MP Board Class 12 Major Weeds of Rabi and Kharif Seasons रबी और खरीफ में उगने वाले प्रमुख खरपतवार

Major Weeds of Rabi and Kharif Seasons : कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए ‘खरीफ और रबी मौसम के प्रमुख खरपतवार’ (Major Weeds of Kharif and Rabi Seasons) पर एक अति विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख। इस लेख में मौसम के आधार पर खरपतवारों का वर्गीकरण, उनके वानस्पतिक नाम (Scientific Names), पहचान, विशेषताएँ, फसलों पर प्रभाव और उनके रासायनिक तथा एकीकृत प्रबंधन (Integrated Weed Management) का गहन अध्ययन किया गया है। यह बोर्ड परीक्षाओं और कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं (UPCATET, ICAR, BHU) के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है।

रबी और खरीफ में उगने वाले प्रमुख खरपतवार (Major Weeds of Rabi and Kharif Seasons) – संपूर्ण अध्ययन (कक्षा 12 कृषि विज्ञान)

1. प्रस्तावना (Introduction)

भारतीय कृषि (Indian Agriculture) मुख्य रूप से मौसम (Seasons) और मानसून पर निर्भर है। जलवायु और तापमान के आधार पर भारत में मुख्य रूप से तीन कृषि ऋतुएँ पाई जाती हैं— खरीफ (Kharif), रबी (Rabi) और जायद (Zaid)। जिस प्रकार हर मौसम की मुख्य फसलें (Crops) अलग-अलग होती हैं, उसी प्रकार उन फसलों के साथ उगने वाले अनचाहे पौधे या खरपतवार (Weeds) भी मौसम के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

कृषि विज्ञान के कक्षा 12 (Class 12 Agriculture) के पाठ्यक्रम में ‘खरपतवार प्रबंधन’ (Weed Management) एक अत्यंत महत्वपूर्ण इकाई है। इस अध्याय में हमें यह समझना होता है कि किस मौसम में कौन-से खरपतवार अधिक उगते हैं, उनकी जैविक विशेषताएं क्या हैं और वे हमारी मुख्य फसल को किस प्रकार नुकसान पहुंचाते हैं।

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तापमान (Temperature), आर्द्रता (Humidity), और दिन की लंबाई (Photoperiod) खरपतवारों के बीजों के अंकुरण (Germination) को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि गेहूं (Wheat) के खेत में उगने वाला बथुआ, धान (Paddy) के खेत में नहीं उगता। इस विस्तृत लेख में हम खरीफ और रबी मौसम में उगने वाले प्रमुख खरपतवारों का वैज्ञानिक और व्यावहारिक (Scientific and Practical) अध्ययन करेंगे।

2. खरीफ मौसम के प्रमुख खरपतवार (Major Weeds of Kharif Season)

खरीफ ऋतु की पृष्ठभूमि (Background of Kharif Season):

खरीफ की फसलें जून-जुलाई (मानसून के आगमन) में बोई जाती हैं और अक्टूबर-नवंबर में काटी जाती हैं। इस मौसम में उच्च तापमान (High Temperature), अधिक वर्षा (Heavy Rainfall), और उच्च आर्द्रता (High Humidity) होती है। यह गर्म और नम वातावरण खरपतवारों की वृद्धि (Vegetative growth) के लिए अत्यंत अनुकूल होता है। यही कारण है कि खरीफ की फसलों (जैसे— धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, सोयाबीन) में रबी की तुलना में खरपतवारों का प्रकोप बहुत अधिक होता है और उपज में सर्वाधिक नुकसान (Heavy yield loss) होता है।

खरीफ मौसम में उगने वाले प्रमुख खरपतवार निम्नलिखित हैं:

2.1 सांवा या जंगली धान (Barnyard Grass / Sawa)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):इचिनोक्लोआ क्रसगैली (Echinochloa crusgalli) और इचिनोक्लोआ कोलोनम (Echinochloa colonum)
  • कुल (Family): पोएसी या ग्रैमिनी (Poaceae / Gramineae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह एक एकवर्षीय (Annual) और संकरी पत्ती (Narrow-leaved) वाला एकबीजपत्री खरपतवार है। प्रारंभिक अवस्था में यह देखने में बिल्कुल धान (Rice) के पौधे जैसा लगता है, इसलिए इसे नकलची खरपतवार (Mimicry weed) भी कहा जाता है।
  • प्रभावित फसलें: यह मुख्य रूप से धान (Paddy) के खेत का सबसे भयंकर खरपतवार है। यह धान के साथ पोषक तत्वों (Nutrients) के लिए भारी प्रतिस्पर्धा करता है।
  • प्रजनन (Propagation): इसका फैलाव मुख्य रूप से बीजों (Seeds) द्वारा होता है।

2.2 मोथा (Nut Sedge / Purple Nutsedge)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):साइपरस रोटन्डस (Cyperus rotundus)
  • कुल (Family): साइपरेसी (Cyperaceae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह दुनिया के सबसे खतरनाक बहुवर्षीय (Perennial) खरपतवारों में से एक है। इसकी पत्तियां संकरी और तना तिकोना (Triangular stem) होता है। यद्यपि यह पूरे वर्ष जीवित रहता है, लेकिन खरीफ मौसम में इसकी वृद्धि सबसे अधिक होती है।
  • प्रभावित फसलें: यह लगभग सभी खरीफ फसलों जैसे— मक्का, कपास, सोयाबीन, मूंगफली और सब्जियों में पाया जाता है।
  • प्रजनन (Propagation): इसका नियंत्रण सबसे कठिन होता है क्योंकि यह बीजों के अलावा अपनी भूमिगत गांठों या कंदों (Underground Tubers/Rhizomes) द्वारा बहुत तेजी से फैलता है।

2.3 पत्थरचट्टा या विषखपरा (Horse Purslane)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):ट्राईएन्थेमा पोर्टुलाकास्ट्रम (Trianthema portulacastrum)
  • कुल (Family): फाइकोइडेसी (Ficoidaceae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह चौड़ी पत्ती (Broad-leaved) वाला, द्विबीजपत्री (Dicot) एकवर्षीय खरपतवार है। इसका तना मांसल (Succulent), लाल और हरापन लिए हुए होता है जो जमीन पर रेंगकर (Spreading habit) चलता है।
  • प्रभावित फसलें: यह मक्का (Maize), बाजरा (Pearl millet), अरहर और कपास (Cotton) के खेतों में भारी मात्रा में उगता है और जमीन को पूरी तरह ढक लेता है।
  • प्रजनन: बीजों द्वारा। इसके बीज कई वर्षों तक मिट्टी में सुरक्षित रहते हैं।

2.4 चौलाई या जंगली चौलाई (Pigweed / Amaranth)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):ऐमारैन्थस विरिडिस (Amaranthus viridis)
  • कुल (Family): ऐमारैन्थेसी (Amaranthaceae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह खरीफ का एक बहुत ही आम चौड़ी पत्ती वाला एकवर्षीय खरपतवार है। इसकी वृद्धि दर बहुत तेज होती है।
  • प्रभावित फसलें: मक्का, ज्वार, मूंगफली, सोयाबीन और सब्जियां।
  • विशेषता (Special Feature): यह बीज उत्पादन में सबसे आगे है। एक पौधा अपने जीवनकाल में 1 लाख से अधिक बीज (Over 1 lakh seeds) पैदा कर सकता है। हालांकि कच्ची अवस्था में इसका उपयोग सब्जी और पशु चारे (Fodder) के रूप में भी किया जाता है।

2.5 गाजर घास या कांग्रेस घास (Carrot Weed / Congress Grass)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस (Parthenium hysterophorus)
  • कुल (Family): एस्टरेसी (Asteraceae / Compositae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह एक आक्रामक (Invasive) चौड़ी पत्ती वाला खरपतवार है जो मूल रूप से अमेरिका का है और पीएल-480 (PL-480) गेहूं के आयात के साथ भारत आया था। इसकी पत्तियां गाजर की पत्तियों जैसी दिखती हैं।
  • प्रभावित फसलें: यह खेतों के अलावा खाली पड़ी जमीनों, सड़कों के किनारे और चरागाहों में भी उगता है।
  • हानिकारक प्रभाव (Harmful Effects): यह एलेलोपैथी (Allelopathy) प्रभाव डालता है और फसलों को उगने नहीं देता। इसके परागकणों (Pollen grains) से मनुष्यों में अस्थमा (Asthma), सांस की बीमारी और चर्म रोग (Skin allergy) होता है।

