MP Board Class 12 Chemistry Galvanic Cell & Electrode Potential : गैल्वैनी सेल, इलेक्ट्रोड विभव और उसका मापन

Class 12 Chemistry Galvanic Cell & Electrode Potential : कक्षा 12वीं रसायन विज्ञान (Chemistry) के लिए गैल्वैनी सेल (Galvanic Cell), मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential), मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) और सेल विभव (Cell EMF) का विस्तृत अध्ययन। बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स और हल।

1. गैल्वैनी सेल (Galvanic Cell) का परिचय

गैल्वैनी सेल एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैद्युतरासायनिक सेल (Electrochemical Cell) है जो कि एक स्वतः रेडॉक्स अभिक्रिया (Spontaneous Redox Reaction) की रासायनिक ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में रूपांतरित करती है। इस युक्ति में स्वतः रेडॉक्स अभिक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली गिब्ज़ ऊर्जा (Gibbs Energy) वैद्युत कार्य (Electrical Work) में रूपांतरित होती है। इस उत्पन्न विद्युतीय ऊर्जा का उपयोग विभिन्न उपकरणों, जैसे— मोटर (Motor), हीटर (Heater), पंखा (Fan), गीज़र (Geyser) इत्यादि को चलाने में किया जाता है।

डेनियल सेल (Daniell Cell) गैल्वैनी सेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया संपन्न होती है:

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

    \[\text{Zn(s)} + \text{Cu}^{2+}\text{(aq)} \rightarrow \text{Zn}^{2+}\text{(aq)} + \text{Cu(s)}\]

यह समग्र सेल अभिक्रिया (Overall Cell Reaction) वास्तव में दो अलग-अलग अर्ध सेल अभिक्रियाओं (Half-cell reactions) का संयोजन (योग) होती है:

  1. अपचयन अर्ध अभिक्रिया (Reduction Half Reaction):

        \[\text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu(s)} \quad (2.2)\]

  2. ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया (Oxidation Half Reaction):

        \[\text{Zn(s)} \rightarrow \text{Zn}^{2+} + 2\text{e}^- \quad (2.3)\]

ये दोनों अभिक्रियाएं डेनियल सेल के दो भिन्न भागों में होती हैं। अपचयन (Reduction) की अर्ध अभिक्रिया कॉपर इलैक्ट्रोड (Copper Electrode) पर होती है, जबकि ऑक्सीकरण (Oxidation) की अर्ध अभिक्रिया जिंक इलैक्ट्रोड (Zinc Electrode) पर होती है। सेल के इन दो अलग-अलग भागों को ‘अर्ध सेल’ (Half Cell) या ‘रेडॉक्स युग्म’ (Redox Couple) कहा जाता है। कार्यप्रणाली के आधार पर, कॉपर इलैक्ट्रोड को अपचयन अर्ध सेल एवं जिंक इलैक्ट्रोड को ऑक्सीकरण अर्ध सेल भी कहा जा सकता है।

हम विभिन्न प्रकार के अर्ध सेलों के संयोजन से डेनियल सेल जैसी असंख्य गैल्वैनी सेलों की रचना कर सकते हैं। प्रत्येक अर्ध सेल में एक धात्विक इलैक्ट्रोड (Metallic Electrode) अपने ही वैद्युतअपघट्य (Electrolyte) के विलयन में निमज्ज (डूबा) रहता है। दोनों अर्ध सेल बाहर से एक वोल्टमीटर (Voltmeter) एवं एक स्विच के माध्यम से धात्विक तार (Metallic Wire) द्वारा जुड़े रहते हैं। आंतरिक परिपथ को पूरा करने के लिए दोनों अर्ध सेलों के वैद्युतअपघट्य एक लवण सेतु (Salt Bridge) द्वारा जुड़े रहते हैं। कुछ विशेष स्थितियों में, कभी-कभी दोनों ही इलैक्ट्रोड एक ही वैद्युतअपघट्य में निमज्ज रहते हैं, ऐसी स्थितियों में लवण सेतु की आवश्यकता नहीं होती है।

