MP Board Class 12 Structure and Uses of Major Veterinary Equipments पशु चिकित्सा में प्रयुक्त प्रमुख उपकरणों की रचना और उपयोग

Structure and Uses of Major Veterinary Equipments : एमपी बोर्ड कक्षा 12 पशुपालन (MP Board Class 12 Animal Husbandry) के छात्रों के लिए ‘पशु चिकित्सा में प्रयुक्त प्रमुख उपकरणों की रचना और उपयोग’ (Structure and Uses of Veterinary Equipments) पर एक अत्यंत विस्तृत और विश्लेषणात्मक लेख।

इस लेख में ट्रोकार कैनुला, बर्डिजो कैस्ट्रेटर, प्रोबैंग, टीट साइफन, माउथ गैग और ड्रेन्चिंग बॉटल जैसे सभी प्रमुख उपकरणों की बनावट (Structure), कार्यप्रणाली (Working) और सावधानियों (Precautions) का द्विभाषी (Bilingual) रूप में गहराई से वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।

इकाई 3: पशु चिकित्सा (Veterinary Science)

अध्याय: पशु चिकित्सा में प्रयुक्त प्रमुख उपकरणों की रचना और उपयोग (Structure and Uses of Major Veterinary Equipments) – संपूर्ण अध्ययन (कक्षा 12 पशुपालन)

1. प्रस्तावना (Introduction)

डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) और पशुपालन व्यवसाय में पशुओं का उत्तम स्वास्थ्य ही किसान की आर्थिक उन्नति का आधार है। पशुपालन के दौरान पशुओं में कई बार ऐसी आपातकालीन स्थितियां (Emergency situations) उत्पन्न हो जाती हैं, जहाँ पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) के पहुँचने का इंतजार करने पर पशु की मृत्यु हो सकती है। पेट में अत्यधिक गैस भर जाना (आफरा), गले में चारा अटक जाना (चोकिंग), या चोट लगने पर अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) होना ऐसी ही कुछ स्थितियां हैं।

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इन आपातकालीन परिस्थितियों में पशु की जान बचाने और उसे त्वरित प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) प्रदान करने के लिए पशुपालक के पास कुछ विशेष ‘पशु चिकित्सा उपकरणों’ (Veterinary Equipments) का होना नितांत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, फार्म के दैनिक और शल्य कार्यों (जैसे- बधियाकरण, खुर काटना, दवा पिलाना) के लिए भी इन उपकरणों का नियमित उपयोग होता है।

मध्य प्रदेश (MP Board) के कक्षा 12 ‘पशुपालन’ (Animal Husbandry) विषय के अंतर्गत ‘पशु चिकित्सा संबंधी उपकरण’ एक अत्यधिक महत्वपूर्ण अध्याय है। बोर्ड परीक्षाओं (Board Exams) और प्रतियोगी परीक्षाओं (PAT, ICAR) में इन उपकरणों की बनावट (Structure) और उनके विशिष्ट उपयोग (Specific uses) पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। इस विस्तृत लेख में हम पशु चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाले सभी प्रमुख उपकरणों का वैज्ञानिक और व्यावहारिक (Scientific and Practical) अध्ययन करेंगे।

2. प्रमुख पशु चिकित्सा उपकरण : रचना और उपयोग (Major Veterinary Equipments : Structure and Uses)

एक कृषि छात्र और सफल डेयरी प्रबंधक को निम्नलिखित उपकरणों की पहचान, उनकी बनावट और उपयोग का सटीक ज्ञान होना चाहिए:

2.1 ट्रोकार एवं कैनुला (Trocar and Canula)

यह पशु चिकित्सा का सबसे महत्वपूर्ण जीवन रक्षक (Life-saving) उपकरण है, जिसका उपयोग पेट की गैस निकालने के लिए किया जाता है।

