MP Board Class 11 marathi Project List 2025-26 : कक्षा 11 विषय मराठी प्रायोजना सूची त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाओं के आधार पर छात्र के द्वारा किए जाने वाले MP Board Class 11 marathi Project List 2025-26 Exam के लिए निर्धारित किया गया है
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल
हायर सेकेण्डरी परीक्षा सत्र 2025-26
सुझावात्मक प्रायोजना कार्य
कक्षा – 11वी विषय: मराठी
- कुल अंक: 20
- अंक वितरण:
- वर्कबुक: 5 अंक
- त्रैमासिक परीक्षा से पहले कोई एक परियोजना: 5 अंक
- अर्धवार्षिक परीक्षा से पहले कोई एक परियोजना: 5 अंक
- वार्षिक परीक्षा से पहले कोई एक परियोजना: 5 अंक
- सुझाए गए परियोजना कार्य:
- घरों से निकलने वाले गीले कचरे से जैविक खाद बनाने पर परियोजना तैयार करना।
- आपके क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़ों और पौधों के बारे में एक चार्ट बनाना।
- जल प्रदूषण और जल संरक्षण से संबंधित जानकारी प्राप्त करके एक परियोजना तैयार करना।
- अपने आसपास बोली जाने वाली लोककथाओं को इकट्ठा करके कक्षा में एक प्रतियोगिता का आयोजन करना।
- मराठी भाषा के नाटकों की सूची तैयार करना।
- किसी मराठी कवि या लेखक का संपूर्ण परिचय देना।
- मानव जीवन पर कोविड-19 के प्रभाव के परिणामों की समीक्षा करना।
- महामारियों की रोकथाम के लिए एक परियोजना बनाना।
- मराठी भाषा के अंतर्गत लोकोक्तियों और मुहावरों को इकट्ठा करके एक परियोजना तैयार करना।
- नोट: शिक्षक कक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार उपरोक्त के अलावा भी परियोजनाएं तैयार करा सकते हैं।
1. घरों से निकलने वाले गीले कचरे से जैविक खाद बनाने पर परियोजना
यह परियोजना गीले कचरे (जैसे रसोई का कचरा) को खाद में बदलने की प्रक्रिया पर आधारित है, जिसे कम्पोस्टिंग कहा जाता है।
परियोजना का उद्देश्य: गीले कचरे का उचित प्रबंधन करके जैविक खाद बनाना और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देना।
सामग्री:
- एक बड़ा बर्तन या गड्ढा (कम्पोस्ट बिन)
- गीला कचरा (सब्जियों और फलों के छिलके, चाय पत्ती, बचा हुआ खाना)
- सूखा कचरा (सूखी पत्तियां, लकड़ी का बुरादा, अखबार के टुकड़े)
- थोड़ी सी मिट्टी या गोबर
कम्पोस्टिंग की प्रक्रिया:
- कचरा इकट्ठा करें: अपने घर के रसोई से निकलने वाले गीले कचरे और आसपास से सूखे कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करें।
- परत-दर-परत जमाना: कम्पोस्ट बिन या गड्ढे में सबसे नीचे सूखी सामग्री की एक मोटी परत बिछाएँ। फिर, गीली सामग्री की एक परत डालें। इसी तरह, गीले और सूखे कचरे की परतों को बारी-बारी से जमाते रहें।
- हवा का संचार: समय-समय पर सामग्री को पलटते रहें ताकि हवा का संचार हो सके। इससे खाद बनने की प्रक्रिया तेज होती है और दुर्गंध नहीं आती।
- नमी बनाए रखें: मिश्रण में पर्याप्त नमी होनी चाहिए, लेकिन यह बहुत ज्यादा गीला नहीं होना चाहिए। आप समय-समय पर थोड़ा पानी छिड़क सकते हैं।
- खाद का तैयार होना: लगभग 2-3 महीनों में, कचरा गहरे भूरे या काले रंग की भुरभुरी सामग्री में बदल जाएगा, जिसमें से मिट्टी जैसी सुगंध आएगी। यही जैविक खाद है।
- उपयोग: इस खाद का उपयोग अपने घर के पौधों, बगीचों या खेतों में कर सकते हैं।
निष्कर्ष: कम्पोस्टिंग एक सरल और प्रभावी तरीका है, जिससे हम अपने घर के कचरे को उपयोगी संसाधन में बदल सकते हैं और रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं।
