MP Board Class 10 Hindi Question Bank Unit 2 : Blueprint के अनुसार MP Board Class 10 Hindi Question Bank Unit 2 मे सभी संभावित प्रश्नो का संग्रह दिया गया है ।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (01 अंक)
सही विकल्प चुनकर लिखिए –
- ‘रसात्मकं वाक्यं काव्यं’ परिभाषा किस आचार्य की है?
अ. आचार्य जगन्नाथ
ब. आचार्य मम्मट
स. आचार्य विश्वनाथ
द. आचार्य रामचंद्र शुक्ल
उत्तर: स. आचार्य विश्वनाथ - काव्य के भेद होते हैं –
अ. एक
ब. दो
स. तीन
द. चार
उत्तर: ब. दो (मुख्य रूप से श्रव्य काव्य और दृश्य काव्य) - किस काव्य के छन्द एक कथा के धागे में माला की तरह गुथे होते हैं?
अ. मुक्तक काव्य
ब. प्रबंध काव्य
स. श्रव्य काव्य
द. दृश्यकाव्य
उत्तर: ब. प्रबंध काव्य - ‘आलंबन’ और ‘उद्दीपन’ का संबंध है –
अ. स्थायी भाव से
ब. संचारी भाव से
स. विभाव से
द. अनुभाव से
उत्तर: स. विभाव से - संचारी भावों की संख्या है –
अ. 32
ब. 33
स. 34
द. 35
उत्तर: ब. 33 - जुगुप्सा किस रस का स्थायी भाव है –
अ. अद्भुत
ब. वीभत्स
स. रौद्र
द. भयानक
उत्तर: ब. वीभत्स - लय, तुक, यति, गति, मात्रा एवं चरण से युक्त रचना को कहते हैं –
अ. रस
ब. छन्द
स. अलंकार
द. इसमें से कोई नहीं
उत्तर: ब. छन्द - काव्य की शोभा बढ़ाने वाले कारक को कहते हैं –
अ. रस
ब. छन्द
स. अलंकार
द. उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: स. अलंकार
- ‘दोहा’ छन्द के द्वितीय और चतुर्थ चरण में मात्राएँ होती हैं –
अ. 13-13
ब. 11-11
स. 12-12
द. 16-11
उत्तर: ब. 11-11
(दोहा एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है। इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (दूसरे और चौथे) में 11-11 मात्राएँ होती हैं।)
रिक्त स्थान में सही शब्द चुनकर लिखिए –
- नायक के जीवन की किसी एक घटना अथवा हृदयस्पर्शी अंश का पूर्णता के साथ अंकन …………………… काव्य में किया जाता है। (महाकाव्य / खंड काव्य)
उत्तर: खंड काव्य - अभिनय तत्व की प्रधानता …………………… काव्य में होती है। (दृश्यकाव्य / श्रव्यकाव्य)
उत्तर: दृश्यकाव्य - काव्य में रस का अर्थ …………………… स्वीकार किया गया है। (आनंद / अलंकार)
उत्तर: आनंद - नायक – नायिका के संयोग या वियोग का वर्णन …………………… रस में होता है। (हास / श्रृंगार)
उत्तर: श्रृंगार - कविता के रचना विधान को …………………… कहते हैं। (छन्द / रस)
उत्तर: छन्द - चौपाई के प्रत्येक चरण में …………………… मात्राएँ होती हैं। (16-16 / 24-24)
उत्तर: 16-16 - छन्द …………………… प्रकार के होते हैं। (आठ / दो)
उत्तर: दो - जहाँ लोक की मर्यादा को पार करके किसी वस्तु का अत्यंत बढ़ा चढ़ाकर वर्णन किया जाता है वहाँ …………………… अलंकार होता है। (अन्योक्ति / अतिशयोक्ति)
उत्तर: अतिशयोक्ति - वीर रस का स्थायी भाव …………………… है। (उत्साह / क्रोध)
उत्तर: उत्साह - ‘बार-बार मोहि लागि बोलाबा’, पंक्ति में अलंकार है। (पुनरुक्तिप्रकाश / उपमा)
उत्तर: पुनरुक्तिप्रकाश
यहाँ आपके द्वारा दिए गए चित्र का पाठ्य सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है:
सही जोड़ी बनाकर लिखिए –
सही जोड़ी बनाकर लिखिए –
| अ | ब |
| 1. कामायनी | (ग) महाकाव्य |
| 2. दोहा | (क) छन्द |