2.6 दूब घास (Bermuda Grass)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):साइनोडोन डैक्टिलोन (Cynodon dactylon)
  • कुल (Family): पोएसी (Poaceae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह एक संकरी पत्ती वाला बहुवर्षीय (Perennial) खरपतवार है।
  • प्रभावित फसलें: खरीफ की लगभग सभी फसलें।
  • प्रजनन: यह अपने तनों (Runners) और भूमिगत प्रकंदों (Rhizomes) द्वारा जमीन पर तेजी से फैलता है। इसे उखाड़ना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि जमीन में छूटा हुआ एक छोटा सा टुकड़ा भी नया पौधा बना लेता है।

2.7 मकोय (Black Nightshade)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):सोलेनम नाइग्रम (Solanum nigrum)
  • कुल (Family): सोलेनेसी (Solanaceae)
  • पहचान: यह चौड़ी पत्ती वाला एकवर्षीय खरपतवार है। इसमें छोटे सफेद फूल और काले-हरे रंग के छोटे गोलाकार फल लगते हैं।
  • फसलें: कपास, सोयाबीन, सब्जियां।

3. रबी मौसम के प्रमुख खरपतवार (Major Weeds of Rabi Season)

रबी ऋतु की पृष्ठभूमि (Background of Rabi Season):

रबी की फसलें अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं। इस मौसम में तापमान कम (Low Temperature) होता है और सर्दियां (Winters) पड़ती हैं। रबी की फसलों (जैसे— गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों, आलू) को सिंचाई की आवश्यकता होती है। इस कम तापमान और सीमित नमी में उगने वाले खरपतवार खरीफ के खरपतवारों से बिल्कुल भिन्न होते हैं।

रबी मौसम में उगने वाले प्रमुख खरपतवार निम्नलिखित हैं:

3.1 गेहूं का मामा या गुल्ली डंडा (Canary Grass)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):फैलरिस माइनर (Phalaris minor)
  • कुल (Family): पोएसी (Poaceae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह रबी के मौसम का सबसे कुख्यात एकवर्षीय, संकरी पत्ती वाला (Monocot) खरपतवार है। प्रारंभिक वानस्पतिक अवस्था (Vegetative stage) में यह बिल्कुल गेहूं (Wheat) के पौधे जैसा दिखता है। इसीलिए इसे गेहूं का नकलची या आपत्तिजनक खरपतवार (Objectionable/Mimicry weed) कहा जाता है।
  • प्रभावित फसलें: यह मुख्य रूप से केवल गेहूं (Wheat) की फसल में उगता है।
  • विशेषता: इसे पहचानने का मुख्य तरीका यह है कि जब इसे जड़ से उखाड़ा जाता है, तो इसकी जड़ों के पास का रस गुलाबी रंग (Pinkish sap) का होता है। इसके नियंत्रण के लिए पहले ‘आइसोप्रोट्यूरॉन’ (Isoproturon) दवा का प्रयोग होता था, लेकिन अब इसने इस दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Resistance) विकसित कर ली है। अब इसके लिए ‘सल्फोसल्फ्यूरॉन’ या ‘क्लोडिनाफॉप’ का प्रयोग किया जाता है।

3.2 जंगली जई (Wild Oat)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):एवीना फतवा (Avena fatua)
  • कुल (Family): पोएसी (Poaceae)
  • पहचान: यह भी एक एकवर्षीय संकरी पत्ती वाला नकलची खरपतवार है। इसका पौधा जई (Oat) और गेहूं के पौधे से बहुत मिलता-जुलता है।
  • प्रभावित फसलें: गेहूं, जौ, चना और मटर।
  • प्रजनन: यह बीजों द्वारा फैलता है और इसके बीज फसल के बीजों के साथ आसानी से मिल जाते हैं।