  • रचना (Structure): यह स्टेनलेस स्टील (Stainless steel) का बना एक विशेष उपकरण है। इसके मुख्य रूप से दो भाग होते हैं:
    1. ट्रोकार (Trocar): यह अंदर का भाग होता है जो एक भाले (Spear) की तरह अत्यंत नुकीला और ठोस होता है। इसके ऊपरी सिरे पर पकड़ने के लिए एक गोल हत्था (Handle) लगा होता है।
    2. कैनुला (Canula): यह एक खोखली नली (Hollow tube) होती है, जो ट्रोकार के ऊपर एक म्यान (Sheath) की तरह चढ़ी रहती है।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग जुगाली करने वाले पशुओं (गाय, भैंस) में आफरा या टिम्पैनी (Tympany / Bloat) रोग होने पर किया जाता है। जब रुमेन (Rumen/पेट) में अत्यधिक गैस भर जाती है और पशु का दम घुटने लगता है, तब पेट के बाईं ओर ‘पैरालम्बर फोसा’ (Left Paralumbar fossa) नामक त्रिकोणीय गड्ढे में ट्रोकार-कैनुला को एक साथ जोर से छेद कर अंदर घुसाया जाता है।
  • कार्यप्रणाली: अंदर जाते ही नुकीले ‘ट्रोकार’ को बाहर खींच लिया जाता है और खोखली ‘कैनुला’ पेट में ही फंसी रह जाती है। इस नली के माध्यम से पेट की सारी जहरीली गैस तेजी से बाहर निकल जाती है और पशु की जान बच जाती है।

2.2 बर्डिजो कैस्ट्रेटर (Burdizzo Castrator)

यह उपकरण नर पशुओं की प्रजनन क्षमता को समाप्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

  • रचना (Structure): यह लोहे या स्टील का बना एक बहुत भारी और मजबूत सरौते या चिमटे (Pincer-like tool) जैसा उपकरण होता है। इसके जबड़े (Jaws) चौड़े और कुंद (Blunt) होते हैं (यानी इनमें धार नहीं होती)। इसमें लीवर (Leverage) प्रणाली लगी होती है, जिससे हैंडल दबाने पर जबड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग नर बछड़ों, सांडों या बकरों को बधिया (Castration) करने के लिए किया जाता है।
  • कार्यप्रणाली (रक्तहीन बधियाकरण / Bloodless Castration): इसे नर पशु के अंडकोष (Testicles) के ठीक ऊपर स्थित नसों (Spermatic cord) पर रखा जाता है और हैंडल को जोर से दबा दिया जाता है। कुंद जबड़ों के कारण बाहर की त्वचा नहीं कटती (इसलिए खून नहीं निकलता), लेकिन अंदर की नस (Spermatic cord) कुचल कर नष्ट हो जाती है। रक्त संचार रुक जाने से अंडकोष कुछ ही दिनों में सूख जाते हैं। यह बधिया करने की सबसे सुरक्षित विधि है, क्योंकि इसमें ‘टिटनेस’ (Tetanus) या घाव में कीड़े पड़ने का कोई डर नहीं होता।

2.3 प्रोबैंग (Probang)

  • रचना (Structure): यह रबर, प्लास्टिक या मुलायम चमड़े (Leather) की बनी लगभग 4.5 से 5 फीट लंबी एक अत्यंत लचीली (Flexible) और खोखली नली होती है। इस नली के एक सिरे पर लकड़ी या स्टील का एक गोल गुंबद (Bulb) लगा होता है, ताकि गले में डालते समय यह नली अंदर से छिले नहीं।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग मुख्य रूप से चोकिंग (Choking) की स्थिति में किया जाता है। जब पशु जल्दी-जल्दी में सेब, आलू, या किसी कड़े चारे का बड़ा टुकड़ा निगल लेता है और वह उसकी आहार नली (Esophagus) में अटक जाता है, तो पशु को सांस लेने में दिक्कत होती है।
  • कार्यप्रणाली: प्रोबैंग को मुंह के रास्ते (माउथ गैग की मदद से) पशु की आहार नली में डाला जाता है और अटकी हुई वस्तु (Obstruction) को धकेल कर पेट (Rumen) के अंदर पहुंचा दिया जाता है।

2.4 ड्रेन्चिंग बॉटल (Drenching Bottle)

