MP Board Class 10 Electricity Complete Guide

MP Board Class 10 Electricity Complete Guide : यहाँ दिए गए पाठ्यांश पर आधारित, बोर्ड परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण और संक्षिप्त नोट्स दिए गए हैं:

परीक्षा उपयोगी नोट्स: अध्याय 12 – विद्युत (Electricity)

1. विद्युत धारा (Electric Current)

  • परिभाषा: किसी चालक में विद्युत आवेश (इलेक्ट्रॉनों) के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।
  • सूत्र: I = \frac{Q}{t} (धारा = आवेश / समय)
  • SI मात्रक: ऐम्पियर (A)। (1 A = 1 C / 1 s)
  • विद्युत धारा की दिशा: परिपाटी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनों (ऋणावेश) के प्रवाह की विपरीत दिशा को विद्युत धारा की दिशा माना जाता है (अर्थात धनावेश के प्रवाह की दिशा)।
  • मापक यंत्र:ऐमीटर (Ammeter)।
    • ध्यान दें: इसे परिपथ में सदैव श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: 1 कूलॉम (C) आवेश लगभग 6 \times 10^{18} इलेक्ट्रॉनों में समाए आवेश के बराबर होता है। (एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 \times 10^{-19} C आवेश होता है)।

2. विद्युत परिपथ (Electric Circuit)

  • परिभाषा: विद्युत धारा के सतत (continuous) तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं। यदि परिपथ कहीं से टूट जाए, तो धारा का प्रवाह रुक जाता है।
  • स्विच का कार्य: यह सेल (या बैटरी) तथा बल्ब (या अन्य उपकरण) के बीच एक चालक संबंध (Conducting link) स्थापित करता है।

3. विद्युत विभव और विभवांतर (Electric Potential & Potential Difference)

चालक तार में इलेक्ट्रॉन स्वयं गति नहीं करते। उन्हें गति प्रदान करने के लिए वैद्युत दाब में अंतर की आवश्यकता होती है, जिसे विभवांतर कहते हैं (यह बैटरी या सेल द्वारा उत्पन्न होता है)।

  • विभवांतर की परिभाषा: किसी धारावाही परिपथ के दो बिंदुओं के बीच एकांक आवेश (Unit charge) को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को विभवांतर कहते हैं।
  • सूत्र: V = \frac{W}{Q} (विभवांतर = किया गया कार्य / आवेश)
  • SI मात्रक: वोल्ट (V)।
  • 1 वोल्ट की परिभाषा: यदि 1 कूलॉम आवेश को ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है, तो विभवांतर 1 वोल्ट (1 V = 1 J / 1 C) कहलाता है।
  • मापक यंत्र:वोल्टमीटर (Voltmeter)।
    • ध्यान दें: इसे सदैव उन बिंदुओं के पार्श्वक्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है जिनके बीच विभवांतर मापना होता है।

4. ओम का नियम (Ohm’s Law) – [V. Imp]

जर्मन वैज्ञानिक जार्ज साईमन ओम (1827) ने विभवांतर और विद्युत धारा के बीच संबंध स्थापित किया।

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  • नियम: यदि किसी धातु के तार का ताप समान रहे, तो परिपथ में तार के सिरों के बीच का विभवांतर (V), उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है।
  • गणितीय रूप: V \propto I
  • सूत्र: V = IR
  • प्रतिरोध (Resistance – R): यह चालक का वह गुण है जो अपने में प्रवाहित होने वाले आवेश (धारा) के प्रवाह का विरोध करता है।
  • प्रतिरोध का SI मात्रक: ओम (\Omega)। (1 \Omega = 1 V / 1 A)

यहाँ एक वीडियो दिया गया है जो जल के प्रवाह (Plumbing analogy) का उदाहरण देकर वोल्टेज, करंट और प्रतिरोध के बीच के संबंध को और अधिक स्पष्ट करता है:

मुख्य निष्कर्ष: जिस प्रकार पानी की पाइप में पानी का दबाव (Voltage) पानी के बहाव (Current) को धकेलता है, और पाइप की चौड़ाई या रुकावट (Resistance) उसे नियंत्रित करती है, ठीक उसी प्रकार विद्युत परिपथ भी कार्य करता है।

5. परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण अंतर: ऐमीटर बनाम वोल्टमीटर

गुणऐमीटर (Ammeter)वोल्टमीटर (Voltmeter)
उपयोगविद्युत धारा (I) मापने के लिएविभवांतर (V) मापने के लिए
संयोजनपरिपथ में श्रेणीक्रम (Series) में जुड़ता हैपरिपथ में पार्श्वक्रम (Parallel) में जुड़ता है

6. संख्यात्मक प्रश्नों (Numericals) के लिए महत्त्वपूर्ण सूत्र

  1. Q = It (आवेश = धारा \times समय)
  2. W = VQ (कार्य = विभवांतर \times आवेश)
  3. V = IR (ओम का नियम: विभवांतर = धारा \times प्रतिरोध)
  4. I = \frac{V}{R} (धारा = विभवांतर / प्रतिरोध)

यहाँ आपके द्वारा दिए गए सभी प्रश्नों के व्यवस्थित और स्पष्ट उत्तर चित्र सहित दिए गए हैं:

1. विद्युत परिपथ और धारा (Electric Circuit & Current)

प्रश्न: विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है?

