Weeds: Meaning, Characteristics and Classification : कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए ‘खरपतवार: अर्थ, विशेषताएँ, वर्गीकरण और महत्व’ (Weeds: Meaning, Characteristics, Classification, and Importance) पर एक अति विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख। इस लेख में खरपतवार विज्ञान (Weed Science) के मूलभूत सिद्धांतों, खरपतवारों के प्रकार, फसलों पर उनके हानिकारक और लाभदायक प्रभावों, और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) का गहन अध्ययन किया गया है। यह लेख बोर्ड परीक्षाओं और कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं (Agricultural Competitive Exams) के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका (Complete Guide) है।
खरपतवार: अर्थ, विशेषताएँ और वर्गीकरण (Weeds: Meaning, Characteristics and Classification) – संपूर्ण अध्ययन (कक्षा 12 कृषि विज्ञान के लिए)
1. प्रस्तावना (Introduction)
भारतीय कृषि (Indian Agriculture) में फसल उत्पादन (Crop Production) को अधिकतम स्तर तक ले जाने के लिए कई कृषि क्रियाएं की जाती हैं। किसान अपने खेत में उत्तम बीज बोता है, खाद और उर्वरक डालता है, और समय पर सिंचाई करता है। परंतु, मुख्य फसल के साथ कुछ ऐसे अनचाहे पौधे (Unwanted plants) भी उग आते हैं, जिन्हें किसान ने नहीं बोया है। ये पौधे मुख्य फसल के साथ जल (Water), प्रकाश (Light), स्थान (Space) और पोषक तत्वों (Nutrients) के लिए भयंकर प्रतिस्पर्धा (Competition) करते हैं। इन्हीं अनचाहे पौधों को खरपतवार (Weeds) कहा जाता है।
कृषि विज्ञान में कीटों और बीमारियों की तुलना में खरपतवारों से फसल को सबसे अधिक नुकसान होता है (लगभग 30 से 35 प्रतिशत)। कक्षा 12 के कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के पाठ्यक्रम में ‘खरपतवार प्रबंधन’ (Weed Management) एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इस विस्तृत लेख में हम खरपतवार की परिभाषा, उसकी जैविक विशेषताओं, वर्गीकरण, और कृषि में उसके प्रभावों का वैज्ञानिक और व्यावहारिक (Scientific and Practical) अध्ययन करेंगे।
2. खरपतवार का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Weed)
खरपतवार का अर्थ (Meaning of Weed):
साधारण शब्दों में, “खेत में उगा हुआ कोई भी अनचाहा या अवांछित पौधा (Unwanted plant), जो बिना बोए उग आता है और किसान को लाभ के स्थान पर हानि (Harm/Damage) पहुंचाता है, खरपतवार कहलाता है।”
खरपतवार विज्ञान के पिता (Father of Weed Science):
प्रसिद्ध अंग्रेजी वैज्ञानिक जेथ्रो टुल (Jethro Tull) को खरपतवार विज्ञान का जनक कहा जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘हॉर्स होइंग हसबेंडरी’ (Horse Hoeing Husbandry) में ‘Weed’ (खरपतवार) शब्द का प्रयोग किया था।
खरपतवार की वैज्ञानिक परिभाषाएं (Scientific Definitions):
- जेथ्रो टुल के अनुसार: “खरपतवार वह पौधा है जो वहां उगता है जहां उसकी इच्छा या आवश्यकता नहीं होती है (A plant growing where it is not desired)।”
- कृषि दृष्टिकोण से: “कोई भी पौधा जो अपनी उचित जगह से बाहर (Out of place) उगता है और मुख्य फसल के उत्पादन (Crop Yield) और गुणवत्ता (Quality) को घटाता है, खरपतवार कहलाता है।”उदाहरण: यदि गेहूं (Wheat) के खेत में सरसों (Mustard) का पौधा बिना बोए उग आता है, तो वहां सरसों का पौधा भी ‘खरपतवार’ ही कहलाएगा, भले ही वह एक आर्थिक फसल है।
3. खरपतवारों की विशेषताएँ (Characteristics of Weeds)
