इकाई 5: कृतिका भाग-2 प्रश्न बैंक MP Board Class 10 Hindi Question Bank Unit 5

MP Board Class 10 Hindi Question Bank Unit 5

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न (01 अंक)
सही विकल्प चुनकर लिखिए-

माँ ने भोलानाथ के घाव पर लगाया-
(अ) मरहम
(ब) दवाई
(स) पिसी हुई हल्दी
(द) तुलसी का रस
उत्तर: (स) पिसी हुई हल्दी

भोलानाथ का असल में नाम था-
(अ) तारकेश्वरनाथ
(ब) अमरनाथ
(स) केदारनाथ
(द) बद्रीनाथ
उत्तर: (अ) तारकेश्वरनाथ

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‘मइयाँ चावल अमनिया कर रही थीं’ अमनिया का अर्थ है-
(अ) फटकना
(ब) साफ करना
(स) चुनना
(द) धोना
उत्तर: (ब) साफ करना

बरखा बंद होते ही बाग में बहुत से नजर आए-
(अ) चूहे
(ब) बंदर
(स) चिरई
(द) बिच्छू
उत्तर: (द) बिच्छू

साँप निकलने पर डरकर भागे भोलानाथ आकर छिपे-
(अ) घर के कमरे में
(ब) बैठक के कोने में
(स) पिताजी की गोद में
(द) मइयाँ के अँचल में
उत्तर: (द) मइयाँ के अँचल में

‘साना साना हाथ जोड़ि’ रचना है-
(अ) कमलेश्वर की
(ब) शिव प्रसाद मिश्र की
(स) मधु कांकरिया की
(द) शिवपूजन सहाय की
उत्तर: (स) मधु कांकरिया की

एक कतार में लगी सफेद सफेद बौद्ध पताकाएँ प्रतीक हैं-
(अ) शांति और अहिंसा की
(ब) सुंदरता की
(स) आत्मा की शांति की
(द) नए कार्य की शुरुआत की
उत्तर: (स) आत्मा की शांति की

‘साना साना हाथ जोड़ि’ गद्य की विधा है-
(अ) संस्मरण
(ब) यात्रा वृत्तांत
(स) डायरी लेखन
(द) रिपोर्ताज
उत्तर: (ब) यात्रा वृत्तांत

पहाड़ी कुत्ते भौंकते हैं-
(अ) काली रात में
(ब) चाँदनी रात में
(स) आधी रात में
(द) दिन में
उत्तर: (ब) चाँदनी रात में

‘फेरि भेटुला’ का अर्थ है-
(अ) फिर जाएंगे
(ब) फिर आएंगे
(स) फिर चलेंगे
(द) फिर मिलेंगे
उत्तर: (द) फिर मिलेंगे

मधु कांकरिया की सहेली है-
(अ) मणि
(ब) जितेन
(स) प्रियंवदा
(द) सुभद्रा
उत्तर: (अ) मणि

खेदुम है-
(अ) फूलों का बगीचा
(ब) रोडोडेंड्रो के फूल
(स) देवी देवताओं का निवास
(द) झरना
उत्तर: (स) देवी देवताओं का निवास

हिरोशिमा कविता किस काव्य संग्रह से ली गई है?
(अ) अरी ओ करुणा प्रभामय
(ब) नदी के द्वीप
(स) इंद्रधनु रौंदे हुए
(द) अज्ञेय यायावर रहेगा याद
उत्तर: (अ) अरी ओ करुणा प्रभामय

लेखक अपनी अभ्यंतर विवशता को पहचान पाता है –
(अ) प्रयोग करके
(ब) लिखकर
(स) सुनकर
(द) पढ़कर
उत्तर: (ब) लिखकर

हिरोशिमा नामक कविता अज्ञेय ने लिखी-
(अ) भारत में
(ब) रेल गाड़ी में बैठे बैठे
(स) जापान में
(द) हवाई जहाज में
उत्तर: (ब) रेल गाड़ी में बैठे बैठे