उत्तर: किसी विद्युत धारा के सतत (continuous) तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं। यदि परिपथ कहीं से टूट जाए या स्विच ‘ऑफ़’ कर दिया जाए, तो विद्युत धारा का प्रवाह रुक जाता है।

प्रश्न: विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर (A) है। यदि किसी परिपथ में प्रति सेकंड एक कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस परिपथ में विद्युत धारा 1 ऐम्पियर कहलाती है।

अर्थात् 1\text{ A} = 1\text{ C}/1\text{ s}

प्रश्न: एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।

उत्तर: एक कूलॉम (1 C) आवेश लगभग 6 \times 10^{18} इलेक्ट्रॉनों में समाए आवेश के तुल्य होता है।

2. विद्युत विभव और विभवांतर (Electric Potential)

प्रश्न: उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।

उत्तर: विद्युत सेल अथवा बैटरी।

प्रश्न: यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1V है?

उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि किसी विद्युत धारावाही चालक के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक 1 कूलॉम आवेश को ले जाने में 1 जूल (J) कार्य किया जाता है।

प्रश्न: 6 V बैटरी से गुज़रने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?

उत्तर: दी गई ऊर्जा (किया गया कार्य) निकालने का सूत्र है: W = V \times Q

यहाँ, विभवांतर (V) = 6\text{ V} और आवेश (Q) = 1\text{ C} है।

अतः ऊर्जा W = 6\text{ V} \times 1\text{ C} =6\text{ J} (जूल)। प्रत्येक कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा दी जाती है।

3. चालक का प्रतिरोध और उसके कारक (Resistance & its Factors)

प्रश्न: किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

उत्तर: किसी चालक का प्रतिरोध मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करता है:

  • चालक की लंबाई पर: प्रतिरोध लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है (R \propto l)
  • अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर (मोटाई): प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (R \propto \frac{1}{A})
  • पदार्थ की प्रकृति पर: जिसे वैद्युत प्रतिरोधकता कहते हैं।

प्रश्न: समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है? क्यों?

उत्तर:मोटे तार में विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी।

चालक का प्रतिरोध उसकी मोटाई (अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। मोटे तार का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण उसका प्रतिरोध कम होता है, जिससे विद्युत धारा बिना किसी बाधा के सरलता से प्रवाहित होती है।

प्रश्न: मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा?

उत्तर: ओम के नियम (V = IR) के अनुसार, यदि प्रतिरोध नियत रखा जाए, तो विद्युत धारा सीधे तौर पर विभवांतर पर निर्भर करती है (I \propto V)। अतः, यदि विभवांतर को आधा कर दिया जाए, तो उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा भी आधी (1/2) रह जाएगी।

प्रश्न: विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु (Alloy) के क्यों बनाए जाते हैं?

उत्तर: इसके दो प्रमुख कारण हैं:

  1. मिश्रातुओं की वैद्युत प्रतिरोधकता (Resistivity) उनकी शुद्ध धातुओं की तुलना में बहुत अधिक होती है, जिससे वे अधिक ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
  2. उच्च तापमान (जब वे लाल तप्त होते हैं) पर मिश्रातुओं का आसानी से उपचयन (ऑक्सीकरण या दहन) नहीं होता है, जिससे वे पिघलते या टूटते नहीं हैं।

प्रश्न: आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत चालक है? और कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?

उत्तर:

  • (a) आयरन (Fe) और मर्करी (Hg) में आयरन (Fe) एक अच्छा विद्युत चालक है, क्योंकि इसकी वैद्युत प्रतिरोधकता मर्करी की तुलना में कम होती है।
  • (b) सभी धातुओं में सिल्वर (चाँदी / Ag) सर्वश्रेष्ठ विद्युत चालक है, क्योंकि इसकी वैद्युत प्रतिरोधकता सबसे कम (1.60 \times 10^{-8} \, \Omega\text{m}) होती है।

यहाँ दिए गए पाठ्यांश और प्रश्नों के व्यवस्थित, स्पष्ट और चित्र-सहित उत्तर दिए गए हैं।

1. श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)

प्रश्न: किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2 V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5\ \Omega प्रतिरोधक, एक 8\ \Omega प्रतिरोधक, एक 12\ \Omega प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।

उत्तर:

श्रेणीक्रम संयोजन में सभी अवयवों (प्रतिरोधकों, बैटरी और कुंजी) को एक सिरे से दूसरा सिरा मिलाकर एक ही लाइन (पथ) में जोड़ा जाता है।

  • बैटरी: 2 V के तीन सेल श्रेणीक्रम में जुड़कर 3 \times 2\text{ V} = 6\text{ V} की बैटरी बनाते हैं।
  • प्रतिरोधक:5\ \Omega, 8\ \Omega, और 12\ \Omega के तीनों प्रतिरोधक एक के बाद एक जुड़े होते हैं।

प्रश्न: उपर्युक्त परिपथ को दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 12\ \Omega के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे?

