कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा (MP Board और अन्य राज्य बोर्ड) के कृषि (Agriculture) संकाय के छात्रों के लिए ‘फसल उत्पादन एवं उद्यान शास्त्र’ (Crop Production and Horticulture) का अध्याय 4 अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Phosphatic Fertilizers
Class 12 Crop Production Chapter 4 Phosphatic Fertilizers : पौधों के पोषण और विकास में नाइट्रोजन की तरह फॉस्फोरस भी एक अत्यन्त आवश्यक तत्व है। पौधों में होने वाले कोशिका-विभाजन (Cell Division) के लिए फॉस्फोरस की नितांत आवश्यकता होती है। हमारे देश (भारत) की भूमियों में प्रायः इस तत्व की कमी पायी जाती है। जहाँ नाइट्रोजन की कुछ मात्रा सहजीवी जीवाणुओं द्वारा वायुमण्डल से भूमि को प्राप्त हो जाती है, वहीं फॉस्फोरस केवल विभिन्न उर्वरक तथा खादों के द्वारा ही भूमि को प्राप्त हो पाता है।
1. फॉस्फोरस यौगिकीकरण की समस्या (Problem of Phosphorus Fixation)
कृषि छात्रों के लिए फॉस्फोरस उर्वरकों की प्रकृति को समझना बहुत जरूरी है। कभी-कभी ऐसी भूमियों में भी फॉस्फोरस के उर्वरक देने की आवश्यकता होती है जिनमें अविलेय (अघुलनशील) फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है।
फॉस्फोरस उर्वरक की सबसे महत्वपूर्ण समस्या यह है कि इसे घुलनशील अवस्था में भूमि में देने पर भी यह अचल (Immobile) हो जाता है। उर्वरक के रूप में जो फॉस्फोरस खेत में दिया जाता है, उसका लगभग 33% भाग ही पौधों को प्राप्त हो पाता है। फॉस्फोरस की शेष मात्रा अप्राप्त (Unavailable) अवस्था में परिवर्तित हो जाती है। कृषि विज्ञान में इस प्रक्रिया को फॉस्फोरस यौगिकीकरण (Phosphorus fixation) कहा जाता है।
2. फॉस्फोरस के रासायनिक रूप (Chemical Forms of Phosphorus)
फॉस्फोरस युक्त उर्वरकों में फॉस्फेट मुख्य रूप से कैल्सियम के साथ संयुक्त रहता है। कैल्सियम की मात्रा के आधार पर फॉस्फोरस के निम्नलिखित तीन रूप पाए जाते हैं:
- मोनो-कैल्सियम फॉस्फेट:

- डाइ-कैल्सियम फॉस्फेट:

- ट्राइ-कैल्सियम फॉस्फेट:

