Major Harmful Insects and Their Management : एमपी बोर्ड कक्षा 12 कृषि विज्ञान (MP Board Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए ‘इकाई 6: पौध संरक्षण – II’ (Unit 6: Plant Protection – II) के अंतर्गत ‘प्रमुख हानिकारक कीट’ (Major Harmful Insects) पर एक अति विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख। इस लेख में फसलों और भंडारित अनाज के प्रमुख कीटों की पहचान, जीवन चक्र, क्षति की प्रकृति (Nature of Damage), और उनके एकीकृत प्रबंधन (Integrated Pest Management) का गहराई से अध्ययन किया गया है। यह बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक संपूर्ण और सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शिका है।
इकाई 6: पौध संरक्षण – II : प्रमुख हानिकारक कीट और उनका प्रबंधन (Unit 6: Plant Protection – II : Major Harmful Insects and Their Management) – कक्षा 12 कृषि विज्ञान के लिए संपूर्ण अध्ययन
1. प्रस्तावना (Introduction)
भारतीय कृषि (Indian Agriculture) में फसल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा हर साल नाशीजीवों (Pests) के कारण नष्ट हो जाता है। पिछली इकाई (Unit 5) में हमने पौध संरक्षण की मूल परिभाषाओं और खरपतवारों का अध्ययन किया था। अब ‘इकाई 6: पौध संरक्षण – II’ (Unit 6: Plant Protection – II) में हम कृषि के एक और सबसे बड़े शत्रु— हानिकारक कीटों (Harmful Insects) का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
एक अनुमान के अनुसार, भारत में कुल कृषि उत्पादन का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा केवल हानिकारक कीटों द्वारा नष्ट कर दिया जाता है। यह नुकसान केवल खेतों में खड़ी फसल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि कटाई के बाद गोदामों (Warehouses) में रखे अनाज को भी कीट भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
मध्य प्रदेश (MP Board) और अन्य राज्य बोर्डों के कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के पाठ्यक्रम में प्रमुख फसलों (जैसे चना, धान, कपास, सरसों, गन्ना) और भंडारित अनाज (Stored grains) के कीटों की पहचान, उनका जीवन चक्र (Life cycle) और उनके नियंत्रण (Control measures) का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। इस विस्तृत लेख में हम इन सभी पहलुओं का वैज्ञानिक और व्यावहारिक (Scientific and Practical) अध्ययन करेंगे।
2. कीट क्या हैं? (What are Insects? – A Scientific Overview)
कृषि में हानिकारक कीटों को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि वास्तव में कीट (Insect) किसे कहते हैं।
जीव विज्ञान (Biology) के अनुसार, कीट ‘आर्थ्रोपोडा’ संघ (Phylum Arthropoda) और ‘इन्सेक्टा’ वर्ग (Class Insecta) के प्राणी हैं। एक वयस्क कीट (Adult Insect) की मुख्य जैविक विशेषताएं निम्नलिखित होती हैं:
- शरीर का विभाजन (Body Division): कीट का शरीर मुख्य रूप से तीन भागों में बंटा होता है— सिर (Head), वक्ष (Thorax), और उदर (Abdomen)।
- पैरों की संख्या (Number of Legs): सभी कीटों के वक्ष (Thorax) भाग में 3 जोड़ी (यानी कुल 6) पैर पाए जाते हैं। इसीलिए इन्हें हेक्सापोडा (Hexapoda) भी कहा जाता है।
- पंख और शृंगिकाएं (Wings and Antennae): अधिकांश कीटों में एक या दो जोड़ी पंख (Wings) और सिर पर एक जोड़ी संवेदी शृंगिकाएं (Antennae) पाई जाती हैं।
3. मुखांगों के आधार पर हानिकारक कीटों का वर्गीकरण (Classification of Harmful Insects based on Mouthparts)
फसलों को नुकसान पहुंचाने के तरीके के आधार पर कीटों को उनके मुखांगों (Mouthparts) के अनुसार दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
- चबाने और काटने वाले कीट (Biting and Chewing Insects):इन कीटों के जबड़े (Mandibles) बहुत मजबूत होते हैं। ये पौधों की पत्तियों, तनों, फूलों और फलों को काटकर चबा जाते हैं।उदाहरण: टिड्डी (Grasshopper), चने की सूंडी (Gram Pod Borer), दीमक (Termite), और विभिन्न प्रकार की इल्लियां (Caterpillars)।
