Class 12 Crop Production Chapter 4 Potassic Fertilizers : कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा (MP Board और अन्य राज्य बोर्ड) के कृषि (Agriculture) संकाय के छात्रों के लिए ‘फसल उत्पादन एवं उद्यान शास्त्र’ (Crop Production and Horticulture) का अध्याय 4 (उर्वरक) अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Class 12 Crop Production Chapter 4: पोटाश युक्त उर्वरक (Potassic Fertilizers)
Potassic Fertilizers : पौधों के पोषण के लिए नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस के बाद पोटाश का ही सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे देश (भारत) की अधिकांश भूमियों में नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस की अपेक्षा पोटाश की अधिक मात्रा पायी जाती है। अतः कुछ विशेष भूमियों अथवा फसलों को छोड़कर अन्य विभिन्न फसलों के लिए प्रायः पोटाश की अलग से आवश्यकता नहीं होती है।
परन्तु, अच्छी उपज लेने के लिए पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों (N.P.K.) को सन्तुलित मात्रा में देना चाहिए। खासतौर से हल्की भूमियों में पोटाश देने वाले उर्वरक प्रयोग करने चाहिए।
पोटाश की आवश्यकता वाली प्रमुख फसलें:
आलू, तम्बाकू, गन्ना, प्याज, टमाटर आदि फसलों तथा फल-वृक्षों में पोटाश देने वाले उर्वरक प्रयोग करने से काफी अच्छी पैदावार मिलती है।
1. पोटाश युक्त उर्वरकों के प्रकार (Types of Potassic Fertilizers)
पोटाश की आपूर्ति के लिए मुख्य रूप से दो उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है:
A. पोटैशियम क्लोराइड (Potassium Chloride)
इस उर्वरक को म्यूरेट ऑफ पोटाश (Muriate of Potash) भी कहते हैं।
- पोटाश की मात्रा: इसमें लगभग 60% पोटाश होता है।
- विशेषताएँ:
- यह पानी में घुलनशील है तथा रिसाव (Leaching) द्वारा इसकी हानि नहीं होती है।
- इसका रंग सफेद से लाल होता है (लाल रंग आयरन ऑक्साइड के कारण होता है)।
- यह दानेदार तथा महीन चूर्ण के रूप में बाजारों में मिलता है।
- यह वायुमण्डल की नमी को शोषित नहीं करता है।
- सस्ता होने के कारण इसकी खपत अधिक होती है।
- फसल पर प्रभाव:
- इसका पूरा पोटाश पौधों को शीघ्र प्राप्त हो जाता है।
- इसके प्रयोग से दो दाल वाली फसलें (दलहनी) अधिक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen fixation) करती हैं।
- कन्दों के अच्छे विकास के लिए इसका प्रयोग करना चाहिए।
- सावधानियाँ: इसकी भूमि में प्रतिक्रिया अम्लीय होती है। इस उर्वरक में क्लोरीन होती है, जो तम्बाकू एवं चुकन्दर आदि फसलों के गुणों को खराब कर देती है।
- निर्माण: यह सिल्वाइट तथा कार्नेलाइट खनिजों से बनाया जाता है और यह उर्वरक कांधला (गुजरात) में तैयार किया जाता है।
B. पोटैशियम सल्फेट (Potassium Sulphate)
- पोटाश की मात्रा: इस उर्वरक में लगभग 48% पोटाश होता है।
- विशेषताएँ:
- यह सफेद महीन चूर्ण के रूप में होता है।
- यह पानी में घुलनशील है तथा वायुमण्डल की नमी को शोषित नहीं करता है, इसलिए भण्डारण में कोई कठिनाई नहीं होती है।
- इसमें 23-48% गंधक (Sulfur) भी पाया जाता है।
- यह पोटाश के उर्वरकों में सबसे महँगा है।
- फसल पर प्रभाव:
- इसमें क्लोरीन नहीं होती है, इसलिए गेहूँ, आलू, चुकन्दर आदि फसलों के लिए इसको सफलतापूर्वक प्रयोग कर सकते हैं।
- यह तम्बाकू की फसल के लिए सर्वोत्तम उर्वरक है।
- यह पौधों को शीघ्रता से प्राप्त हो जाता है तथा फसलों के उत्पादन एवं किस्म सुधारने में विशेष सहायक है।
- मिट्टी पर प्रभाव: यह उदासीन (Neutral) उर्वरक है तथा भूमि में अम्लीयता या क्षारीयता पैदा नहीं करता है। चूने वाली तथा हल्की मृदाओं में इसका प्रयोग अधिक लाभदायक रहता है।
2. खेत में देने का समय एवं विधि (Time and Method of Application)
पोटॉश प्रदान करने वाले उर्वरक अच्छे घुलनशील होते हैं इसलिए पौधों को शीघ्रता से प्राप्त हो जाते हैं।
- समय (Time): इन उर्वरकों का प्रयोग अधिकतर बोआई के समय ही करते हैं।
- विधि (Method):
- बोआई के समय पोरा या फर्टी-सीड-ड्रिल के द्वारा कूँड़ों में बीज से नीचे इन उर्वरकों को देते हैं।
- इन उर्वरकों को खड़ी फसल में (Top dressing के रूप में) भी प्रयोग कर सकते हैं।
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. पोटाश युक्त उर्वरकों का प्रयोग मुख्य रूप से किन फसलों में किया जाता है?
उत्तर: आलू, तम्बाकू, गन्ना, प्याज, टमाटर आदि फसलों तथा फल-वृक्षों में पोटाश युक्त उर्वरकों का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।
Q2. म्यूरेट ऑफ पोटाश (Muriate of Potash) में पोटाश की मात्रा कितनी होती है?
उत्तर: पोटैशियम क्लोराइड या म्यूरेट ऑफ पोटाश में लगभग 60% पोटाश पाया जाता है।
Q3. तम्बाकू और चुकंदर की फसल के लिए पोटैशियम क्लोराइड का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए?
उत्तर: क्योंकि पोटैशियम क्लोराइड में क्लोरीन मौजूद होती है, जो तम्बाकू एवं चुकन्दर आदि फसलों के गुणों को खराब कर देती है। इन फसलों के लिए पोटैशियम सल्फेट सर्वोत्तम उर्वरक है।
Q4. पोटैशियम सल्फेट मिट्टी पर कैसा प्रभाव डालता है?
उत्तर: पोटैशियम सल्फेट एक उदासीन उर्वरक है, अतः यह भूमि में अम्लीयता या क्षारीयता पैदा नहीं करता है।
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