महत्वपूर्ण बिंदु: विभिन्न फसलों के दृष्टिकोण से फॉस्फोरस का मोनो-कैल्सियम फॉस्फेट रूप ही सबसे महत्वपूर्ण पदार्थ है, क्योंकि यह पानी में घुलनशील होता है और पौधे फॉस्फोरस को इसी रूप में ग्रहण करते हैं।
3. प्रमुख फॉस्फोरस युक्त उर्वरक (Major Phosphatic Fertilizers)
बाजार में किसानों के लिए कई प्रकार के फॉस्फोरस उर्वरक उपलब्ध हैं। परीक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित उर्वरक सबसे महत्वपूर्ण हैं:
A. सुपर फॉस्फेट (Super Phosphate)
फॉस्फोरस देने वाली खादों में सुपर फॉस्फेट का प्रमुख स्थान है और फसलों के लिए इसका सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है।
- उपयुक्तता: यह सभी प्रकार की भूमियों के लिए उपयोगी उर्वरक है, परन्तु उदासीन मिट्टियों (Neutral soils) में इसका असर सबसे अधिक होता है। भारी जलोढ़ भूमियों में इसका प्रयोग कम लाभदायक रहता है।
- दलहनी फसलों के लिए: दलहनी फसलों के लिए सुपर फॉस्फेट सर्वोत्तम उर्वरक है।
- प्रयोग विधि: कार्बनिक खाद के साथ इसका प्रयोग अधिक लाभदायक रहता है। फॉस्फेट की अप्राप्यता को कम करने के लिए आजकल दानेदार सुपर फॉस्फेट बनाए जाते हैं।
- निर्माण (Manufacturing): इसे खनिज कैल्सियम फॉस्फेट से बनाया जाता है। कच्चे खनिज फॉस्फेट के बहुत बारीक चूरे को गन्धक के अम्ल (
) की लगभग समान मात्रा के साथ मिलाकर यह उर्वरक तैयार किया जाता है। इसका निर्माण भावनगर (गुजरात), बड़ौदा (गुजरात), सिंदरी (बिहार) तथा दिल्ली आदि शहरों में किया जा रहा है। - प्रकार: यह भूरे रंग का पानी में घुलनशील चूर्ण होता है। इसमें
की प्रतिशतता के आधार पर इसे निम्न प्रकारों में बाँटा गया है:
- सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP): 16% फॉस्फोरस।
- डबल सुपर फॉस्फेट (DSP): 32% फॉस्फोरस।
- ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP): 48% फॉस्फोरस।
B. हड्डियों की खाद अथवा अस्थि चूर्ण (Bone Meal)
हड्डियों का उर्वरक के रूप में प्रयोग प्राचीन काल से ही हो रहा है, क्योंकि इनमें पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस पाया जाता है। यह खाद सभी प्रकार की भूमियों के लिए उपयुक्त होती है और इसमें कैल्सियम कार्बोनेट की उपस्थिति के कारण भूमि की अम्लता (Acidity) कम हो जाती है। यह दो रूपों में मिलता है:
- कच्चा अस्थि चूर्ण (Raw Bone Meal): हड्डियों को सुखाकर महीन पीसकर यह चूरा बनता है। इसमें लगभग 3% नाइट्रोजन तथा 24% फॉस्फोरस होता है। वसा (Fat) की उपस्थिति के कारण ये हड्डियाँ शीघ्र विच्छेदित नहीं होती हैं, जिससे पौधों को तुरंत लाभ नहीं मिलता है।
- भाप उपचारित अस्थि चूर्ण (Steamed Bone Meal): हड्डियों को 15-20 पौण्ड दाब पर भाप से उपचारित करने पर वसा पदार्थ अलग हो जाते हैं। सुखाने के बाद इसका अधिक बारीक चूर्ण तैयार कर लिया जाता है, जो अपना प्रभाव जल्दी दिखाता है। इसमें 22-30% फॉस्फोरस तथा 1.0-2.0% नाइट्रोजन रहती है।
C. डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (D.A.P.)
यह हल्के कत्थई रंग का एक अत्यंत लोकप्रिय दानेदार उर्वरक है।
- पोषक तत्व: इस उर्वरक से नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस दोनों ही प्राप्त होते हैं। बाजार में इसके दो ग्रेड मिलते हैं: एक में 18% नाइट्रोजन व 46% फॉस्फोरस, तथा दूसरे में 21% नाइट्रोजन व 53% फॉस्फोरस पाया जाता है।
- उपयोग: इसका प्रयोग उन क्षेत्रों के लिए अच्छा रहता है, जहाँ नाइट्रोजन से अधिक फॉस्फोरस की आवश्यकता होती है। इसे क्षारीय तथा चूनेदार मृदाओं में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा सकता है। प्रायः सभी फसलों में इसका प्रयोग किया जा सकता है तथा इसे उर्वरक मिश्रण बनाने में भी काम लाया जाता है।
- विशेषताएँ: यह वायुमण्डल की नमी को अधिक मात्रा में शोषित नहीं करता है, इसलिए गोदामों में इसे आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
- सावधानी: यह उर्वरक अम्लीय प्रकृति का होता है, इसलिए खेत में इसका लगातार प्रयोग करने से भूमि अम्लीय हो जाती है।
- निर्माण: यह अमोनिया तथा फॉस्फोरिक अम्ल को मिश्रित करके बनाया जाता है और बड़ौदा (गुजरात) के कारखाने में तैयार किया जाता है।
4. फॉस्फोरस युक्त उर्वरकों को खेत में देने का समय (Time of Application)
फॉस्फोरस देने वाले उर्वरकों का प्रयोग बोआई के समय से पहले अथवा बोआई के समय खेत में करना चाहिए। ऐसा करने से फसल की प्रारम्भ से ही अच्छी वृद्धि होती है।
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. फॉस्फोरस यौगिकीकरण (Phosphorus Fixation) किसे कहते हैं?
उत्तर: खेत में उर्वरक के रूप में दिए गए फॉस्फोरस का लगभग 33% भाग ही पौधों को प्राप्त हो पाता है, शेष मात्रा अप्राप्त (अघुलनशील) अवस्था में परिवर्तित होकर मिट्टी में स्थिर हो जाती है। इसे फॉस्फोरस यौगिकीकरण कहते हैं।
Q2. पौधे फॉस्फोरस को किस रूप में ग्रहण करते हैं?
उत्तर: पौधे फॉस्फोरस को मुख्य रूप से पानी में घुलनशील ‘मोनो-कैल्सियम फॉस्फेट’ के रूप में ग्रहण करते हैं।
Q3. सुपर फॉस्फेट में फॉस्फोरस की कितनी प्रतिशत मात्रा पाई जाती है?
उत्तर: सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) में 16%, डबल सुपर फॉस्फेट (DSP) में 32% और ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP) में 48% फॉस्फोरस पाया जाता है।
Q4. D.A.P. का पूरा नाम और इसमें पोषक तत्वों की मात्रा क्या है?
उत्तर: D.A.P. का पूरा नाम डाइ-अमोनियम फॉस्फेट है। इसके एक प्रमुख ग्रेड में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस पाया जाता है।
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