  • रचना (Structure): यह कांच, पीतल या कठोर प्लास्टिक की बनी एक विशेष प्रकार की बोतल होती है। इसकी गर्दन (Neck) लंबी, पतली और थोड़ी टेढ़ी (Curved) होती है।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग पशुओं को तरल औषधियां (Liquid medicines), काढ़ा (Decoction), या तेल (जैसे अरंडी का तेल) सुरक्षित रूप से मुंह द्वारा पिलाने (Oral administration) के लिए किया जाता है।
  • विशेषता एवं सावधानी: इसकी लंबी और टेढ़ी गर्दन के कारण दवा सीधे पशु की जीभ के पीछे (गले में) जाती है, जिससे दवा श्वास नली (Trachea) में नहीं गिरती। दवा पिलाते समय पशु की जीभ (Tongue) को कभी नहीं पकड़ना चाहिए, अन्यथा दवा फेफड़ों में चली जाएगी और पशु को ‘एस्पिरेशन निमोनिया’ (Aspiration Pneumonia) हो जाएगा।

2.5 माउथ गैग (Mouth Gag)

  • रचना (Structure): यह लोहे या स्टील का बना एक छल्लेदार (Ring-like) या चौकोर फ्रेम वाला उपकरण होता है। इसके दोनों ओर पट्टियां (Straps) लगी होती हैं, जिन्हें पशु के सींगों या कान के पीछे बांधा जा सकता है।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग पशु के मुंह को जबरदस्ती खुला रखने (To keep the mouth open) के लिए किया जाता है।
  • आवश्यकता: जब पशु के दांतों (Teeth) की जांच करनी हो, गले के अंदर फंसे कांटे को निकालना हो, या मुंह के रास्ते ‘प्रोबैंग’ (Probang) नली डालनी हो, तो माउथ गैग को पशु के ऊपरी और निचले जबड़े (Jaws) के बीच फंसा दिया जाता है। इससे पशु अपना मुंह बंद नहीं कर पाता और पशु चिकित्सक के हाथ को चबाने (Biting) का डर नहीं रहता।

2.6 टीट साइफन (Teat Siphon / Teat Slitter)

  • रचना (Structure): यह स्टेनलेस स्टील, चांदी या प्लास्टिक की बनी एक अत्यंत छोटी (लगभग 2 से 3 इंच लंबी), पतली और खोखली नली होती है। इसके निचले (नुकीले) सिरे पर छोटे-छोटे छिद्र (Pores) होते हैं।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग थन (Teat) से संबंधित रोगों में किया जाता है।
  • कार्यप्रणाली: जब थनैला रोग (Mastitis) के कारण, या किसी बाहरी चोट के कारण गाय/भैंस के थन का छिद्र (Teat canal) बंद हो जाता है और दूध बाहर नहीं निकलता, तब इस टीट साइफन को सावधानीपूर्वक थन के छिद्र में अंदर डाल दिया जाता है। इसके खोखले भाग से फंसा हुआ दूध, पानी या मवाद (Pus) आसानी से बाहर निकल आता है।

2.7 पशु चिकित्सा थर्मामीटर (Veterinary Clinical Thermometer)

  • रचना (Structure): यह मनुष्यों के थर्मामीटर जैसा ही होता है, लेकिन इसका बल्ब (Bulb – पारे वाला भाग) अधिक मोटा और छोटा (Stubby bulb) होता है। इसके पीछे एक रिंग (छल्ला) लगा होता है जिसमें धागा बांधा जा सकता है। इसमें तापमान मापने की रेंज 90°F से 110°F तक होती है।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग पशुओं के शरीर का तापमान (Body temperature) मापने के लिए किया जाता है ताकि बुखार (Fever) का पता लगाया जा सके।
  • कार्यप्रणाली: पशुओं के शरीर का तापमान उनके मुंह या कांख से नहीं, बल्कि हमेशा उनके गुदा (Rectum) से मापा जाता है। थर्मामीटर को धागे से बांधकर (ताकि वह अंदर न चला जाए) गुदा के अंदर श्लेष्मिक झिल्ली (Mucous membrane) से छुआ कर 2 मिनट तक रखा जाता है। (गाय-भैंस का सामान्य तापमान लगभग 101.5°F होता है)।

