Class 12 Crop Production Chapter 4 Classification of Fertilizers : उर्वरकों का वर्गीकरण

कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा (विशेषकर MP Board और अन्य राज्य बोर्ड) के कृषि संकाय (Agriculture) के छात्रों के लिए ‘फसल उत्पादन एवं उद्यान शास्त्र’ (Crop Production and Horticulture) का अध्याय 4 अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले लेख में हमने “उर्वरक की परिभाषा” को समझा था। बोर्ड परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों (Long Answer Type Questions) में से एक है— “उर्वरकों का वर्गीकरण” (Classification of Fertilizers)

यहाँ कक्षा 12 के अध्याय 4 के अंतर्गत उर्वरकों के वर्गीकरण (Classification of Fertilizers) पर एक विस्तृत, SEO-अनुकूल और परीक्षा की दृष्टि से तैयार किया गया आर्टिकल दिया गया है। छात्र इसे अपने क्लासरूम नोट्स के रूप में सीधे उपयोग कर सकते हैं।


Classification of Fertilizers

प्रस्तावना (Introduction)
फसलों की बंपर पैदावार और मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) बनाए रखने के लिए उर्वरकों का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। लेकिन सभी फसलों और मिट्टियों की आवश्यकता एक जैसी नहीं होती। किसी फसल को नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता होती है, तो किसी को फॉस्फोरस की। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए कारखानों में विभिन्न प्रकार के उर्वरक तैयार किए जाते हैं। अध्ययन की सुविधा और कृषि में सही उपयोग के लिए उर्वरकों को उनके अंदर मौजूद पोषक तत्वों, निर्माण प्रक्रिया और अवस्था के आधार पर विभिन्न वर्गों में बाँटा गया है। इसे ही उर्वरकों का वर्गीकरण (Classification of Fertilizers) कहते हैं।

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कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए उर्वरकों का वर्गीकरण समझना न केवल परीक्षा के लिए, बल्कि व्यावहारिक खेती (Practical Agriculture) के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।


1. पोषक तत्वों के आधार पर उर्वरकों का मुख्य वर्गीकरण (Main Classification Based on Nutrients)

उर्वरकों को मुख्य रूप से उनमें पाए जाने वाले प्राथमिक पोषक तत्वों (Primary Nutrients – N, P, K) की उपस्थिति के आधार पर तीन प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है:

A. नाइट्रोजन युक्त उर्वरक (Nitrogenous Fertilizers)

वे उर्वरक जिनका उपयोग मिट्टी में मुख्य रूप से नाइट्रोजन (Nitrogen) की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है, नाइट्रोजन युक्त उर्वरक कहलाते हैं। नाइट्रोजन पौधों की वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative growth) और पत्तियों के हरे रंग (क्लोरोफिल) के लिए आवश्यक है।
इन उर्वरकों को नाइट्रोजन के रासायनिक रूप के आधार पर 4 उप-वर्गों में बाँटा गया है:

  1. अमोनिकल उर्वरक (Ammoniacal Fertilizers): इनमें नाइट्रोजन ‘अमोनिया’ (NH4+) के रूप में होती है। धान (Rice) जैसी फसलें नाइट्रोजन को अमोनिया के रूप में ही ग्रहण करती हैं। पानी भरे खेतों के लिए ये सबसे उपयुक्त हैं।
  • उदाहरण: अमोनियम सल्फेट (20.6% N), अमोनियम क्लोराइड।
  1. नाइट्रेट उर्वरक (Nitrate Fertilizers): इनमें नाइट्रोजन ‘नाइट्रेट’ (NO3-) के रूप में होती है। पौधे इसे बहुत तेजी से ग्रहण करते हैं।
  • उदाहरण: सोडियम नाइट्रेट (16% N), कैल्शियम नाइट्रेट।
  1. अमोनिकल एवं नाइट्रेट उर्वरक (Ammoniacal and Nitrate Fertilizers): इनमें नाइट्रोजन अमोनिया और नाइट्रेट दोनों रूपों में पाई जाती है।
  • उदाहरण: कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN – इसे ‘किसान खाद’ भी कहते हैं), अमोनियम नाइट्रेट।
  1. एमाइड उर्वरक (Amide Fertilizers): इनमें नाइट्रोजन ‘एमाइड’ (CNH2) रूप में होती है। मिट्टी में जाने के बाद जीवाणु इसे पहले अमोनिया और फिर नाइट्रेट में बदलते हैं, तब पौधे इसे ग्रहण करते हैं।
  • उदाहरण: यूरिया (Urea – 46% N) (यह सबसे सस्ता और भारत में सबसे अधिक प्रयोग होने वाला उर्वरक है), कैल्शियम सायनामाइड।