रिक्त स्थान में सही शब्द चुनकर लिखिए –

आम की फसल में कभी-कभी खूब-……………….. आती है। (आँधी / वर्षा)
उत्तर: आँधी

कभी-कभी हमसे-……………….. कुश्ती भी लड़ते हैं। (बाबूजी / पिताजी)
उत्तर: बाबूजी

भोलानाथ और उनके साथी-……………….. के बिल के पानी उलचने लगे। (चूहों / साँपों)
उत्तर: चूहों

जहाँ लड़कों का संग वहीं बाजे-………………..। (मृदंग / तंग)
उत्तर: मृदंग

लड़के और बंदर पराई-……………….. नहीं समझते। (प्रीत / पीर)
उत्तर: पीर

गंतोक से-……………….. किलोमीटर की दूरी पर युमथांग था। (139/149)
उत्तर: 149

लेपचा और-……………….. सिक्किम की स्थानीय जातियाँ हैं। (भूटिया / सहरिया)
उत्तर: भूटिया

सिलीगुड़ी से ही हमारे साथ थी यह-……………….. नदी। (तिस्ता / कोसी)
उत्तर: तिस्ता

जितेन उत्साहित होकर कहने लगा, “……………….. हिंदुस्तान का स्विट्जरलैंड है।” (कटाओ / कश्मीर)
उत्तर: कटाओ

मंजिल से कहीं ज्यादा-……………….. होता है मंजिल तक का सफर। (रोमांचक / आकर्षक)
उत्तर: रोमांचक

चाय के बागानों में कई-……………….. बेकू पहले चाय की पत्तियाँ तोड़ रही थी। (युवतियाँ / युवक)
उत्तर: युवतियाँ

हिरोशिमा-……………….. में है। (जापान/अमेरिका)
उत्तर: जापान

अज्ञेय-……………….. के विद्यार्थी रहे हैं। (विज्ञान / कला)
उत्तर: विज्ञान

अज्ञेय का जन्म-……………….. में हुआ। (उत्तर प्रदेश / मध्य प्रदेश)
उत्तर: उत्तर प्रदेश

अज्ञेय की प्रारंभिक शिक्षा-……………….. में हुई। (पंजाब / जम्मू कश्मीर)
उत्तर: जम्मू कश्मीर

गंतोक का मतलब-……………….. है। (पठार / पहाड़)
उत्तर: पहाड़

सही जोड़ी बनाकर लिखिए-

(i)

1. माता का अंचल(ख) माता का अंचल
2. मैं क्यों लिखता हूँ ?(क) अज्ञेय
3. निबंध(ग) शिवपूजन सहाय
4. साना-साना हाथ जोड़ि(ङ) यात्रा वृत्तांत
5. उपन्यास का अंश(घ) मैं क्यों लिखता हूँ?

(ii)

1. शिवपूजन सहाय का जन्म(ख) सन् 1893
2. देहाती दुनिया(ग) शिवपूजन सहाय
3. सलाम आखिरी(घ) मधु कांकरिया
4. अज्ञेय(क) सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
5. अज्ञेय का जन्म(ङ) सन् 1911

(iii)

1. शिवपूजन रचनावली(ङ) चार खण्ड
2. पताखोर(ख) एक धर्म चक्र
3. प्रेयर व्हील(क) काव्य संग्रह
4. त्रिशंकु(ग) निबंध
5. भप्रदूत(घ) उपन्यास

(iv)

1. खुले गगन के लाल सितारे(ख) आम का उगता हुआ पौधा
2. चरैवेति – चरैवेति(घ) चलते रहो – चलते रहो
3. रफ्ता-रफ्ता(ग) धीरे – धीरे
4. अमोले(ङ) कहानी संग्रह
5. चाँदुआ(क) छोटा शामियाना

(v)

1. मतवाला(ङ) प्रतिष्ठित पत्रिका
2. खेदुम(घ) देवी देवताओं का निवास
3. तारसप्तक(ग) अज्ञेय
4. मधु कांकरिया(ख) कोलकाता में जन्म
5. उत्तान(क) पीठ के बल लेटना