| 3. सुदामाचरित्र | (ख) खण्ड काव्य |
| 4. नाटक | (ङ) दृश्यकाव्य |
| 5. शांत रस | (घ) निर्वेद |
सही जोड़ी के उत्तर:
- कामायनी → (ग) महाकाव्य (यह जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक प्रसिद्ध महाकाव्य है।)
- दोहा → (क) छन्द (दोहा एक प्रकार का छन्द है।)
- सुदामाचरित्र → (ख) खण्ड काव्य (यह नरोत्तमदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध खण्ड काव्य है।)
- नाटक → (ङ) दृश्यकाव्य (नाटक दृश्यकाव्य का एक रूप है जिसे देखा जाता है।)
- शांत रस → (घ) निर्वेद (निर्वेद शांत रस का स्थायी भाव है।)
ii.
| अ | ब |
| 1. काव्य की आत्मा | (ख) रस |
| 2. छन्द के प्रकार | (ग) दो |
| 3. चौपाई | (क) मात्रिक छन्द |
| 4. तीन वर्णों का मेल | (ङ) गण |
| 5. बिहारी सतसई | (घ) श्रृंगार परक |
- Query successful
यहाँ आपके द्वारा दिए गए चित्र के अनुसार सही जोड़ी के उत्तर दिए गए हैं:
ii.
| अ | ब |
| 1. काव्य की आत्मा | (ख) रस |
| 2. छन्द के प्रकार | (ग) दो |
| 3. चौपाई | (क) मात्रिक छन्द |
| 4. तीन वर्णों का मेल | (ङ) गण |
| 5. बिहारी सतसई | (घ) श्रृंगार परक |
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सही जोड़ी के उत्तर (ii):
- काव्य की आत्मा → (ख) रस (रस को काव्य की आत्मा कहा जाता है।)
- छन्द के प्रकार → (ग) दो (मुख्यतः छन्द दो प्रकार के होते हैं – मात्रिक और वर्णिक।)
- चौपाई → (क) मात्रिक छन्द (चौपाई एक मात्रिक छन्द है।)
- तीन वर्णों का मेल → (ङ) गण (छन्द शास्त्र में तीन वर्णों के समूह को गण कहते हैं।)
- बिहारी सतसई → (घ) श्रृंगार परक (बिहारी सतसई मुख्यतः श्रृंगार रस पर आधारित रचना है।)
iii.
| अ | ब |
| 1. अलंकार | (ग) आभूषण |
| 2. जहाँ अप्रस्तुत कथन से प्रस्तुत का बोध हो | (क) अन्योक्ति |
| 3. प्रकृति में मानवीय क्रियाओं का आरोपण | (ख) मानवीकरण |
| 4. लोक मर्यादा की सीमा लाँघ कर वर्णन | (ङ) अतिशयोक्ति |
| 5. जहाँ एक ही शब्द दो बार आए और उसका अर्थ भी न बदले | (घ) पुनरुक्तिप्रकाश |
सही जोड़ी के उत्तर (iii):
- अलंकार → (ग) आभूषण (अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व होते हैं, जैसे आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं।)
- जहाँ अप्रस्तुत कथन से प्रस्तुत का बोध हो → (क) अन्योक्ति (अन्योक्ति अलंकार में अप्रस्तुत के माध्यम से प्रस्तुत का वर्णन किया जाता है।)
- प्रकृति में मानवीय क्रियाओं का आरोपण → (ख) मानवीकरण (जब प्रकृति की निर्जीव वस्तुओं पर मानवीय क्रियाओं का आरोप किया जाता है, तो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।)
- लोक मर्यादा की सीमा लाँघ कर वर्णन → (ङ) अतिशयोक्ति (जब किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए, तो वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।)
- जहाँ एक ही शब्द दो बार आए और उसका अर्थ भी न बदले → (घ) पुनरुक्तिप्रकाश (पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार में एक ही शब्द दो बार आता है, लेकिन उसका अर्थ नहीं बदलता, केवल कथन में प्रभाव लाने के लिए दोहराया जाता है।)
एक वाक्य में उत्तर लिखिए –
- किस काव्य में पूर्वापर संबंध नहीं होता है?