3.3 बथुआ (Lamb’s Quarters)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):चीनोपोडियम एल्बम (Chenopodium album)
  • कुल (Family): ऐमारैन्थेसी (Amaranthaceae) – (पूर्व में चीनोपोडिएसी)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह रबी के मौसम का सबसे प्रमुख चौड़ी पत्ती (Broad-leaved) वाला, द्विबीजपत्री (Dicot) खरपतवार है। इसकी पत्तियों पर एक सफेद चूर्ण (White mealy powder) जैसी परत पाई जाती है।
  • प्रभावित फसलें: गेहूं, सरसों, चना, मटर, आलू। गेहूं के खेत में यह सबसे अधिक संख्या में पाया जाता है।
  • उपयोग: हालांकि यह एक खरपतवार है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची अवस्था में इसका उपयोग साग (Vegetable) के रूप में मनुष्य द्वारा बहुतायत से किया जाता है। इसमें आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं।

3.4 सत्यानाशी (Mexican Poppy)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):आर्जिमोन मेक्सिकाना (Argemone mexicana)
  • कुल (Family): पैपावरेसी (Papaveraceae)
  • पहचान और विशेषताएँ: यह एक कंटीला (Thorny), चौड़ी पत्ती वाला एकवर्षीय खरपतवार है। इसके पूरे पौधे (पत्तियों और तने) पर कांटे होते हैं। तोड़ने पर इससे पीला दूध (Yellow latex) निकलता है।
  • प्रभावित फसलें: सरसों (Mustard) और गेहूं।
  • हानिकारक प्रभाव (Danger): यह सरसों का आपत्तिजनक खरपतवार (Objectionable weed) है। इसके बीज सरसों के बीजों से बहुत मिलते-जुलते हैं। यदि सत्यानाशी के बीज सरसों के साथ पिस जाएं और उसका तेल मनुष्य खा ले, तो उसे ‘ड्रॉप्सी’ (Dropsy – जलोदर) नामक भयंकर जानलेवा बीमारी हो जाती है।

3.5 हिरनखुरी (Field Bindweed)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):कन्वाल्वुस आर्वेंसिस (Convolvulus arvensis)
  • कुल (Family): कन्वाल्वुलेसी (Convolvulaceae)
  • पहचान: यह एक बहुवर्षीय चौड़ी पत्ती वाला खरपतवार है। इसका तना बहुत कमजोर होता है, इसलिए यह गेहूं या अन्य फसल के पौधों के चारों ओर लिपट (Twining habit) कर ऊपर चढ़ता है।
  • प्रभावित फसलें: गेहूं, चना, मटर।
  • हानि: यह फसल को बुरी तरह जकड़ लेता है, जिससे फसल गिर (Lodging) जाती है और कटाई (Harvesting) में बहुत परेशानी होती है।

3.6 कृष्णनील (Blue Pimpernel)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):एनागैलिस आर्वेंसिस (Anagallis arvensis)
  • कुल (Family): प्रिम्युलेसी (Primulaceae)
  • पहचान: यह छोटे कद का, चौड़ी पत्ती वाला एकवर्षीय खरपतवार है, जिसमें बहुत ही सुंदर गहरे नीले (Deep blue) रंग के छोटे-छोटे फूल आते हैं।
  • प्रभावित फसलें: गेहूं और चना।

3.7 कासनी (Chicory)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Name):सिकोरियम इन्टाइबस (Cichorium intybus)
  • कुल (Family): एस्टरेसी (Asteraceae)
  • पहचान: यह मुख्य रूप से बरसीम (Berseem – रबी की चारा फसल) का एक प्रमुख सापेक्ष या आपत्तिजनक खरपतवार है। इसके बीज बरसीम के बीजों से मिलते हैं।

4. खरीफ और रबी खरपतवारों में प्रमुख अंतर (Difference between Kharif and Rabi Weeds)

बोर्ड परीक्षा के छात्रों के लिए इन दोनों मौसमों के खरपतवारों के बीच अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है:

क्र.सं.विशेषता (Feature)खरीफ के खरपतवार (Kharif Weeds)रबी के खरपतवार (Rabi Weeds)
1.अंकुरण का समय (Germination Time)इनका अंकुरण जून-जुलाई (मानसून के आगमन) में होता है।इनका अंकुरण अक्टूबर-नवंबर (सर्दियों की शुरुआत) में होता है।
2.तापमान की आवश्यकता (Temp. Requirement)इनके बीज उगने के लिए उच्च तापमान (High Temperature) और अधिक नमी चाहिए।इनके बीज उगने के लिए कम तापमान (Low Temperature) और सीमित नमी चाहिए।
3.वृद्धि दर (Growth Rate)इनकी वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative growth) बहुत तेज और आक्रामक होती है।इनकी वृद्धि दर खरीफ की तुलना में थोड़ी धीमी होती है।
4.फसलों को नुकसान (Damage to Crops)वर्षा ऋतु होने के कारण इनका नियंत्रण कठिन होता है, जिससे उपज में बहुत भारी नुकसान (30-50%) होता है।सिंचाई नियंत्रित होने के कारण इनका प्रबंधन थोड़ा आसान होता है, नुकसान अपेक्षाकृत कम (15-30%) होता है।
5.प्रमुख उदाहरण (Major Examples)सांवा, मोथा, पत्थरचट्टा, चौलाई, दूब घास।गेहूं का मामा, बथुआ, जंगली जई, हिरनखुरी, सत्यानाशी।

5. खरपतवारों से होने वाली हानियां (Harmful Effects of Weeds)

चाहे खरपतवार खरीफ के हों या रबी के, वे हमारी कृषि को बहुआयामी नुकसान (Multidimensional damage) पहुंचाते हैं:

  1. फसल के साथ भयंकर प्रतिस्पर्धा (Fierce Competition): खरपतवार मुख्य फसल के साथ स्थान (Space), धूप (Sunlight), जल (Water) और मिट्टी के पोषक तत्वों (Nutrients) के लिए लड़ते हैं। कई बार खरपतवार फसल से भी अधिक नाइट्रोजन और पोटाश सोख लेते हैं।
  2. उपज और गुणवत्ता में कमी (Reduction in Yield and Quality): खरपतवारों के कारण फसल का उत्पादन 30% से 50% तक गिर जाता है। जब खरपतवार के बीज फसल के दानों के साथ मिल जाते हैं (जैसे सत्यानाशी के बीज सरसों में), तो बाजार में उस उपज की कीमत (Market value) गिर जाती है।
  3. कीटों और बीमारियों को आश्रय (Harboring Pests and Diseases): कई खरपतवार हानिकारक कीटों और फफूंदियों के लिए वैकल्पिक परपोषी (Alternate hosts) का काम करते हैं। ऑफ-सीजन में कीट इन्हीं पर जिंदा रहते हैं।
  4. सिंचाई और कटाई में बाधा (Hindrance in Operations): जलकुंभी (Water Hyacinth) जैसे खरपतवार सिंचाई की नालियों को चोक कर देते हैं। हिरनखुरी जैसे बेलदार खरपतवार फसल की कटाई (Harvesting) में भारी दिक्कत पैदा करते हैं।

6. खरीफ और रबी खरपतवारों का प्रबंधन (Management of Kharif and Rabi Weeds)

फसल को सुरक्षित रखने और बंपर पैदावार प्राप्त करने के लिए खरपतवारों का सही समय पर नियंत्रण (Weed Control) बहुत जरूरी है। आधुनिक कृषि में एकीकृत खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management – IWM) को अपनाया जाता है।

6.1 सस्य या कर्षण विधियां (Cultural / Agronomic Methods)

  • ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई (Deep Summer Ploughing): मई-जून की चिलचिलाती धूप में खेत की गहरी जुताई करने से मोथा और दूब घास के भूमिगत कंद और प्रकंद (Tubers and Rhizomes) बाहर आकर धूप से सूख कर नष्ट हो जाते हैं।
  • फसल चक्र (Crop Rotation): लगातार एक ही फसल बोने से एक ही प्रकार के खरपतवार बढ़ते हैं। गेहूं के बाद चना या सरसों बोने से ‘गेहूं के मामा’ (Phalaris minor) का प्रकोप कम हो जाता है।
  • उचित बीज दर और बुवाई का तरीका: बीजों की मात्रा थोड़ी अधिक रखने और कतारों में बुवाई (Line sowing) करने से फसल जल्दी जमीन को ढक लेती है और खरपतवारों को उगने का मौका नहीं मिलता।