एक वाक्य में उत्तर लिखिए-

हिंदी का स्मरणीय शिल्प में लिखा गया पहला उपन्यास कौन सा माना जाता है?
उत्तर: ‘देहाती दुनिया’।

बरखा के बंद होते ही बाग में क्या -क्या नजर आए?
उत्तर: बिच्छू।

विपदा के समय भोलानाथ किसकी शरण में जाता है?
उत्तर: माँ के आँचल में।

भोलानाथ का असल नाम क्या था?
उत्तर: तारकेश्वरनाथ।

भोलानाथ अपने पिताजी को क्या कहकर बुलाते थे?
उत्तर: बाबूजी।

भोलानाथ और उनके साथी टूटी चूहेदानी से क्या बनाते थे?
उत्तर: पालकी।

निम्नलिखित शब्दों का अर्थ लिखिए-
अ. आबरवाँ
ब. अमनिया
उत्तर: अ. आबरवाँ – रेशमी कपड़े / ब. अमनिया – चावल साफ करना।

सामने ही एकम रकम के रंग-बिरंगे इतने सारे फूल दिखाई पड़े कि लगा फूलों के बाग में आ गई हूँ। रेखांकित शब्द का अर्थ लिखिए।
उत्तर: एकम रकम का अर्थ है तरह-तरह के/विभिन्न प्रकार के।

‘डोको’ क्या है?
उत्तर: पीठ पर बाँधने वाली बाँस की बनी टोकरी।

अज्ञेय ने मानव निर्मित सूरज किसे कहा है?
उत्तर: अणु बम को।

लेखक ने अपने आप को हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब महसूस किया?
उत्तर: जब उन्होंने हिरोशिमा में पत्थर पर मनुष्य की छाया देखी और उसके बाद भारत आकर एक पत्थर पर पेंसिल से चित्र बनाकर देखा।

सत्य / असत्य लिखिए –

तारकेश्वरनाथ ही भोलानाथ थे।
उत्तर: सत्य

भोलानाथ को मइयाँ के गोद से निकलकर बाबूजी की गोद में शांति मिली।
उत्तर: असत्य (विपदा के समय भोलानाथ को माँ के आँचल में ही शांति मिली थी।)

गणेश जी के चूहे की रक्षा के लिए शिव का नंदी निकल आया।
उत्तर: असत्य (यह कथन गलत है, पाठ में ऐसा कोई प्रसंग नहीं है।)

हमारे पिताजी तड़के उठ कर निपट नहा कर पूजा करने बैठ जाते थे।
उत्तर: सत्य

कभी-कभी बाबूजी हमसे कुश्ती भी लड़ते थे।
उत्तर: सत्य

हम कन्हैया बनकर बाबूजी की गोद में हंसते-हंसते बाहर आते थे।
उत्तर: सत्य

चार लड़के बैल बनकर मोट खींचने लग जाते थे।
उत्तर: सत्य

गंगटोक मेहनतकश बादशाहों का शहर है।
उत्तर: सत्य

जब किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होती है तो रंगीन पताकाएँ लगा दी जाती हैं।
उत्तर: असत्य (मृत्यु होने पर सफेद पताकाएँ लगाई जाती हैं, रंगीन पताकाएँ शुभ कार्यों की शुरुआत पर लगाई जाती हैं।)

सेवन सिस्टर्स वाटरफॉल असम में है।
उत्तर: असत्य (सेवन सिस्टर्स वाटरफॉल सिक्किम में है।)

चाय के हरे भरे बागानों में कई युवतियाँ बोकू पहले चाय की पत्तियाँ तोड़ रही थी।
उत्तर: सत्य

लघु उत्तरीय प्रश्न (02 अंक)

1. बाल मनोभावों की अभिव्यक्ति करते-करते लेखक ने तत्कालीन समाज के पारिवारिक परिवेश का चित्रण भी किया है। ‘माता का अंचल’ पाठ के आधार पर इस कथन की विवेचना कीजिए। उत्तर: ‘माता का अंचल’ पाठ में लेखक शिवपूजन सहाय ने भोलानाथ और उनके साथियों के बाल मनोभावों (खेलकूद, शरारतें, माता-पिता से लगाव) का बहुत सुंदर चित्रण किया है। इसी के साथ, उन्होंने तत्कालीन ग्रामीण समाज के पारिवारिक परिवेश को भी बखूबी दर्शाया है:

  • पारिवारिक आत्मीयता: पाठ में पिता-पुत्र के गहरे संबंध, माँ का वात्सल्य और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है। पिता का बच्चे को नहलाना, खिलाना, साथ खेलना – यह सब उस समय के संयुक्त परिवार की आत्मीयता को दर्शाता है।
  • ग्रामीण जीवन: बच्चों के खेल (खेती, बारात, घरौंदा बनाना) तत्कालीन ग्रामीण जीवन, उनकी सादगी और सीमित संसाधनों में खुशी खोजने की प्रवृत्ति को दिखाते हैं।
  • धार्मिक वातावरण: पिता का पूजा-पाठ करना, रामायण पाठ करना और बच्चों को संस्कार देना, उस समय के धार्मिक और सांस्कृतिक परिवेश का हिस्सा था।
  • मातृत्व का महत्व: अंत में, विपदा के समय बच्चे का माँ के आँचल में शरण लेना, माँ के निस्वार्थ प्रेम और सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। यह उस समय के पारिवारिक ढांचे में माँ की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।

2. भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है? उत्तर: भोलानाथ स्वभाव से बहुत चंचल और अपने दोस्तों के साथ खेलने का शौकीन था। जब वह किसी बात पर डरकर या चोट लगकर रोता हुआ अपने पिता या माँ के पास आता था, तो जैसे ही वह अपने साथियों को देखता था कि वे बाहर खेल रहे हैं, तो वह तुरंत अपना रोना और सिसकना भूल जाता था। बच्चों का स्वभाव ही ऐसा होता है कि वे अपने हमउम्र साथियों के साथ खेलने के लिए तुरंत लालायित हो जाते हैं और उनके साथ खेलने की उत्सुकता में अपने दुख-दर्द को भूल जाते हैं। यही भोलानाथ के साथ भी होता था।


3. बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं? उत्तर: बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कई तरीकों से अभिव्यक्त करते हैं, जैसे:

  • शारीरिक निकटता: माता-पिता के पास रहना, उनसे लिपट जाना, उनकी गोद में बैठना।
  • खेलना और मज़ाक करना: उनके साथ शरारतें करना, हँसना, कुश्ती लड़ना (जैसा भोलानाथ करता था)।
  • नकल करना: उनकी आदतों, बातों या क्रियाओं की नकल करना, जो उनके प्रेम और जुड़ाव को दर्शाता है।
  • आज्ञा मानना और सहायता करना: छोटे-मोटे कामों में मदद करना या उनकी कही बातों को मानना।
  • विपदा में आश्रय खोजना: जब वे डरते हैं या चोट लगती है, तो सबसे पहले माता-पिता की शरण में जाना, जो उनके गहरे भरोसे और प्रेम को दिखाता है।

4. माता का अंचल शीर्षक की उपयुक्तता बताइए। उत्तर: ‘माता का अंचल’ शीर्षक इस पाठ के लिए अत्यंत उपयुक्त और सार्थक है। इसके कई कारण हैं:

  • माँ का सुरक्षा कवच: पाठ में दिखाया गया है कि भोलानाथ दिन भर अपने पिता के साथ रहता है, खेलता है, खाता है, लेकिन जब उसे साँप से डर लगता है तो वह सीधे माँ के आँचल में छिप जाता है। माँ का आँचल उसके लिए सबसे सुरक्षित और आश्रय भरा स्थान साबित होता है।
  • ममता का प्रतीक: आँचल भारतीय संस्कृति में माँ की ममता, प्रेम, सुरक्षा और निस्वार्थ स्नेह का प्रतीक है। यह शीर्षक माँ के इसी निस्वार्थ वात्सल्य भाव को उजागर करता है।
  • सर्वाधिक आरामदायक स्थान: यह दर्शाता है कि दुनिया की कोई भी जगह, कितनी भी आनंददायक क्यों न हो, बच्चे के लिए माँ के आँचल से अधिक सुकून और शांति नहीं दे सकती।
  • भावनात्मक केंद्र: भले ही पिता बच्चों के पालन-पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हों, लेकिन भावनात्मक सुरक्षा और अंतिम आश्रय माँ ही होती है, और शीर्षक इसी भावनात्मक केंद्र को दर्शाता है।