2. इलैक्ट्रोड विभव (Electrode Potential) की उत्पत्ति

जब कोई धातु अपने ही आयनों वाले विलयन के संपर्क में आती है, तो इलैक्ट्रोड-वैद्युतअपघट्य अंतरापृष्ठ (Electrode-Electrolyte Interface) पर एक विशेष घटना घटित होती है। इस अंतरापृष्ठ पर धात्विक आयनों (Metal Ions) की प्रवृत्ति विलयन से निकलकर धात्विक इलैक्ट्रोड पर जमा होने की होती है, जिससे कि इलेक्ट्रोड धनावेशित (Positively charged) हो सके।

ठीक उसी समय, इलैक्ट्रोड की धातु के परमाणुओं (Metal atoms) की विलयन में आयनों के रूप में जाने एवं इलैक्ट्रोड पर इलैक्ट्रॉन छोड़ने की प्रवृत्ति होती है, जिससे कि यह इलेक्ट्रोड ऋणावेशित (Negatively charged) हो सके।

साम्यावस्था (Equilibrium) की स्थिति पर, आवेशों का पृथक्करण (Separation of charges) हो जाता है। दोनों विपरीत अभिक्रियाओं की प्रकृति के अनुसार इलैक्ट्रोड, विलयन के सापेक्ष धनात्मक या ऋणात्मक आवेशित हो जाता है। इस प्रकार आवेशों के पृथक्करण के कारण, इलैक्ट्रोड एवं वैद्युतअपघट्य के मध्य एक विभवांतर (Potential Difference) उत्पन्न हो जाता है, जिसे इलैक्ट्रोड विभव (Electrode Potential) कहते हैं।

मानक इलैक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential)

जब किसी अर्ध सेल अभिक्रिया में प्रयुक्त सभी स्पीशीज़ (Species) की सांद्रता केवल एक इकाई (Unity) होती है, तो उस समय उत्पन्न इलैक्ट्रोड विभव को मानक इलैक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential) कहते हैं। IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) के नियमानुसार, मानक अपचयन विभव (Standard Reduction Potential) को ही अब मानक इलैक्ट्रोड विभव कहा जाता है।

  • ऐनोड (Anode): गैल्वैनी सेल की वह अर्ध सेल, जिसमें ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है, ऐनोड कहलाती है। विलयन के सापेक्ष इसका विभव ऋणात्मक (Negative) होता है।
  • कैथोड (Cathode): दूसरी अर्ध सेल जिसमें अपचयन (Reduction) होता है, कैथोड कहलाती है। इसका विभव विलयन के सापेक्ष धनात्मक (Positive) होता है।

इस प्रकार दोनों इलैक्ट्रोडों के मध्य एक विभवांतर होता है। जैसे ही स्विच चालू (ऑन) स्थिति में होता है, इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक इलैक्ट्रोड (ऐनोड) से धनात्मक इलैक्ट्रोड (कैथोड) की ओर प्रवाहित होने लगते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विद्युतधारा (Electric Current) के प्रवाह की दिशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत होती है।

3. सेल विभव और विद्युत वाहक बल (Cell Potential and EMF)

गैल्वैनी सेल के दोनों इलैक्ट्रोडों (कैथोड और ऐनोड) के बीच के विभवांतर को सेल विभव (Cell Potential) कहलाता है एवं इसे वोल्ट (Volt) में मापते हैं। गणितीय रूप से, सेल विभव कैथोड एवं ऐनोड के इलैक्ट्रोड विभवों (अपचयन विभव) का अंतर होता है।

जब सेल में से कोई धारा प्रवाहित नहीं हो रही होती (अर्थात परिपथ खुला होता है), तब इस विभवांतर को सेल वैद्युत वाहक बल (Electromotive Force या emf) कहा जाता है।

गैल्वैनी सेल का निरूपण (Representation of Galvanic Cell)

रसायन विज्ञान में यह स्वीकृत परिपाटी है कि गैल्वैनी सेल को लिखते समय हम ऐनोड को बायीं ओर (Left) एवं कैथोड को दायीं ओर (Right) लिखते हैं।