- छेदने और रस चूसने वाले कीट (Piercing and Sucking Insects):इन कीटों के मुखांग सुई (Needle) की तरह नुकीले होते हैं। ये पौधे के कोमल भागों (पत्तियों, तनों, फूलों) में छेद करके उनका रस (Plant sap) चूस लेते हैं, जिससे पौधा कमजोर होकर पीला पड़ जाता है।उदाहरण: माहू / चेपा (Aphid), सफेद मक्खी (Whitefly), गंधी बग (Gundhi Bug), और थ्रिप्स (Thrips)।
4. प्रमुख फसलों के हानिकारक कीट और उनका प्रबंधन (Major Harmful Insects of Crops and Their Management)
बोर्ड परीक्षाओं (Board Exams) में विशेष फसलों के कीटों पर विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं। आइए मध्य प्रदेश और भारत की प्रमुख फसलों के कीटों का गहराई से अध्ययन करें:
4.1 चने की फली छेदक (Gram Pod Borer)
यह चने (Chickpea) की फसल का सबसे भयंकर और विनाशकारी कीट है। यह एक बहुभक्षी कीट (Polyphagous pest) है जो चने के अलावा अरहर, टमाटर, कपास और मटर को भी भारी नुकसान पहुंचाता है।
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):हेलिकोवर्पा आर्मीजेरा (Helicoverpa armigera)
- क्षति की प्रकृति (Nature of Damage):इस कीट की केवल लार्वा / सूंडी (Caterpillar) अवस्था ही फसल को नुकसान पहुंचाती है। शुरुआत में सूंडी कोमल पत्तियों को खाती है। जब चने में फलियां (Pods) लगने लगती हैं, तो यह सूंडी फली में छेद करके अपना आधा शरीर अंदर डाल देती है और अंदर के दानों (Seeds) को खाकर फली को खोखला कर देती है।
- जीवन चक्र (Life Cycle): पूर्ण कायांतरण (Complete Metamorphosis)। यह अंडा (Egg)
लार्वा (Larva)
प्यूपा (Pupa)
वयस्क (Adult) अवस्थाओं से गुजरता है। - नियंत्रण (Control Measures):
- सस्य नियंत्रण: चने के साथ गेंदा (Marigold) की फसल को ‘ट्रैप क्रॉप’ (Trap crop) के रूप में उगाना चाहिए। गेंदे के फूलों पर कीट आकर्षित होकर अंडे देते हैं, जिन्हें बाद में नष्ट किया जा सकता है।
- जैविक नियंत्रण: NPV (Nucleopolyhedrovirus) @ 250 LE प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। ‘ट्राइकोग्रामा’ (Trichogramma) नामक परजीवी कार्ड का उपयोग करें। फेरोमोन ट्रैप (Pheromone traps) लगाकर नर कीटों को फंसाएं।
- रासायनिक नियंत्रण: क्लोरपाइरीफॉस (Chlorpyrifos) 20 EC या इंडोक्साकार्ब (Indoxacarb) 14.5 SC का उचित मात्रा में छिड़काव करें।
4.2 धान का गंधी बग (Paddy Gundhi Bug)
यह धान (Paddy/Rice) का एक अत्यंत हानिकारक रस चूसने वाला कीट है।
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):लेप्टोकोरिसा एक्यूटा (Leptocorisa acuta)
- क्षति की प्रकृति (Nature of Damage):इस कीट के निम्फ (Nymph – शिशु) और वयस्क (Adult) दोनों ही फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। ये धान की बालियों (Panicles) में जब दूधिया अवस्था (Milky stage) होती है, तब दानों में सुई चुभाकर उनका दूधिया रस चूस लेते हैं। इससे दाने खोखले (Chaffy grains) रह जाते हैं।
- विशेष पहचान: इस कीट के शरीर से एक विशेष प्रकार की बदबू (Foul odor/Smell) आती है, इसीलिए इसे ‘गंधी बग’ कहा जाता है। खेत के पास से गुजरने पर यह बदबू आसानी से महसूस की जा सकती है।
- नियंत्रण (Control Measures):
- खेत के आसपास से खरपतवारों (विशेषकर सावां घास) को नष्ट कर देना चाहिए।
- प्रकाश प्रपंच (Light traps) लगाकर कीटों को आकर्षित कर नष्ट करें।
- रासायनिक नियंत्रण: मैलाथियान (Malathion 5% Dust) या क्विनालफॉस (Quinalphos 1.5% Dust) का 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह या शाम के समय भुरकाव (Dusting) करें।
4.3 धान का पीला तना छेदक (Yellow Stem Borer of Paddy)
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):सिर्पोफागा इन्सर्टुलस (Scirpophaga incertulas)
- क्षति की प्रकृति (Nature of Damage):इसकी सूंडी (Caterpillar) तने के अंदर घुस जाती है और अंदर से तने को खाती है।
