MP Board 9th Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

MP Board 9th Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

यहाँ “निर्धनता: एक चुनौती” (कक्षा 9 अर्थशास्त्र, अध्याय 3) के विस्तृत और परीक्षा-उपयोगी नोट्स दिए गए हैं। आपकी सुविधा के लिए एक संक्षिप्त ब्लॉग परिचय (Description) और दोनों भाषाओं (Hindi और English) में शीर्षकों का उपयोग किया गया है।

ब्लॉग पोस्ट के लिए परिचय (Blog Post Introduction):
नमस्कार दोस्तों! हमारे आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम कक्षा 9 अर्थशास्त्र के अध्याय 3, “निर्धनता: एक चुनौती” (Poverty as a Challenge) के विस्तृत और परीक्षा-उपयोगी नोट्स साझा कर रहे हैं। [cite_start]स्वतंत्र भारत के सामने गरीबी हटाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है । इन नोट्स में हमने निर्धनता के अर्थ, इसके कारणों, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इसके आँकड़ों और सरकार द्वारा चलाए जा रहे निर्धनता-निरोधी कार्यक्रमों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया है। परीक्षा की तैयारी और त्वरित रिविज़न (Quick Revision) के लिए ये नोट्स आपके लिए बेहद मददगार साबित होंगे!

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अध्याय 3: निर्धनता: एक चुनौती (Chapter 3: Poverty as a Challenge)

1. परिचय: निर्धनता एक चुनौती (Introduction: Poverty as a Challenge)

  • करोड़ों लोगों को दयनीय निर्धनता से बाहर निकालना स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है ।
  • नीति आयोग (NITI Aayog) निर्धनता का विश्लेषण करने के लिए बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (Multidimensional Poverty Index – MPI) का उपयोग करता है [cite: 2352]।
  • [cite_start]भारत में बहुआयामी निर्धनों का अनुपात 2005-06 के 55% से घटकर 2019-21 में 15% रह गया है ।

2. निर्धनता के आयाम और सामाजिक अपवर्जन (Dimensions of Poverty and Social Exclusion)

  • ]निर्धनता का अर्थ केवल भुखमरी या आश्रय का न होना नहीं है, बल्कि इसका अर्थ स्वच्छ जल, सफाई सुविधाओं, नियमित रोज़गार और न्यूनतम उचित मज़दूरी का अभाव भी है ।
  • सामाजिक अपवर्जन (Social Exclusion): इस अवधारणा के अनुसार, निर्धन लोगों को सामाजिक समता से वंचित होकर मलिन बस्तियों में रहना पड़ता है । भारत में जाति-व्यवस्था इसका एक विशिष्ट उदाहरण है, जहाँ कुछ जातियों को समान अवसरों से अपवर्जित रखा जाता है ।
  • असुरक्षा (Vulnerability): यह कुछ विशेष समुदायों (जैसे पिछड़ी जाति) या व्यक्तियों (जैसे विधवा या विकलांग) के भविष्य में निर्धन होने या बने रहने की अधिक संभावना को दर्शाता है ।

3. निर्धनता रेखा और आकलन (Poverty Line and Estimation)

  • [cite_start]निर्धनता रेखा का निर्धारण न्यूनतम आय या उपभोग स्तरों के आधार पर किया जाता है जो मूल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ज़रूरी है ।
  • कैलोरी आवश्यकता (Calorie Requirement): भारत में स्वीकृत न्यूनतम कैलोरी आवश्यकता ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन और नगरीय (शहरी) क्षेत्रों में 2100 कैलोरी प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन है । ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक शारीरिक श्रम के कारण कैलोरी की आवश्यकता अधिक मानी गई है ।
  • [cite_start]बहुआयामी निर्धनता के सूचक (Indicators of MPI): नीति आयोग 12 विकासात्मक सूचकों का प्रयोग करता है, जिनमें पोषण, बाल मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा, स्वच्छता, पेयजल, आवास और बैंक खाता आदि शामिल हैं।

4. असुरक्षित समूह और अंतर्राज्यीय असमानताएँ (Vulnerable Groups and Inter-State Disparities)