उत्तर: मुक्तक काव्य में। - रामचरितमानस का प्रमुख छन्द कौन सा है?
उत्तर: चौपाई। - मुख्य रूप से स्थायी भावों की संख्या कितनी है?
उत्तर: नौ (9)। - ‘बतरस लालच लाल की’ पंक्ति में कौन सा रस है?
उत्तर: श्रृंगार रस। - अर्द्ध-सम मात्रिक छन्द क्या है?
उत्तर: ऐसा छन्द जिसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) तथा सम चरणों (दूसरे और चौथे) में मात्राओं की संख्या भिन्न-भिन्न होती है। (जैसे दोहा, सोरठा) - ‘पड़ी अचानक नदी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार’
इन पंक्तियों में कौन सा अलंकार है?
उत्तर: अतिशयोक्ति अलंकार। - ‘गणों’ की कुल संख्या लिखिए।
उत्तर: आठ (8)। (यमाताराजभानसलगा) - 16-16 मात्राओं का चरण किस छन्द में होता है?
उत्तर: चौपाई छन्द में। - ‘साकेत’ एवं ‘पंचवटी’ रचनाओं के रचनाकार का नाम लिखिए।
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त। - मात्राओं की संख्या पर आधारित छन्द क्या कहलाते हैं?
उत्तर: मात्रिक छन्द। - जिन कारणों से स्थायी-भाव तीव्र होते हैं उन्हें क्या कहते हैं?
उत्तर: उद्दीपन विभाव।
सत्य / असत्य कथन लिखिए –
- रामचरितमानस महाकाव्य है।
उत्तर: सत्य - दृश्य-काव्य में अभिनय तत्व प्रधान होता है।
उत्तर: सत्य - मात्रिक छन्द में मात्राओं की गिनती निश्चित रहती है।
उत्तर: सत्य - वर्णिक छन्द में गण का बहुत महत्व है।
उत्तर: सत्य - रस के सात अंग हैं।
उत्तर: असत्य (रस के चार अंग होते हैं: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव) - जहाँ अलौकिक आश्चर्य का भाव उत्पन्न हो वहाँ वीभत्स रस होता है।
उत्तर: असत्य (जहाँ अलौकिक आश्चर्य का भाव उत्पन्न हो वहाँ अद्भुत रस होता है, वीभत्स रस नहीं।) - कबीर-तुलसी वृंद रहीम आदि कवियों के भक्ति और नीति परक दोहे पाठ्य पुस्तक के अंतर्गत आते हैं।
उत्तर: सत्य (ये कवि हिंदी साहित्य के भक्ति और नीति काव्य परंपरा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।) - अन्योक्ति अलंकार में लोकसीमा को पार करके बढ़ा चढ़ाकर वर्णन होता है।
उत्तर: असत्य (लोकसीमा को पार करके बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन अतिशयोक्ति अलंकार में होता है, अन्योक्ति में नहीं। अन्योक्ति में अप्रस्तुत के माध्यम से प्रस्तुत का वर्णन होता है।) - ‘बन-ठन के आए, काले-काले मेघ’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का उदाहरण है।
उत्तर: असत्य (यहाँ ‘काले-काले’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार हो सकता है, लेकिन ‘बन-ठन के आए’ और ‘मेघ’ के संदर्भ में यह मानवीकरण अलंकार का भी उदाहरण हो सकता है। यह वाक्य पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का स्पष्ट या एकमात्र उदाहरण नहीं है। अगर सिर्फ ‘काले-काले’ शब्द को देखें तो वह पुनरुक्ति प्रकाश है, लेकिन पूरे वाक्य में ‘बन-ठन के आए’ होने के कारण मानवीकरण प्रमुख है।)