6.2 यांत्रिक या भौतिक विधियां (Mechanical / Physical Methods)

  • निराई-गुड़ाई (Hand Weeding & Hoeing): यह सबसे प्राचीन और सुरक्षित विधि है। खुरपी (Khurpi), कुदाली या हैंड-हो (Hand-hoe) की मदद से खरपतवारों को जड़ से उखाड़ कर फेंक दिया जाता है। खरीफ में यह काम 20-25 दिन और 40-45 दिन पर किया जाता है।
  • मल्चिंग (Mulching): कतारों के बीच खाली जमीन को पुआल (Straw) या प्लास्टिक शीट से ढक देना, ताकि खरपतवारों के बीजों को सूर्य का प्रकाश न मिले और वे न उग सकें।

6.3 रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control – Herbicides / Weedicides)

जब खेत में खरपतवारों की संख्या बहुत अधिक हो जाए और निराई-गुड़ाई संभव न हो, तब रासायनिक दवाओं (खरपतवारनाशियों) का प्रयोग किया जाता है। कृषि छात्रों को इन रसायनों के नाम याद रखना अति आवश्यक है:

खरीफ फसलों के लिए प्रमुख खरपतवारनाशी:

  • धान (Paddy): ‘ब्यूटाक्लोर’ (Butachlor) या ‘पेंडीमेथालिन’ (Pendimethalin) का प्रयोग रोपाई के 2-3 दिन के अंदर (Pre-emergence) करना चाहिए।
  • मक्का और ज्वार (Maize & Sorghum): चौड़ी और संकरी पत्ती वाले खरपतवारों को रोकने के लिए बुवाई के तुरंत बाद ‘एट्राजीन’ (Atrazine) का छिड़काव किया जाता है।
  • सोयाबीन/कपास: पेंडीमेथालिन या इमेजाथाइपर (Imazethapyr) का प्रयोग।

रबी फसलों के लिए प्रमुख खरपतवारनाशी:

  • गेहूं में चौड़ी पत्ती (बथुआ, कृष्णनील): बुवाई के 30-35 दिन बाद (Post-emergence) 2,4-D (2,4-Dichlorophenoxyacetic acid) का छिड़काव किया जाता है।
  • गेहूं में संकरी पत्ती (गेहूं का मामा, जंगली जई): इसके लिए ‘सल्फोसल्फ्यूरॉन’ (Sulfosulfuron) या ‘क्लोडिनाफॉप’ (Clodinafop) का प्रयोग बुवाई के 30-35 दिन बाद किया जाता है। (पहले आइसोप्रोट्यूरॉन का प्रयोग होता था)।
  • सरसों और चना (Mustard & Gram): बुवाई के तुरंत बाद (बीज उगने से पहले – Pre-emergence) ‘पेंडीमेथालिन’ (Pendimethalin @ 3.3 L/ha) का प्रयोग सबसे सुरक्षित और प्रभावी है।

7. निष्कर्ष (Conclusion)

खरपतवार कृषि के “मौन शत्रु” (Silent Enemies) हैं। किसान बीमारियों और कीटों को देखकर तुरंत सतर्क हो जाता है, लेकिन खरपतवार धीरे-धीरे फसल का पोषण छीनकर किसान को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

कक्षा 12 के कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए यह समझना आवश्यक है कि खरीफ और रबी मौसम के खरपतवारों का स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। खरीफ में अत्यधिक नमी के कारण निराई-गुड़ाई कठिन होती है, इसलिए वहां रासायनिक और सस्य विधियों का संयोजन अधिक महत्वपूर्ण है। वहीं रबी में गेहूं के मामा (Phalaris minor) जैसी समस्याओं से निपटने के लिए फसल चक्र (Crop rotation) और सही रसायनों का चुनाव जरूरी है। एक सफल कृषि विशेषज्ञ वही है जो सही समय पर, सही खरपतवार की पहचान कर, पर्यावरण हितैषी (Eco-friendly) तरीके से उसका ‘एकीकृत प्रबंधन’ (IWM) कर सके।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