उत्तर:

  • परिपथ आरेख: ऐमीटर को पूरे परिपथ के श्रेणीक्रम में लगाया जाएगा, जबकि वोल्टमीटर को केवल 12\ \Omega वाले प्रतिरोधक के पार्श्वक्रम (समानांतर) में जोड़ा जाएगा।

गणना:

  1. कुल प्रतिरोध (R_s): श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों का योग होता है।

        \[R_s = R_1 + R_2 + R_3 = 5 + 8 + 12 = 25\ \Omega\]

  2. कुल विभवांतर (V):3 \times 2\text{ V} = 6\text{ V}
  3. ऐमीटर का पाठ्यांक (विद्युत धारा I): ओम के नियम (V = IR) से,

        \[I = \frac{V}{R_s} = \frac{6}{25} = 0.24\text{ A}\]

    (श्रेणीक्रम में पूरे परिपथ में धारा समान रहती है, इसलिए ऐमीटर 0.24 A दर्शाएगा।)
  4. वोल्टमीटर का पाठ्यांक (12\ \Omega पर विभवांतर V_{12}):

        \[V_{12} = I \times R_3 = 0.24 \times 12 = 2.88\text{ V}\]

2. पार्श्वक्रम संयोजन (Parallel Combination)

यहाँ एक इंटरैक्टिव टूल है जो श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम परिपथों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करता है:

प्रश्न: जब (a) 1\ \Omega तथा 10^6\ \Omega (b) 1\ \Omega, 10^3\ \Omega तथा 10^6\ \Omega के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे।

उत्तर:

पार्श्वक्रम (समानांतर) संयोजन का एक मुख्य गुण यह है कि तुल्य (कुल) प्रतिरोध हमेशा संयोजन में जुड़े सबसे छोटे प्रतिरोधक के मान से भी कम होता है।

  • चूँकि दोनों ही स्थितियों (a) और (b) में सबसे छोटा प्रतिरोध 1\ \Omega है, इसलिए दोनों स्थितियों में कुल तुल्य प्रतिरोध 1\ \Omega से कम होगा (यह लगभग 0.999...\ \Omega के बहुत करीब होगा)।

प्रश्न: 100\ \Omega का एक विद्युत लैम्प, 50\ \Omega का एक विद्युत टोस्टर तथा 500\ \Omega का एक जल फिल्टर 220 V के विद्युत स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है?

उत्तर:

यहाँ इस्तरी को तीनों युक्तियों के ‘तुल्य’ माना गया है।

  1. तीनों युक्तियों का तुल्य प्रतिरोध (R_p):

        \[\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}\]

        \[\frac{1}{R_p} = \frac{1}{100} + \frac{1}{50} + \frac{1}{500}\]

    (एलसीएम 500 है)

        \[\frac{1}{R_p} = \frac{5 + 10 + 1}{500} = \frac{16}{500}\]

        \[R_p = \frac{500}{16} = 31.25\ \Omega\]

    अतः, विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध 31.25\ \Omega होना चाहिए।
  2. प्रवाहित विद्युत धारा (I):ओम के नियम (V = IR) से,

        \[I = \frac{V}{R_p} = \frac{220}{31.25} = 7.04\text{ A}\]

    अतः, विद्युत इस्तरी से 7.04 A की धारा प्रवाहित होगी।

प्रश्न: श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?

उत्तर:

घरों में उपकरणों को पार्श्वक्रम (समानांतर) में जोड़ने के निम्नलिखित प्रमुख लाभ हैं:

  1. स्वतंत्र कार्यप्रणाली: यदि कोई एक उपकरण (जैसे बल्ब) खराब हो जाए या बंद कर दिया जाए, तो परिपथ टूटता नहीं है और अन्य सभी उपकरण सामान्य रूप से काम करते रहते हैं। (श्रेणीक्रम में एक के खराब होने पर सब बंद हो जाते हैं)।
  2. समान वोल्टता (Voltage): पार्श्वक्रम में जुड़े प्रत्येक उपकरण को मुख्य स्रोत के समान ही वोल्टता (जैसे घरों में 220V) मिलती है, जिससे वे अपनी पूरी क्षमता से काम करते हैं।
  3. कम कुल प्रतिरोध: परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध कम हो जाता है, जिससे स्रोत से आसानी से पर्याप्त धारा ली जा सकती है।
  4. अलग-अलग स्विच: प्रत्येक उपकरण के लिए अलग स्विच लगाया जा सकता है।

3. प्रतिरोधों के संयोजन पर आधारित तार्किक प्रश्न

प्रश्न: 2\ \Omega, 3\ \Omega तथा 6\ \Omega के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध (a) 4\ \Omega, (b) 1\ \Omega हो?