- वानस्पतिक अवस्था (Vegetative stage) में इसके हमले से मुख्य प्ररोह (Central shoot) सूख जाता है, जिसे ‘डेड हार्ट’ (Dead Heart) कहते हैं।
- बालियां आने की अवस्था में हमले से बालियां सफेद होकर सूख जाती हैं, जिनमें दाने नहीं बनते। इसे ‘सफेद बाली’ (White Head) कहते हैं।
- नियंत्रण:
- कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई (Deep ploughing) करें ताकि ठूंठ (Stubbles) में छुपे प्यूपा नष्ट हो जाएं।
- रासायनिक नियंत्रण के लिए कारटैप हाइड्रोक्लोराइड (Cartap hydrochloride 4G) या कार्बोफ्यूरान (Carbofuran 3G) दानेदार कीटनाशक का प्रयोग करें।
4.4 सरसों का माहू / चेपा (Mustard Aphid)
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):लिपाफिस इरिसिमी (Lipaphis erysimi)
- क्षति की प्रकृति (Nature of Damage):यह बहुत ही छोटा, कोमल और हरे-पीले रंग का रस चूसने वाला कीट है। ये कीट लाखों की संख्या में सरसों की पत्तियों, तनों, और फूलों (Inflorescence) पर चिपक जाते हैं और रस चूसते हैं।
- इससे पौधे पीले पड़ जाते हैं और फलियों में दाने नहीं बनते।
- यह कीट अपने शरीर से एक मीठा चिपचिपा पदार्थ ‘हनीड्यू’ (Honeydew) निकालता है। इस पर काली फफूंद (Sooty mold) उग आती है, जिससे पत्तियों का प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) रुक जाता है।
- नियंत्रण (Control Measures):
- जैविक नियंत्रण: लेडीबर्ड बीटल (Ladybird beetle / Coccinella) माहू का सबसे बड़ा प्राकृतिक शत्रु (Predator) है। इसे खेत में छोड़ना चाहिए। क्राइसोपर्ला (Chrysoperla) का भी उपयोग किया जा सकता है।
- रासायनिक नियंत्रण: रस चूसने वाले कीटों के लिए सर्वांगी कीटनाशक (Systemic Insecticides) जैसे— डाइमेथोएट (Dimethoate 30 EC) या इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid 17.8 SL) का छिड़काव करना सबसे प्रभावी होता है।
4.5 कपास की गुलाबी सूंडी (Pink Bollworm of Cotton)
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):पेक्टिनोफोरा गोसिपिएला (Pectinophora gossypiella)
- क्षति की प्रकृति (Nature of Damage):यह कपास (Cotton) का सबसे खतरनाक कीट है। इसकी सूंडी (Larva) हल्के गुलाबी रंग की होती है।
- यह कपास के फूलों (Flowers) और गूलर/टिंडों (Bolls) में छेद करके अंदर घुस जाती है।
- इसके हमले से फूल खिल नहीं पाते और ‘रोजेट’ (Rosette flower) का आकार ले लेते हैं। यह अंदर ही अंदर बीजों और रुई (Lint) को खाकर नष्ट कर देती है, जिससे रुई की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
- नियंत्रण:
- प्रतिरोधी किस्में जैसे ‘बी.टी. कपास’ (Bt Cotton) का प्रयोग करें।
- फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Traps) का उपयोग करके नर कीटों को फंसाएं।
- रासायनिक नियंत्रण: क्विनालफॉस (Quinalphos) या प्रोफेनोफॉस (Profenofos) का छिड़काव करें।
4.6 गन्ने का पायरिल्ला या पत्ती फुदका (Sugarcane Pyrilla)
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):पायरिल्ला परप्यूसिला (Pyrilla perpusilla)
- क्षति की प्रकृति (Nature of Damage):यह गन्ने का प्रमुख रस चूसने वाला कीट है। इसके निम्फ और वयस्क गन्ने की पत्तियों की निचली सतह पर रहकर रस चूसते हैं।
- इससे पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं।
- यह भी ‘हनीड्यू’ (Honeydew) स्रावित करता है जिस पर काली फफूंद (Sooty mold) उग आती है। इससे गन्ने की वृद्धि रुक जाती है और रस में चीनी की मात्रा (Sugar recovery) 2-3% तक गिर जाती है।
- नियंत्रण:
- इसके जैविक नियंत्रण के लिए ‘एपिरिकानिया मेलानोल्यूका’ (Epiricania melanoleuca) नामक परजीवी कीट का सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है। यह पायरिल्ला का प्राकृतिक शत्रु है।
4.7 दीमक (Termites / White Ants)
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):ओडोंटोटर्मिस ओबेसस (Odontotermes obesus)
