खाद का वर्गीकरण MP Board 12th Crop Production Classification of Manures

खाद का वर्गीकरण (Classification of Manures)

MP Board 12th Crop Production Classification of Manures : खाद को उनके स्रोत और रासायनिक संरचना के आधार पर मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

1. जैविक खाद (Organic Manures)

परिभाषा: जैविक खाद वे प्राकृतिक पदार्थ हैं जो पौधों और पशुओं के अवशेषों (जैसे गोबर, मूत्र, फसल अवशेष, मृत पौधों के भाग, रसोई का कचरा आदि) के सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन (decomposition) से प्राप्त होते हैं। ये मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ और विभिन्न पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

विशेषताएँ और महत्व:

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
  • पोषक तत्वों का स्रोत: ये पौधों के लिए आवश्यक सभी वृहद (मैक्रोन्यूट्रिएंट्स) और सूक्ष्म (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) पोषक तत्व प्रदान करते हैं, हालांकि रासायनिक उर्वरकों की तुलना में कम सांद्रित रूप में।
  • मिट्टी के गुणों में सुधार: जैविक खाद मिट्टी की भौतिक संरचना (जैसे वायु संचार, जल धारण क्षमता), रासायनिक गुणों (जैसे पोषक तत्व उपलब्धता) और जैविक गतिविधियों (जैसे सूक्ष्मजीवों की संख्या) में सुधार करती है।
  • ह्यूमस का निर्माण: अपघटन प्रक्रिया के दौरान ये मिट्टी में ह्यूमस (Humus) का निर्माण करते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पोषक तत्वों का धीमा विमोचन: पोषक तत्व धीरे-धीरे और लगातार पौधों को उपलब्ध होते हैं, जिससे निक्षालन (leaching) और अन्य हानियाँ कम होती हैं।
  • पर्यावरण के अनुकूल: ये पर्यावरण के लिए सुरक्षित होते हैं और मिट्टी व जल प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं।

प्रमुख प्रकार:

  • गोबर की खाद (Farmyard Manure – FYM): पशुओं के गोबर, मूत्र और बिछावन के अपघटन से बनती है।
  • कम्पोस्ट खाद (Compost Manure): विभिन्न प्रकार के जैविक कचरे (फसल अवशेष, खरपतवार, रसोई का कचरा आदि) को सड़ाकर बनाई जाती है।
  • हरी खाद (Green Manure): कुछ फसलों (जैसे ढैंचा, सनई, मूंग, लोबिया) को खेत में उगाकर, फूल आने से पहले ही मिट्टी में जोत दिया जाता है ताकि वे सड़कर मिट्टी में जैविक पदार्थ और पोषक तत्व जोड़ सकें।
  • वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost): केंचुओं की सहायता से जैविक कचरे के अपघटन से प्राप्त खाद।
  • खलियाँ (Oil Cakes): विभिन्न तिलहनी फसलों (जैसे नीम की खली, मूंगफली की खली) से तेल निकालने के बाद बची हुई खलियाँ।

2. अकार्बनिक खाद / रासायनिक उर्वरक (Inorganic Manures / Chemical Fertilizers)

परिभाषा: अकार्बनिक खाद, जिन्हें आमतौर पर रासायनिक उर्वरक (Chemical Fertilizers) कहा जाता है, वे संश्लेषित (manufactured) रासायनिक यौगिक होते हैं जिन्हें विशेष रूप से पौधों को विशिष्ट पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम) प्रदान करने के लिए कारखानों में तैयार किया जाता है। ये प्राकृतिक रूप से प्राप्त नहीं होते हैं।

विशेषताएँ और महत्व:

  • उच्च पोषक तत्व सांद्रता: रासायनिक उर्वरकों में पोषक तत्व उच्च सांद्रता में होते हैं, जिससे कम मात्रा में अधिक पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं।
  • तेजी से उपलब्धता: इनमें मौजूद पोषक तत्व पौधों को तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे पौधों की तेजी से वृद्धि होती है।
  • पोषक तत्व विशिष्टता: ये विशिष्ट पोषक तत्वों (जैसे केवल नाइट्रोजन या केवल फास्फोरस) पर केंद्रित होते हैं, जिससे किसान पौधों की विशेष कमी को पूरा कर सकते हैं।
  • भंडारण और परिवहन में आसानी: ये आमतौर पर दानेदार या पाउडर के रूप में होते हैं, जिससे इनका भंडारण और परिवहन आसान होता है।
  • जैविक पदार्थ नहीं जोड़ते: ये मिट्टी में जैविक पदार्थ नहीं जोड़ते हैं और लंबे समय तक केवल इनके उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: अत्यधिक या असंतुलित उपयोग से जल प्रदूषण (निक्षालन), वायु प्रदूषण (वाष्पीकरण) और मिट्टी के सूक्ष्मजीवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

प्रमुख प्रकार:

  • नाइट्रोजनी उर्वरक: यूरिया, अमोनियम सल्फेट, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) आदि।
  • फास्फोरसी उर्वरक: डी-अमोनियम फास्फेट (DAP), सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) आदि।
  • पोटाश उर्वरक: म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP), सल्फेट ऑफ पोटाश (SOP) आदि।
  • मिश्रित/जटिल उर्वरक: NPK (12:32:16), NPK (19:19:19) आदि।

निष्कर्ष: आधुनिक कृषि में, मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने और फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management – INM) प्रणाली को अपनाया जाता है। इसमें जैविक खाद और रासायनिक उर्वरकों दोनों का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग किया जाता है ताकि मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण को बनाए रखते हुए अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

Leave a Comment