उत्तर:

(a) 4\ \Omega प्राप्त करने के लिए:

  • पहले 3\ \Omega और 6\ \Omega को पार्श्वक्रम में जोड़ें:

        \[\frac{1}{R_p} = \frac{1}{3} + \frac{1}{6} = \frac{2+1}{6} = \frac{3}{6} = \frac{1}{2}\ \Omega \Rightarrow R_p = 2\ \Omega\]

  • अब इस 2\ \Omega के परिणामी प्रतिरोध को बचे हुए 2\ \Omega के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ दें:

        \[R_{total} = 2\ \Omega + 2\ \Omega = 4\ \Omega\]

(b) 1\ \Omega प्राप्त करने के लिए:

  • तीनों प्रतिरोधकों (2\ \Omega, 3\ \Omega, 6\ \Omega) को एक साथ पार्श्वक्रम में जोड़ दें:

        \[\frac{1}{R_p} = \frac{1}{2} + \frac{1}{3} + \frac{1}{6} = \frac{3+2+1}{6} = \frac{6}{6} = 1\ \Omega \Rightarrow R_p = 1\ \Omega\]

प्रश्न: 4\ \Omega, 8\ \Omega, 12\ \Omega तथा 24\ \Omega प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से (a) अधिकतम (b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके?

उत्तर:

(a) अधिकतम प्रतिरोध के लिए:

प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ना चाहिए।

    \[R_{max} = 4 + 8 + 12 + 24 = 48\ \Omega\]

(b) निम्नतम प्रतिरोध के लिए:

प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम (Parallel) में जोड़ना चाहिए।

    \[\frac{1}{R_{min}} = \frac{1}{4} + \frac{1}{8} + \frac{1}{12} + \frac{1}{24}\]

(एलसीएम 24 है)

    \[\frac{1}{R_{min}} = \frac{6 + 3 + 2 + 1}{24} = \frac{12}{24} = \frac{1}{2}\]

    \[R_{min} = 2\ \Omega\]

12.7 विद्युत धारा का तापीय प्रभाव

हम जानते हैं कि बैटरी अथवा सेल विद्युत ऊर्जा के स्रोत हैं। सेल के भीतर होने वाली रासायनिक अभिक्रिया सेल के दो टर्मिनलों के बीच विभवांतर उत्पन्न करती है, जो बैटरी से संयोजित किसी प्रतिरोधक अथवा प्रतिरोधकों के किसी निकाय में विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए इलेक्ट्रॉनों में गति स्थापित करता है। हमने अनुभाग 12.2 में यह अध्ययन किया है कि परिपथ में विद्युत धारा बनाए रखने के लिए स्रोत को अपनी ऊर्जा खर्च करते रहना पड़ता है। यह ऊर्जा कहाँ चली जाती है? विद्युत धारा बनाए रखने में, खर्च हुई स्रोत की ऊर्जा का कुछ भाग उपयोगी कार्य करने (जैसे पंखे की पंखुड़ियों को घुमाना) में उपयोग हो जाता है। स्रोत की ऊर्जा का शेष भाग उस ऊष्मा को उत्पन्न करने में खर्च होता है जो साधित्रों के ताप में वृद्धि करती है। इसका प्रेक्षण प्रायः हम अपने दैनिक जीवन में करते हैं। उदाहरण के लिए, हम किसी विद्युत पंखे को निरंतर काफी समय तक चलाते हैं तो वह गर्म हो जाता है। इसके विपरीत यदि विद्युत परिपथ विशुद्ध रूप से प्रतिरोधक है, अर्थात बैटरी से केवल प्रतिरोधकों का एक समूह ही संयोजित है तो स्रोत की ऊर्जा निरंतर पूर्ण रूप से ऊष्मा के रूप में क्षयित होती रहती है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं। इस प्रभाव का उपयोग विद्युत हीटर, विद्युत इस्तरी जैसी युक्तियों में किया जाता है।

प्रतिरोध R के किसी प्रतिरोधक पर विचार कीजिए जिससे विद्युत धारा I प्रवाहित हो रही है। मान लीजिए इसके सिरों के बीच विभवांतर V है (चित्र 12.13)। मान लीजिए इससे समय t में Q आवेश प्रवाहित होता है। Q आवेश विभवांतर V से प्रवाहित होने में किया गया कार्य VQ है। अतः स्रोत को समय t में VQ ऊर्जा की आपूर्ति करनी चाहिए। अतः स्रोत द्वारा परिपथ में निवेशित शक्ति

    \[P = V \frac{Q}{t} = VI\]