(नोट: इस प्रश्न में थोड़ी अस्पष्टता है। यदि केवल ‘काले-काले’ पर ध्यान दिया जाए तो पुनरुक्ति प्रकाश है, लेकिन ‘बन-ठन के आए’ क्रिया बादलों (प्रकृति) को मानव रूप दे रही है, जो मानवीकरण अलंकार है। आमतौर पर ऐसे मामलों में मानवीकरण को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए, यह कथन असत्य है क्योंकि यह केवल पुनरुक्ति प्रकाश पर जोर देता है और मानवीकरण को छोड़ देता है, या इसे एक गलत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करता है।)
अति लघु उत्तरीय / लघु उत्तरीय प्रश्न (02 अंक)
- काव्य की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: आचार्य विश्वनाथ के अनुसार, “रसात्मकं वाक्यं काव्यम्।” अर्थात, रस युक्त वाक्य ही काव्य है। दूसरे शब्दों में, ऐसा शब्द और अर्थ का संगम जिसमें पाठक या श्रोता को आनंद की अनुभूति हो, काव्य कहलाता है। - महाकाव्य किसे कहते हैं?
उत्तर: महाकाव्य वह वृहत् (बड़ा) काव्य है जिसमें किसी महान नायक के संपूर्ण जीवन का विस्तृत वर्णन होता है। इसमें अनेक सर्ग (अध्याय) होते हैं और इसमें जीवन के विविध पक्षों, आदर्शों, और उदात्त भावनाओं का चित्रण होता है। इसका कथानक ऐतिहासिक या पौराणिक होता है। - दो खण्डकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सुदामाचरित्र (रचनाकार: नरोत्तमदास)
पंचवटी (रचनाकार: मैथिलीशरण गुप्त)
- रस के अंगों के नाम लिखिए।
उत्तर: रस के चार अंग होते हैं:
स्थायी भाव (मूल भाव)
विभाव (भावों को उत्पन्न करने वाले कारण)
अनुभाव (स्थायी भाव के जागृत होने पर शारीरिक चेष्टाएँ)
संचारी भाव (क्षणिक भाव जो स्थायी भाव को पुष्ट करते हैं)
- ‘छन्द’ के कितने भेद हैं?
उत्तर: छन्द के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं:
मात्रिक छन्द
वर्णिक छन्द
- ‘विभाव’ किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: ‘विभाव’ उन कारणों, वस्तुओं या परिस्थितियों को कहते हैं जिनके कारण हृदय में स्थायी भाव जागृत होते हैं।
यह दो प्रकार के होते हैं:
आलंबन विभाव: वह मुख्य वस्तु या व्यक्ति जिसके कारण भाव जागृत होता है (जैसे नायक-नायिका)।
उद्दीपन विभाव: वे बाहरी परिस्थितियाँ जो स्थायी भाव को और तीव्र करती हैं (जैसे चांदनी, कोयल की कूक)।
- ‘चौपाई’ छन्द का उदाहरण लिखिए।
उत्तर: चौपाई एक सम मात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण:
‘मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।।’ - अतिशयोक्ति अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: अतिशयोक्ति अलंकार वह होता है जहाँ किसी बात, वस्तु या गुण का इतना बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया जाए कि वह लोक-सीमा (सामान्य वास्तविकता) का अतिक्रमण कर जाए, यानी असंभव सा लगे।
उदाहरण:
‘हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग।
लंका सिगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।’
(यहाँ हनुमान की पूँछ में आग लगने से पहले ही पूरी लंका का जल जाना बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन है।) - अलंकार किसे कहते हैं?