गैल्वैनी सेल को लिखने के लिए साधारणतया धातु एवं वैद्युतअपघट्य (ठोस और जलीय प्रावस्था) के मध्य एक ऊर्ध्वाधर रेखा (Vertical line |) खींचकर उन्हें अलग किया जाता है। दो वैद्युतअपघट्यों को, यदि वह लवण सेतु (Salt bridge) द्वारा जुड़े हुए हों तो उनके मध्य दो ऊर्ध्वाधर रेखाएं (Double vertical lines ||) खींचकर, लिखा जाता है।

इस परिपाटी के अनुसार लिखे गए सेल का emf धनात्मक (Positive) होता है। इसे दायीं ओर के अर्ध सेल के विभव (Cathode) से बायीं ओर के अर्ध सेल के विभव (Anode) को घटाकर दिया जाता है, जैसे कि:

    \[E_{\text{सेल}} = E_{\text{दायाँ}} - E_{\text{बायाँ}}\]

उदाहरण:

निम्नलिखित सेल अभिक्रिया पर विचार करें:

    \[\text{Cu(s)} + 2\text{Ag}^+\text{(aq)} \rightarrow \text{Cu}^{2+}\text{(aq)} + 2\text{Ag(s)} \quad (2.4)\]

इसकी अर्ध सेल अभिक्रियाएं हैं:

  • कैथोड (अपचयन): 2\text{Ag}^+\text{(aq)} + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{Ag(s)} \quad (2.5)
  • ऐनोड (ऑक्सीकरण): \text{Cu(s)} \rightarrow \text{Cu}^{2+}\text{(aq)} + 2\text{e}^- \quad (2.6)

यह देखा जा सकता है कि अभिक्रिया समीकरण (2.5) एवं अभिक्रिया समीकरण (2.6) का योग समग्र समीकरण (2.4) देता है। यहाँ सिल्वर (Ag) इलैक्ट्रोड कैथोड की तरह तथा कॉपर (Cu) इलैक्ट्रोड ऐनोड की तरह कार्य करता है। इस सेल को निम्न प्रकार से निरूपित किया जा सकता है:

    \[\text{Cu(s)} \vert{} \text{Cu}^{2+}\text{(aq)} \vert{}\vert{} \text{Ag}^+\text{(aq)} \vert{} \text{Ag(s)}\]

एवं हम पाते हैं कि:

    \[E_{(\text{सेल})} = E_{(\text{दायाँ})} - E_{(\text{बायाँ})} = E_{\text{Ag}^+/\text{Ag}} - E_{\text{Cu}^{2+}/\text{Cu}} \quad (2.7)\]

4. इलैक्ट्रोड विभव का मापन (Measurement of Electrode Potential)

अकेले अर्ध सेल के विभव का मापन कभी नहीं किया जा सकता। हम केवल दो अर्ध सेलों के विभवों में अंतर को ही माप सकते हैं, जिससे सेल का emf प्राप्त होता है। यदि हम स्वेच्छा से एक इलैक्ट्रोड (अर्ध सेल) का विभव चयनित कर लें (उसे एक स्थिर मान दे दें), तो इसके सापेक्ष दूसरे अर्ध सेल का विभव आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।

इस उद्देश्य के लिए, परिपाटी के अनुसार मानक हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड (Standard Hydrogen Electrode – SHE) नामक अर्ध सेल को चुना गया है। इसे निम्नलिखित प्रकार से निरूपित किया जाता है:

    \[\text{Pt(s)} \vert{} \text{H}_2\text{(g)} \vert{} \text{H}^+\text{(aq)}\]

इसका विभव निम्नलिखित अभिक्रिया के संगत समस्त तापों पर, शून्य निर्दिष्ट किया गया है:

    \[\text{H}^+\text{(aq)} + \text{e}^- \rightarrow \frac{1}{2}\text{H}_2\text{(g)}\]

