MP Board 12th crop Production Vermi Compost केंचुए की खाद

विद्यार्थियों की परीक्षा की तैयारी के लिए ‘वर्मी कम्पोस्ट (केंचुए की खाद)’ पर आधारित व्यवस्थित और सरल नोट्स नीचे दिए गए हैं। इन्हें आप अपनी नोटबुक में इसी प्रारूप में लिख सकते हैं:

वर्मी कम्पोस्ट (Vermi Compost) अथवा केंचुए की खाद

MP Board 12th crop Production Vermi Compost

MP Board 12th crop Production Vermi Compost : केंचुआ (Earthworm) को ‘कृषक का मित्र’ कहा जाता है। केंचुओं द्वारा विभिन्न कार्बनिक पदार्थों को खाकर और पचाकर जो उत्तम गुणवत्ता वाली खाद तैयार की जाती है, उसे वर्मी कम्पोस्ट (केंचुए की खाद) कहते हैं। यह महँगे रासायनिक उर्वरकों का एक बेहतरीन जैविक विकल्प है।

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पोषक तत्वों की मात्रा:

अन्य कार्बनिक खादों की तुलना में इसमें पोषक तत्व अधिक पाए जाते हैं:

  • नाइट्रोजन (N): 2.5% से 3.0%
  • फास्फोरस (P) एवं पोटाश (K): 1.5% से 2.0%
  • सूक्ष्म तत्व: कैल्सियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, कॉपर व बोरॉन संतुलित मात्रा में।

1. केंचुए की खाद बनाने हेतु आवश्यक सामग्री (Materials Required)

प्रायः सभी प्रकार के जैविक रूप से विघटित होने वाले (Biodegradable) कार्बनिक व्यर्थ पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है:

  • कृषि अवशेष: फसलों के तने, पत्तियाँ, भूसा, सब्जियों के छिलके आदि।
  • जानवरों का गोबर: गाय, बैल, भैंस, भेड़, बकरी का गोबर और मुर्गी की बीट।
  • वानिकी अवशेष: पौधों की टहनियाँ, लकड़ी का बुरादा, जंगलों की सूखी पत्तियाँ।
  • गोबर गैस की स्लरी (Slurry): बायोगैस संयंत्र से निकला गारा।
  • औद्योगिक व शहरी कचरा: खाद्य प्रसंस्करण का कचरा, सड़क किनारे की सूखी पत्तियाँ।
  • अन्य: व्यर्थ कागज और सूती कपड़े।

2. पदार्थों का प्रारंभिक उपचार (Preliminary Treatment)

केंचुए अपघटित पदार्थ ही खाते हैं, इसलिए कच्ची सामग्री का प्रारंभिक उपचार जरूरी है:

  1. प्रति 10-20 किलोग्राम कार्बनिक कचरे में आधा किलोग्राम पकी हुई गोबर की खाद मिलाएँ (जीवाणुओं को सक्रिय करने हेतु)।
  2. इस मिश्रण का ढेर लगाएँ और प्रति 20 कि.ग्रा. ढेर पर लगभग 5 लीटर पानी का छिड़काव करें।
  3. इस ढेर को 3 से 7 दिनों तक हमेशा नम बनाए रखें और बीच-बीच में पलटते रहें।
  4. 2 से 7 सप्ताह के बाद यह सामग्री केंचुए की खाद बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।

3. वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की मुख्य विधि (Method of Preparation)

केंचुए की खाद गड्ढे या कंटेनर दोनों में बनाई जा सकती है। गड्ढा विधि के चरण निम्नलिखित हैं:

  • स्थान का चुनाव: ऊँचे और छायादार स्थान का चुनाव करें।
  • गड्ढे का आकार: उपलब्ध सामग्री के अनुसार गड्ढा बनाएँ (आदर्श आकार: 40 फुट लम्बा, 3 फुट चौड़ा और 2 फुट गहरा)। औसतन 1 वर्गमीटर में 200 केंचुए रखे जाते हैं।
  • प्रथम परत: गड्ढे की निचली सतह पर 2-3 इंच मोटी कोई भी जैव-अपघटनीय (Biodegradable) सामग्री बिछाएँ।
  • द्वितीय परत: इसके ऊपर 2-3 इंच मोटी आंशिक रूप से सड़ी हुई गोबर की खाद बिछाएँ।
  • नमी: पूरी सामग्री में पानी छिड़क कर 40% तक नमी बनाएँ।
  • केंचुए छोड़ना: अब प्रति वर्ग मीटर लगभग 150 केंचुओं को सावधानीपूर्वक गड्ढे में छोड़ दें।
  • तृतीय परत: उपचारित खाद्य पदार्थ की 7-9 इंच मोटी परत डालें और फिर से पानी छिड़कें।
  • ढकना व छाया: क्यारियों के ऊपर छाया की व्यवस्था करें और गड्ढे को पुराने जूट के बोरों से ढक दें।

