Class 9 Hindi Unit 6 Apathit Bodh Question Bank : कक्षा 9 हिंदी इकाई 6 ‘अपठित बोध’ का सम्पूर्ण प्रश्न बैंक। परीक्षा की तैयारी के लिए अपठित गद्यांश (Unseen Prose) और अपठित काव्यांश (Unseen Poetry) को हल करने के तरीके और सभी महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न-उत्तर यहाँ प्राप्त करें।
इकाई – 6 : अपठित बोध
इकाई 6 अपठित बोध – अपठित काव्यांश / गद्यांश 04
अपठित गद्यांश –
निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
1- अंग्रेजी में एक कहावत है कि सत्य के बाद स्वच्छता का स्थान है। अर्थात स्वच्छता जीवन की मूल आवश्यकताओं में शामिल है। मनुष्य मात्र में स्वच्छता का विचार उत्पन्न करने के लिए शिक्षा का प्रचार करना अनिवार्य है, इसलिए शिक्षित व्यक्ति स्वयं ही स्वच्छता की ओर प्रवृत्त हो जाता है। बाह्य स्वच्छता का प्रभाव हमारी आंतरिक स्वच्छता पर भी पड़ता है। वही आंतरिक स्वच्छता, सदाचार, नैतिक मूल्य, सद्विचार एवं अच्छी संगति से प्राप्त होती है।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक क्या हो सकता है?
- ii. हमारी आंतरिक सुरक्षा का आधार क्या है?
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
2- गिरिराज हिमालय का विस्तार अफगानिस्तान की सीमा से लेकर म्यांमार तक फैला है। रूस तथा चीन तक इसकी शाखाएँ पहुँचती है। इसी पर्वत पर मानसरोवर झील तथा शिव का निवास कैलाश पर्वत है। सिंधु, गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र तथा कोसी जैसी विशाल नदियों का उद्गम हिमालय ही है। बद्रीनाथ तीर्थ और स्वर्ग से सुंदर कश्मीर हिमालय की गोद में ही बसा है। संसार की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट हिमालय का मुकुट है। हिमालय भारत की सुरक्षा तथा गौरव का प्रतीक है।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. गंगा, यमुना तथा ब्रह्मपुत्र नदियों का जनक कौन है?
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
3- विद्या अमूल्य, अनश्वर तथा सर्वोच्च धन है। अन्य सभी प्रकार के धन कभी न कभी नष्ट हो जाते हैं। परंतु विद्या धन कभी नष्ट नहीं होता। रावण स्वर्णमयी लंका को नष्ट होने से न बचा सका। उसका बल तथा धन भी नष्ट हो गया। युद्ध में पराजित हुआ। परंतु श्रीराम भी उसका विद्या ज्ञान नहीं छीन पाए। युद्ध में मरणासन्न पड़े रावण से लक्ष्मण ने विद्या-धन प्राप्त किया था। अतः विद्या-धन ही वह एक मात्र पूँजी है जो हमेशा हमारे साथ रहती है।
प्रश्न –
- i. रावण के पास सबसे अमूल्य धन कौन सा था?
