MP Board Class 11 Chemistry practical and Project List 2025-26 : कक्षा 11 विषय रसायन प्रयोग एवं प्रायोजना सूची

MP Board Class 11 Chemistry practical and Project List 2025-26 : कक्षा 11 विषय रसायन प्रयोग एवं प्रायोजना सूची त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाओं के आधार पर छात्र के द्वारा किए जाने वाले MP Board Class 11 Chemistry practical and Project List 2025-26 Exam के लिए निर्धारित किया गया है 

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल
हायर सेकेण्डरी परीक्षा सत्र 2025-26
सुझावात्मक प्रायोजना कार्य
कक्षा – 11वी विषय: रसायन विज्ञान

  • कुल अंक: 30
  • अंक वितरण:
    • आयतनमितीय विश्लेषण: 8 अंक
      • प्रयोग, आवश्यक सामग्री, सिद्धांत और अवलोकन: 3 अंक
      • गणना: 3 अंक
      • परिणाम और सावधानियां: 2 अंक
    • अकार्बनिक मिश्रण का विश्लेषण (1 अम्लीय + 1 क्षारीय मूलक): 8 अंक
      • एक अम्लीय और एक क्षारीय मूलक के लिए सही संभावित और निश्चित परीक्षण लिखने के लिए: 6 अंक
      • परिणाम को आवेश के साथ लिखने के लिए: 2 अंक
    • कार्बनिक रसायन विज्ञान (एक कार्बनिक यौगिक N, S, CI, Br, I में तत्वों की पहचान): 4 अंक
    • परियोजना: 4 अंक
      • उद्देश्य: 1 अंक
      • आवश्यक सामग्री: 1 अंक
      • विधि (अवलोकन पर आधारित): 2 अंक
    • वार्षिक प्रायोगिक रिकॉर्ड बुक: 4 अंक
    • मौखिक: 2 अंक
  • परियोजनाओं की सूची (कोई भी चार):
    • सल्फाइड आयरन के साथ पीने के पानी में जीवाणु संदूषण का पता लगाना।
    • साबुन के विभिन्न नमूनों की झाग बनाने की क्षमता की तुलना करना।
    • चाय की पत्ती के विभिन्न नमूनों की अम्लता का अध्ययन करना और इसे उसके स्वाद के साथ सहसंबंधित करना।
    • कपास, रेशम और नायलॉन के धागों की ताकत की तुलना करना।
    • ऊन और सूती धागों की ताकत पर अम्लों और क्षारों के प्रभाव का अध्ययन करना।
    • क्रिस्टलीकरण द्वारा अशुद्ध यौगिकों (जैसे फिटकरी, कॉपर सल्फेट, बेंजोइक एसिड) का शुद्धिकरण।
    • सल्फाइड आयनों का परीक्षण करके पानी में बैक्टीरिया का परीक्षण करना।
    • प्रयोगशाला में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त करना।
  • नोट: शिक्षक कक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार उपरोक्त के अलावा भी परियोजनाएं तैयार करा सकते हैं।

क्रिस्टलीकरण द्वारा अशुद्ध यौगिकों (जैसे फिटकरी, कॉपर सल्फेट, बेंजोइक एसिड) का शुद्धिकरण।

क्रिस्टलीकरण (Crystallization) एक महत्वपूर्ण रासायनिक प्रक्रिया है जिसका उपयोग अशुद्ध ठोस यौगिकों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है कि अधिकांश ठोस पदार्थ गर्म विलायक में अधिक घुलनशील होते हैं, जबकि ठंडे विलायक में कम। जब अशुद्ध यौगिक को गर्म विलायक में घोलकर ठंडा किया जाता है, तो शुद्ध क्रिस्टल बनते हैं और अशुद्धियाँ विलयन में रह जाती हैं।

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नीचे दिए गए उदाहरणों—फिटकरी (Alum), कॉपर सल्फेट (Copper Sulfate), और बेंजोइक एसिड (Benzoic Acid)—के लिए क्रिस्टलीकरण द्वारा शुद्धिकरण की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया गया है। ये प्रयोग आमतौर पर प्रयोगशाला में किए जाते हैं, और सुरक्षा उपायों (जैसे दस्ताने पहनना, आँखों की सुरक्षा) का पालन करना आवश्यक है।

1. फिटकरी (Alum) का शुद्धिकरण

फिटकरी (KAl(SO₄)₂·12H₂O) एक जल-घुलनशील यौगिक है, जो अक्सर मिट्टी या अन्य अशुद्धियों से दूषित होता है। विलायक के रूप में जल का उपयोग किया जाता है।

चरण:

  • चरण 1: अशुद्ध फिटकरी का घोल बनाना – लगभग 10 ग्राम अशुद्ध फिटकरी लें और इसे न्यूनतम मात्रा में गर्म जल (लगभग 50-60°C) में घोलें। घोल को तब तक हिलाएं जब तक फिटकरी पूरी तरह घुल न जाए। यदि अशुद्धियाँ अधिक हैं, तो घोल को संतृप्त बनाने के लिए थोड़ा और जल मिलाएं।
  • चरण 2: निस्पंदन (Filtration) – गर्म घोल को फ़नल और फ़िल्टर पेपर की सहायता से छानें। इससे अघुलनशील अशुद्धियाँ (जैसे मिट्टी) अलग हो जाती हैं।
  • चरण 3: क्रिस्टलीकरण – छाने गए घोल (फ़िल्ट्रेट) को धीरे-धीरे ठंडा होने दें। ठंडा होने पर शुद्ध फिटकरी के क्रिस्टल बनने लगेंगे। यदि क्रिस्टल जल्दी न बनें, तो घोल को बर्फ के पानी में रखकर ठंडा करें।
  • चरण 4: क्रिस्टलों का पृथक्करण और शुष्कीकरण – क्रिस्टलों को फ़िल्टर पेपर से छानकर अलग करें। उन्हें ठंडे जल से धोएं ताकि चिपकी हुई अशुद्धियाँ निकल जाएं। फिर क्रिस्टलों को फ़िल्टर पेपर पर फैलाकर हवा में सुखाएं।
  • परिणाम: शुद्ध, सफेद, अष्टफलकीय (octahedral) क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।