  • असुरक्षित समूह (Vulnerable Groups): भारत में अनुसूचित जनजाति (43%), अनुसूचित जाति (29%), ग्रामीण अनियत कृषि श्रमिक (34%) और शहरी अनियत मज़दूर (34%) निर्धनता के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित हैं ।
  • अंतर्राज्यीय असमानताएँ (Inter-State Disparities): भारत के प्रत्येक राज्य में निर्धन लोगों का अनुपात एक समान नहीं है ।
    • केरल: मानव संसाधन विकास पर ध्यान देकर निर्धनता कम की है ।
    • पश्चिम बंगाल: भूमि सुधार उपायों से सहायता मिली है ।
    • आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु: अनाज के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से निर्धनता में सुधार हुआ है ।

5. वैश्विक निर्धनता परिदृश्य (Global Poverty Scenario)

  • विश्व बैंक (World Bank) अत्यंत आर्थिक निर्धनता को प्रतिदिन $2.15 से कम पर जीवन निर्वाह करने वाले लोगों के रूप में परिभाषित करता है ।
  • वैश्विक निर्धनता 2010 के 16.27% से घटकर 2019 में 9.05% हो गई है ।
  • चीन में निर्धनों का अनुपात वर्ष 2020 में घटकर मात्र 0.1% रह गया ।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDGs): संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) ने 2030 तक सभी प्रकार की निर्धनता को समाप्त करने का लक्ष्य (SDG 1) निर्धारित किया है।

6. निर्धनता के मुख्य कारण (Main Causes of Poverty)

  • ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियाँ: ब्रिटिश शासन के दौरान पारंपरिक हस्तशिल्पकारी नष्ट हो गई और उद्योगों का विकास रुक गया ।
  • जनसंख्या वृद्धि और असमानता: जनसंख्या में उच्च दर से वृद्धि हुई और भूमि व अन्य संसाधनों का असमान वितरण रहा ।
  • सामाजिक और आर्थिक कारक: धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक दायित्वों पर अत्यधिक खर्च । छोटे किसान कृषि आगतों (बीज, उर्वरक) के लिए ऋण लेते हैं और चुका न पाने के कारण ऋणग्रस्तता (Debt trap) का शिकार हो जाते हैं ।

7. निर्धनता-निरोधी उपाय (Anti-Poverty Measures)

सरकार की निर्धनता-निरोधी रणनीति मुख्यतः दो कारकों पर निर्भर है: (1) आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन और (2) लक्षित निर्धनता-निरोधी कार्यक्रम [cite: 2754]। कुछ प्रमुख योजनाएँ निम्नलिखित हैं:

  • महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (मनरेगा / MGNREGA): इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर को कम से कम 100 दिनों का रोज़गार उपलब्ध कराना है [cite: 2770, 2771]। इसमें एक-तिहाई रोज़गार महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं ।
  • प्रधानमंत्री पोषण शक्ति अभियान (PM POSHAN): कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए कैलोरी और प्रोटीन की पोषण आवश्यकताओं में सुधार करना और स्कूल में नामांकन बढ़ाना ।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (2016): गर्भवती महिलाओं को अच्छी प्रसवकालीन देखभाल सुविधा देना, जो हर महीने की 9 तारीख को प्रदान की जाती है ।
  • प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY 2016): गरीबी रेखा से नीचे (BPL) की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन (LPG गैस कनेक्शन) प्रदान करना, ताकि उन्हें धुएँ से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके।

8. भावी चुनौतियाँ: मानव निर्धनता (The Challenges Ahead: Human Poverty)

  • बुद्धिजीवियों का मानना है कि निर्धनता की अवधारणा का विस्तार केवल आय तक सीमित न रहकर ‘मानव निर्धनता’ (Human Poverty) तक होना चाहिए ।
  • इसमें शिक्षा, घर, स्वास्थ्य सेवा, रोज़गार की सुरक्षा, आत्मविश्वास, और लिंग व जाति आधारित भेदभाव से मुक्ति जैसे मुद्दे भी शामिल होने चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion): आशा है कि कक्षा 9 के अध्याय 3 “निर्धनता: एक चुनौती” के ये नोट्स आपके लिए उपयोगी साबित होंगे।

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