मानक हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड (SHE) की संरचना

मानक हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड में सूक्ष्म विभाजित प्लैटिनम ब्लैक से लेपित प्लैटिनम इलैक्ट्रोड या प्लैटिनम पत्र होता है। यह इलैक्ट्रोड अम्लीय विलयन में निमज्जित (डूबा हुआ) होता है एवं इस पर शुद्ध हाइड्रोजन गैस (Pure Hydrogen Gas) बुद-बुद की (प्रवाहित की) जाती है। हाइड्रोजन की अपचित एवं आक्सीकृत दोनों अवस्थाओं की सांद्रता, इकाई मान पर स्थिर रखी जाती है। इसका अर्थ है कि विलयन में हाइड्रोजन गैस का दाब 1 bar एवं हाइड्रोजन आयन (\text{H}^+) की सांद्रता 1.00 M (एक मोलर) होती है।

मापन की प्रक्रिया

हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड को ऐनोड (संदर्भ अर्ध सेल – बायीं ओर) तथा किसी दूसरी सेल जिसका विभव ज्ञात करना हो, उसे कैथोड (दायीं ओर) के स्थान पर लेकर एक पूर्ण सेल बनाई जाती है। इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है: मानक हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड || दूसरी अर्ध सेल।

इस निर्मित सेल का 298K पर emf, दूसरी अर्ध सेल के अपचयन विभव का मान देता है। यदि दाहिनी ओर वाले अर्ध सेल की अपचित एवं ऑक्सीकृत स्पीशीज़ की सांद्रताएं इकाई (unity) हों तो उपरोक्त सेल का विभव, दाहिनी ओर के अर्ध सेल के मानक विभव, E^\ominus_{(\text{R})}, के बराबर होता है।

    \[E^\ominus_{(\text{सेल})} = E^\ominus_{(\text{R})} - E^\ominus_{(\text{L})}\]

जहाँ E^\ominus_{(\text{सेल})} सेल का मानक विभव एवं E^\ominus_{(\text{R})} तथा E^\ominus_{(\text{L})} क्रमशः दाहिनी एवं बाईं ओर की अर्ध सेलों के मानक इलैक्ट्रोड विभव हैं।

चूँकि मानक हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड का विभव E^\ominus_{(\text{L})} शून्य होता है अतः:

    \[E^\ominus_{(\text{सेल})} = E^\ominus_{(\text{R})} - 0 = E^\ominus_{(\text{R})}\]

उदाहरण:

  • कॉपर (Cu) का मापन: निम्नलिखित सेल का मापित emf 0.34 V है, जो कि कॉपर की अर्ध सेल अभिक्रिया का मानक इलैक्ट्रोड विभव भी है।सेल: \text{Pt(s)} \vert{} \text{H}_2\text{(g, 1 bar)} \vert{} \text{H}^+\text{(aq, 1 M)} \vert{}\vert{} \text{Cu}^{2+}\text{(aq, 1 M)} \vert{} \text{Cu}अर्ध सेल अभिक्रिया: \text{Cu}^{2+}\text{(aq, 1 M)} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu(s)}
  • जिंक (Zn) का मापन: इसी प्रकार, जिंक के लिए निर्मित सेल का मापित emf -0.76 V है, जो कि जिंक की अर्ध सेल अभिक्रिया के मानक इलैक्ट्रोड विभव के संगत है।सेल: \text{Pt(s)} \vert{} \text{H}_2\text{(g, 1 bar)} \vert{} \text{H}^+\text{(aq, 1 M)} \vert{}\vert{} \text{Zn}^{2+}\text{(aq, 1 M)} \vert{} \text{Zn}अर्ध सेल अभिक्रिया: \text{Zn}^{2+}\text{(aq, 1 M)} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Zn(s)}

डेनियल सेल का कुल विभव

इस परिपाटी के परिप्रेक्ष्य में डेनियल सेल की अर्ध अभिक्रियाओं को निम्न प्रकार से लिखा जा सकता है:

  • बायाँ इलैक्ट्रोड (ऐनोड): \text{Zn(s)} \rightarrow \text{Zn}^{2+}\text{(aq, 1 M)} + 2\text{e}^-
  • दायाँ इलैक्ट्रोड (कैथोड): \text{Cu}^{2+}\text{(aq, 1 M)} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu(s)}