B. फॉस्फोरस युक्त उर्वरक (Phosphatic Fertilizers)

वे उर्वरक जो पौधों को मुख्य रूप से फॉस्फोरस (Phosphorus) प्रदान करते हैं। फॉस्फोरस जड़ों के विकास और फसल को जल्दी पकाने में मदद करता है। इनकी घुलनशीलता के आधार पर इन्हें 3 उप-वर्गों में बाँटा गया है:

  1. जल में घुलनशील फॉस्फेटिक उर्वरक (Water Soluble Phosphatic Fertilizers): ये पानी में पूरी तरह घुल जाते हैं। इन्हें उन फसलों में दिया जाता है जिन्हें फॉस्फोरस की तुरंत आवश्यकता होती है।
  • उदाहरण: सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP – 16% P2O5), डबल सुपर फॉस्फेट (32% P2O5), ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (48% P2O5)।
  1. साइट्रिक अम्ल में घुलनशील (Citric Acid Soluble Phosphatic Fertilizers): ये पानी में नहीं घुलते, लेकिन मिट्टी के हल्के अम्लों (Weak acids) या साइट्रिक अम्ल में घुल जाते हैं। ये अम्लीय मृदा (Acidic soils) के लिए बहुत उपयोगी हैं।
  • उदाहरण: बेसिक स्लैग (Basic Slag), डाई-कैल्शियम फॉस्फेट।
  1. अघुलनशील फॉस्फेटिक उर्वरक (Insoluble Phosphatic Fertilizers): ये न तो पानी में घुलते हैं और न ही साइट्रिक अम्ल में। ये केवल प्रबल अम्लों में घुलते हैं। इनका असर मिट्टी में बहुत धीरे-धीरे होता है।
  • उदाहरण: रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate), बोन मील (हड्डी की खाद)।

C. पोटाश युक्त उर्वरक (Potassic Fertilizers)

वे उर्वरक जिनका प्रयोग मिट्टी में पोटेशियम/पोटाश (Potassium) की आपूर्ति के लिए किया जाता है। पोटाश पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है और दानों को चमकदार बनाता है।
इन्हें 2 भागों में बाँटा जाता है:

  1. क्लोराइड युक्त (Chloride Form): उदाहरण: म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP – इसमें लगभग 60% K2O होता है)। यह भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला पोटाश उर्वरक है।
  2. क्लोराइड रहित (Non-Chloride Form): उदाहरण: सल्फेट ऑफ पोटाश (SOP – 48 से 50% K2O)। यह तंबाकू, आलू और टमाटर जैसी फसलों के लिए अच्छा है जहाँ क्लोराइड नुकसानदायक हो सकता है।

2. निर्माण और पोषक तत्वों की संख्या के आधार पर वर्गीकरण (Classification Based on Composition & Number of Nutrients)

बोर्ड परीक्षाओं में यह वर्गीकरण बहुत बार पूछा जाता है:

A. एकल उर्वरक (Straight Fertilizers)

वे उर्वरक जिनमें प्राथमिक पोषक तत्वों (N, P, K) में से केवल एक ही मुख्य पोषक तत्व पाया जाता है, एकल उर्वरक कहलाते हैं।

  • उदाहरण: यूरिया (केवल नाइट्रोजन), सिंगल सुपर फॉस्फेट (केवल फॉस्फोरस), म्यूरेट ऑफ पोटाश (केवल पोटाश)।

B. जटिल या यौगिक उर्वरक (Complex Fertilizers)

जब किसी उर्वरक में दो या दो से अधिक प्राथमिक पोषक तत्व (N, P या K) रासायनिक रूप से एक साथ मिले होते हैं, तो उसे जटिल उर्वरक कहते हैं। इनका निर्माण कारखानों में विशेष रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है।

  • उदाहरण: डी.ए.पी. (DAP – Di-Ammonium Phosphate): इसमें 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है।
  • अमोनियम फॉस्फेट, नाइट्रो-फॉस्फेट।

C. मिश्रित उर्वरक (Mixed Fertilizers)

जब दो या दो से अधिक ‘एकल उर्वरकों’ को कारखानों में या किसानों द्वारा भौतिक रूप से (Physically) मिलाया जाता है, तो इस मिश्रण को मिश्रित उर्वरक कहते हैं। इनमें रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं होती है।

  • उदाहरण: NPK मिश्रण (जैसे NPK 12:32:16)। यह किसानों के श्रम और समय दोनों की बचत करता है।

3. भौतिक अवस्था के आधार पर वर्गीकरण (Classification Based on Physical State)