सावधानियाँ: फिटकरी अम्लीय होती है, इसलिए त्वचा से संपर्क न होने दें।

MP Board Class 11 Chemistry practical and Project List 2025-26

Simulation देखने के लिए यहा क्लिक करें : Alum purification Simulation

2. कॉपर सल्फेट (Copper Sulfate) का शुद्धिकरण

कॉपर सल्फेट (CuSO₄·5H₂O) नीले रंग का क्रिस्टलीय यौगिक है, जो अक्सर धूल या अन्य लवणों से अशुद्ध होता है। विलायक के रूप में जल का उपयोग किया जाता है।

चरण:

  • चरण 1: अशुद्ध कॉपर सल्फेट का घोल बनाना – 10 ग्राम अशुद्ध कॉपर सल्फेट लें और इसे गर्म जल (लगभग 60-70°C) में घोलें। घोल नीला हो जाएगा। संतृप्त घोल बनाने के लिए जल की मात्रा नियंत्रित रखें।
  • चरण 2: निस्पंदन – गर्म घोल को फ़िल्टर पेपर से छानें ताकि अघुलनशील अशुद्धियाँ अलग हो जाएं।
  • चरण 3: क्रिस्टलीकरण – फ़िल्ट्रेट को कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें। ठंडा होने पर नीले क्रिस्टल बनेंगे। यदि आवश्यक हो, तो घोल को रेफ्रिजरेटर में रखें।
  • चरण 4: क्रिस्टलों का पृथक्करण और शुष्कीकरण – क्रिस्टलों को छानकर अलग करें, ठंडे जल से धोएं, और हवा में सुखाएं। सुखाने के लिए ओवन का उपयोग न करें क्योंकि इससे जल के अणु निकल सकते हैं।
  • परिणाम: शुद्ध, नीले, पेंटाहाइड्रेट क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।

सावधानियाँ: कॉपर सल्फेट विषाक्त है, इसलिए इसे मुंह से न छुएं और प्रयोग के बाद हाथ धोएं।

3. बेंजोइक एसिड (Benzoic Acid) का शुद्धिकरण

बेंजोइक एसिड (C₆H₅COOH) एक कार्बनिक यौगिक है, जो अक्सर अन्य कार्बनिक अशुद्धियों से दूषित होता है। विलायक के रूप में गर्म जल या इथेनॉल का उपयोग किया जाता है (जल अधिक सामान्य है क्योंकि बेंजोइक एसिड गर्म जल में घुलनशील है)।

चरण:

  • चरण 1: अशुद्ध बेंजोइक एसिड का घोल बनाना – 5-10 ग्राम अशुद्ध बेंजोइक एसिड लें और इसे गर्म जल (लगभग 80-90°C) में घोलें। यदि पूरी तरह न घुले, तो थोड़ा और जल मिलाएं। (वैकल्पिक: इथेनॉल का उपयोग करें यदि अशुद्धियाँ अधिक हों।)
  • चरण 2: निस्पंदन – गर्म घोल को फ़िल्टर पेपर से छानें ताकि अघुलनशील अशुद्धियाँ निकल जाएं।
  • चरण 3: क्रिस्टलीकरण – फ़िल्ट्रेट को धीरे-धीरे ठंडा करें। ठंडा होने पर सफेद, सुई जैसे क्रिस्टल बनेंगे।
  • चरण 4: क्रिस्टलों का पृथक्करण और शुष्कीकरण – क्रिस्टलों को छानकर अलग करें, ठंडे जल से धोएं, और फ़िल्टर पेपर पर सुखाएं। यदि इथेनॉल का उपयोग किया है, तो क्रिस्टलों को हवा में वाष्पित होने दें।
  • परिणाम: शुद्ध, सफेद क्रिस्टल प्राप्त होते हैं, जिनका गलनांक लगभग 122°C होता है।

सावधानियाँ: बेंजोइक एसिड त्वचा को जलन पैदा कर सकता है। इथेनॉल ज्वलनशील है, इसलिए आग से दूर रखें।

सामान्य सिद्धांत और लाभ

  • क्रिस्टलीकरण का सिद्धांत: यह घुलनशीलता के अंतर पर आधारित है। शुद्ध यौगिक क्रिस्टल बनाता है, जबकि अशुद्धियाँ या तो घुली रहती हैं या अलग हो जाती हैं।
  • लाभ: सरल, सस्ती, और उच्च शुद्धता प्रदान करती है।
  • सीमाएँ: केवल उन यौगिकों के लिए उपयुक्त जो क्रिस्टलीय हों और जिनकी घुलनशीलता तापमान पर निर्भर हो।

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