MP Board 9th Mathematics Lines and Angles Basic Terms and Definitions
यहाँ कक्षा 9 के गणित विषय के अध्याय “रेखाएँ और कोण” (Lines and Angles) के अंतर्गत आधारभूत पदों और परिभाषाओं (Basic Terms and Definitions) पर विस्तृत और सचित्र नोट्स दिए गए हैं। आप इन्हें सीधे अपने ब्लॉग में कॉपी और पेस्ट कर सकते हैं।
कक्षा 9 गणित अध्याय 6: रेखाएँ और कोण – आधारभूत पद और परिभाषाएँ
ज्यामिति (Geometry) को अच्छी तरह समझने के लिए हमें सबसे पहले रेखाओं और कोणों से जुड़े कुछ मूल शब्दों (Basic Terms) को समझना होगा। आइए इन सभी परिभाषाओं को चित्रों के माध्यम से आसान भाषा में समझते हैं।
1. रेखा और उसके भाग (Line and its Parts)
ज्यामिति में रेखाओं के अलग-अलग रूप होते हैं, जिन्हें समझना बहुत ज़रूरी है:
- रेखा (Line): एक सीधी रेखा जिसकी कोई मोटाई नहीं होती और जिसका कोई अंत बिंदु (End point) नहीं होता। इसे दोनों दिशाओं में अनंत (infinity) तक बढ़ाया जा सकता है।
- रेखाखंड (Line Segment): एक रेखा का वह भाग (या टुकड़ा) जिसके दो अंत बिंदु हों, रेखाखंड कहलाता है। उदाहरण के लिए, एक 5 सेंटीमीटर लंबी खींची गई रेखा वास्तव में एक रेखाखंड है।
- किरण (Ray): रेखा का वह भाग जिसका केवल एक ही अंत बिंदु हो (जहाँ से वह शुरू होती है) और दूसरी दिशा में अनंत तक जाती हो, किरण कहलाती है। (जैसे: सूर्य की किरण या टॉर्च की रोशनी)।
2. संरेख और असंरेख बिंदु (Collinear and Non-collinear Points)
- संरेख बिंदु (Collinear Points): यदि तीन या तीन से अधिक बिंदु एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों, तो उन्हें संरेख बिंदु कहते हैं।
- असंरेख बिंदु (Non-collinear Points): यदि तीन या अधिक बिंदु एक ही सीधी रेखा पर स्थित न हों, तो वे असंरेख बिंदु कहलाते हैं। (असंरेख बिंदुओं को मिलाने पर बहुभुज जैसे कि त्रिभुज का निर्माण होता है)।
3. कोण, भुजाएँ और शीर्ष (Angle, Arms, and Vertex)
जब दो किरणें (Rays) एक ही अंत बिंदु (End point) से प्रारंभ होती हैं, तो एक कोण (Angle) बनता है।
- भुजाएँ (Arms): कोण बनाने वाली दोनों किरणों को कोण की भुजाएँ कहते हैं।
- शीर्ष (Vertex): वह उभयनिष्ठ (Common) अंत बिंदु जहाँ दोनों किरणें मिलती हैं, कोण का शीर्ष कहलाता है।
4. कोणों के प्रकार (Types of Angles)
माप (Degree measure) के आधार पर कोणों को मुख्य रूप से 5 प्रकारों में बाँटा गया है:
- न्यून कोण (Acute Angle): वह कोण जिसका माप 0° से बड़ा और 90° से छोटा होता है।
- समकोण (Right Angle): वह कोण जिसका माप ठीक 90° होता है। समकोण को दर्शाने के लिए अक्सर एक छोटे से चौकोर (Square) निशान का उपयोग किया जाता है।
- अधिक कोण (Obtuse Angle): वह कोण जिसका माप 90° से बड़ा और 180° से छोटा होता है।
- ऋजु कोण (Straight Angle): वह कोण जिसका माप ठीक 180° होता है। यह कोण एक बिल्कुल सीधी रेखा (Straight line) बनाता है।
- प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): वह कोण जिसका माप 180° से बड़ा और 360° से छोटा होता है। यह अक्सर किसी कोण के बाहर की तरफ बनने वाला कोण होता है।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण टिप: परीक्षा में अक्सर कोणों के प्रकारों को पहचानने या “प्रतिवर्ती कोण” (Reflex angle) निकालने के लिए प्रश्न आते हैं। किसी भी कोण
का प्रतिवर्ती कोण निकालने के लिए, उसे 360° में से घटा दें:
प्रतिवर्ती कोण = 360° – ![]()
यहाँ कक्षा 9 के गणित विषय के अध्याय “रेखाएँ और कोण” के दूसरे सबसे महत्त्वपूर्ण भाग “कोणों के युग्म” (Pairs of Angles) पर सचित्र और विस्तृत नोट्स दिए गए हैं। आप इन्हें अपने ब्लॉग में सीधे कॉपी-पेस्ट कर सकते हैं:
कक्षा 9 गणित अध्याय 6: रेखाएँ और कोण – ‘कोणों के युग्म’ (Pairs of Angles)
ज्यामिति में जब दो कोण एक साथ मिलते हैं, तो वे कुछ विशेष संबंध बनाते हैं। इन संबंधों को “कोणों के युग्म” कहा जाता है। परीक्षा में
या
का मान निकालने वाले ज़्यादातर प्रश्न इन्हीं नियमों पर आधारित होते हैं। आइए इन्हें चित्रों के साथ विस्तार से समझते हैं:
1. आसन्न कोण (Adjacent Angles)
दो कोण ‘आसन्न कोण’ कहलाते हैं, यदि वे एक-दूसरे से बिल्कुल सटे हुए हों। इसके लिए तीन शर्तें पूरी होनी चाहिए:
- उनका शीर्ष (Vertex) एक ही (उभयनिष्ठ) हो।
- उनकी एक भुजा (Arm) उभयनिष्ठ (Common) हो।
- जो भुजाएँ उभयनिष्ठ नहीं हैं, वे उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत ओर (एक बाईं तरफ और एक दाईं तरफ) स्थित हों।
सरल शब्दों में: एक ही बिंदु से निकलने वाले और एक ‘कॉमन दीवार’ साझा करने वाले दो पड़ोसी कोण आसन्न कोण होते हैं।
2. कोणों का रैखिक युग्म (Linear Pair of Angles)
यह पूरे अध्याय का सबसे महत्त्वपूर्ण नियम है!
जब दो आसन्न कोणों का योग (Total) 180° हो जाता है, तो वे एक बिल्कुल सीधी रेखा बना लेते हैं। ऐसे कोणों के जोड़े को ‘कोणों का रैखिक युग्म’ कहते हैं।
- नियम (रैखिक युग्म अभिगृहीत): एक सीधी रेखा पर खड़ी किसी किरण द्वारा बनाए गए दोनों आसन्न कोणों का योग हमेशा 180° होता है। (अर्थात्
)
3. पूरक कोण (Complementary Angles)
जब किन्हीं दो कोणों के मापों का योग ठीक 90° होता है, तो ऐसे कोणों को एक-दूसरे का ‘पूरक कोण’ कहते हैं।
- उदाहरण: यदि एक कोण 30° है, तो उसका पूरक कोण 60° होगा (क्योंकि 30° + 60° = 90°)।
- इसी प्रकार, 45° का पूरक कोण 45° ही होगा।
4. संपूरक कोण (Supplementary Angles)
जब किन्हीं दो कोणों के मापों का योग ठीक 180° होता है, तो ऐसे कोणों को एक-दूसरे का ‘संपूरक कोण’ कहते हैं। (रैखिक युग्म बनाने वाले कोण भी हमेशा संपूरक होते हैं)।
- उदाहरण: यदि एक कोण 110° है, तो उसका संपूरक कोण 70° होगा (क्योंकि 110° + 70° = 180°)।
5. शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles)
जब दो सीधी रेखाएँ एक-दूसरे को किसी बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं (काटती हैं), तो ‘X’ के आकार की आकृति बनती है। इसमें आमने-सामने (विपरीत दिशा) में बनने वाले कोणों को ‘शीर्षाभिमुख कोण’ कहते हैं।
- सबसे ज़रूरी प्रमेय (Theorem): यदि दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो शीर्षाभिमुख कोण हमेशा एक-दूसरे के बराबर होते हैं।
- (अर्थात्, अगर ऊपर का कोण 50° है, तो ठीक उसके नीचे वाला कोण भी 50° ही होगा)।
💡 परीक्षा के लिए ‘मास्टर ट्रिक्स’ (Exam Tricks):
- सीधी रेखा देखें: अगर चित्र में कहीं भी एक सीधी रेखा (Straight line) दिखे और उस पर कोई कोण बना हो, तो तुरंत समझ जाएँ कि वहाँ रैखिक युग्म (180°) का नियम लगेगा।
- X का आकार देखें: अगर चित्र में दो रेखाएँ क्रॉस (X) बना रही हैं, तो आमने-सामने के कोणों को बिना सोचे समझे बराबर कर दें (शीर्षाभिमुख कोण)।
- पूरक और संपूरक: अगर प्रश्न में “पूरक” लिखा हो तो
करें, और “संपूरक” लिखा हो तो
करें।