खरपतवार प्रकृति में बहुत ही कठोर (Hardy) और संघर्षशील होते हैं। प्रतिकूल वातावरणीय परिस्थितियों (Adverse environmental conditions) में भी जीवित रहने की उनकी क्षमता फसलों से कहीं अधिक होती है। खरपतवारों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- अधिक बीज उत्पादन (Prodigious Seed Production):खरपतवार के पौधे मुख्य फसल की तुलना में कई गुना अधिक बीज (Seeds) पैदा करते हैं।उदाहरण: मकोय (Makoi) का एक पौधा लगभग 1,75,000 बीज पैदा कर सकता है। चौलाई (Amaranthus) का एक पौधा 1,96,000 तक बीज उत्पन्न कर सकता है।
- बीजों की लंबी जीवन क्षमता (Deep/Long Seed Viability):खरपतवारों के बीज मिट्टी के अंदर कई वर्षों तक जीवित (Viable) रह सकते हैं। जब भी उन्हें अनुकूल परिस्थितियां (Favorable conditions) मिलती हैं, वे अंकुरित (Germinate) हो जाते हैं। बथुआ (Chenopodium album) और जंगली सरसों के बीज मिट्टी में 30 से 40 साल तक सुरक्षित रह सकते हैं।
- सुषुप्तावस्था (Dormancy):खरपतवार के बीजों में गहरी सुषुप्तावस्था (Dormancy) पाई जाती है। इसका अर्थ है कि बीज परिपक्व (Mature) होने के तुरंत बाद नहीं उगते, बल्कि अपने अनुकूल मौसम के आने का इंतजार करते हैं। यह उन्हें नष्ट होने से बचाता है।
- गहरी जड़ प्रणाली (Deep Root System):खरपतवारों की जड़ें (Roots) फसल की जड़ों की तुलना में बहुत गहराई तक जाती हैं, जिससे वे मिट्टी की निचली सतह से भी नमी (Moisture) और पोषक तत्व (Nutrients) खींच लेते हैं। उदाहरण: काँस (Kans) और हिरनखुरी (Convolvulus arvensis) की जड़ें बहुत गहरी होती हैं।
- समान आकारिकी (Morphological Similarity):कुछ खरपतवार देखने में बिल्कुल मुख्य फसल जैसे लगते हैं, जिससे किसान उन्हें पहचान नहीं पाता।उदाहरण: गेहूं के खेत में उगने वाला ‘गेहूं का मामा’ या गुल्ली डंडा (Phalaris minor) बिल्कुल गेहूं के पौधे जैसा दिखता है।
- वानस्पतिक प्रजनन (Vegetative Reproduction):कई बहुवर्षीय खरपतवार केवल बीजों से ही नहीं, बल्कि अपने वानस्पतिक भागों (Vegetative parts) जैसे— जड़ (Root), प्रकंद (Rhizome), तना (Stem), कंद (Tuber) और सकर (Sucker) द्वारा भी तेजी से फैलते हैं।उदाहरण: मोथा (Cyperus rotundus) अपने कंदों (Tubers) से और दूब घास (Cynodon dactylon) अपने तनों (Runners) से फैलती है।
- शीघ्र वृद्धि और विकास (Rapid Growth and Development):खरपतवारों के पौधे फसल के पौधों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। वे जल्दी से बड़े होकर फसल को ढक लेते हैं और सूर्य के प्रकाश (Sunlight) को रोक लेते हैं।
- सुरक्षात्मक आवरण एवं संरचना (Protective Structures):प्रकृति ने खरपतवारों को जानवरों और कीटों से बचने के लिए विशेष सुरक्षा कवच दिए हैं। कुछ में कांटे (Thorns) होते हैं (जैसे— सत्यानाशी / Argemone mexicana), कुछ में दुर्गंध (Bad smell) होती है, और कुछ जहरीले (Poisonous) होते हैं, जिससे पशु इन्हें नहीं खाते।
4. खरपतवारों का वर्गीकरण (Classification of Weeds)
खरपतवारों को उनके जीवन चक्र, बीजपत्रों, फसल संबंध और जलवायु के आधार पर विभिन्न वर्गों में विभाजित किया गया है। कक्षा 12 के छात्रों के लिए यह वर्गीकरण परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
(A) जीवन चक्र के आधार पर (Based on Life Cycle):
- एकवर्षीय खरपतवार (Annual Weeds):ये वे खरपतवार हैं जो अपना जीवन चक्र (Life cycle)—यानी बीज से उगना, बढ़ना, फूल आना, बीज बनना और सूखना—एक ही वर्ष या एक ही ऋतु (Season) में पूरा कर लेते हैं। इन्हें मौसम के आधार पर बांटा गया है:
