MP Board Class 10 hindi Project List 2025-26 : कक्षा 10 विषय हिन्दी प्रायोजना सूची त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाओं के आधार पर छात्र के द्वारा किए जाने वाले MP Board Class 10 hindi Project List 2025-26 Exam के लिए निर्धारित किया गया है
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल
हायर सेकेण्डरी परीक्षा सत्र 2025-26
सुझावात्मक प्रायोजना कार्य
कक्षा 11वीं विषय- हिन्दी
अंक विभाजन-
- अभ्यास पुस्तिका: 05 अंक
- त्रैमासिक परीक्षा पूर्व कोई एक प्रोजेक्ट: 05 अंक
- अर्द्धवार्षिक परीक्षा पूर्व कोई एक प्रोजेक्ट: 05 अंक
- वार्षिक परीक्षा पूर्व कोई एक प्रोजेक्ट: 05 अंक
- पूर्णांक: 20 अंक
- नोट: शिक्षक द्वारा कक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार उपरोक्त के अतिरिक्त भी प्रोजेक्ट तैयार कराये जा सकते है।
प्रोजेक्ट कार्य
- ‘नमक का दारोगा’ कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी न किसी सच्चाई को उजागर करते हैं। निम्नलिखित के संदर्भ में पाठ के उस अंश को उद्धृत करते हुए बताए कि समाज की किस सच्चाई को उजागर करते हैं:
- (क) वृद्ध मुंशी
- (ख) वकील
- (ग) शहर की भीड़
- पाठ में आए रोटियों के अलग-अलग नामों की सूची बनाइएँ और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करें। (आरोह – मियाँ नसीरुद्दीन से)
- पाठ्यक्रम में सम्मिलित किसी एक रस, एक छन्द और एक अलंकार की परिभाषा और उदाहरण लिखिए।
- लेखिका मन्नू भण्डारी की भाषा और शैली का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
- आजादी से पूर्व अनेक नारे प्रचलित थे किन्हीं दस नारों का संकलन करें और संदर्भ भी लिखे।
- मानव शरीर का निर्माण किन पाँच तत्वों से हुआ है? चार्ट रूप में प्रस्तुत कीजिए।
- घर से अलग होकर आप घर को किस तरह से याद करते हैं? साथ ही परिवार के सभी सदस्यों के संवाद अपने शब्दों में लिखे।
- इंटरनेट पत्रकारिता ने दुनिया को किस प्रकार समेट लिया है, उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए? (अभिव्यक्ति और माध्यम)
- आधुनिक काल को कितने भागों में बांटा गया है? काल क्रमानुसार लिखिए?
- गद्य साहित्य की विभिन्न विधाओं में प्रमुख एवं गौण (सहायक) विधाओं को कलात्मक एवं आकर्षण चार्ट के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
- निर्देश: उपर्युक्त प्रायोजना कार्य सूची में से प्रत्येक विद्यार्थी को चार प्रायोजना कार्य करवाना अनिवार्य है।
नमक का दारोगा: पात्रों का समाज से संबंध
मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘नमक का दारोगा’ कहानी मात्र एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि भारतीय समाज का एक दर्पण है। कहानी के लगभग सभी पात्र अपने-अपने व्यवहार और सोच के माध्यम से समाज की किसी न किसी सच्चाई को उजागर करते हैं। वंशीधर, पंडित अलोपीदीन, उनके वृद्ध पिता, वकील और यहाँ तक कि शहर की भीड़ भी, सब मिलकर एक ऐसे समाज का चित्रण करते हैं जहाँ धन और सत्ता का वर्चस्व है, और ईमानदारी का मार्ग अत्यंत कठिन है।
(क) वृद्ध मुंशी: धन-केंद्रित व्यावहारिक सोच का प्रतीक
वंशीधर के वृद्ध पिता समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो जीवन के अनुभवों से सीखकर नैतिकता और आदर्शों को त्याग देता है। वे यह मानते हैं कि ईमानदारी से जीवन नहीं चलता और धन ही जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है। उनका मानना है कि नौकरी में पद-प्रतिष्ठा से अधिक ऊपरी कमाई पर ध्यान देना चाहिए। वे अपने बेटे को इसी धन-केंद्रित सोच की सीख देते हैं।
पाठ का अंश: “बेटे! नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना; यह तो पीर का मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए। ऐसा काम ढूँढ़ना जहाँ कुछ ऊपरी आय हो। मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है, जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है। ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती रहती है।”
यह अंश उस सामाजिक सच्चाई को उजागर करता है जहाँ गरीबी और जीवन के कटु अनुभवों ने लोगों को आदर्शों से दूर कर दिया है। यह दिखाता है कि कैसे एक पिता भी अपने बेटे को ईमानदारी की बजाय भ्रष्टाचार का रास्ता अपनाने की सलाह देता है, क्योंकि समाज में यही व्यवहारिक माना जाता है।
(ख) वकील: न्याय व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रतीक