2. आपके क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़ों और पौधों के बारे में चार्ट
आप अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़ों और पौधों का एक चार्ट बना सकते हैं। यहाँ भारत में पाए जाने वाले कुछ सामान्य पेड़ों और पौधों के उदाहरण दिए गए हैं, जिन्हें आप अपने चार्ट में शामिल कर सकते हैं।
क्र.सं. | पेड़/पौधे का नाम | सामान्य नाम (हिंदी) | वैज्ञानिक नाम | विशेषताएं |
1 | आम | आम | Mangifera indica | भारत का राष्ट्रीय फल। गर्मियों में फल देता है। |
2 | नीम | नीम | Azadirachta indica | औषधीय गुणों से भरपूर। इसकी पत्तियों का उपयोग कीटनाशक के रूप में होता है। |
3 | तुलसी | तुलसी | Ocimum sanctum | घरों में पाया जाने वाला पवित्र पौधा। सर्दी-जुकाम के इलाज में उपयोगी। |
4 | पीपल | पीपल | Ficus religiosa | इसे बौद्ध वृक्ष भी कहते हैं। यह 24 घंटे ऑक्सीजन देता है। |
5 | बरगद | बरगद | Ficus benghalensis | भारत का राष्ट्रीय वृक्ष। इसकी विशाल शाखाएँ और जड़ें दूर तक फैलती हैं। |
6 | गेंदा | गेंदा | Tagetes erecta | यह एक फूलों वाला पौधा है। इसके फूल पूजा और सजावट में उपयोग होते हैं। |
7 | गुलाब | गुलाब | Rosa indica | यह एक फूलों वाला पौधा है। प्रेम और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है। |
8 | अशोक | अशोक | Saraca asoca | यह एक सजावटी पेड़ है। इसके फूल और पत्तियां शुभ माने जाते हैं। |
चार्ट बनाने के लिए सुझाव: आप चार्ट को और भी आकर्षक बनाने के लिए प्रत्येक पेड़ या पौधे का चित्र भी बना सकते हैं या चिपका सकते हैं।
3. जल प्रदूषण और जल संरक्षण से संबंधित परियोजना
यह परियोजना जल प्रदूषण के कारणों, प्रभावों और जल संरक्षण के तरीकों पर केंद्रित है।
परियोजना का उद्देश्य: जल प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जल संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देना।
परियोजना की रूपरेखा:
1. जल प्रदूषण (Water Pollution):
- परिभाषा: जल स्रोतों (नदियों, झीलों, तालाबों आदि) में हानिकारक पदार्थों का मिल जाना, जिससे जल पीने या उपयोग के लायक नहीं रहता।
- प्रदूषण के मुख्य कारण:
- औद्योगिक कचरा: कारखानों से निकलने वाले रसायन और अपशिष्ट जल।
- घरेलू सीवेज: शहरों से निकलने वाला अनुपचारित गंदा पानी।
- कृषि अपशिष्ट: खेतों से बहकर आने वाले उर्वरक और कीटनाशक।
- ठोस कचरा: प्लास्टिक और अन्य कूड़ा-करकट का पानी में फेंकना।
- प्रदूषण के प्रभाव:
- जलीय जीवों के लिए खतरा।
- मानव स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव (जल-जनित रोग जैसे टाइफाइड, हैजा)।
- पेयजल की कमी।
2. जल संरक्षण (Water Conservation):
- परिभाषा: पानी का समझदारी से उपयोग करना और भविष्य के लिए इसे बचाना।
- जल संरक्षण के तरीके:
- वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): बारिश के पानी को इकट्ठा करके उसका उपयोग करना।

* **कम पानी का उपयोग:** नहाने, बर्तन धोने और कपड़े धोने में कम पानी का उपयोग करें।
* **नल की मरम्मत:** टपकते नलों को तुरंत ठीक करें।
* **पानी का पुनर्चक्रण (Recycling):** उपयोग किए गए पानी को साफ करके फिर से उपयोग में लाएँ।
* **जन जागरूकता अभियान:** लोगों को पानी बचाने के महत्व के बारे में जागरूक करना।
निष्कर्ष: जल जीवन के लिए एक अमूल्य संसाधन है। जल प्रदूषण को रोकना और जल का संरक्षण करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पर्याप्त और स्वच्छ जल उपलब्ध हो सके।