- खरीफ के खरपतवार (Kharif Weeds): जो वर्षा ऋतु में उगते हैं। उदाहरण: पत्थरचट्टा (Trianthema portulacastrum), सांवा (Echinochloa crus-galli), दूब घास।
- रबी के खरपतवार (Rabi Weeds): जो शीत ऋतु में गेहूं-चने के साथ उगते हैं। उदाहरण: बथुआ (Chenopodium album), कृष्णनील (Anagallis arvensis), जंगली जई (Avena fatua)।
- जायद के खरपतवार (Zaid Weeds): जो ग्रीष्म ऋतु में उगते हैं।
- द्विवर्षीय खरपतवार (Biennial Weeds):ये वे खरपतवार हैं जो अपना जीवन चक्र दो वर्षों में पूरा करते हैं। पहले वर्ष में ये अपनी वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative growth) करते हैं और दूसरे वर्ष में इनमें फूल और बीज (Flowers and Seeds) बनते हैं।उदाहरण: जंगली गाजर (Daucus carota), कासनी (Cichorium intybus), जंगली गोभी।
- बहुवर्षीय खरपतवार (Perennial Weeds):ये खरपतवार एक बार उगने के बाद कई वर्षों तक जीवित रहते हैं और हर साल फूल तथा बीज पैदा करते हैं। इनका नियंत्रण (Control) सबसे कठिन होता है क्योंकि ये मुख्य रूप से भूमिगत वानस्पतिक भागों (Underground vegetative parts) से फैलते हैं।उदाहरण: मोथा (Cyperus rotundus), काँस (Saccharum spontaneum), हिरनखुरी (Convolvulus arvensis)।
(B) बीजपत्रों के आधार पर (Based on Cotyledons / Leaf Shape):
- एकबीजपत्री या संकरी पत्ती वाले खरपतवार (Monocots or Narrow-leaved Weeds):इनके बीजों में केवल एक बीजपत्र (Cotyledon) होता है और इनकी पत्तियां लंबी और संकरी (Narrow) होती हैं। पत्तियों में समानांतर शिराविन्यास (Parallel venation) पाया जाता है।उदाहरण: मोथा, दूब घास, जंगली जई, गुल्ली डंडा (Phalaris minor)।
- द्विबीजपत्री या चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार (Dicots or Broad-leaved Weeds):इनके बीजों में दो बीजपत्र होते हैं और इनकी पत्तियां चौड़ी (Broad) होती हैं। पत्तियों में जालिकारूपी शिराविन्यास (Reticulate venation) होता है।उदाहरण: बथुआ, हिरनखुरी, मकोय, सत्यानाशी।
(C) फसल संबंध या निर्भरता के आधार पर (Based on Crop Association / Dependence):
यह वर्गीकरण बहुत ही महत्वपूर्ण है और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछा जाता है:
- निरपेक्ष खरपतवार (Absolute Weeds):ये वास्तविक खरपतवार हैं। ये हमेशा किसान को नुकसान ही पहुंचाते हैं, चाहे वे किसी भी फसल में उगें। उदाहरण: मोथा, बथुआ, हिरनखुरी।
- सापेक्ष खरपतवार (Relative Weeds):जब किसी मुख्य फसल के खेत में बिना बोए किसी दूसरी फसल का पौधा उग आता है, तो उसे सापेक्ष खरपतवार कहते हैं। उदाहरण: यदि गेहूं के खेत में चने (Gram) का पौधा उग आए, तो चना यहां सापेक्ष खरपतवार कहलाएगा।
- अवांछित या रोग्यू खरपतवार (Rogue Weeds):जब मुख्य फसल की किसी एक किस्म (Variety) के खेत में उसी फसल की किसी दूसरी किस्म का पौधा उग आता है, तो उसे रोग्यू (Rogue) कहते हैं।उदाहरण: गेहूं की किस्म ‘Sonalika’ के खेत में ‘Kalyansona’ किस्म के पौधे का उग आना। इन्हें उखाड़ कर फेंकने की क्रिया को रोगिंग (Roguing) कहते हैं।
- नकलची या आपत्तिजनक खरपतवार (Mimicry / Objectionable Weeds):वे खरपतवार जिनके बीज (Seeds) या पौधे का आकार मुख्य फसल से इतना मिलता-जुलता है कि उन्हें आसानी से अलग नहीं किया जा सकता।उदाहरण: गेहूं में ‘गेहूं का मामा’ (Phalaris minor) पौधे के आकार में नकल करता है, जबकि सरसों (Mustard) में ‘सत्यानाशी’ (Argemone mexicana) के बीज सरसों के बीजों जैसे दिखते हैं।