- प्रकृति (Nature): दीमक एक ‘सामाजिक कीट’ (Social Insect) है जो कॉलोनियों में रहता है। इसकी कॉलोनी में रानी (Queen), राजा (King), श्रमिक (Workers), और सैनिक (Soldiers) होते हैं।
- क्षति की प्रकृति: कृषि में केवल ‘श्रमिक’ (Workers) ही फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। ये गेहूं, चना, गन्ना और लकड़ी को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। ये पौधों की जड़ों (Roots) और तने को जमीन के अंदर ही अंदर खाकर खोखला कर देते हैं, जिससे पूरा पौधा सूख कर आसानी से खिंच जाता है।
- नियंत्रण (Control):
- खेत में कच्ची गोबर की खाद (Undecomposed FYM) का प्रयोग कभी न करें, क्योंकि यह दीमक को आकर्षित करती है।
- दीमक की बांबी या टीले (Termitarium) को खोदकर रानी दीमक (Queen) को मार दें।
- रासायनिक नियंत्रण: बीजोपचार (Seed treatment) के लिए क्लोरपाइरीफॉस (Chlorpyrifos 20 EC) का प्रयोग करें। खड़ी फसल में सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफॉस दें।
5. भंडारित अनाज के प्रमुख कीट (Major Pests of Stored Grains)
बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से भंडारित अनाज के कीट अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। खेत में कटाई के बाद जब किसान अनाज को गोदामों (Warehouses/Silos) में रखता है, तो वहां भी कीट भारी नुकसान (लगभग 10%) पहुंचाते हैं। ये कीट दो प्रकार के होते हैं:
- प्राथमिक कीट (Primary Pests): जो साबुत और स्वस्थ दानों (Whole grains) को काट सकते हैं। (जैसे— घुन, खपरा बीटल)।
- द्वितीयक कीट (Secondary Pests): जो केवल टूटे हुए या पिसे हुए अनाज (Broken grains/Flour) को नुकसान पहुंचाते हैं। (जैसे— लाल सुरी / Red Rust Flour Beetle)।
5.1 घुन या चावल का घुन (Rice Weevil)
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):साइटोफिलस ओराइजी (Sitophilus oryzae)
- पहचान: यह गहरे भूरे या काले रंग का एक छोटा सा भृंग (Beetle) होता है, जिसके मुंह के आगे सूंड (Snout) होती है।
- क्षति की प्रकृति: यह भंडारित गेहूं, चावल, मक्का और ज्वार का सबसे बड़ा शत्रु है। मादा दाने के अंदर छेद करके अंडे देती है। इसकी ग्रब (Grub – सूंडी) दाने को अंदर से खाकर पूरा खोखला कर देती है और वयस्क दाने में गोल छेद करके बाहर निकलता है।
5.2 खपरा बीटल (Khapra Beetle)
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name):ट्रोगोडर्मा ग्रेनेरियम (Trogoderma granarium)
- क्षति की प्रकृति: यह भारत में भंडारित गेहूं का सबसे भयंकर कीट है। इसकी ग्रब (Grub) अवस्था के शरीर पर बहुत सारे बाल (Hairs) होते हैं। यह अनाज के ऊपरी भाग (भ्रूण / Embryo) को सबसे पहले खाती है, जिससे बीज की अंकुरण क्षमता (Germination capacity) नष्ट हो जाती है।
भंडारित अनाज के कीटों का नियंत्रण (Management of Stored Grain Pests)
- सुखाना (Drying): भंडारण से पहले अनाज को तेज धूप में अच्छी तरह सुखाना चाहिए ताकि दानों में नमी (Moisture) 10% से कम रह जाए। नमी कीटों को पनपने का मौका देती है।
- सफाई: गोदाम की दरारों (Cracks and crevices) को भर दें और पुरानी बोरियों को उबलते पानी या मैलाथियान (Malathion) से उपचारित करें।
- धूमन (Fumigation): यदि अनाज में कीट लग गए हैं, तो एल्मुनियम फॉस्फाइड (Aluminium Phosphide / Celphos / Sulphas) की गोलियों का उपयोग करें। यह हवा की नमी के संपर्क में आकर जहरीली फॉस्फीन गैस (Phosphine gas) छोड़ती है, जो अनाज के अंदर गहराई तक जाकर कीटों को मार देती है। (3 गोलियां / टन अनाज)।
6. कीटों से होने वाली हानियां (Damage Caused by Insects)
कीट कृषि को दो प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं:
- प्रत्यक्ष हानि (Direct Damage): कीट पौधों की पत्तियों को खाकर प्रकाश संश्लेषण रोक देते हैं, तनों और जड़ों को खाकर पौधे को सुखा देते हैं, या फलों/फूलों को नष्ट करके सीधे उपज (Yield) को कम कर देते हैं (जैसे— फली छेदक, तना छेदक)।