कहानी में वकील उन लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो कानून और न्याय को धन के आगे झुका देते हैं। जब पंडित अलोपीदीन को गिरफ्तार किया जाता है, तो वकीलों को लगता है कि यह मुकदमा आसानी से जीत जाएँगे, लेकिन जब वे देखते हैं कि सत्य और धर्म की जीत हो रही है, तो वे तुरंत अपना पक्ष बदल लेते हैं।
पाठ का अंश: “कानून की महिमा का पूरा बखान करते हुए उन्होंने अदालत में पंडित अलोपीदीन की ओर से जोरदार बहस की।” (यह अंश उनके व्यवहार का सारांश है।) “जब मुकदमा जीतने की उम्मीद न रही तो वे सभी वकील और मुंशी खुशी से उछल पड़े।”
ये वकील उस सामाजिक सच्चाई को दर्शाते हैं जहाँ कानून और न्याय व्यवस्था धनवानों के हाथों की कठपुतली बन गई है। वे अपनी पेशेवर नैतिकता और आदर्शों को ताक पर रखकर सिर्फ़ अपने ग्राहक के पैसे और अपने स्वार्थ के लिए काम करते हैं। उनका व्यवहार बताता है कि उस समाज में न्याय नहीं, बल्कि जिसकी लाठी उसकी भैंस का सिद्धांत चलता था।
(ग) शहर की भीड़: बदलती और स्वार्थी लोकमत का प्रतीक
शहर की भीड़ उस आम जनता का प्रतिनिधित्व करती है जिसका विचार बहुत ही क्षणिक और अस्थिर होता है। जब वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन को गिरफ्तार किया, तो यही भीड़ वंशीधर की ईमानदारी की तारीफ कर रही थी और उन्हें सम्मान दे रही थी। लेकिन जब पंडित अलोपीदीन बेदाग़ छूट गए और वंशीधर को नौकरी से निकाल दिया गया, तो यही भीड़ उन पर हँसने लगी और उनका मज़ाक उड़ाने लगी।
पाठ का अंश: “जब पंडित अलोपीदीन को अदालत में देखा गया तो लोगों की फब्तियाँ, ताने और कठोर बातें, सब तीर की तरह आकर चुभने लगीं।”
यह अंश उस सामाजिक सच्चाई को उजागर करता है जहाँ लोग सत्य और असत्य का निर्णय परिणामों के आधार पर करते हैं, न कि सिद्धांतों के आधार पर। यह भीड़ दर्शाती है कि समाज में लोग अक्सर अवसरवादी होते हैं और बहुमत उसी के साथ खड़ा होता है जो शक्तिशाली और सफल होता है। यह दिखाता है कि कैसे लोकमत बहुत जल्दी बदल जाता है और ईमानदार व्यक्ति को अकेला छोड़ देता है।
निष्कर्ष
‘नमक का दारोगा’ के पात्र यह सिद्ध करते हैं कि समाज में आदर्श और नैतिकता की बजाय धन, सत्ता और स्वार्थ का बोलबाला है। वृद्ध मुंशी की सोच, वकीलों का लालच और भीड़ की अवसरवादिता ये सभी उस समय के समाज की कड़वी सच्चाइयों का सटीक चित्रण करते हैं। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपनी नैतिकता पर अडिग रहना ही सच्ची विजय है।
मियाँ नसीरुद्दीन: रोटियों की सूची
मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित पाठ ‘मियाँ नसीरुद्दीन’ में लेखक ने नानबाई (रोटी बनाने वाले) मियाँ नसीरुद्दीन के हुनर का वर्णन करते हुए कई तरह की रोटियों का जिक्र किया है। ये रोटियाँ उनकी कला और कौशल को दिखाती हैं। नीचे पाठ में वर्णित रोटियों और उनके बारे में कुछ जानकारी दी गई है।
रोटी का नाम | उसके बारे में जानकारी |
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नान् (Nan) | यह एक प्रकार की साधारण और मोटी रोटी होती है, जिसे तंदूर में सेंका जाता है। यह भारत और मध्य एशिया में बहुत लोकप्रिय है। |
ताफ़तान (Taftan) | यह फारसी मूल की एक रोटी है जो दूध, दही और अंडों से बनती है। यह अक्सर नरम और हल्की मीठी होती है। |
बाकरखानी (Baqarkhani) | यह एक मोटी, परतदार और कुरकुरी रोटी होती है, जो अक्सर तंदूर में पकाई जाती है। इसे मीठा या नमकीन दोनों तरह से बनाया जाता है। |
गौदीदार (Gaudidaar) | यह एक खास तरह की रोटी है जिसका जिक्र मियाँ नसीरुद्दीन के संदर्भ में किया गया है। यह रोटी नरम और गूदेदार होती है, जो सिर्फ कारीगर नानबाई ही बना सकते हैं। |
शीरमाल (Sheermal) | यह एक मीठी, केसर के रंग वाली रोटी होती है, जिसे दूध (शीर) से बनाया जाता है। यह अक्सर मुग़लई व्यंजनों के साथ परोसी जाती है। |
नान्-ए-पान (Naan-e-paan) | यह पान के पत्ते की तरह दिखने वाली छोटी और बहुत पतली रोटी होती है, जो अपनी नाजुकता और हल्केपन के लिए जानी जाती है। |
रूमाली (Roomali) | यह एक बेहद पतली रोटी होती है, जिसे हाथ से इतना पतला किया जाता है कि यह रुमाल की तरह लगती है। इसे गरम तवे पर उल्टा करके पकाया जाता है। |

यह जानकारी आपके प्रोजेक्ट के लिए एक बेहतरीन आधार है। आप चाहें तो इसमें इन रोटियों के चित्र भी जोड़ सकते हैं या मियाँ नसीरुद्दीन के चरित्र पर और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।