(D) परजीविता के आधार पर (Based on Parasitism):
कुछ खरपतवार अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते, बल्कि दूसरी फसलों (Host plants) पर निर्भर रहते हैं। इन्हें 4 भागों में बांटा गया है (याद रखने की ट्रिक: CLOS):
- C – Cuscuta (अमरबेल): पूर्ण तना परजीवी (Total Stem Parasite)। यह रिजका (Lucerne) और बरसीम पर लगती है।
- L – Loranthus (लोरेन्थस / बांदा): अर्ध तना परजीवी (Partial Stem Parasite)। यह आम (Mango) और सेब के पेड़ों पर लगता है।
- O – Orobanche (ओरोबैंकी): पूर्ण जड़ परजीवी (Total Root Parasite)। यह सरसों, तंबाकू (Tobacco) और टमाटर की जड़ों पर लगता है।
- S – Striga (स्ट्राईगा / रुखड़ी): अर्ध जड़ परजीवी (Partial Root Parasite)। यह ज्वार (Sorghum), बाजरा और गन्ने की जड़ों पर लगता है।
5. खरपतवारों का प्रकीर्णन या फैलाव (Dispersal of Weeds)
खरपतवार के बीज एक स्थान से दूसरे स्थान (One place to another) तक बहुत आसानी से फैल जाते हैं। इनके प्रकीर्णन के मुख्य साधन निम्नलिखित हैं:
- हवा द्वारा (By Wind – Anemochory): बहुत से खरपतवारों के बीज अत्यंत हल्के होते हैं और उनके ऊपर बाल जैसी संरचनाएं (Pappus/Coma) होती हैं। हवा इन्हें मीलों दूर तक उड़ा ले जाती है। उदाहरण: मदार (Calotropis), आक।
- जल द्वारा (By Water – Hydrochory): सिंचाई के पानी या बारिश की बाढ़ के साथ खरपतवार के बीज बहकर दूसरे खेतों में पहुंच जाते हैं।
- पशुओं और पक्षियों द्वारा (By Animals and Birds – Zoochory): पशु जब चारा खाते हैं, तो कुछ कठोर बीज बिना पचे उनके गोबर (Dung) के साथ बाहर आ जाते हैं और खेत में फैल जाते हैं। इसके अलावा गोखरू (Xanthium) जैसे कांटों वाले बीज पशुओं के शरीर या ऊन (Wool) से चिपक कर फैलते हैं।
- मनुष्य द्वारा (By Humans): अशुद्ध बीजों (Impure seeds) की बुवाई करने, कृषि यंत्रों (Agricultural implements) जैसे ट्रैक्टर, कल्टीवेटर को बिना साफ किए दूसरे खेत में ले जाने से भी खरपतवार फैलते हैं।
6. खरपतवारों से होने वाली हानियां (Harmful Effects / Disadvantages of Weeds)
फसलों को बीमारियों और कीटों से जितना नुकसान होता है, उससे कहीं अधिक नुकसान खरपतवारों से होता है। खरपतवारों से होने वाली प्रमुख हानियां निम्नलिखित हैं:
- फसल के साथ प्रतिस्पर्धा (Competition with Crop):खरपतवार मुख्य फसल के साथ स्थान (Space), सूर्य के प्रकाश (Light), जल (Water) और पोषक तत्वों (Nutrients) के लिए भयंकर प्रतिस्पर्धा करते हैं। एक अनुमान के अनुसार, खरपतवार मिट्टी से मुख्य फसल की तुलना में नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटैशियम (K) बहुत तेजी से सोख लेते हैं, जिससे फसल कमजोर रह जाती है।
- उपज में भारी कमी (Reduction in Crop Yield):प्रतिस्पर्धा के कारण फसल की वृद्धि रुक जाती है और उपज में 30% से 50% तक, और कभी-कभी गंभीर स्थिति में 100% तक की कमी आ सकती है।
- कृषि उत्पाद की गुणवत्ता में कमी (Reduction in Quality of Produce):जब फसल के बीजों के साथ खरपतवार के बीज मिल जाते हैं, तो बाजार में उपज का मूल्य (Market value) कम हो जाता है। उदाहरण: सरसों के बीजों में सत्यानाशी (Argemone) के बीज मिलने से उसका तेल दूषित हो जाता है, जिससे मनुष्यों में ‘ड्रॉप्सी’ (Dropsy) नामक भयंकर बीमारी हो जाती है। इसी प्रकार गेहूं में जंगली लहसुन मिलने से आटे से बदबू आने लगती है।
- कीटों और रोगों को आश्रय (Host for Pests and Diseases):खरपतवार कई हानिकारक कीटों (Insects) और रोगजनकों (Pathogens) के लिए वैकल्पिक परपोषी (Alternate host) का कार्य करते हैं। जब खेत में मुख्य फसल नहीं होती, तब कीट इन खरपतवारों पर जिंदा रहते हैं।