सेल की समग्र अभिक्रिया उपरोक्त अभिक्रियाओं का योग होती है:

    \[\text{Zn(s)} + \text{Cu}^{2+}\text{(aq)} \rightarrow \text{Zn}^{2+}\text{(aq)} + \text{Cu(s)}\]

सेल का emf = E^\ominus_{(\text{सेल})} = E^\ominus_{(\text{R})} - E^\ominus_{(\text{L})}

    \[E^\ominus_{(\text{सेल})} = 0.34\text{V} - (-0.76)\text{V} = 1.10\text{V}\]

5. अक्रिय इलैक्ट्रोड (Inert Electrodes)

कभी-कभी सेल के निर्माण में प्लैटिनम (Platinum – Pt) एवं स्वर्ण (Gold – Au) जैसी धातुएं अक्रिय इलैक्ट्रोड (Inert Electrode) के रूप में प्रयुक्त होती हैं। अक्रिय इलैक्ट्रोड की विशेषता यह है कि वे स्वयं रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेतीं, परंतु ऑक्सीकरण एवं अपचयन अभिक्रियाओं के लिए एवं इलैक्ट्रॉनों के चालन के लिए अपनी सतह प्रदान करती हैं।

उदाहरण के लिए निम्नलिखित अर्ध सेलों में Pt का उपयोग होता है:

  1. हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड:\text{Pt(s)} \vert{} \text{H}_2\text{(g)} \vert{} \text{H}^+\text{(aq)}जिसकी अर्ध अभिक्रिया है: \text{H}^+\text{(aq)} + \text{e}^- \rightarrow \frac{1}{2}\text{H}_2\text{(g)}
  2. ब्रोमीन इलैक्ट्रोड:\text{Pt(s)} \vert{} \text{Br}_2\text{(aq)} \vert{} \text{Br}^-\text{(aq)}जिसकी अर्ध अभिक्रिया है: \frac{1}{2}\text{Br}_2\text{(aq)} + \text{e}^- \rightarrow \text{Br}^-\text{(aq)}

6. मानक इलैक्ट्रोड विभव का महत्व (Significance of Standard Electrode Potential)

मानक इलैक्ट्रोड विभव बहुत महत्वपूर्ण है एवं हम इनसे कई महत्वपूर्ण सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं।

धनात्मक और ऋणात्मक मान का अर्थ

  • धनात्मक मान (Positive Value): यदि किसी इलैक्ट्रोड का मानक इलैक्ट्रोड विभव शून्य से अधिक (धनात्मक) होता है, तो इसका अर्थ है कि इसकी अपचित अवस्था (Reduced state) हाइड्रोजन गैस से अधिक स्थायी (Stable) होती है। प्रथम स्थिति में, कॉपर का मानक इलैक्ट्रोड विभव का धनात्मक मान (0.34 V) इंगित करता है कि \text{Cu}^{2+} आयन \text{H}^+ आयनों की तुलना में आसानी से अपचित हो जाते हैं। इसका विपरीत प्रक्रम संभव नहीं होता अर्थात् मानक परिस्थितियों में हाइड्रोजन आयन \text{Cu} को ऑक्सीकृत नहीं कर सकते। हम यह भी कह सकते हैं कि हाइड्रोजन गैस कॉपर आयनों को अपचित कर सकती है। यही कारण है कि \text{Cu(s)} हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) में नहीं घुलता है। नाइट्रिक अम्ल (Nitric Acid) में यह नाइट्रेट आयनों से ऑक्सीकृत होता है न कि हाइड्रोजन आयनों से।
  • ऋणात्मक मान (Negative Value): इसी प्रकार से, यदि मानक इलैक्ट्रोड विभव ऋणात्मक होता है तो हाइड्रोजन गैस उस स्पीशीज़ की अपचित अवस्था से अधिक स्थायी होती है। दूसरी स्थिति में जिंक का मानक इलैक्ट्रोड विभव का ऋणात्मक मान (-0.76 V) इंगित करता है कि हाइड्रोजन आयन ज़िंक को ऑक्सीकृत कर सकते हैं (या ज़िंक हाइड्रोजन आयनों को अपचित कर सकता है)।