उत्तर: अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्वों या साधनों को कहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं। अलंकार के प्रयोग से काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है और उसकी सुंदरता बढ़ जाती है। - हिन्दी के दो प्रसिद्ध महाकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
रामचरितमानस (रचनाकार: गोस्वामी तुलसीदास)
कामायनी (रचनाकार: जयशंकर प्रसाद)
- वीर रस और रौद्र रस के स्थायी भाव लिखिए।
उत्तर:
वीर रस का स्थायी भाव → उत्साह
रौद्र रस का स्थायी भाव → क्रोध
- ‘वात्सल्य’ रस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: वात्सल्य रस वह होता है जहाँ संतान के प्रति माता-पिता, गुरुजनों या बड़ों के प्रेम, स्नेह, दुलार और ममता का भाव व्यक्त होता है। इसका स्थायी भाव ‘वत्सलता’ या ‘स्नेह’ होता है।
उदाहरण:
‘किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।
मनिमय कनक नंद कैं आँगन बिम्ब पकरिबै धावत।।’ - प्रबंध काव्य के भेद लिखिए।
उत्तर: प्रबंध काव्य के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं:
महाकाव्य
खण्डकाव्य
- महाकाव्य एवं खण्ड काव्य में अंतर लिखिए।
उत्तर: अंतर का आधार महाकाव्य खण्डकाव्य विषय-वस्तु इसमें नायक के जीवन का समग्र, व्यापक और विस्तृत चित्रण होता है। इसमें नायक के जीवन की किसी एक घटना या एक पक्ष का पूर्णता के साथ चित्रण होता है। विस्तार इसका आकार बड़ा होता है और इसमें कई सर्ग (अध्याय) होते हैं। इसका आकार सीमित होता है और इसमें सर्गों की संख्या कम होती है। पात्र इसमें अनेक मुख्य और गौण पात्र होते हैं। इसमें पात्रों की संख्या सीमित होती है। उदाहरण रामचरितमानस, कामायनी सुदामाचरित्र, पंचवटी - अन्योक्ति अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: अन्योक्ति अलंकार वह होता है जहाँ अप्रस्तुत (जो सामने न हो) के माध्यम से प्रस्तुत (जो कहने का उद्देश्य हो) का वर्णन किया जाता है। इसमें सीधे बात न कहकर किसी और के माध्यम से बात कही जाती है।
उदाहरण:
‘माली आवत देखकरि, कलियाँ करै पुकार।
फूले फूले चुन लिये, कालि हमारी बार।।’
(यहाँ माली और कलियों के माध्यम से मनुष्य और मृत्यु के विषय में बात कही गई है।) - दसवाँ रस किसे माना गया है? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: दसवाँ रस वात्सल्य रस को माना गया है।
उदाहरण:
‘किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।
मनिमय कनक नंद कैं आँगन बिम्ब पकरिबै धावत।।’
(यहाँ कृष्ण के बाल रूप के प्रति माता यशोदा के स्नेह का वर्णन है।) - ‘यमाताराजभानसलगा’ यह सूत्र किसके लिए और क्यों प्रयुक्त होता है?
उत्तर: ‘यमाताराजभानसलगा’ यह सूत्र गणों के लिए प्रयुक्त होता है।
यह क्यों प्रयुक्त होता है: यह सूत्र वर्णिक छन्दों में गणों की पहचान करने और उनके लघु-गुरु क्रम को समझने में मदद करता है। इस सूत्र के प्रत्येक अक्षर से एक गण बनता है और अगले दो अक्षरों से उसकी मात्रा (लघु-गुरु) निर्धारित होती है। जैसे:
यगण (य+मा+ता) – लघु, गुरु, गुरु (ऽऽ)
मगण (मा+ता+रा) – गुरु, गुरु, गुरु (ऽऽऽ)
और इसी तरह सभी आठ गणों को याद रखने के लिए यह सूत्र बहुत उपयोगी है।