किसानों के प्रयोग के तरीके (Method of Application) को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों को भौतिक अवस्था के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है:

  1. ठोस उर्वरक (Solid Fertilizers): बाजार में उपलब्ध अधिकांश उर्वरक ठोस रूप में होते हैं। ये दानेदार (Granular), चूर्ण (Powder) या क्रिस्टल (Crystal) के रूप में मिलते हैं।
  • उदाहरण: दानेदार यूरिया, DAP के दाने, SSP का चूर्ण।
  1. तरल उर्वरक (Liquid Fertilizers): ये उर्वरक द्रव या पानी जैसी अवस्था में होते हैं। इनका उपयोग पानी में घोलकर छिड़काव (Foliar spray) के रूप में या ड्रिप सिंचाई (Fertigation) के माध्यम से किया जाता है।
  • उदाहरण: नैनो यूरिया (Nano Urea – आधुनिक कृषि का नया आविष्कार), तरल NPK, लिक्विड अमोनिया। तरल उर्वरकों का पौधों पर सबसे तेज असर होता है।

4. उर्वरकों के वर्गीकरण का कृषि में महत्व (Importance of Classification in Agriculture)

छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि उर्वरकों का यह वर्गीकरण केवल किताबी ज्ञान नहीं है। इसके निम्नलिखित लाभ हैं:

  • सही चुनाव: वर्गीकरण के ज्ञान से किसान अपनी फसल और मिट्टी की जाँच रिपोर्ट के अनुसार सही उर्वरक का चुनाव कर सकता है। (जैसे अम्लीय भूमि के लिए रॉक फॉस्फेट)।
  • लागत में कमी: जटिल और मिश्रित उर्वरकों के उपयोग से बार-बार खेत में खाद डालने की मजदूरी बचती है।
  • समय पर पोषण: फसल की किस अवस्था में (बुवाई के समय या फूल आते समय) कौन सा उर्वरक देना है, यह उर्वरक की घुलनशीलता (Water solubility) पर निर्भर करता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

कक्षा 12वीं कृषि (फसल उत्पादन एवं उद्यान शास्त्र) के अध्याय 4 के अनुसार, उर्वरकों का वर्गीकरण मुख्य रूप से उनके पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) और उनकी निर्माण प्रकृति (एकल, जटिल, मिश्रित) पर आधारित है। परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए छात्रों को मुख्य वर्गीकरण के साथ-साथ उनके रासायनिक नाम (जैसे- DAP, Urea, SSP) और उनमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों का प्रतिशत (जैसे- यूरिया में 46% नाइट्रोजन) अवश्य लिखना चाहिए। यह विषय न केवल बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि पी.ए.टी. (PAT) और कृषि प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी एक आधार है।


FAQs (Frequently Asked Questions) – SEO के लिए उपयोगी

Q1. उर्वरकों का वर्गीकरण कितने प्रकार से किया जाता है?
उत्तर: उर्वरकों का वर्गीकरण मुख्य रूप से 3 आधारों पर किया जाता है: 1. पोषक तत्वों के आधार पर (नाइट्रोजनी, फॉस्फेटिक, पोटाशिक), 2. निर्माण के आधार पर (एकल, जटिल, मिश्रित), और 3. भौतिक अवस्था के आधार पर (ठोस, तरल)।

Q2. नाइट्रोजन युक्त उर्वरक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: नाइट्रोजन युक्त उर्वरक रासायनिक संरचना के आधार पर 4 प्रकार के होते हैं: अमोनिकल (जैसे- अमोनियम सल्फेट), नाइट्रेट (जैसे- सोडियम नाइट्रेट), अमोनिकल-नाइट्रेट (जैसे- किसान खाद/CAN), और एमाइड (जैसे- यूरिया)।

Q3. एकल और जटिल उर्वरक में क्या अंतर है? (Difference between Straight and Complex Fertilizer)
उत्तर: जिस उर्वरक में केवल एक ही प्राथमिक पोषक तत्व (N, P या K) होता है, उसे एकल उर्वरक कहते हैं (जैसे- यूरिया)। जबकि जिस उर्वरक में दो या तीन प्राथमिक तत्व रासायनिक रूप से एक साथ मिले होते हैं, उसे जटिल उर्वरक कहते हैं (जैसे- DAP, जिसमें N और P दोनों होते हैं)।

Q4. किसान खाद (Kisan Khad) किसे कहते हैं?
उत्तर: कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) को ‘किसान खाद’ कहा जाता है। यह एक नाइट्रोजन युक्त उर्वरक है और यह मिट्टी को न तो अधिक अम्लीय बनाता है और न ही क्षारीय, इसलिए यह किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय है।