 महीने

B) 3-4 महीने

C) 5-6 महीने

D) 8-10 महीने

सही उत्तर: C) 5-6 महीने

4. कृत्रिम खाद के ढेर की पहली पलटाई कितने समय बाद की जाती है?

A) 1 सप्ताह बाद

B) 2 सप्ताह बाद

C) 4 सप्ताह बाद

D) 8 सप्ताह बाद

सही उत्तर: C) 4 सप्ताह बाद

5. नाडेप (NADEP) टाँके का मानक आकार सामान्यतः क्या होता है?

A) 10 x 5 x 2 फीट

B) 12 x 5 x 3 फीट (या 10 x 6 x 3 फीट)

C) 15 x 6 x 4 फीट

D) 8 x 4 x 3 फीट

सही उत्तर: B) 12 x 5 x 3 फीट (या 10 x 6 x 3 फीट)

6. नाडेप टाँके की दीवारों में हवा के सुचारू आवागमन के लिए कुल कितने छिद्र (Holes) छोड़े जाते हैं?

A) 34

B) 46

C) 58

D) 68

सही उत्तर: D) 68

7. नाडेप टाँके की दीवारें ईंटों से बनाते समय उनकी मोटाई सामान्यतः कितनी रखी जाती है?

A) 4 या 9 इंच

B) 12 इंच

C) 15 इंच

D) 18 इंच

सही उत्तर: A) 4 या 9 इंच

8. एक पक्के नाडेप टाँके से एक वर्ष में कितनी बार खाद बनाई जा सकती है?

A) 1 बार

B) 2 बार

C) 3 बार

D) 4 बार

सही उत्तर: C) 3 बार

9. नाडेप (NADEP) कम्पोस्ट विधि का विकास किस राज्य में हुआ था?

A) मध्य प्रदेश

B) गुजरात

C) महाराष्ट्र (यवतमाल जिले के ग्राम पुसद में)

D) उत्तर प्रदेश

सही उत्तर: C) महाराष्ट्र

10. नाडेप विधि से खाद कितने दिनों में बनकर तैयार हो जाती है?

A) 30 से 60 दिन

B) 60 से 90 दिन

C) 90 से 120 दिन

D) 150 से 180 दिन

सही उत्तर: C) 90 से 120 दिन

11. नाडेप विधि की सबसे बड़ी विशेषता (रोचक तथ्य) क्या है?

A) इसमें पानी की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती।

B) मात्र 1 किलो गोबर से 30 किलो खाद बनाई जा सकती है।

C) यह हवा की अनुपस्थिति में तैयार होती है।

D) इसमें केवल केंचुओं का उपयोग होता है।

सही उत्तर: B) मात्र 1 किलो गोबर से 30 किलो खाद बनाई जा सकती है।

12. नाडेप टाँके को भरते समय सबसे पहली परत (First Layer) किस सामग्री की बिछाई जाती है?

A) गोबर का घोल

B) छनी हुई भुरभुरी मिट्टी

C) जैविक कचरा (लगभग 6 इंच मोटी परत)

D) रासायनिक खाद

सही उत्तर: C) जैविक कचरा (लगभग 6 इंच मोटी परत)

13. नाडेप कम्पोस्ट टाँके की भराई में ‘तृतीय परत’ (Third Layer) के रूप में क्या बिछाया जाता है?

A) सूखा भूसा

B) साफ छनी हुई मिट्टी (लगभग 50-60 किलो)

C) गोबर गैस स्लरी

D) नीम की खली

सही उत्तर: B) साफ छनी हुई मिट्टी (लगभग 50-60 किलो)

14. नाडेप कम्पोस्ट में नाइट्रोजन (Nitrogen) की कितनी प्रतिशत मात्रा पाई जाती है?

A) 0.1 से 0.4 प्रतिशत

B) 0.5 से 1.5 प्रतिशत

C) 2.5 से 3.0 प्रतिशत

D) 4.0 से 5.0 प्रतिशत

सही उत्तर: B) 0.5 से 1.5 प्रतिशत

15. नाडेप टाँके को पूरी तरह से भरने के लिए लगभग कितनी परतों (Layers) का निर्माण किया जाता है?

A) 4-5 परतें

B) 7-8 परतें

C) 11-12 परतें

D) 15-20 परतें

सही उत्तर: C) 11-12 परतें

16. गुणवत्तायुक्त खाद बनाने के लिए नाडेप टाँके को भरने में कुल कितना समय लगना चाहिए?

A) इसे एक ही दिन में भरना आवश्यक है।

B) इसे 1 सप्ताह में धीरे-धीरे भरना चाहिए।

C) 15 दिन में।

D) 1 महीने में।

सही उत्तर: A) इसे एक ही दिन में भरना आवश्यक है।

17. कृषि के लिए ‘कृषक का मित्र जीव’ (Farmer’s friend) किसे कहा जाता है?

A) साँप

B) केंचुआ

C) मेंढक

D) दीमक

सही उत्तर: B) केंचुआ

18. वर्मी कम्पोस्ट (केंचुए की खाद) में नाइट्रोजन (N) की मात्रा कितनी होती है?

A) 0.5 – 1.5%

B) 1.5 – 2.0%

C) 2.5 – 3.0%

D) 3.5 – 4.0%

सही उत्तर: C) 2.5 – 3.0%

19. वर्मी कम्पोस्ट में फास्फोरस और पोटाश की मात्रा लगभग कितनी होती है?

A) 0.5 – 1.0%

B) 1.5 – 2.0%

C) 2.5 – 3.0%

D) 3.5 – 4.5%

सही उत्तर: B) 1.5 – 2.0%

20. नाडेप संरचना में हवा के सुचारू आवागमन के लिए जो 68 छिद्र छोड़े जाते हैं, उन गोल रिंग्स (छिद्रों) का व्यास कितना होता है?

A) 2 इंच

B) 4 इंच

C) 6 इंच

D) 8 इंच

सही उत्तर: C) 6 इंच

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