Class 12 Crop Production Chapter 4 Nitrogenous Fertilizers नाइट्रोजन युक्त उर्वरक

कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा (MP Board, UP Board और अन्य राज्य बोर्ड) के कृषि (Agriculture) संकाय के छात्रों के लिए ‘फसल उत्पादन एवं उद्यान शास्त्र’ (Crop Production and Horticulture) का अध्याय 4 (उर्वरक) बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में सबसे अधिक पूछा जाने वाला और कृषि के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण विषय है — “नाइट्रोजन युक्त उर्वरक” (Nitrogenous Fertilizers)


Nitrogenous Fertilizers

प्रस्तावना (Introduction)
पौधों की वृद्धि और विकास के लिए मुख्य रूप से तीन प्राथमिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है— नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटेशियम (K)। इनमें से नाइट्रोजन पौधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और सबसे अधिक मात्रा में आवश्यक तत्व है। भारतीय मिट्टियों में प्रायः नाइट्रोजन की भारी कमी पाई जाती है। इसी कमी को पूरा करने के लिए किसान जिन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, उन्हें नाइट्रोजन युक्त उर्वरक (Nitrogenous Fertilizers) कहा जाता है।

कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का वर्गीकरण, उनके प्रकार और उनका उपयोग समझना परीक्षा के साथ-साथ सफल खेती के लिए भी बहुत आवश्यक है।

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1. नाइट्रोजन युक्त उर्वरक की परिभाषा (Definition of Nitrogenous Fertilizers)

परिभाषा:

“वे रासायनिक उर्वरक जिनका निर्माण कारखानों में औद्योगिक विधियों द्वारा किया जाता है और जिनका मुख्य उद्देश्य मिट्टी और पौधों को ‘नाइट्रोजन’ (Nitrogen) तत्व की आपूर्ति करना होता है, नाइट्रोजन युक्त उर्वरक कहलाते हैं।”

पौधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन (जो हवा में 78% है) को सीधे ग्रहण नहीं कर सकते (दलहनी फसलों को छोड़कर)। इसलिए, उन्हें नाइट्रोजन कृत्रिम उर्वरकों के माध्यम से मिट्टी में देनी पड़ती है।


2. पौधों में नाइट्रोजन के मुख्य कार्य (Functions of Nitrogen in Plants)

नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का महत्व समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नाइट्रोजन पौधों के लिए क्या काम करती है:

  • वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth): यह पौधों की जड़ों, तनों और पत्तियों के तेजी से विकास में मदद करता है।
  • क्लोरोफिल का निर्माण (Formation of Chlorophyll): नाइट्रोजन पौधों के हरे रंग (क्लोरोफिल) का मुख्य घटक है, जो प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के लिए आवश्यक है।
  • प्रोटीन का निर्माण (Protein Synthesis): यह पौधों में अमीनो अम्ल और प्रोटीन बनाने के लिए सबसे जरूरी तत्व है।
  • कमी के लक्षण (Deficiency Symptoms): नाइट्रोजन की कमी होने पर पौधों की निचली (पुरानी) पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं और पौधे का विकास रुक जाता है।

3. नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का वर्गीकरण (Classification of Nitrogenous Fertilizers)

नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों को उनमें मौजूद नाइट्रोजन के रासायनिक रूप के आधार पर 4 मुख्य वर्गों में बाँटा गया है। बोर्ड परीक्षाओं में यह वर्गीकरण विस्तार से पूछा जाता है:

A. नाइट्रेट उर्वरक (Nitrate Fertilizers)

इन उर्वरकों में नाइट्रोजन नाइट्रेट (NO_3^-) के रूप में मौजूद होती है। पौधे नाइट्रोजन को सबसे आसानी से और सबसे तेजी से इसी रूप में ग्रहण करते हैं।