- ‘मानवीकरण’ अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: मानवीकरण अलंकार वह होता है जहाँ प्रकृति की निर्जीव वस्तुओं या अमूर्त भावों को मानव की तरह क्रियाएँ करते या व्यवहार करते हुए दिखाया जाता है।
उदाहरण:
‘मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के।’
(यहाँ बादलों को सजे-धजे मेहमानों की तरह आते हुए दिखाया गया है, जो एक मानवीय क्रिया है।) - विभाव और अनुभाव में अंतर लिखिए।
उत्तर: अंतर का आधार विभाव अनुभाव परिभाषा वे कारण जो हृदय में स्थायी भावों को उत्पन्न करते हैं। स्थायी भावों के जागृत होने पर शरीर की बाहरी चेष्टाएँ या क्रियाएँ। प्रकार आलंबन विभाव और उद्दीपन विभाव। कायिक (शारीरिक), वाचिक (वाचन), आहार्य (वेशभूषा) और सात्विक (अनैच्छिक)। भूमिका भावों को जगाने वाले कारण। भावों को व्यक्त करने वाले लक्षण। उदाहरण नायक/नायिका, सुंदर दृश्य, चांदनी। हँसना, रोना, आँखों से आँसू आना, काँपना, पसीना आना। - तीन महाकाव्यों के नाम रचनाकार सहित लिखिए।
उत्तर:
रामचरितमानस – गोस्वामी तुलसीदास
कामायनी – जयशंकर प्रसाद
पृथ्वीराज रासो – चंदबरदाई
- चौपाई छन्द के लक्षण उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
लक्षण:
यह एक सम मात्रिक छन्द है।
इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।
प्रत्येक चरण के अंत में गुरु (ऽ) लघु (।) नहीं आता।
चरणों के अंत में प्रायः यति होती है और तुक मिलता है।
उदाहरण:
‘मंगल भवन अमंगल हारी। (16 मात्राएँ)
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।। (16 मात्राएँ)’
- ‘स्थायी भाव’ किसे कहते हैं और यह कहाँ विद्यमान रहते हैं?
उत्तर: ‘स्थायी भाव’ वे मूल या प्रधान भाव होते हैं जो मनुष्य के हृदय में सुषुप्त (असुप्त) अवस्था में हमेशा विद्यमान रहते हैं और उचित अवसर मिलने पर प्रकट होते हैं। ये भाव श्रोता या पाठक के हृदय में स्थायी रूप से विद्यमान रहते हैं और रस की अवस्था तक पहुँचते हैं। प्रत्येक रस का एक निश्चित स्थायी भाव होता है। - काव्य के प्रमुख भेद लिखिए।
उत्तर: काव्य के प्रमुख भेद दो हैं:
श्रव्य काव्य: वह काव्य जिसे सुना या पढ़ा जाता है (जैसे कविता, कहानी)।
दृश्य काव्य: वह काव्य जिसे देखा और सुना दोनों जा सकता है, जिसका मंचन किया जा सकता है (जैसे नाटक, एकांकी)।
- काव्य किसे कहते हैं? काव्य के प्रमुख भेदों को समझाइए।
उत्तर:
काव्य: आचार्य विश्वनाथ के अनुसार, “रसात्मकं वाक्यं काव्यम्।” अर्थात, रस से परिपूर्ण वाक्य ही काव्य है। यह शब्द और अर्थ का ऐसा मेल है जो पाठक या श्रोता के हृदय में आनंद और भावों की अनुभूति उत्पन्न करता है।
काव्य के प्रमुख भेद:
श्रव्य काव्य (Auditory/Readable Poetry):
वह काव्य जिसे पढ़कर या सुनकर आनंद प्राप्त किया जाता है।
इसके भी दो मुख्य भेद हैं:
प्रबंध काव्य: जिसमें कोई कथा या घटना क्रमबद्ध रूप से चलती है। यह महाकाव्य और खण्डकाव्य में बंटा है।
मुक्तक काव्य: जिसमें प्रत्येक पद या छंद अपने आप में पूर्ण होता है और उसका पूर्वापर संबंध अनिवार्य नहीं होता।
दृश्य काव्य (Dramatic Poetry):
वह काव्य जिसे देखा और सुना दोनों जा सकता है, अर्थात जिसका मंच पर अभिनय किया जा सके।
उदाहरण: नाटक, एकांकी।
- ‘महाकाव्य’ के प्रमुख लक्षण लिखिए एवं एक महाकाव्य का नाम रचनाकार सहित लिखिए।
उत्तर:
महाकाव्य के प्रमुख लक्षण:
इसमें किसी महान नायक के संपूर्ण जीवन का विस्तृत और व्यापक वर्णन होता है।