2.8 एनिमा कैन (Enema Can)

  • रचना (Structure): यह एक कैन (डिब्बा) होता है, जिसके निचले हिस्से में एक लंबी रबर की नली (Rubber tube) जुड़ी होती है। इस नली के अंतिम सिरे पर एक चिकना नोज़ल (Nozzle) लगा होता है।
  • उपयोग (Uses): इसका उपयोग पशुओं को गंभीर कब्ज (Severe Constipation / Impaction) होने पर मल (Dung) को बाहर निकालने के लिए किया जाता है।
  • कार्यप्रणाली: एनिमा कैन में साबुन का गुनगुना पानी (Warm soapy water) या ग्लिसरीन भर दिया जाता है। नोज़ल को पशु के गुदा (Rectum) में डालकर कैन को ऊपर उठा दिया जाता है, जिससे पानी दबाव के साथ आंतों (Intestines) में चला जाता है। इससे कठोर मल मुलायम होकर बाहर आ जाता है।

2.9 सिरिंज एवं नीडल (Syringe and Hypodermic Needle)

  • रचना (Structure): सिरिंज प्लास्टिक या कांच की बनी होती है, जिसमें एक बैरल (Barrel) और एक प्लंजर (Plunger) होता है। नीडल (सुई) स्टेनलेस स्टील की बनी होती है और विभिन्न आकारों (Gauge) में आती है। पशुओं के लिए 16 से 18 गेज की मोटी सुई का प्रयोग होता है।
  • उपयोग (Uses): पशु के शरीर में तरल औषधियां (Liquid medicines/Antibiotics) या टीके (Vaccines) पहुंचाने, और जांच के लिए शरीर से रक्त (Blood) निकालने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • विधियां: इंजेक्शन को अंतः पेशीय (IM – मांस में), अंतः शिरा (IV – नस में), या उप-त्वचीय (SC – त्वचा के नीचे) लगाया जा सकता है।

2.10 डॉकिंग मशीन (Docking Machine / Elastrator)

  • रचना (Structure): यह एक विशेष प्रकार का उपकरण है जिसका उपयोग भेड़ों (Sheep) की पूंछ काटने के लिए किया जाता है। इसमें रबर के छल्लों (Rubber rings) को फैलाने की व्यवस्था होती है या फिर इसमें गर्म ब्लेड (Heated blade) लगी होती है।
  • उपयोग (Uses): भेड़ों में जन्म के 1-2 सप्ताह के भीतर उनकी पूंछ काटना डॉकिंग (Docking) कहलाता है।
  • उद्देश्य: पूंछ काटने से भेड़ों की पिछली टांगों और ऊन पर मल-मूत्र नहीं चिपकता, जिससे ऊन साफ रहती है और परजीवियों (Parasites / Blowfly) के संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

2.11 खुर काटने की कैंची (Hoof Trimmer / Hoof Cutter)

  • रचना (Structure): यह एक भारी और मजबूत सरौते या कैंची (Heavy-duty shear) के समान होती है, जिसके ब्लेड बहुत धारदार और घुमावदार होते हैं।
  • उपयोग (Uses): जो पशु अधिक समय तक पक्के फर्श पर या बाड़े (Shed) में बंधे रहते हैं, उनके खुर (Hooves) प्राकृतिक रूप से नहीं घिसते और असामान्य रूप से बढ़ जाते हैं। इन बढ़े हुए खुरों को काटने और उन्हें सही आकार (Trimming) देने के लिए इस उपकरण का उपयोग किया जाता है। यदि खुर न काटे जाएं, तो पशु को चलने में दर्द (Lameness) होता है।

2.12 बुल होल्डर और नोज़ रिंग (Bull Holder and Nose Ring)