(12.19) अर्थात समय t में स्रोत द्वारा परिपथ को प्रदान की गयी ऊर्जा P \times t है जो VIt के बराबर है। स्रोत द्वारा खर्च की जाने वाली इस ऊर्जा का क्या होता है? यह ऊर्जा ऊष्मा के रूप में प्रतिरोधक में क्षयित हो जाती है। इस प्रकार किसी स्थायी विद्युत धारा I द्वारा समय t में उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा

    \[H = VIt\]

(12.20) ओम का नियम [समीकरण (12.5)] लागू करने पर हमें प्राप्त होता है

    \[H = I^2Rt\]

(12.21) इसे जूल का तापन नियम कहते हैं। इस नियम से यह स्पष्ट है कि किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न होने वाली ऊष्मा (i) दिए गए प्रतिरोधक में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के वर्ग के अनुक्रमानुपाती, (ii) दी गयी विद्युत धारा के लिए प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती तथा (iii) उस समय के अनुक्रमानुपाती होती है जिसके लिए दिए गए प्रतिरोध से विद्युत धारा प्रवाहित होती है।

उदाहरण 12.10

किसी विद्युत इस्तरी में अधिकतम तापन दर के लिए 840 W की दर से ऊर्जा उपभुक्त होती है तथा 360 W की दर से उस समय उपभुक्त होती है जब तापन की दर निम्नतम है। यदि विद्युत स्रोत की वोल्टता 220 V है तो दोनों प्रकरणों में विद्युत धारा तथा प्रतिरोध के मान परिकलित कीजिए।

हल:

समीकरण (12.19) से हम यह जानते हैं कि निवेशी शक्ति P = VI

इस प्रकार विद्युत धारा I = P/V

(a) जब तापन की दर अधिकतम है, तब I = 840\ \text{W} / 220\ \text{V} = 3.82\ \text{A}; (और विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध R = V/I = 220\ \text{V} / 3.82\ \text{A} = 57.60\ \Omega)

प्रश्नों के उत्तर:

  1. किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?
    • विद्युत हीटर की डोरी (संयोजी तार) कॉपर या ऐलुमिनियम जैसी अच्छी चालक धातुओं की बनी होती है, जिनका प्रतिरोध बहुत कम होता है। जूल के तापन नियम (H = I^2Rt) के अनुसार, प्रतिरोध कम होने के कारण इसमें नगण्य ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसके विपरीत, तापन अवयव (Heating element) मिश्रातु (जैसे निक्रोम) का बना होता है, जिसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, इसलिए समान धारा प्रवाहित होने पर यह अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करके उत्तप्त हो जाता है।
  2. एक घंटे में 50 W विभवांतर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
    • (यहाँ ’50 W’ के स्थान पर ’50 V’ होना चाहिए, क्योंकि विभवांतर का मात्रक वोल्ट है।)
    • V = 50\ \text{V}, Q = 96000\ \text{C}
    • उत्पन्न ऊष्मा (किया गया कार्य) H = V \times Q = 50\ \text{V} \times 96000\ \text{C} = 4,800,000\ \text{J} = 4.8 \times 10^6\ \text{J}
  3. 20\ \Omega प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी 5 A विद्युत धारा लेती है।30 s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
    • R = 20\ \Omega, I = 5\ \text{A}, t = 30\ \text{s}
    • जूल के तापन नियम से, H = I^2Rt = (5)^2 \times 20 \times 30 = 25 \times 600 = 15,000\ \text{J} = 1.5 \times 10^4\ \text{J}

12.7.1 विद्युत धारा के तापीय प्रभाव के व्यावहारिक अनुप्रयोग

किसी चालक में ऊष्मा उत्पन्न होना विद्युत धारा का अवश्यंभावी परिणाम है। बहुत-सी स्थितियों में यह अवांछनीय होता है क्योंकि वह उपयोगी विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में रूपांतरित कर देता है। विद्युत परिपथों में अपरिहार्य तापन, परिपथ के अवयवों के ताप में वृद्धि कर सकता है जिससे उनके गुणों में परिवर्तन हो सकता है। विद्युत इस्तरी, विद्युत टोस्टर, विद्युत तंदूर, विद्युत केतली तथा विद्युत हीटर जूल के तापन पर आधारित कुछ सुपरिचित युक्तियाँ हैं।

विद्युत तापन का उपयोग प्रकाश उत्पन्न करने में भी होता है जैसा कि हम विद्युत बल्ब में देखते हैं। यहाँ पर बल्ब के तंतु को उत्पन्न ऊष्मा को जितना संभव हो सके रोके रखना चाहिए ताकि वह अत्यंत तप्त होकर प्रकाश उत्पन्न करे। इसे इतने उच्च ताप पर पिघलना नहीं चाहिए। बल्ब के तंतुओं को बनाने के लिए टंगस्टन (गलनांक 3380\ ^\circ\text{C}) का उपयोग किया जाता है जो उच्च गलनांक की एक प्रबल धातु है। विद्युतरोधी टेक का उपयोग करके तंतु को यथासंभव ताप विलगित बनाना चाहिए। प्रायः बल्बों में रासायनिक दृष्टि से अक्रिय नाइट्रोजन तथा आर्गन गैस भरी जाती है जिससे उसके तंतु की आयु में वृद्धि हो जाती है। तंतु द्वारा उपभुक्त ऊर्जा का अधिकांश भाग ऊष्मा के रूप में प्रकट होता है, परंतु इसका एक अल्प भाग विकरित प्रकाश के रूप में भी दृष्टिगोचर होता है।