- भूमि के मूल्य में कमी (Reduction in Land Value):जिस खेत में काँस (Kans) या मोथा जैसे जिद्दी बहुवर्षीय खरपतवार उग आते हैं, उस भूमि की कीमत बहुत कम हो जाती है क्योंकि वहां खेती करना कठिन और महंगा हो जाता है।
- एलेलोपैथी प्रभाव (Allelopathy Effect):कुछ खरपतवार अपनी जड़ों से ऐसे जहरीले रासायनिक पदार्थ (Toxic chemicals) छोड़ते हैं जो मुख्य फसल के बीजों के अंकुरण (Germination) और पौधों की वृद्धि (Growth) को रोक देते हैं। इस जैविक प्रक्रिया को ‘एलेलोपैथी’ (Allelopathy) कहा जाता है। उदाहरण: गाजर घास (Parthenium) का फसलों पर एलेलोपैथिक प्रभाव।
- पशुधन और मनुष्यों को नुकसान (Harm to Livestock and Humans):गाजर घास (Parthenium hysterophorus) जैसे खरपतवारों के परागकणों (Pollen grains) से मनुष्यों में अस्थमा (Asthma), चर्म रोग (Skin allergy) और सांस की बीमारियां होती हैं। कुछ जहरीले खरपतवार खाने से पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है।
7. खरपतवारों के लाभ (Beneficial Effects of Weeds)
यद्यपि खरपतवार हानिकारक होते हैं, लेकिन प्रकृति में हर चीज़ का कुछ न कुछ उपयोग अवश्य होता है। खरपतवारों के कुछ लाभ भी हैं:
- मृदा अपरदन नियंत्रण (Soil Erosion Control): खाली खेतों में दूब घास और मोथा जैसे खरपतवार मिट्टी को अपनी जड़ों से बांध कर रखते हैं, जिससे हवा और पानी द्वारा मिट्टी का कटाव (Soil erosion) नहीं होता।
- पशु चारे के रूप में (As Fodder): कई खरपतवार जैसे दूब घास, सेंजी, और चौलाई का उपयोग पशुओं के चारे (Fodder) के रूप में किया जाता है।
- औषधीय महत्व (Medicinal Value): कई खरपतवार जड़ी-बूटियों के रूप में काम आते हैं।उदाहरण: भुई आंवला (Phyllanthus niruri) का उपयोग पीलिया (Jaundice) के इलाज में, चिरचिटा/अपामार्ग (Achyranthes aspera) का उपयोग दांत दर्द में, और मकोय का उपयोग पेट के रोगों में होता है।
- जीवांश पदार्थ में वृद्धि (Addition of Organic Matter): खरपतवारों को फूल आने से पहले मिट्टी में जोत कर दबा देने से वे हरी खाद (Green manure) का काम करते हैं और मिट्टी में जीवांश पदार्थ (Organic matter) बढ़ाते हैं।
- सब्जी के रूप में (As Vegetable): बथुआ, चौलाई और पोई (Basella) जैसे खरपतवारों का उपयोग मनुष्य सब्जी और साग के रूप में करते हैं।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
आधुनिक कृषि (Modern Agriculture) में खरपतवार प्रबंधन (Weed Management) फसल उत्पादन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और खर्चीला अंग बन चुका है। खरपतवार न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रहार करते हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) को भी चुनौती देते हैं।
कक्षा 12 के कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए खरपतवारों की जीवविज्ञान (Biology), उनके प्रकार और वर्गीकरण को समझना नितांत आवश्यक है। भविष्य में सफल कृषि करने के लिए केवल रसायनों (Herbicides) पर निर्भर न रहकर एकीकृत खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management – IWM) को अपनाना चाहिए, जिसमें सस्य, यांत्रिक, जैविक और रासायनिक सभी विधियों का संतुलित उपयोग किया जाता है। “सही समय पर की गई खरपतवार की पहचान, फसल को दे एक नया जीवन।”
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: खरपतवार विज्ञान का जनक (Father of Weed Science) किसे कहा जाता है?