ऑक्सीकारक और अपचायक क्षमता (Oxidizing and Reducing Power)

  • फ्लुओरीन (Fluorine – F₂): सारणी में फ्लुओरीन का मानक इलैक्ट्रोड विभव उच्चतम है। यह इंगित करता है कि फ्लुओरीन गैस (\text{F}_2) की फ्लुओराइड आयन (\text{F}^-) में अपचित होने की प्रवृत्ति अधिकतम है। अतः फ्लुओरीन गैस प्रबलतम ऑक्सीकारक (Strongest Oxidizing Agent) है एवं फ्लुओराइड आयन दुर्बलतम अपचायक (Weakest Reducing Agent) है।
  • लीथियम (Lithium – Li): लीथियम का इलैक्ट्रोड विभव न्यूनतम है। यह इंगित करता है कि लीथियम आयन दुर्बलतम ऑक्सीकारक है जबकि लीथियम धातु जलीय विलयनों में प्रबलतम अपचायक (Strongest Reducing Agent) है।

निष्कर्षतः, जब हम इलेक्ट्रोकेमिकल सीरीज (सारणी 2.1) में ऊपर से नीचे की ओर जाते हैं तो मानक इलैक्ट्रोड विभव कम होता जाता है एवं इसी के साथ अभिक्रिया के बायीं ओर की स्पीशीज़ की ऑक्सीकारक क्षमता बढ़ती है तथा दायीं ओर के स्पीशीज़ की अपचयन क्षमता बढ़ती है।

अन्य अनुप्रयोग

वैद्युत रासायनिक सेलों और मानक इलेक्ट्रोड विभवों का व्यापक उपयोग विलयनों की pH ज्ञात करने में, विलेयता गुणनफल (Solubility Product) निकालने में, साम्यावस्था स्थिरांक (Equilibrium Constant) ज्ञात करने तथा अन्य ऊष्मागतिकीय गुणों (Thermodynamic Properties) एवं विभवमितीय अनुमापनों (Potentiometric Titrations) में होता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: गैल्वैनी सेल किसे कहते हैं?

गैल्वैनी सेल एक वैद्युतरासायनिक युक्ति है जो स्वतः होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया की रासायनिक ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में रूपांतरित करती है। डेनियल सेल इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण है।

Q2: इलैक्ट्रोड विभव से आप क्या समझते हैं?

इलैक्ट्रोड और वैद्युतअपघट्य के मध्य आवेशों के पृथक्करण के कारण उत्पन्न होने वाले विभवांतर को इलैक्ट्रोड विभव कहते हैं।

Q3: मानक हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड (SHE) का विभव कितना माना गया है?

मानक हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड (SHE) का विभव सभी तापों पर शून्य (0 V) निर्दिष्ट किया गया है। इसका उपयोग अन्य इलेक्ट्रोडों के मानक विभव मापने के लिए एक संदर्भ (Reference) के रूप में किया जाता है।

Q4: कॉपर (Cu) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) में क्यों नहीं घुलता है?

कॉपर का मानक इलेक्ट्रोड विभव धनात्मक (+0.34 V) होता है, जिसका अर्थ है कि \text{Cu}^{2+} आयन \text{H}^+ आयनों की तुलना में आसानी से अपचित होते हैं। मानक परिस्थितियों में हाइड्रोजन आयन \text{Cu} को ऑक्सीकृत नहीं कर सकते, इसलिए कॉपर HCl में नहीं घुलता।

Q5: प्लैटिनम (Pt) और स्वर्ण (Au) को अक्रिय इलेक्ट्रोड क्यों कहा जाता है?