5. भोलानाथ का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था फिर भी विपदा के समय माँ की शरण लेता है। इसकी क्या वजह हो सकती है? उत्तर: भोलानाथ का अपने पिता से गहरा जुड़ाव था; वे साथ खेलते, खाते और सोते थे। पिताजी उसके मित्र जैसे थे। इसके बावजूद, जब साँप निकलता है और भोलानाथ अत्यधिक भयभीत हो जाता है, तो वह सीधे माँ के आँचल में जाकर छिपता है। इसकी वजह यह हो सकती है:

  • अनादि काल से चली आ रही प्रवृत्ति: विपदा या अत्यधिक भय के समय बच्चे स्वाभाविक रूप से माँ के पास जाते हैं, क्योंकि माँ का आँचल उनके लिए सहज सुरक्षा, ममता और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक होता है।
  • माँ की ममतामयी सुरक्षा: पिता भले ही मित्रवत हों, लेकिन माँ का स्पर्श, उनकी गोद की उष्णता और उनका आँचल शारीरिक व मानसिक रूप से तत्काल सुरक्षा प्रदान करता है। माँ की ममता में भय को शांत करने की एक अनोखी शक्ति होती है।
  • संस्कार और जैविक जुड़ाव: बच्चे का जन्म से ही माँ से गहरा जैविक और भावनात्मक जुड़ाव होता है। संकट में वह मूल प्रवृत्ति जागृत होती है।
  • पिता का ‘खेल’ और माँ का ‘आश्रय’: पिता के साथ संबंध में खेल और मनोरंजन का पहलू अधिक था, जबकि माँ के साथ संबंध में पोषण, सुरक्षा और भावनात्मक आश्रय का। तीव्र भय की स्थिति में व्यक्ति को आश्रय की अधिक आवश्यकता होती है।

6. गंतोक को मेहनतकश बादशाहों का शहर क्यों कहा गया? उत्तर: गंतोक (गंगटोक) को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यहाँ के लोग अत्यधिक परिश्रमी हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से इस पहाड़ी शहर को सुंदर बनाया है। यहाँ के नागरिक विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन जीवनशैली के बावजूद जीवन को उत्साह और ऊर्जा के साथ जीते हैं। वे परिश्रम करते हैं, लेकिन अपने जीवन को पूरे शाही अंदाज़ में जीते हैं। वे अपने काम के साथ-साथ अपने शहर की सुंदरता और व्यवस्था का भी पूरा ध्यान रखते हैं। उनकी यह मेहनती और स्वाभिमानी जीवनशैली उन्हें ‘बादशाहों’ जैसा बनाती है।


7. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का लगाना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है? उत्तर:

  • श्वेत पताकाएँ (सफेद झंडे): ये तब लगाई जाती हैं जब किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु हो जाती है। ये पताकाएँ शांति, अहिंसा और दिवंगत आत्मा की शांति का प्रतीक होती हैं, जो उस व्यक्ति की मृत्यु के शोक और श्रद्धांजलि को व्यक्त करती हैं।
  • रंगीन पताकाएँ: ये तब लगाई जाती हैं जब कोई शुभ कार्य या नया कार्य आरंभ किया जाता है। ये पताकाएँ खुशी, उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक होती हैं।