इसमें अनेक सर्ग (अध्याय) होते हैं (प्रायः 8 या अधिक)।
कथानक ऐतिहासिक या पौराणिक होता है।
इसमें वीर, श्रृंगार, शांत आदि रसों में से कोई एक प्रधान रस होता है और अन्य रस गौण होते हैं।
इसमें जीवन के उदात्त आदर्शों, प्रकृति चित्रण और मानवीय मूल्यों का चित्रण होता है।
इसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में से किसी एक की प्राप्ति दिखाना होता है।
महाकाव्य का नाम रचनाकार सहित:
रामचरितमानस – गोस्वामी तुलसीदास
- ‘खण्डकाव्य’ को खण्डकाव्य क्यों कहते हैं? परिभाषित करते हुए खण्डकाव्य के प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर: खण्डकाव्य को ‘खण्डकाव्य’ इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें किसी नायक के संपूर्ण जीवन का वर्णन न होकर उसके जीवन के किसी एक खंड (अंश) या एक महत्वपूर्ण घटना का ही पूर्णता के साथ चित्रण किया जाता है। यह अपने आप में पूर्ण होता है, लेकिन महाकाव्य जितना विस्तृत नहीं होता।
खण्डकाव्य की परिभाषा और लक्षण:
यह काव्य का वह रूप है जिसमें नायक के जीवन के किसी एक विशेष भाग, घटना या एक पक्ष का पूर्णता के साथ वर्णन होता है।
इसका आकार महाकाव्य की तुलना में छोटा होता है।
इसमें सर्गों की संख्या सीमित होती है।
कथानक एक ही घटना या भाव पर केंद्रित होता है।
उदाहरण: सुदामाचरित्र, पंचवटी।
- प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य में अंतर लिखिए।
उत्तर: अंतर का आधार प्रबंध काव्य मुक्तक काव्य कथानक इसमें एक क्रमबद्ध कथा होती है, जो शुरू से अंत तक जुड़ी होती है। इसमें प्रत्येक पद या छंद अपने आप में पूर्ण होता है, कोई पूर्वापर कथा नहीं होती। विस्तार विस्तृत होता है, जिसमें कई घटनाएँ और पात्र होते हैं। संक्षिप्त होता है, जिसमें एक ही भाव या विचार व्यक्त होता है। निर्भरता छंद एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं क्योंकि वे एक कथा को आगे बढ़ाते हैं। प्रत्येक छंद स्वतंत्र होता है, उसका अर्थ समझने के लिए पिछले छंद को जानना जरूरी नहीं। उदाहरण रामचरितमानस (महाकाव्य), सुदामाचरित्र (खण्डकाव्य) कबीर के दोहे, बिहारी के दोहे। - ‘रस’ किसे कहते हैं? आचार्य जगन्नाथ के अनुसार रस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: ‘रस’ काव्य को पढ़ने, सुनने या नाटक को देखने से पाठक, श्रोता या दर्शक को मिलने वाली अलौकिक आनंद की अनुभूति को कहते हैं। यह काव्य की आत्मा माना जाता है।
आचार्य जगन्नाथ के अनुसार रस की परिभाषा: “रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्।” अर्थात्, रमणीय (सुंदर, आनंददायक) अर्थ का प्रतिपादन करने वाला शब्द ही काव्य है। यद्यपि यह परिभाषा सीधे रस की नहीं, काव्य की है, लेकिन यह आनंद के महत्व पर बल देती है।
(सही संदर्भ: आचार्य विश्वनाथ के अनुसार, “रसात्मकं वाक्यं काव्यम्।” यह रस के साथ काव्य के संबंध को सीधे बताता है। आचार्य जगन्नाथ का ध्यान शब्द और अर्थ की रमणीयता पर अधिक था।) - रस के प्रमुख अंगों का वर्णन उदाहरण देकर कीजिए।
उत्तर: रस के चार प्रमुख अंग होते हैं:
स्थायी भाव: वे मूल भाव जो मनुष्य के हृदय में स्थायी रूप से विद्यमान रहते हैं। प्रत्येक रस का एक स्थायी भाव होता है।
उदाहरण: श्रृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ (प्रेम) है।