4. खाद का एकत्रीकरण (Collection)

  • लगभग 2 माह के बाद गड्ढे के ऊपरी परत का रंग गहरा भूरा हो जाता है, जिसका अर्थ है खाद तैयार है।
  • गड्ढे की ऊपरी परत को खुरच कर, जहाँ तक खाद बन गई हो, उसे सावधानी से अलग कर लें।

5. निर्माण के समय आवश्यक सावधानियाँ (Precautions)

  1. नमी: पूरी निर्माण अवधि में खाद के ढेर में 30% से 40% नमी अवश्य होनी चाहिए।
  2. स्थान: गड्ढा ऐसे स्थान पर हो जहाँ सीधी धूप और अत्यधिक बारिश का पानी न पहुँचे।
  3. सुरक्षा: केंचुओं को चींटियों, चूहों, पक्षियों और अन्य शिकारी जंतुओं से बचाना चाहिए।
  4. निषेध: खाद बनाने की सामग्री में प्लास्टिक, काँच, रबर या पत्थर के टुकड़े बिल्कुल नहीं होने चाहिए।

6. वर्मी कम्पोस्ट के प्रमुख लाभ (Benefits)

  • यह पौधों के लिए एक सर्वोत्तम और संतुलित जैविक खाद है।
  • इसके उपयोग से मृदा की भौतिक संरचना और जलधारण क्षमता में सुधार होता है।
  • पर्यावरण पूरी तरह सुरक्षित रहता है और रसायनों का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
  • कम लागत और कम समय में इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।

7. वर्मी कम्पोस्ट देने का समय एवं ढंग (Application of Vermicompost)

  • सब्जी वाली फसलों में: 5 से 7.5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से खेत की मिट्टी में मिलाएँ। इसके बाद ही सब्जियों की रोपाई या बुवाई करें।
  • फलदार वृक्षों में: बड़े वृक्षों के तने के आस-पास 1 मीटर की परिधि में 5 किलोग्राम खाद प्रति वृक्ष मिट्टी में मिलाएँ। ऊपर से हल्की सिंचाई करें।
  • विभिन्न (अन्य) फसलों में: बुवाई से पूर्व, खेत में पर्याप्त नमी होने पर 5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में बिखेर कर मिट्टी में मिला दें। फसल कटाई के बाद भी खेत में नमी और वानस्पतिक अवशेष छोड़ें ताकि बचे हुए केंचुए जीवित रहें और खाद बनाते रहें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs on MP Board 12th crop Production Vermi Compost

  1. वर्मी कम्पोस्ट (केंचुए की खाद) क्या है?

    केंचुओं द्वारा विभिन्न कार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों (जैसे- गोबर, सूखे पत्ते, कृषि अवशेष) को खाकर और पचाकर तैयार की गई उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद को वर्मी कम्पोस्ट कहते हैं।

  2. वर्मी कम्पोस्ट तैयार होने में औसतन कितना समय लगता है?

    केंचुए गड्ढे में छोड़ने के बाद खाद को पूरी तरह से तैयार होने में लगभग 2 महीने (60 दिन) का समय लगता है।

  3. केंचुए की खाद में कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं?

    इसमें 2.5% से 3.0% नाइट्रोजन, 1.5% से 2.0% फास्फोरस व पोटाश के साथ-साथ कैल्सियम, मैग्नीशियम, सल्फर और जिंक जैसे सूक्ष्म तत्व भी संतुलित मात्रा में पाए जाते हैं।

  4. वर्मी कम्पोस्ट बनाते समय गड्ढे में कितनी नमी होनी चाहिए?

    खाद निर्माण की पूरी प्रक्रिया के दौरान गड्ढे या ढेर में 30% से 40% नमी का होना अत्यंत आवश्यक है।

  5. क्या वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए किसी भी प्रकार का कचरा उपयोग किया जा सकता है?

    नहीं, इसके लिए केवल जैविक रूप से अपघटित (Biodegradable) होने वाले कचरे का ही उपयोग किया जा सकता है। इसमें प्लास्टिक, काँच, रबर या पत्थर के टुकड़े बिल्कुल नहीं डालने चाहिए।

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