प्रश्न 1: ‘नकलची खरपतवार’ (Mimicry Weed) किसे कहते हैं? खरीफ और रबी का एक-एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: वे खरपतवार जो अपनी प्रारंभिक वानस्पतिक अवस्था (Vegetative stage) में देखने में बिल्कुल मुख्य फसल के पौधे जैसे लगते हैं, नकलची खरपतवार कहलाते हैं। किसान इन्हें आसानी से पहचान नहीं पाता।

  • खरीफ का उदाहरण: धान के खेत में उगने वाला ‘सांवा’ (Echinochloa crusgalli)।
  • रबी का उदाहरण: गेहूं के खेत में उगने वाला ‘गेहूं का मामा / गुल्ली डंडा’ (Phalaris minor)।

प्रश्न 2: बहुवर्षीय खरपतवार (Perennial Weeds) को नष्ट करना सबसे कठिन क्यों होता है?

उत्तर: बहुवर्षीय खरपतवार (जैसे मोथा, दूब घास, काँस) केवल बीजों से ही नहीं, बल्कि जमीन के अंदर गहराई में स्थित अपनी जड़ों, कंदों (Tubers) और प्रकंदों (Rhizomes) द्वारा तेजी से फैलते हैं। यदि इन्हें ऊपर से काट भी दिया जाए, तो जमीन के अंदर छुपे हुए हिस्सों से ये दोबारा अंकुरित हो जाते हैं। इसलिए ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई द्वारा इनकी जड़ों को सुखाना पड़ता है।

प्रश्न 3: गेहूं की फसल में बथुआ (चौड़ी पत्ती) और गेहूं के मामा (संकरी पत्ती) को नियंत्रित करने के लिए किन रसायनों का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर:

  • बथुआ, कृष्णनील और हिरनखुरी (चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार) के नियंत्रण के लिए 2,4-D नामक दवा का प्रयोग बुवाई के 30-35 दिन बाद किया जाता है।
  • गेहूं के मामा (Phalaris minor – संकरी पत्ती) के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन (Sulfosulfuron) या क्लोडिनाफॉप का छिड़काव किया जाता है।

प्रश्न 4: सरसों की फसल के लिए सबसे खतरनाक ‘आपत्तिजनक खरपतवार’ (Objectionable weed) कौन सा है और क्यों?

उत्तर: सरसों के लिए सबसे खतरनाक आपत्तिजनक खरपतवार ‘सत्यानाशी’ (Argemone mexicana) है। इसके बीज सरसों के बीजों से इतने मिलते-जुलते हैं कि इन्हें छानकर अलग करना असंभव होता है। यदि सत्यानाशी के बीज सरसों में पिस जाएं और उस तेल का सेवन मनुष्य कर ले, तो उसे ‘ड्रॉप्सी’ (Dropsy – जलोदर) नामक गंभीर जानलेवा बीमारी हो जाती है।

प्रश्न 5: प्री-इमर्जेंस (Pre-emergence) और पोस्ट-इमर्जेंस (Post-emergence) खरपतवारनाशी में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • प्री-इमर्जेंस (Pre-emergence): इन दवाओं का छिड़काव फसल की बुवाई के तुरंत बाद (1 से 3 दिन के अंदर) लेकिन बीजों के अंकुरण (उगने) से पहले किया जाता है, ताकि खरपतवार के बीज उग ही न सकें। उदाहरण: पेंडीमेथालिन (Pendimethalin)।
  • पोस्ट-इमर्जेंस (Post-emergence): इन दवाओं का छिड़काव फसल और खरपतवार दोनों के उगने के बाद (लगभग 25-35 दिन की अवस्था पर) खड़ी फसल में किया जाता है, ताकि उगे हुए खरपतवार नष्ट हो जाएं। उदाहरण: 2,4-D।

प्रश्न 6: गाजर घास (Parthenium) को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

उत्तर: गाजर घास एक आक्रामक विदेशी खरपतवार है। यह एलेलोपैथी (Allelopathy) प्रभाव छोड़ता है जिससे इसके आसपास कोई दूसरी फसल नहीं उग पाती। इसके अलावा, इसके परागकण हवा में उड़कर मनुष्यों में भयानक एलर्जी, चर्म रोग (Dermatitis) और अस्थमा (Asthma) जैसी बीमारियां पैदा करते हैं।