- अप्रत्यक्ष हानि (Indirect Damage): कुछ कीट (विशेषकर रस चूसने वाले कीट जैसे सफेद मक्खी और माहू) पौधों में बीमारियों को फैलाते हैं। ये ‘रोगवाहक’ (Vector) का काम करते हैं। उदाहरण के लिए, सफेद मक्खी भिंडी में ‘पीत शिरा मोज़ेक’ (Yellow Vein Mosaic) और टमाटर में ‘पत्ती मरोड़’ (Leaf Curl) वायरस फैलाती है।
7. कीट नियंत्रण की आधुनिक विधियां : एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (Modern Methods of Insect Control : IPM)
आधुनिक कृषि में रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने के लिए एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM) अपनाया जाता है। इसके मुख्य अंग निम्नलिखित हैं:
7.1 सस्य वैज्ञानिक नियंत्रण (Cultural Control)
- गहरी ग्रीष्मकालीन जुताई करना ताकि जमीन में छुपे कीटों के प्यूपा (Pupae) धूप में मर जाएं।
- फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाना।
- ‘ट्रैप क्रॉप’ (Trap Crop) उगाना, जैसे कपास या चने के चारों ओर भिंडी या गेंदा उगाना।
- रोग एवं कीट प्रतिरोधी किस्मों (Resistant Varieties) का उपयोग करना।
7.2 यांत्रिक एवं भौतिक नियंत्रण (Mechanical & Physical Control)
- खेत में प्रकाश प्रपंच (Light traps) लगाना। रात में बल्ब की रोशनी से आकर्षित होकर कीट नीचे रखे केरोसिन मिले पानी में गिरकर मर जाते हैं।
- पीले चिपचिपे जाल (Yellow Sticky Traps) का प्रयोग। रस चूसने वाले कीट (सफेद मक्खी, माहू) पीले रंग की ओर आकर्षित होकर इन पर चिपक जाते हैं।
- नर कीटों को फंसाने के लिए फेरोमोन ट्रैप (Pheromone Traps) का उपयोग करना।
7.3 जैविक नियंत्रण (Biological Control)
यह सबसे पर्यावरण हितैषी (Eco-friendly) विधि है। इसमें शत्रु कीटों को मारने के लिए उनके ‘प्राकृतिक शत्रुओं’ (Natural Enemies) का प्रयोग किया जाता है।
- परभक्षी (Predators): लेडीबर्ड बीटल (Ladybird beetle) और क्राइसोपर्ला (Chrysoperla) जो माहू को खा जाते हैं।
- परजीवी (Parasitoids):ट्राइकोग्रामा (Trichogramma) जैसे छोटे ततैया जो फली छेदक कीटों के अंडों को नष्ट कर देते हैं।
- जैविक कीटनाशक (Biopesticides): नीम का अर्क (Neem oil – Azadirachtin), बेसिलस थुरिंजिएंसिस (Bt), और NPV वायरस का छिड़काव।
7.4 रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control)
जब अन्य सभी विधियां विफल हो जाएं और कीटों की संख्या ‘आर्थिक क्षति स्तर’ (Economic Threshold Level – ETL) को पार कर जाए, तब रसायनों (Insecticides) का प्रयोग किया जाता है।
- चबाने वाले कीटों के लिए ‘संपर्क कीटनाशक’ (Contact Insecticides) जैसे— क्लोरपाइरीफॉस, साइपरमेथ्रिन।
- रस चूसने वाले कीटों के लिए ‘सर्वांगी कीटनाशक’ (Systemic Insecticides) जैसे— डाइमेथोएट, इमिडाक्लोप्रिड, मोनोक्रोटोफॉस।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
कक्षा 12 कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए ‘प्रमुख हानिकारक कीटों’ (Major Harmful Insects) का यह अध्याय कृषि की वास्तविक चुनौतियों को समझने का एक द्वार है। एक सफल कृषि विशेषज्ञ या किसान बनने के लिए कीट की पहचान (Identification), उसके जीवन चक्र (Life cycle) की कमजोर कड़ी को जानना और उचित प्रबंधन (Management) का ज्ञान होना नितांत आवश्यक है।
हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी कीट हानिकारक नहीं होते; मधुमक्खी (Honeybee) और केंचुआ जैसे कई जीव किसान के परम मित्र हैं। इसलिए, हमें रसायनों के अंधे प्रयोग से बचकर ‘एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन’ (IPM) को अपनाना चाहिए, ताकि हमारी फसलें भी सुरक्षित रहें और हमारा पर्यावरण (Environment) भी।
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: ‘डेड हार्ट’ (Dead Heart) और ‘सफेद बाली’ (White Head) किस कीट के हमले के लक्षण हैं?
