वैद्युत द्विध्रुव के कारण विभव Electric Potential due to a Dipole

वैद्युत द्विध्रुव के कारण विभव (Electric Potential due to a Dipole)

1. मूल अवधारणा (Basic Concepts)

  • एक वैद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole) दो समान और विपरीत बिंदु आवेशों (q तथा -q) से मिलकर बनता है, जिनके बीच की दूरी बहुत कम (2a) होती है।
  • द्विध्रुव का कुल आवेश शून्य होता है।
  • द्विध्रुव आघूर्ण (Dipole Moment, \mathbf{p}): इसका परिमाण q \times 2a होता है और इसकी दिशा -q से q की ओर होती है।
  • अध्यारोपण का सिद्धांत: किसी बिंदु पर द्विध्रुव के कारण कुल विभव, दोनों आवेशों (q तथा -q) के कारण उत्पन्न अलग-अलग विभवों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।

2. विभव का सूत्र निगमन (Derivation)

मान लीजिए कि द्विध्रुव का केंद्र मूल बिंदु पर है और हमें केंद्र से r दूरी पर स्थित किसी बिंदु P पर विभव (V) ज्ञात करना है।

आवेश q तथा -q से बिंदु P की दूरियाँ क्रमशः r_1 तथा r_2 हैं।

कुल विभव निम्न होगा:

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

    \[V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0}\left(\frac{q}{r_1} - \frac{q}{r_2}\right)\]

ज्यामिति (Cosine Rule) के अनुसार, दूरियों के वर्ग इस प्रकार होंगे:

    \[r_1^2 = r^2 + a^2 - 2ar\cos\theta\]

    \[r_2^2 = r^2 + a^2 + 2ar\cos\theta\]

सन्निकटन (Approximation):

हम मानते हैं कि बिंदु P द्विध्रुव के आकार की तुलना में बहुत दूर है, अर्थात r \gg a। इसलिए हम a/r के उच्च कोटि के पदों (squares and higher powers) की उपेक्षा कर सकते हैं:

    \[r_1^2 \cong r^2\left(1 - \frac{2a\cos\theta}{r}\right)\]

    \[r_2^2 \cong r^2\left(1 + \frac{2a\cos\theta}{r}\right)\]

अब द्विपद प्रमेय (Binomial Theorem) का उपयोग करते हुए, a/r के प्रथम कोटि के पदों को सम्मिलित करने पर:

    \[\frac{1}{r_1} \cong \frac{1}{r}\left(1 - \frac{2a\cos\theta}{r}\right)^{-1/2} \cong \frac{1}{r}\left(1 + \frac{a}{r}\cos\theta\right)\]

    \[\frac{1}{r_2} \cong \frac{1}{r}\left(1 + \frac{2a\cos\theta}{r}\right)^{-1/2} \cong \frac{1}{r}\left(1 - \frac{a}{r}\cos\theta\right)\]

इन मानों को वापस विभव (V) के समीकरण में रखने पर:

    \[V = \frac{q}{4\pi\epsilon_0}\left[ \frac{1}{r}\left(1 + \frac{a}{r}\cos\theta\right) - \frac{1}{r}\left(1 - \frac{a}{r}\cos\theta\right) \right]\]

    \[V = \frac{q}{4\pi\epsilon_0}\left(\frac{2a\cos\theta}{r^2}\right)\]

चूंकि द्विध्रुव आघूर्ण p = 2qa होता है, इसलिए:

    \[V = \frac{p\cos\theta}{4\pi\epsilon_0 r^2}\]

सदिश रूप में (Vector Form):

चूंकि p\cos\theta = \mathbf{p} \cdot \mathbf{\hat{r}} (जहाँ \mathbf{\hat{r}} स्थिति सदिश के अनुदिश एकांक सदिश है), इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है:

    \[V = \frac{1}{4\pi\epsilon_0}\frac{\mathbf{p} \cdot \mathbf{\hat{r}}}{r^2} \quad (\text{जब } r \gg a)\]


3. विशेष स्थितियाँ (Special Cases)

स्थिति 1: द्विध्रुव अक्ष पर (Axial Line) यदि बिंदु द्विध्रुव के अक्ष पर है, तो \theta = 0^\circ या \theta = \pi होगा।

    \[V = \pm \frac{1}{4\pi\epsilon_0}\frac{p}{r^2}\]

(धनात्मक चिह्न \theta = 0^\circ के लिए तथा ऋणात्मक चिह्न \theta = \pi के लिए)

स्थिति 2: निरक्षीय समतल पर (Equatorial Plane)

यदि बिंदु द्विध्रुव के निरक्षीय तल पर है, तो \theta = \pi/2 (90^\circ) होगा। चूंकि \cos(\pi/2) = 0 होता है, अतः:

    \[V = 0\]


4. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तुलना (Key Differences)

एकल आवेश के विभव और वैद्युत द्विध्रुव के विभव में दो मुख्य अंतर होते हैं:

  1. दिशा पर निर्भरता: एकल आवेश का विभव केवल दूरी r पर निर्भर करता है। परंतु द्विध्रुव का विभव दूरी r के साथ-साथ स्थिति सदिश \mathbf{r} और द्विध्रुव आघूर्ण \mathbf{p} के बीच के कोण \theta पर भी निर्भर करता है
  2. दूरी के साथ घटने की दर: अधिक दूरियों पर, एकल आवेश का विभव 1/r के अनुपात में घटता है (V \propto 1/r), जबकि द्विध्रुव का विभव 1/r^2 के अनुपात में तेजी से घटता है (V \propto 1/r^2)।

Leave a Comment