- ii. उपर्युक्त अनुच्छेद का सारांश लिखिए।
- iii. उपर्युक्त अनुच्छेद का शीर्षक लिखिए।
4- भारत में ध्वनि प्रदूषण को दैनिक जीवन का एक हिस्सा माना जाता है और एक बड़ी सीमा तक हमने इसके साथ रहने के अभ्यस्त भी हो चुके हैं इसलिए भारत में ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध सामाजिक चेतना का अभाव है। 45 डेसीबेल से अधिक की ध्वनि शोर मानी जाती है। जबकि दिल्ली, कोलकाता तथा मुंबई जैसे महानगरों में ध्वनि का स्तर 90 डेसीबेल से भी अधिक है। उल्लेखनीय है कि मुंबई विश्व का तीसरा सबसे अधिक शोरगुल वाला शहर है। अतः भारत में ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध व्यापक एवं प्रभावी कानूनों की महती आवश्यकता है।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. ध्वनि प्रदूषण क्या है।
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
5- तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या, सिकुड़ते जंगल, अवैध शिकार, पर्यावरण प्रदूषण तथा ध्वस्त होता पारिस्थितिक तंत्र, जैव विविधता के प्रमुख खतरे हैं। जैव विविधता का सर्वाधिक ह्रास वन्य प्राणियों में हुआ है। मारीशस का डोडो, स्काटलैंड का ग्रेट ऑक तथा न्यूजीलैंड का मोआ पक्षी ऐसे प्राणी हैं जिन्हें हम अब कभी देख नहीं सकते हैं। भारत में एशियाई सिंह, चित्तीदार तेंदुआ, कस्तूरी मृग, काला हिरण, तापीर, सुनहरा लंगूर तथा सिंहपूँछ बंदर विलुप्त होने की कगार पर हैं यदि इनके संरक्षण के प्रभावी उपाय न किये गये तो इन नायाब जीवों को हम हमेशा-हमेशा के लिए खो देंगे।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त अनुच्छेद का संभावित शीर्षक लिखिए।
- ii. संसार के कौन से वन्य प्राणी विलुप्त हो चुके हैं?
- iii. उपर्युक्त अनुच्छेद का सार लिखिए।
6- निंदा का उद्गम हीनता और कमजोरी से होता है। निंदा करके उनके अहम को तुष्टि मिलती है। ज्यों कर्म क्षीण हो जाता है, त्यों निंदा की प्रवृत्ति में दिनों-दिन इजाफा होता चला जाता है। निंदा कुछ लोगों की पूँजी होती है बड़ा लंबा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूँजी का कई लोगों की प्रतिष्ठा ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण पर आधारित होती है।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. लोग दूसरों की निंदा क्यों करते हैं
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
7- हमारी जीवन शैली में कम्प्यूटर और इंटरनेट का दखल इस कदर बढ़ता जा रहा है कि संभव है कि आने वाले समय में इंसान, कम्प्यूटर और कम्प्यूटर, इंसान बन जाएगा। कम्प्यूटर विशेषज्ञ और लेखक कवि “रे कुर्जवील” ने भविष्यवाणी की है कि सन 2029 तक कम्प्यूटर और इंसान में तमीज कर पाना मुश्किल हो जाएगा और सदी के अंत तक तो वे सर्वथा एक रूप हो जाएँगे।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. इंसान के कम्प्यूटर बन जाने से समाज को क्या खतरे हैं?
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
8- आधुनिक बाजारवादी संस्कृति उपभोग एवं एन्जॉय पर आधारित है। हर विज्ञापन हमसे कहता है कि जीवन का सारा रस, सारा ममत्व, सारा सुख और सारा आनंद चीजों का उपभोग करने में है और इन विज्ञापनों के सहारे ही हमारा भी दिया चलता है। इतने भोग-उपभोग के लिए पैसा कमाना पड़ता है और पैसा कमाने से इंसान को इतनी फुर्सत ही नहीं मिल पाती कि वह एन्जॉय कर सके। अतः इस बात की पूरी संभावना है कि 21 वीं सदी में एन्जॉय करने का आग्रह और एन्जॉयमेन्ट के लिए समय की कमी दोनों बढ़ेंगे।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का संभावित शीर्षक चुनिए।
- ii. 21वीं सदी का इंसान एन्जॉय क्यों नहीं कर पायेगा?
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
9- भारत में टी.वी. और इंटरनेट के प्रभाव से सांस्कृतिक उपनिवेशवाद तेजी से अपने पाँव पसार रहा है। सदियों तक शासन करने के बावजूद अंग्रेज हमारे शहरी लोगों तक को पतलून पहनने का कायल कर सके और न “हाउ डू यू डू” कहने का। लेकिन मैकवर्ल्ड ने चंद ही सालों में अमेरिकी जीन्स हमारे लड़के-लड़कियों की खास पोशाक बना दी और सभी जगह बच्चों को अंकल और आन्टी से हाय और बाय बोलना सिखा दिया। भारत की मध्यवर्गीय जनता ने हैप्पी बर्थडे, हैप्पी न्यू ईयर, हैप्पी वैडिंग एनिवर्सरी, फादर्स-डे, मदर्स-डे, वेलेन्टाइन्स डे, जैसे हैप्पीनेस के नये अवसर जुटा लिए हैं जो पूरी तरह कार्ड उपहार और बाजार से जुड़े हुए हैं। नई सदी में सांस्कृतिक गुलामी की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक चुनिए।
- ii. सांस्कृतिक उपनिवेशवाद या सांस्कृतिक गुलामी से क्या आशय है?