12.8 विद्युत शक्ति

आपने अपनी पिछली कक्षाओं में यह अध्ययन किया था कि कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। ऊर्जा के उपभुक्त होने की दर को भी शक्ति कहते हैं।

समीकरण (12.21) से हमें किसी विद्युत परिपथ में उपभुक्त अथवा क्षयित विद्युत ऊर्जा की दर प्राप्त होती है। इसे विद्युत शक्ति भी कहते हैं। शक्ति P को इस प्रकार व्यक्त करते हैं

    \[P = VI\]

अथवा

    \[P = I^2R = V^2/R\]

(12.22)

विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है। यह उस युक्ति द्वारा उपभुक्त शक्ति है जिससे उस समय 1 A विद्युत धारा प्रवाहित होती है जब उसे 1 V विभवांतर पर प्रचालित कराया जाता है। इस प्रकार

    \[1\ \text{W} = 1\ \text{वोल्ट} \times 1\ \text{ऐम्पियर} = 1\ \text{V A}\]

(12.23) ‘वाट’ शक्ति का छोटा मात्रक है। अतः वास्तविक व्यवहार में हम इसके काफी बड़े मात्रक (किलोवाट) का उपयोग करते हैं। एक किलोवाट, 1000 वाट के बराबर होता है। चूँकि विद्युत ऊर्जा शक्ति तथा समय का गुणनफल होती है इसलिए विद्युत ऊर्जा का मात्रक वाट घंटा (Wh) है। जब एक वाट शक्ति का उपयोग 1 घंटे तक होता है तो उपभुक्त ऊर्जा एक वाट घंटा होती है। विद्युत ऊर्जा का व्यापारिक मात्रक किलोवाट घंटा (kWh) है जिसे सामान्य बोलचाल में ‘यूनिट’ कहते हैं।

    \[1\ \text{kW h} = 1000\ \text{वाट} \times 3600\ \text{सेकंड}\]

    \[= 3.6 \times 10^6\ \text{वाट सेकंड}\]

    \[= 3.6 \times 10^6\ \text{जूल (J)}\]

प्रश्नों के उत्तर:

  1. विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है?
    • विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर को ‘विद्युत शक्ति’ (Electric Power) कहते हैं। इसका निर्धारण P = VI अथवा P = I^2R अथवा P = V^2/R सूत्रों द्वारा किया जाता है, जहाँ V विभवांतर, I विद्युत धारा और R प्रतिरोध है।
  2. कोई विद्युत मोटर 220 V के विद्युत स्रोत से 5.0 A विद्युत धारा लेता है।मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
    • V = 220\ \text{V}, I = 5.0\ \text{A}, t = 2\ \text{घंटे} = 7200\ \text{s}
    • मोटर की शक्ति P = VI = 220\ \text{V} \times 5.0\ \text{A} = 1100\ \text{W} (या 1.1 kW)
    • उपभुक्त ऊर्जा E = P \times t = 1100\ \text{W} \times 2\ \text{घंटे} = 2200\ \text{Wh} = 2.2\ \text{kWh} (यूनिट)।
    • (जूल में: 1100\ \text{W} \times 7200\ \text{s} = 7,920,000\ \text{J} = 7.92 \times 10^6\ \text{J})

दी गई जानकारी:

  • किसी चालक में गतिशील इलेक्ट्रॉनों की धारा विद्युत धारा की रचना करती है। परिपाटी के अनुसार इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत दिशा को विद्युत धारा की दिशा माना जाता है।
  • विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर (A) है।
  • किसी विद्युत परिपथ में इलेक्ट्रॉनों को गति प्रदान करने के लिए हम किसी सेल अथवा बैटरी का उपयोग करते हैं। सेल अपने सिरों के बीच विभवांतर उत्पन्न करता है। इस विभवांतर को वोल्ट (V) में मापते हैं।
  • प्रतिरोध एक ऐसा गुणधर्म है जो किसी चालक में इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह का विरोध करता है। यह विद्युत धारा के परिमाण को नियंत्रित करता है। प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (\Omega) है।
  • ओम का नियम: किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित विद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है परंतु एक शर्त यह है कि प्रतिरोधक का ताप समान रहना चाहिए।
  • किसी चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई पर सीधे उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर प्रतिलोमतः निर्भर करता है और उस पदार्थ की प्रकृति पर भी निर्भर करता है जिससे वह बना है।
  • श्रेणीक्रम में संयोजित बहुत से प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध उनके व्यष्टिगत प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।

चित्र में दी गई जानकारी:

  • पार्श्वक्रम में संयोजित प्रतिरोधकों के समुच्चय का तुल्य प्रतिरोध R_p निम्नलिखित संबंध द्वारा व्यक्त किया जाता है

        \[\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} + \dots\]

  • किसी प्रतिरोधक में क्षयित अथवा उपभुक्त ऊर्जा को इस प्रकार व्यक्त किया जाता है

        \[W = V \times I \times T\]

  • विद्युत शक्ति का मात्रक वाट (W) है। जब 1 A विद्युत धारा 1 V विभवांतर पर प्रवाहित होती है तो परिपथ में उपभुक्त शक्ति 1 वाट होती है।
  • विद्युत ऊर्जा का व्यापारिक मात्रक किलोवाट घंटा (kW h) है

        \[1\ \text{kW h} = 3,600,000\ \text{J} = 3.6 \times 10^6\ \text{J}\]

चित्र “image_6af0be.png” में दिए गए अभ्यास प्रश्नों के उत्तर:

  1. प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है।इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं।यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R' है तो R/R' अनुपात का मान क्या है- (a) 1/25 (b) 1/5 (c) 5 (d) 25
    • उत्तर: (d) 25
    • (हल: प्रत्येक टुकड़े का प्रतिरोध = R/5। पार्श्वक्रम में: 1/R' = 5/(R/5) = 25/R \Rightarrow R' = R/25। अतः R/R' = R / (R/25) = 25)
  2. निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता?

    (a) I^2R (b) IR^2 (c) VI (d) V^2/R
    • उत्तर: (b) IR^2
  3. किसी विद्युत बल्ब का अनुमंताक 220 V; 100 W है।जब इसे 110 V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है? (a) 100 W (b) 75 W (c) 50 W (d) 25 W
    • उत्तर: (d) 25 W
    • (हल: बल्ब का प्रतिरोध R = V^2/P = (220)^2/100 = 484\ \Omega। 110 V पर शक्ति P' = (V')^2/R = (110)^2/484 = 12100/484 = 25\ \text{W})
  4. दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं।श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा? (a) 1:2 (b) 2:1 (c) 1:4 (d) 4:1
    • उत्तर: (c) 1:4
    • (हल: मान लें दोनों का प्रतिरोध R है। श्रेणीक्रम में R_s = 2R, ऊष्मा H_s = V^2t/(2R)। पार्श्वक्रम में R_p = R/2, ऊष्मा H_p = V^2t/(R/2) = 2V^2t/R। अनुपात H_s/H_p = 1/4)
  5. किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है?
    • उत्तर: वोल्टमीटर को सदैव उन दो बिंदुओं के पार्श्वक्रम (समांतर क्रम) में संयोजित किया जाता है जिनके बीच विभवांतर मापना होता है।
  6. किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 \times 10^{-8}\ \Omega\ \text{m} है।10\ \Omega प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी?यदि इससे दोगुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा?
    • उत्तर:
      • d = 0.5\ \text{mm} = 5 \times 10^{-4}\ \text{m}, R = 10\ \Omega, \rho = 1.6 \times 10^{-8}\ \Omega\ \text{m}
      • क्षेत्रफल A = \pi(d/2)^2 = \pi d^2 / 4 = 3.14 \times (25 \times 10^{-8}) / 4
      • l = \frac{RA}{\rho} = \frac{10 \times 3.14 \times 25 \times 10^{-8}}{4 \times 1.6 \times 10^{-8}} = 122.7\ \text{m} (लगभग)।
      • यदि व्यास दोगुना कर दिया जाए, तो क्षेत्रफल 4 गुना हो जाएगा। चूँकि प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (R \propto 1/A), इसलिए नया प्रतिरोध पहले का एक-चौथाई (1/4) यानी 2.5\ \Omega रह जाएगा।

अभ्यास प्रश्नों के उत्तर:

  1. किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं

    I (ऐम्पियर) 0.5 \ 1.0 \ 2.0 \ 3.0 \ 4.0 V (वोल्ट) 1.6 \ 3.4 \ 6.7 \ 10.2 \ 13.2V तथा I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
    • उत्तर:V–I ग्राफ एक सरल रेखा प्राप्त होगी। प्रतिरोध R ग्राफ के ढाल (Slope) के बराबर होता है। किन्हीं दो बिंदुओं को लेकर: R = \frac{V_2 - V_1}{I_2 - I_1} = \frac{6.7 - 3.4}{2.0 - 1.0} = 3.3\ \Omega (लगभग)।
  2. किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12 V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA विद्युत धारा प्रवाहित होती है।प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
    • उत्तर:V = 12\ \text{V}, I = 2.5\ \text{mA} = 2.5 \times 10^{-3}\ \text{A}
    • R = \frac{V}{I} = \frac{12}{2.5 \times 10^{-3}} = 4800\ \Omega या 4.8\ \text{k}\Omega।
  3. 9 V की किसी बैटरी को 0.2\ \Omega, 0.3\ \Omega, 0.4\ \Omega, 0.5\ \Omega तथा 12\ \Omega के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है।12\ \Omega के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी?
    • उत्तर: कुल प्रतिरोध R_s = 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12 = 13.4\ \Omega।
    • परिपथ की कुल धारा I = \frac{V}{R_s} = \frac{9}{13.4} = 0.67\ \text{A}। श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों से समान धारा प्रवाहित होती है, अतः 12\ \Omega के प्रतिरोधक से भी 0.67\ \text{A} धारा प्रवाहित होगी।
  4. 176\ \Omega प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत स्रोत से संयोजन से 5 A विद्युत धारा प्रवाहित हो?
    • उत्तर: आवश्यक तुल्य प्रतिरोध R_p = \frac{V}{I} = \frac{220}{5} = 44\ \Omega।
    • मान लें n प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जुड़े हैं। तो \frac{1}{R_p} = \frac{n}{176} \Rightarrow \frac{1}{44} = \frac{n}{176} \Rightarrow n = \frac{176}{44} = 4। अतः 4 प्रतिरोधकों की आवश्यकता होगी।
  5. यह दर्शाइए कि आप 6\ \Omega प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध (i) 9\ \Omega, (ii) 4\ \Omega हो।
    • उत्तर:(i) 9\ \Omega के लिए: दो प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ें (\frac{1}{R} = \frac{1}{6}+\frac{1}{6} \Rightarrow R=3\ \Omega) और तीसरे को इनके साथ श्रेणीक्रम में जोड़ दें (3 + 6 = 9\ \Omega)।(ii) 4\ \Omega के लिए: दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ें (6 + 6 = 12\ \Omega) और फिर इस संयोजन को तीसरे के साथ पार्श्वक्रम में जोड़ दें (\frac{1}{R_p} = \frac{1}{12} + \frac{1}{6} = \frac{3}{12} \Rightarrow R_p = 4\ \Omega)।
  6. 220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 W है।यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5 A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?
    • उत्तर: एक बल्ब द्वारा ली जाने वाली धारा I_1 = \frac{P}{V} = \frac{10}{220} = \frac{1}{22}\ \text{A}।
    • अधिकतम कुल धारा I = 5\ \text{A}। मान लें n बल्ब जुड़ सकते हैं। तो n \times I_1 = I \Rightarrow n \times \frac{1}{22} = 5 \Rightarrow n = 110। अतः 110 बल्ब संयोजित किए जा सकते हैं।
  7. किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियों A तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24\ \Omega है तथा इन्हें पृथक-पृथक, श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है।यदि यह भट्टी 220 V विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं?
    • उत्तर:
      • (i) पृथक-पृथक:R = 24\ \Omega \Rightarrow I = \frac{V}{R} = \frac{220}{24} = 9.16\ \text{A}
      • (ii) श्रेणीक्रम में:R_s = 24 + 24 = 48\ \Omega \Rightarrow I = \frac{220}{48} = 4.58\ \text{A}
      • (iii) पार्श्वक्रम में:R_p = \frac{24 \times 24}{24 + 24} = 12\ \Omega \Rightarrow I = \frac{220}{12} = 18.33\ \text{A}

अभ्यास प्रश्न (18) के उत्तर:

  1. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए

    (a) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है?

    * उत्तर: टंगस्टन का गलनांक बहुत उच्च (लगभग 3380 °C) होता है और यह उच्च तापमान पर भी पिघलता नहीं है। यह बिना उपचयित (जले) हुए अत्यधिक ऊष्मा और श्वेत प्रकाश उत्पन्न कर सकता है।(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्यों बनाए जाते हैं?

    * उत्तर: मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है, जिससे वे अधिक ऊष्मा उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा, उच्च तापमान पर मिश्रातुओं का शीघ्र ही उपचयन (ऑक्सीकरण) नहीं होता है, जिससे वे अधिक टिकाऊ होते हैं।(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?

    * उत्तर: श्रेणीक्रम में यदि एक उपकरण (अवयव) खराब हो जाए, तो पूरा परिपथ टूट जाता है और कोई भी उपकरण काम नहीं करता। साथ ही, श्रेणीक्रम में सभी उपकरणों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समान वोल्टता (Voltage) नहीं मिल पाती है।(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?

    * उत्तर: किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (R \propto 1/A)। अतः क्षेत्रफल बढ़ने (तार मोटा होने) पर प्रतिरोध घटता है, और क्षेत्रफल घटने (तार पतला होने) पर प्रतिरोध बढ़ता है।(e) विद्युत संचारण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?

    * उत्तर: कॉपर और ऐलुमिनियम विद्युत के बहुत अच्छे चालक हैं और इनकी वैद्युत प्रतिरोधकता बहुत कम होती है। इसलिए, इनसे विद्युत संचारण करने पर ऊर्जा का ह्रास (ऊष्मा के रूप में) बहुत कम होता है।