प्लैटिनम और स्वर्ण स्वयं किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं, वे केवल ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनों के चालन के लिए अपनी सतह प्रदान करते हैं, इसलिए इन्हें अक्रिय इलेक्ट्रोड (Inert Electrodes) कहा जाता है।

डेनियल सेल (गैल्वैनी सेल) का योजनाबद्ध आरेख

शीर्षक: डेनियल सेल की संरचना और कार्यप्रणाली

       इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह (e⁻) 
       ---------------------->
       
         (–)                         (+)
       +-----+      वोल्टमीटर      +-----+
       | Zn  |--------( V )--------| Cu  |
       | छड़ |                     | छड़ |
       |     |                     |     |
       |     |    लवण सेतु (Salt   |     |
       |     |       Bridge)       |     |
       |     |     ===========     |     |
     __|     |_____|         |_____|     |__
    |  |     |     |         |     |     |  |
    |  |     |     |         |     |     |  |
    |  |     |     |         |     |     |  |
    |  *---*       |         |       *---*  |
    | Zn²⁺ आयन     |         |     Cu²⁺ आयन |
    |              |         |              |
    | जिंक सल्फेट  |         | कॉपर सल्फेट  |
    |  (ZnSO₄)     |         |  (CuSO₄)     |
    |   विलयन      |         |   विलयन      |
    +--------------+         +--------------+
       ऐनोड (Anode)             कैथोड (Cathode)
      ऑक्सीकरण अर्ध सेल       अपचयन अर्ध सेल

आरेख का विवरण और लेबलिंग:

  1. बायां अर्ध सेल (ऐनोड):
    • पात्र (Beaker): एक कांच का बीकर।
    • विद्युतअपघट्य (Electrolytic solution): जिंक सल्फेट (\text{ZnSO}_4) का विलयन।
    • इलेक्ट्रोड: जिंक (\text{Zn}) की धातु की छड़।
    • आवेश (Charge): ऋणात्मक (–)।
    • अभिक्रिया: ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया: \text{Zn(s)} \rightarrow \text{Zn}^{2+}\text{(aq)} + 2\text{e}^-. \text{Zn}^{2+} आयन विलयन में प्रवेश करते हैं और इलेक्ट्रॉन छड़ पर रह जाते हैं।
  2. दायां अर्ध सेल (कैथोड):
    • पात्र (Beaker): दूसरा कांच का बीकर।
    • विद्युतअपघट्य (Electrolytic solution): कॉपर सल्फेट (\text{CuSO}_4) का विलयन। (यह विलयन नीला होता है, जिसे अक्सर आरेख में नीले रंग से दर्शाया जाता है)।
    • इलेक्ट्रोड: कॉपर (\text{Cu}) की धातु की छड़।
    • आवेश (Charge): धनात्मक (+)।
    • अभिक्रिया: अपचयन अर्ध अभिक्रिया: \text{Cu}^{2+}\text{(aq)} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu(s)}. \text{Cu}^{2+} आयन विलयन से छड़ पर जाते हैं और वहाँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके जमा हो जाते हैं।
  3. लवण सेतु (Salt Bridge):
    • एक उलटी U-आकार की नली जो दोनों विलयनों को जोड़ती है।
    • इसमें एक निष्क्रिय विद्युतअपघट्य (जैसे \text{KCl} या \text{KNO}_3) का पेस्ट या जेल भरा होता है।
    • यह परिपथ को पूरा करता है और विलयनों की विद्युत उदासीनता बनाए रखता है।
  4. बाह्य परिपथ (External Circuit):
    • दोनों इलेक्ट्रोडों को एक धात्विक तार द्वारा जोड़ा जाता है।
    • परिपथ में एक वोल्टमीटर (V) और एक स्विच (जिसे आरेख में ऑन स्थिति में दिखाया जा सकता है) शामिल होता है।
  5. प्रवाह की दिशा:
    • इलेक्ट्रॉन प्रवाह (\text{e}^-): ऐनोड (Zn) से कैथोड (Cu) की ओर (बाह्य तार में)।
    • विद्युत धारा प्रवाह: इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के विपरीत दिशा में (Cu से Zn की ओर)।
  6. समग्र अभिक्रिया:

        \[\text{Zn(s)} + \text{Cu}^{2+}\text{(aq)} \rightarrow \text{Zn}^{2+}\text{(aq)} + \text{Cu(s)}\]

Class 12 Chemistry Galvanic Cell & Electrode Potential
Class 12 Chemistry Galvanic Cell & Electrode Potential