  • विशेषताएँ: ये जल में अत्यधिक घुलनशील होते हैं। इनका प्रभाव फसल पर बहुत जल्दी (तुरंत) दिखाई देता है। इन्हें ‘टॉप ड्रेसिंग’ (खड़ी फसल में छिड़काव) के लिए उपयोग किया जाता है।
  • कमियाँ: पानी के साथ घुलकर ये मिट्टी की निचली परतों में चले जाते हैं (Leaching loss)।
  • प्रमुख उदाहरण:
  • सोडियम नाइट्रेट (Sodium Nitrate) – 16% नाइट्रोजन
  • कैल्शियम नाइट्रेट (Calcium Nitrate) – 15.5% नाइट्रोजन

B. अमोनिकल उर्वरक (Ammoniacal Fertilizers)

इन उर्वरकों में नाइट्रोजन अमोनिया (NH_4^+) के रूप में होती है।

  • विशेषताएँ: ये उर्वरक पानी में घुलनशील होते हैं, लेकिन मिट्टी के कण इन्हें आसानी से सोख लेते हैं, जिससे यह पानी के साथ बहकर नष्ट नहीं होते (No Leaching)।
  • उपयोग: पानी भरे खेतों, विशेषकर धान (Paddy/Rice) की फसल के लिए ये सबसे उपयुक्त माने जाते हैं, क्योंकि धान का पौधा नाइट्रोजन को अमोनिया के रूप में ही ग्रहण करता है।
  • प्रमुख उदाहरण:
  • अमोनियम सल्फेट (Ammonium Sulphate) – 20.6% नाइट्रोजन
  • अमोनियम क्लोराइड (Ammonium Chloride) – 25% नाइट्रोजन

C. अमोनिकल और नाइट्रेट उर्वरक (Ammoniacal and Nitrate Fertilizers)

इन उर्वरकों में नाइट्रोजन दोनों रूपों (अमोनिया और नाइट्रेट) में पाई जाती है।

  • विशेषताएँ: इसमें मौजूद नाइट्रेट पौधों को तुरंत पोषण देता है, जबकि अमोनिया धीरे-धीरे और लंबे समय तक फसल को नाइट्रोजन उपलब्ध कराती है।
  • प्रमुख उदाहरण:
  • कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN – Calcium Ammonium Nitrate): इसमें 25-26% नाइट्रोजन होती है। इसे ‘किसान खाद’ (Kisan Khad) भी कहा जाता है। यह मिट्टी पर न तो अम्लीय प्रभाव डालता है और न ही क्षारीय (Neutral effect), इसलिए यह सभी फसलों और मिट्टियों के लिए सुरक्षित है।
  • अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate) – 33-34% नाइट्रोजन।

D. एमाइड उर्वरक (Amide Fertilizers)

इन उर्वरकों में नाइट्रोजन एमाइड (-NH_2) के रूप में होती है। यह प्रकृति में कार्बनिक (Organic) होते हैं लेकिन कारखानों में बनाए जाते हैं।

  • विशेषताएँ: मिट्टी में डालने के बाद जीवाणु (Bacteria) इसे पहले अमोनिया में और फिर नाइट्रेट में बदलते हैं, तब जाकर पौधे इसे ग्रहण कर पाते हैं। इसलिए इनका असर थोड़ी देरी से शुरू होता है।
  • प्रमुख उदाहरण:
  • यूरिया (Urea): इसमें 46% नाइट्रोजन होती है। यह सफेद दानेदार रूप में आता है। यह भारत में सबसे सस्ता, सबसे अधिक उत्पादित और किसानों द्वारा सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला उर्वरक है।
  • कैल्शियम सायनामाइड (Calcium Cyanamide) – 21% नाइट्रोजन।

4. प्रमुख नाइट्रोजन युक्त उर्वरक (Important Nitrogenous Fertilizers in Detail)

बोर्ड परीक्षा में यूरिया और किसान खाद के बारे में अलग से प्रश्न (टिप्पणी) पूछे जाते हैं:

  1. यूरिया (Urea):
  • नाइट्रोजन की मात्रा: 46%
  • यह पानी में पूरी तरह घुलनशील है।
  • इसका उपयोग बुवाई के समय और खड़ी फसल में (टॉप ड्रेसिंग) दोनों रूपों में किया जा सकता है।
  • पानी में घोलकर पत्तियों पर छिड़काव (Foliar spray) के लिए यह सबसे बेहतरीन उर्वरक है। (आजकल नैनो यूरिया तरल रूप में भी बहुत लोकप्रिय हो रहा है)।
  1. कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN / किसान खाद):
  • नाइट्रोजन की मात्रा: 25% (आधी अमोनिया और आधी नाइट्रेट रूप में)।
  • इसे ‘उदासीन उर्वरक’ (Neutral Fertilizer) कहते हैं, क्योंकि लगातार प्रयोग से यह मिट्टी को खराब (अम्लीय या क्षारीय) नहीं करता।

5. नाइट्रोजन युक्त उर्वरक देते समय सावधानियाँ (Precautions)

  • विभाजित मात्रा (Split Doses): नाइट्रोजन बहुत जल्दी नष्ट होता है (हवा में उड़कर या पानी में बहकर), इसलिए पूरी मात्रा एक साथ बुवाई के समय नहीं देनी चाहिए। इसे 2 या 3 बार में बाँटकर देना चाहिए।
  • नमी की आवश्यकता: उर्वरक डालने के बाद खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है, अन्यथा यह पौधों को जला सकता है।
  • जलभराव वाले खेत: धान के खेत (जहाँ पानी भरा हो) में नाइट्रेट उर्वरकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, वहाँ अमोनिकल उर्वरक (जैसे अमोनियम सल्फेट) का प्रयोग करना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

कक्षा 12 ‘फसल उत्पादन’ के छात्रों के लिए नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है। संक्षेप में, नाइट्रोजन पौधों के वानस्पतिक विकास और क्लोरोफिल के लिए उत्तरदायी है। रासायनिक रूप के आधार पर नाइट्रोजन उर्वरकों को नाइट्रेट, अमोनिकल, दोनों का मिश्रण और एमाइड (जैसे यूरिया) में वर्गीकृत किया जाता है। परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त करने के लिए छात्रों को वर्गीकरण के साथ-साथ उर्वरकों के नाम और उनमें पाई जाने वाली नाइट्रोजन की प्रतिशत (%) मात्रा अवश्य लिखनी चाहिए।


FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. नाइट्रोजन युक्त उर्वरक किसे कहते हैं?
उत्तर: वे रासायनिक खाद जो कारखानों में तैयार किए जाते हैं और जिनका मुख्य कार्य मिट्टी में नाइट्रोजन की आपूर्ति करना होता है, नाइट्रोजन युक्त उर्वरक कहलाते हैं। (जैसे- यूरिया, अमोनियम सल्फेट)।

Q2. यूरिया में कितने प्रतिशत नाइट्रोजन पाया जाता है?
उत्तर: यूरिया (Urea) में सबसे अधिक 46% नाइट्रोजन एमाइड रूप में पाया जाता है।

Q3. ‘किसान खाद’ (Kisan Khad) का रासायनिक नाम क्या है?
उत्तर: किसान खाद का रासायनिक नाम कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) है। इसे उदासीन उर्वरक माना जाता है क्योंकि यह मिट्टी की प्रकृति को नुकसान नहीं पहुँचाता।

Q4. धान की फसल के लिए कौन सा नाइट्रोजन उर्वरक सबसे अच्छा होता है?
उत्तर: धान (चावल) की फसल के लिए अमोनिकल उर्वरक (जैसे- अमोनियम सल्फेट) सबसे अच्छे होते हैं, क्योंकि धान का पौधा नाइट्रोजन को अमोनिया (NH4+) के रूप में ग्रहण करता है और यह पानी में बहकर नष्ट नहीं होता।