विभाव: वे कारण, वस्तुएँ या परिस्थितियाँ जो हृदय में स्थायी भावों को जागृत करती हैं।
आलंबन विभाव: जिसके कारण भाव जागृत हो (जैसे नायक-नायिका)।
उद्दीपन विभाव: जो भावों को और तीव्र करे (जैसे चांदनी, सुंदर बगीचा)।
अनुभाव: स्थायी भाव के जागृत होने पर आश्रय (जिसके मन में भाव उत्पन्न हो) की शारीरिक चेष्टाएँ या क्रियाएँ।
उदाहरण: प्रेम में मुस्कराना, आँखों में चमक आना। क्रोध में आँखें लाल होना, होंठ फड़कना।
संचारी भाव (व्यभिचारी भाव): वे क्षणिक भाव जो स्थायी भावों के साथ आकर उन्हें पुष्ट करते हैं और तुरंत लुप्त हो जाते हैं। इनकी संख्या 33 मानी गई है।
उदाहरण: प्रेम में ‘लज्जा’, ‘चपलता’, ‘हर्ष’ आदि संचारी भाव हो सकते हैं।
- पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार वह होता है जहाँ काव्य में किसी शब्द का दो बार प्रयोग होता है, लेकिन दोनों बार उसका अर्थ नहीं बदलता। शब्द का दोहराव केवल कथन में सौंदर्य, बल या प्रभाव उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
उदाहरण:
‘मीठे-मीठे बोल, मन भावन।’
(यहाँ ‘मीठे-मीठे’ शब्द दो बार आया है, लेकिन दोनों का अर्थ ‘मधुर’ ही है। दोहराव केवल मधुरता पर बल देने के लिए है।) - अलंकार की परिभाषा एवं भेद लिखिए।
उत्तर:
अलंकार की परिभाषा: अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्वों को कहते हैं। जिस प्रकार आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार अलंकार काव्य की सुंदरता और प्रभावशीलता को बढ़ाते हैं।
अलंकार के प्रमुख भेद:
शब्दालंकार: जहाँ शब्दों के प्रयोग से काव्य में सौंदर्य या चमत्कार उत्पन्न होता है (जैसे अनुप्रास, यमक, श्लेष)।
अर्थालंकार: जहाँ अर्थ के माध्यम से काव्य में सौंदर्य या चमत्कार उत्पन्न होता है (जैसे उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण, अतिशयोक्ति)।
उभयालंकार: जहाँ शब्द और अर्थ दोनों के कारण काव्य में सौंदर्य आता है (यह कम प्रचलित है)।
- आख्यानक गीतियाँ किसे कहते हैं? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: आख्यानक गीतियाँ वे काव्य रचनाएँ होती हैं जिनमें किसी कहानी (आख्यान) या घटना को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इनमें कथा तत्व और गेयता (गीत गाने योग्य गुण) दोनों का समन्वय होता है। ये कथाएँ प्रायः वीर रस, करुण रस या अन्य भावनात्मक विषयों पर आधारित होती हैं।
उदाहरण:
‘झाँसी की रानी’ (सुभद्रा कुमारी चौहान) – इसमें रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी को गीतात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- छन्द की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: छन्द काव्य के नियमों को कहते हैं, जिनमें मात्राओं, वर्णों, यति (विराम), गति (लय) और तुक आदि का विशेष ध्यान रखा जाता है। छन्दबद्ध रचना को गेय (गाया जा सकने योग्य) और प्रभावपूर्ण बनाने में सहायक होते हैं। - दोहा छन्द का उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
‘रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।।’ - दोहा छन्द की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: दोहा एक अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं, तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। चरणों के अंत में प्रायः तुक मिलता है।