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सार लिखिए।
10- लोक साहित्य में लोकगीतों का विशेष स्थान है। ये गीत व्यक्ति विशेष के न होकर समूह के होते हैं। इनका रचयिता अज्ञात होता है और ये प्रायः मौखिक रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी या एक स्थान से दूसरे स्थान में स्थानांतरित होते रहते हैं। लोकगीत, लोकजीवन का दर्पण होते हैं। जिनमें लोक संस्कृति के समस्त पक्षों का वर्णन होता हैं। लोकगीत धर्म, सामाजिक रीति-रिवाज, दर्शन, ज्योतिष, वैद्यक, सदाचार, उपदेश, लोक व्यवहार मनोरंजन तथा जीवन के समस्त पक्षों का संचित कोष होते हैं।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. लोकगीतों की कोई दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
- iii. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
अपठित काव्यांश –
निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
1-
जो जल बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़ै दाम,
दोनों हाथ उलीचिये, यही सयानों काम।
प्रश्न –
- i. नाव में पानी बढ़ने पर क्या करना चाहिए?
- ii. घर में संपत्ति बढ़ने पर क्या करना बुद्धिमानी है?
- iii. उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
2-
कल जो हमारी सभ्यता पर हँसे थे अज्ञान से,
आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसंधान से।
जो आज प्रेमी है हमारे भक्त कल होंगे वहीं,
जो आज व्यर्थ विरक्त है अनुरक्त कल होंगे वहीं।
प्रश्न –
- i. हमारी सभ्यता पर लोग क्यों हँस रहे थे?
- ii. अनुरक्त का विलोम लिखिए।
- iii. आज कौन लज्जित हो रहे है?
- iv. उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
3-हम अनिकेतन हम अनिकेतन,
रमते राम हमारा, क्या घर, क्या दर कैसा वेतन,
अब तक इतनी यों ही काटी, अब क्या सीखे नव परिपाटी,
कौन बनाए आज घरौंदा, हाथों चुन-चुन कंकड़ माटी,
ठाट फकीराना है अपनाए बाघांबर सोहे अपने तन।
प्रश्न –
- i. उक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. कवि अपने आपको अनिकेतन क्यों कहता है?
- iii. उक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
4-
कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास,
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उसके पास।
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त,
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त।
प्रश्न –
- i. कई दिनों से चक्की उदास क्यों थी।
- ii. उक्त पंक्तियाँ कौन सी प्राकृतिक आपदा की ओर इशारा करती हैं?
- iii. उक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
5-
माँ तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन,
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन,
थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब भी,
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण,
ज्ञान अर्पित प्राण अर्पित,
रक्त का कण-कण समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूँ ।।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. कवि भारत माँ को क्या अर्पित करना चाहता है?
- iii. देश की धरती का हम पर क्या ऋण हैं?
6-
गगन-गगन तेरा यश फहराए
पवन-पवन तेरा बल गहराए
क्षिति-जल-नभ पर डाल हिंडोले
चरण-चरण संचरण सुनहरा
ओ ऋषियों के वेश
प्यारे भारत देश।
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. आप अपने देश को प्यार क्यों करते है?
- iii. उक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
7-
जी पहले कुछ दिन शर्म लगी मुझको,
पर पीछे-पीछे अक्ल जगी मुझको,
जी लोगों ने तो बेंच दिये ईमान,
जी आप न हो सुनकर ज्यादा हैरान,
मैं सोच-समझकर आखिर,
अपने गीत बेंचता हूँ,
जी हाँ हुजूर मैं गीत बेंचता हूँ
प्रश्न –
- i. उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
- ii. कवि को गीत बेचने में शर्म क्यों नहीं आती?
- iii. उपर्युक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।