  • रचना एवं उपयोग: ‘नोज़ रिंग’ (Nose ring) पीतल या एल्युमिनियम का बना एक छल्ला होता है जिसे सांड (Bull) की नाक की बीच वाली दीवार (Nasal septum) में छेद करके पहना दिया जाता है। ‘बुल होल्डर’ (Bull holder) एक चिमटेनुमा उपकरण है जिससे सांड की नाक को पकड़कर उसे नियंत्रित (Control) किया जाता है। उग्र सांडों (Aggressive bulls) को काबू में करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।

3. उपकरणों का रखरखाव और निर्जर्मीकरण (Maintenance and Sterilization of Equipments)

पशु चिकित्सा उपकरणों का उपयोग करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात उनका साफ और कीटाणुरहित (Sterilized) होना है। यदि उपकरण गंदे होंगे, तो पशु के शरीर में खतरनाक संक्रमण (जैसे सेप्टिसीमिया या टिटनेस) फैल सकता है।

  1. उपयोग से पहले (Before Use): सिरिंज, नीडल, ट्रोकार-कैनुला और टीट साइफन जैसे धातु के उपकरणों को उपयोग करने से पहले कम से कम 15-20 मिनट तक पानी में उबालना (Boiling) चाहिए।
  2. रासायनिक निर्जर्मीकरण (Chemical Sterilization): रबर या प्लास्टिक के उपकरण (जैसे प्रोबैंग, एनिमा कैन) जिन्हें उबाला नहीं जा सकता, उन्हें एंटीसेप्टिक लोशन (जैसे डिटॉल, सैवलॉन या पोटेशियम परमैंगनेट के घोल) से अच्छी तरह धोना चाहिए।
  3. उपयोग के बाद (After Use): सभी उपकरणों को गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह धोकर, साफ कपड़े से पोंछकर, सुखाकर उनके बॉक्स में सुरक्षित रख देना चाहिए। जंग (Rust) से बचाने के लिए धातु के उपकरणों के जोड़ (Joints) पर हल्का तेल लगा देना चाहिए।

4. प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स का महत्व (Importance of First Aid Box on a Dairy Farm)

प्रत्येक छोटे या बड़े डेयरी फार्म पर एक ‘प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स’ (First Aid Box) अनिवार्य रूप से होना चाहिए। इस बॉक्स में उपरोक्त सभी आवश्यक उपकरण (जैसे ट्रोकार कैनुला, थर्मामीटर, ड्रेन्चिंग बॉटल), पट्टियां (Bandages), रुई (Cotton), और जीवन रक्षक औषधियां (जैसे टिंचर आयोडीन, लाल दवा, फिटकरी, दर्द निवारक इंजेक्शन) हमेशा उपलब्ध होनी चाहिए।

इस बॉक्स की उपलब्धता पशुपालक को आपातकाल (Emergency) में पशु की जान बचाने का अवसर देती है, पशु का दर्द कम करती है, और घाव को गंभीर रूप (Infection) लेने से रोकती है।

5. निष्कर्ष (Conclusion)

कक्षा 12 पशुपालन (Animal Husbandry) के छात्रों के लिए ‘पशु चिकित्सा में प्रयुक्त उपकरणों’ का यह अध्याय केवल किताबी ज्ञान नहीं है, बल्कि यह एक सफल पशुपालक बनने का ‘प्रैक्टिकल टूलकिट’ (Practical Toolkit) है।

पशुओं की बीमारियां और दुर्घटनाएं कभी भी बताकर नहीं आतीं। जब गाय का पेट फूलकर ढोल (Bloat) जैसा हो जाए, तब केवल एक ‘ट्रोकार और कैनुला’ ही 5 मिनट के भीतर उसकी जान बचा सकता है। रक्तहीन बधियाकरण के लिए ‘बर्डिजो कैस्ट्रेटर’ और गले की रुकावट (Choking) के लिए ‘प्रोबैंग’ का उपयोग भारतीय डेयरी फार्मिंग की आधारभूत आवश्यकताएं हैं। एक शिक्षित और जागरूक किसान इन उपकरणों की बनावट को समझकर और इनके निर्जर्मीकरण (Sterilization) का सही पालन करके, अपने पशुधन को अकाल मृत्यु से बचा सकता है और अपने व्यवसाय को आर्थिक नुकसान से महफूज रख सकता है।

6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

प्रश्न 1: पशुओं में ‘आफरा’ (Tympany / Bloat) रोग होने पर किस उपकरण का प्रयोग किया जाता है और कैसे?