उत्तर: ये दोनों धान के ‘पीले तना छेदक’ (Yellow Stem Borer – Scirpophaga incertulas) के हमले के लक्षण हैं। वानस्पतिक अवस्था में तना सूखने को ‘डेड हार्ट’ और बालियां सूख कर सफेद हो जाने को ‘सफेद बाली’ कहते हैं।
प्रश्न 2: चने की फली छेदक (Gram Pod Borer) का जैविक नियंत्रण कैसे किया जाता है?
उत्तर: इसके जैविक नियंत्रण के लिए NPV (Nucleopolyhedrovirus) का छिड़काव किया जाता है। इसके अलावा ‘ट्राइकोग्रामा’ (Trichogramma) नामक परजीवी (Parasitoid) का उपयोग किया जाता है, जो फली छेदक के अंडों को नष्ट कर देता है।
प्रश्न 3: गंधी बग (Gundhi Bug) फसल को किस अवस्था में नुकसान पहुंचाता है?
उत्तर: धान का गंधी बग फसल को ‘दूधिया अवस्था’ (Milky stage) में नुकसान पहुंचाता है। इसके निम्फ और वयस्क दोनों ही बालियों के दानों में सुई चुभाकर दूधिया रस चूस लेते हैं, जिससे दाने खोखले रह जाते हैं।
प्रश्न 4: भंडारित अनाज में एल्मुनियम फॉस्फाइड (सल्फास) का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: एल्मुनियम फॉस्फाइड (Aluminium Phosphide) एक धूमन रसायन (Fumigant) है। यह हवा की नमी के साथ क्रिया करके ‘फॉस्फीन गैस’ (Phosphine gas) बनाता है। यह जहरीली गैस गोदाम में रखे अनाज के अंदर गहराई तक जाकर घुन और खपरा बीटल जैसे भंडारित अनाज के कीटों को पूरी तरह नष्ट कर देती है।
प्रश्न 5: ट्रैप क्रॉप (Trap Crop) किसे कहते हैं? एक उदाहरण दें।
उत्तर: मुख्य फसल को कीटों से बचाने के लिए उसके चारों ओर या बीच में कोई ऐसी फसल बोना, जिस पर कीट अधिक आकर्षित हों, ट्रैप क्रॉप (फंदा फसल) कहलाता है। उदाहरण: चने या टमाटर की फसल को ‘फली छेदक’ से बचाने के लिए खेत के चारों ओर गेंदा (Marigold) लगाना। कीट टमाटर की बजाय गेंदे के फूलों पर अंडे देता है।
प्रश्न 6: सर्वांगी कीटनाशक (Systemic Insecticide) रस चूसने वाले कीटों के लिए अधिक प्रभावी क्यों होते हैं?
उत्तर: सर्वांगी कीटनाशक पौधे की पत्तियों द्वारा सोख लिए जाते हैं और पूरे पौधे के रस (Plant sap) में फैल जाते हैं। जब माहू या सफेद मक्खी जैसे कीट पौधे का रस चूसते हैं, तो यह विष उनके शरीर में जाकर उन्हें मार देता है। (उदाहरण: डाइमेथोएट)।