उत्तर: जेथ्रो टुल (Jethro Tull) को खरपतवार विज्ञान का जनक माना जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले अपनी पुस्तक ‘Horse Hoeing Husbandry’ में ‘Weed’ शब्द का प्रयोग किया था।
प्रश्न 2: रोग्यू खरपतवार (Rogue Weed) और रोगिंग (Roguing) क्या है?
उत्तर: जब किसी मुख्य फसल की एक निश्चित किस्म (Variety) के खेत में उसी फसल की किसी दूसरी किस्म का पौधा उग आता है, तो उसे ‘रोग्यू’ कहते हैं (जैसे गेहूं की HD-2967 किस्म में PBW-343 का पौधा उगना)। इस अनचाहे पौधे को उखाड़ कर खेत से बाहर निकालने की क्रिया को रोगिंग (Roguing) कहते हैं। यह शुद्ध बीज उत्पादन (Seed Production) के लिए बहुत जरूरी है।
प्रश्न 3: आपत्तिजनक या नकलची खरपतवार (Objectionable / Mimicry Weeds) किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर: वे खरपतवार जिनके बीज या पौधों का आकार मुख्य फसल के बीजों या पौधों से इतना अधिक मिलता है कि उन्हें आसानी से अलग नहीं किया जा सकता, आपत्तिजनक खरपतवार कहलाते हैं।
उदाहरण: गेहूं की फसल में ‘गेहूं का मामा’ (Phalaris minor) और सरसों की फसल में ‘सत्यानाशी’ (Argemone mexicana)।
प्रश्न 4: पूर्ण जड़ परजीवी और पूर्ण तना परजीवी खरपतवार कौन-से हैं?
उत्तर:
- पूर्ण जड़ परजीवी (Total Root Parasite): ओरोबैंकी (Orobanche), जो मुख्य रूप से तंबाकू, सरसों और टमाटर की जड़ों पर लगता है।
- पूर्ण तना परजीवी (Total Stem Parasite): अमरबेल (Cuscuta), जो रिजका (Lucerne) और बरसीम के तने पर लिपट कर अपना भोजन प्राप्त करती है।
प्रश्न 5: एलेलोपैथी (Allelopathy) प्रभाव क्या है?
उत्तर: कुछ खरपतवार (जैसे गाजर घास / Parthenium) अपनी जड़ों या पत्तियों से ऐसे जहरीले रासायनिक पदार्थ स्रावित करते हैं, जो उनके आस-पास उगने वाली मुख्य फसल के बीजों के अंकुरण (Germination) और विकास को रोक देते हैं। पौधों के बीच होने वाली इस रासायनिक प्रतिस्पर्धा को एलेलोपैथी कहते हैं।
प्रश्न 6: सापेक्ष खरपतवार (Relative Weed) का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब किसी खेत में मुख्य फसल के साथ बिना बोए किसी दूसरी आर्थिक फसल का पौधा उग आए, तो उसे सापेक्ष खरपतवार कहते हैं। उदाहरण: गेहूं के खेत में यदि चने (Gram) का पौधा अपने आप उग आता है, तो वह चना ‘सापेक्ष खरपतवार’ कहलाएगा।