उत्तर: आफरा रोग (पेट में गैस भरना) में ‘ट्रोकार एवं कैनुला’ (Trocar and Canula) का प्रयोग किया जाता है। इसे पशु के पेट के बाईं ओर (Left paralumbar fossa) के त्रिकोण में जोर से छेद कर अंदर घुसाया जाता है। नुकीला ट्रोकार बाहर निकाल लिया जाता है और खोखली कैनुला पेट में ही रहने दी जाती है, जिससे पेट की गैस तेजी से बाहर निकल जाती है।

प्रश्न 2: बर्डिजो कैस्ट्रेटर (Burdizzo Castrator) को ‘रक्तहीन बधियाकरण’ (Bloodless Castration) का उपकरण क्यों कहा जाता है?

उत्तर: बर्डिजो कैस्ट्रेटर के जबड़े कुंद (Blunt – बिना धार के) होते हैं। जब इससे नर पशु के अंडकोष के ऊपर की नसों (Spermatic cord) को दबाया जाता है, तो बाहर की त्वचा कटती या फटती नहीं है, जिससे खून बिल्कुल नहीं निकलता। नस अंदर ही अंदर कुचल कर नष्ट हो जाती है। इसलिए इसे रक्तहीन बधियाकरण कहते हैं। यह विधि संक्रमण (Infection) और टिटनेस के खतरे को खत्म कर देती है।

प्रश्न 3: ड्रेन्चिंग बॉटल (Drenching Bottle) से दवा पिलाते समय पशु की जीभ (Tongue) क्यों नहीं पकड़नी चाहिए?

उत्तर: ड्रेन्चिंग बॉटल से तरल दवा पिलाते समय यदि पशु की जीभ पकड़ ली जाए, तो पशु दवा को निगलने (Swallowing) की क्रिया नहीं कर पाता। इससे दवा भोजन नली में जाने के बजाय श्वास नली (Trachea) से होते हुए फेफड़ों (Lungs) में गिर जाती है। इससे पशु को ‘ड्रेन्चिंग निमोनिया’ (Aspiration Pneumonia) हो जाता है, जिससे उसकी दर्दनाक मृत्यु हो सकती है।

प्रश्न 4: प्रोबैंग (Probang) क्या है और इसका उपयोग कब किया जाता है?

उत्तर: प्रोबैंग रबर या प्लास्टिक की बनी एक लंबी, लचीली नली होती है जिसके एक सिरे पर गोल गुंबद (Bulb) लगा होता है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब पशु के गले या आहार नली में कोई चीज (जैसे सेब, आलू, या कड़ा चारा) अटक जाती है (चोकिंग)। इसे मुंह से डालकर अटकी हुई वस्तु को पेट में धकेला जाता है।

प्रश्न 5: ‘टीट साइफन’ (Teat Siphon) का क्या उपयोग है?

उत्तर: टीट साइफन एक पतली धातु या प्लास्टिक की नली होती है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब ‘थनैला रोग’ (Mastitis) के कारण या किसी चोट के कारण गाय का थन (Teat) बंद हो जाता है और दूध नहीं निकलता। इसे थन के छेद (Teat canal) में डालकर फंसा हुआ दूध या मवाद सुरक्षित बाहर निकाला जाता है।

प्रश्न 6: पशुओं का शारीरिक तापमान (Body temperature) मापने के लिए थर्मामीटर को कहाँ लगाया जाता है?

उत्तर: पशुओं (गाय, भैंस, बकरी) का शारीरिक तापमान हमेशा उनके गुदा (Rectum) के अंदर क्लिनिकल थर्मामीटर लगाकर मापा जाता है। थर्मामीटर के बल्ब को श्लेष्मिक झिल्ली (Mucous membrane) से छुआ कर 2 मिनट तक रखा जाता है।