8. ‘लॉन्ग स्टॉक’ में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक ही क्यों दिखाई दी? उत्तर: ‘लॉन्ग स्टॉक’ में लेखिका ने एक ‘प्रेयर व्हील’ (प्रार्थना चक्र) देखा था। इस चक्र के बारे में बताया गया था कि इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। यह देखकर लेखिका को लगा कि चाहे मैदान हों या पहाड़, सभी जगह के लोगों की आस्थाएं और विश्वास एक जैसे ही हैं। हिंदू धर्म में भी लोग गंगा में स्नान करके अपने पाप धोने की बात करते हैं, और यहाँ बौद्ध धर्म में भी पाप मुक्ति के लिए चक्र घुमा रहे हैं। यह समानता देखकर लेखिका को महसूस हुआ कि ऊपरी तौर पर भले ही विविधता हो, लेकिन भारत की आत्मा, यहाँ के लोगों की मूल भावनाएँ, आस्थाएँ और विश्वास एक ही हैं।


9. प्रकृति के अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है? लिखिए। उत्तर: प्रकृति के अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को अद्भुत और मंत्रमुग्ध कर देने वाली अनुभूति होती है। उन्हें लगता है कि वे एक ऐसे अनमोल संसार में आ गई हैं जहाँ उन्हें जीवन के परम सत्य का अनुभव हो रहा है। वे प्रकृति के विशालता और सौंदर्य में डूब जाती हैं, जहाँ हर तरफ झरने, वादियाँ, फूल और बादलों का अद्भुत संगम है। इस विराट स्वरूप को देखकर लेखिका का मन शांत हो जाता है और वे स्वयं को प्रकृति के एक छोटे से अंश के रूप में महसूस करती हैं। उन्हें यह भी एहसास होता है कि इस विराट प्रकृति के सामने मानवीय अस्तित्व कितना छोटा है और यहाँ आकर सभी चिंताएँ, भय और स्वार्थ समाप्त हो जाते हैं।

10. ‘कटाओ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है’। इस कथन के पक्ष में अपना तर्क लिखिए। उत्तर: कटाओ पर किसी भी दुकान का न होना वास्तव में उसके लिए वरदान है। इसके पक्ष में तर्क निम्नलिखित हैं:

  • प्राकृतिक सौंदर्य की अक्षुण्णता: दुकानें न होने से कटाओ का प्राकृतिक सौंदर्य जस का तस बना हुआ है। वहाँ की पवित्रता और शांति बनी हुई है, जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है।
  • प्रदूषण रहित वातावरण: दुकानों के न होने से कचरा, प्लास्टिक और अन्य प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलता, जिससे कटाओ का वातावरण स्वच्छ और निर्मल रहता है।
  • पर्यटकों की निजता: पर्यटक वहाँ शांति से प्रकृति का आनंद ले पाते हैं, उन्हें व्यावसायिक गतिविधियों से कोई व्यवधान नहीं होता।
  • अनावश्यक भीड़ से बचाव: दुकानें न होने से वहाँ अनावश्यक भीड़ नहीं जुटती, जिससे प्राकृतिक स्थल का मूल स्वरूप बना रहता है। यह उसे व्यावसायिक पर्यटन स्थल बनने से रोकता है।

11. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है? ‘साना साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर लिखिए। उत्तर: ‘साना साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर प्रकृति ने जल संचय की अद्भुत व्यवस्था की है। पहाड़ी क्षेत्रों में:

  • शीतकाल में बर्फ: प्रकृति शीतकाल में पहाड़ों पर बर्फ के रूप में जल का संचय करती है।
  • गर्मियों में पिघलना: गर्मियों में जब जल का संकट होता है, तब यह बर्फ पिघलकर नदियों का रूप ले लेती है।
  • जल आपूर्ति: ये नदियाँ पूरे वर्ष शहरों और मैदानी इलाकों को जल प्रदान करती हैं, जिससे सिंचाई, बिजली उत्पादन और पीने के पानी की आपूर्ति होती है। यह व्यवस्था एक ओर प्रकृति के सौंदर्य को बनाए रखती है, तो दूसरी ओर मानव जीवन के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।

12. लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है। इसका कारण लिखिए? उत्तर: लेखक (अज्ञेय) के अनुसार, प्रत्यक्ष अनुभव केवल बाहरी घटना या तथ्य को जानना है, जबकि ‘अनुभूति’ उस अनुभव को हृदय में उतारना और उसे आत्मसात करना है। प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में इसलिए अधिक मदद करती है क्योंकि:

  • गहराई और प्रामाणिकता: अनुभूति में लेखक का हृदय, भावनाएँ और विचार घुल-मिल जाते हैं, जिससे लेखन में गहराई और प्रामाणिकता आती है। केवल देखा हुआ लिखने से वह नीरस हो सकता है, लेकिन महसूस किया हुआ लिखने से जीवंत हो उठता है।
  • मानवीय संवेदना: अनुभूति लेखक को विषय के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है, जिससे वह उसे अधिक सूक्ष्मता और भावनात्मकता से प्रस्तुत कर पाता है।
  • सृजनात्मकता: अनुभूति लेखक को अपनी आंतरिक विवशता को पहचानकर उसे कलात्मक रूप देने के लिए प्रेरित करती है। यह केवल सूचना देना नहीं, बल्कि उसे रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।

13. मैं क्यों लिखता हूँ ? पाठ के आधार पर बताइए कि लेखक को कौन सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं? उत्तर: ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पाठ के आधार पर लेखक (अज्ञेय) को निम्नलिखित बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं:

  • आंतरिक विवशता: लेखक की सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी ‘आंतरिक विवशता’ है। वे कहते हैं कि उनके भीतर कुछ ऐसा होता है जो उन्हें लिखने के लिए मजबूर करता है, मानो वह उनके भीतर का दबाव हो जिसे वे लिखकर मुक्त करना चाहते हैं।
  • प्रत्यक्ष अनुभव: वे अपने देखे, भोगे और महसूस किए गए अनुभवों को लिखना चाहते हैं।
  • ज्ञान और बौद्धिक जिज्ञासा: वे अपनी बौद्धिक जिज्ञासा को शांत करने और ज्ञान को दूसरों तक पहुँचाने के लिए लिखते हैं।
  • सामाजिक दायित्व: कई बार वे समाज की विसंगतियों, समस्याओं और मानवीय त्रासदी को अभिव्यक्त करने के लिए लिखते हैं, जैसे हिरोशिमा पर कविता लिखना।
  • आत्म-प्रकाशन: कुछ हद तक, अपने विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करने की इच्छा भी उन्हें प्रेरित करती है।

14. कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति के साथ-साथ बाहरी दबाव भी महत्वपूर्ण होता है। यह बाहरी दबाव कौन-कौन से हो सकते हैं? उत्तर: हाँ, कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति (आंतरिक प्रेरणा) के साथ-साथ बाहरी दबाव भी महत्वपूर्ण होते हैं। ये बाहरी दबाव कई प्रकार के हो सकते हैं:

  • आर्थिक दबाव: प्रकाशन के लिए, जीवन-यापन के लिए या पुरस्कार राशि के लिए लिखना।
  • संपादकीय दबाव: किसी पत्रिका के संपादक द्वारा विषय या समय-सीमा का दबाव।
  • सामाजिक/राजनीतिक दबाव: समाज में व्याप्त कोई समस्या, आंदोलन या राजनीतिक घटना जो लेखक को लिखने के लिए प्रेरित करे (जैसे ‘हिरोशिमा’ कविता में अणु बम का प्रभाव)।
  • पाठकों की अपेक्षाएँ: पाठकों की पसंद या बाजार की माँग के अनुसार लिखना।
  • प्रकाशन का दबाव: प्रकाशक द्वारा पुस्तक प्रकाशित करने का आग्रह या समय-सीमा।
  • शिक्षा या पाठ्यक्रम का दबाव: पाठ्यपुस्तकों के लिए लेखन।

15. हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंतः और बाहरी दोनों दबाव का परिणाम है। कैसे? पाठ के आधार पर लिखिए। उत्तर: हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक (अज्ञेय) के अंतः और बाहरी दोनों दबावों का परिणाम थी:

  • बाहरी दबाव: लेखक जब जापान के हिरोशिमा शहर गए, तो उन्होंने वहाँ अणु बम के विध्वंसकारी परिणामों को प्रत्यक्ष देखा। उन्होंने पत्थर पर मानव की जल चुकी छाया देखी, जो बाहरी यथार्थ था। यह भयावह दृश्य उनके लिए एक बाहरी दबाव था जिसने उन्हें विचलित किया।
  • अंतः दबाव: इस बाहरी अनुभव को देखकर लेखक ने उसे केवल तथ्यों के रूप में नहीं लिया, बल्कि वह उनके भीतर उतर गया और उन्हें गहरी पीड़ा और संवेदनशीलता (अनुभूति) प्रदान की। भारत लौटकर, जब वे एक पत्थर पर पेंसिल से चित्र बना रहे थे और वह पत्थर उनके हाथ से टूट गया, तब उन्हें लगा कि ठीक इसी तरह बम से ध्वस्त पत्थर के भीतर मनुष्य की छाया अंकित हुई होगी। यह आंतरिक अहसास और पीड़ा (जो उनकी ‘आंतरिक विवशता’ थी) ने उन्हें कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार, बाहरी दृश्य और आंतरिक अनुभूति का समन्वय ही इस कविता का कारण बना।

16. अनुभव और अनुभूति में क्या अंतर है? उत्तर:

  • अनुभव (Experience): अनुभव किसी घटना या क्रिया को बाहरी रूप से देखना या उसमें शामिल होना है। यह जानकारी या ज्ञान का वह स्तर है जो इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त होता है। यह अक्सर बौद्धिक और सतही हो सकता है।
    • उदाहरण: किसी भूकंप को देखना एक अनुभव है।
  • अनुभूति (Realization/Deep Feeling): अनुभूति अनुभव को हृदय में उतारना, उसे आत्मसात करना और उससे प्रभावित होना है। यह अनुभव के भावनात्मक और आंतरिक पक्ष से संबंधित है। इसमें व्यक्ति का स्वयं का हृदय और चेतना शामिल होती है, जो उसे गहरे स्तर पर प्रभावित करती है।
    • उदाहरण: भूकंप की त्रासदी को देखकर उसकी पीड़ा और विनाश को गहराई से महसूस करना अनुभूति है। संक्षेप में, अनुभव बाहरी होता है, जबकि अनुभूति आंतरिक और भावनात्मक होती है।

17. ‘मातृत्व और श्रम साधना साथ साथ’ पाठ के आधार पर पहाड़ी महिलाओं की स्थिति को स्पष्ट कीजिए। उत्तर: ‘साना साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर पहाड़ी महिलाओं की स्थिति ‘मातृत्व और श्रम साधना साथ साथ’ की प्रतीक है। उनकी स्थिति निम्नलिखित विशेषताओं से स्पष्ट होती है:

  • कठोर परिश्रम: पहाड़ी महिलाएँ अत्यंत परिश्रमी होती हैं। वे घरों का काम करने के साथ-साथ चाय के बागानों में या सड़कों के निर्माण में भी कड़ी मेहनत करती हैं।
  • श्रम के साथ मातृत्व: वे अपनी पीठ पर बच्चे को ‘डोको’ (बाँस की टोकरी) में लादे हुए, काम करती हैं। यह दर्शाता है कि वे अपने मातृत्व के दायित्व को निभाते हुए भी श्रम साधना में लगी रहती हैं।
  • पुरुषों के साथ कंधे से कंधा: वे पुरुषों के साथ मिलकर काम करती हैं, चाहे वह भारी सामान ढोना हो या सड़कें बनाना हो। वे समाज में सक्रिय और समान भागीदार होती हैं।
  • सांस्कृतिक पहचान: उनकी वेशभूषा, बोली और जीवनशैली उनकी अद्वितीय पहाड़ी संस्कृति का हिस्सा है, जिसमें श्रम और सादगी का गहरा महत्व है। यह सब उनकी जुझारू प्रवृत्ति, सहनशीलता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

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