Major Fungicides: Basic Information and Methods of Application : एमपी बोर्ड कक्षा 12 कृषि विज्ञान (MP Board Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए ‘इकाई 6: पौध संरक्षण – II’ (Unit 6: Plant Protection – II) के अंतर्गत ‘प्रमुख कवकनाशियों की प्रारंभिक जानकारी और उपयोग विधि’ (Basic Information and Application Methods of Major Fungicides) पर एक अति विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख। इस लेख में कवकनाशियों के प्रकार, प्रमुख रसायनों (जैसे मैन्कोजेब, कार्बेन्डाजिम, थाइरम) की कार्यप्रणाली, बीजोपचार और छिड़काव की विधियों तथा सावधानियों का द्विभाषी (Bilingual) रूप में गहराई से अध्ययन किया गया है। यह बोर्ड परीक्षाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शिका है।
इकाई 6: पौध संरक्षण – II : प्रमुख कवकनाशियों की प्रारंभिक जानकारी और उपयोग विधि (Major Fungicides: Basic Information and Methods of Application) – कक्षा 12 कृषि विज्ञान
भारतीय कृषि (Indian Agriculture) में फसल उत्पादन को सबसे अधिक नुकसान पादप रोगों (Plant Diseases) द्वारा होता है। पादप रोग विज्ञान (Plant Pathology) के अनुसार, फसलों में लगने वाली लगभग 80% बीमारियां केवल फफूंदी या कवकों (Fungi) के कारण होती हैं। गेहूँ का रतुआ (Rust), आलू का झुलसा (Blight), और गन्ने का लाल सड़न (Red Rot) जैसे भयंकर रोग कवक जनित ही हैं। जब सस्य (Cultural) और जैविक (Biological) नियंत्रण विधियां इन रोगों को रोकने में विफल हो जाती हैं, तब फसल को तुरंत नष्ट होने से बचाने के लिए रसायनों का उपयोग करना अनिवार्य हो जाता है।
कृषि विज्ञान में कवकों (Fungi) को मारने या उनकी वृद्धि को रोकने के लिए जिन जहरीले रासायनिक पदार्थों (Toxic Chemicals) का उपयोग किया जाता है, उन्हें कवकनाशी या फफूंदनाशी (Fungicides) कहते हैं। कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि बाजार में उपलब्ध कौन-सा कवकनाशी किस बीमारी में काम आता है और उसे फसल पर किस विधि से प्रयोग करना चाहिए।
कवकनाशियों का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Fungicides)
शब्द ‘Fungicide’ दो लैटिन शब्दों से मिलकर बना है— Fungus (कवक) और Caedo (मारना)।
परिभाषा: “वे रासायनिक पदार्थ जो पादप रोग उत्पन्न करने वाले कवकों (Fungi) के बीजाणुओं (Spores) को सीधे मार देते हैं या उनके अंकुरण (Germination) और वृद्धि को रोककर पौधे को बीमारी से बचाते हैं, कवकनाशी (Fungicides) कहलाते हैं।”
कवकनाशियों का वर्गीकरण (Classification of Fungicides)
पौधे के शरीर में प्रवेश करने के तरीके और कार्यप्रणाली (Mode of Action) के आधार पर कवकनाशियों को मुख्य रूप से दो बड़े वर्गों में बांटा गया है:
1. संपर्क कवकनाशी (Contact Fungicides)
ये वे रसायन होते हैं जो पौधे के अंदर प्रवेश नहीं करते हैं। जब इन्हें पौधे पर छिड़का जाता है, तो ये पत्तियों और तनों की बाहरी सतह (Outer surface) पर एक सुरक्षात्मक आवरण (Protective coating) बना लेते हैं। जब कोई उड़ता हुआ कवक बीजाणु (Fungal spore) इस रसायन के संपर्क में आता है, तो वह मर जाता है।
- विशेषता: ये बीमारी को पौधे के अंदर जाने से रोकते हैं (Preventive action)। लेकिन यदि बीमारी पौधे के अंदर पहले ही प्रवेश कर चुकी है, तो ये उसे ठीक नहीं कर सकते। बारिश होने पर ये धुलकर साफ हो जाते हैं।
- प्रमुख उदाहरण: मैन्कोजेब (Mancozeb), कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride), कैपटाफ (Captaf)।
2. सर्वांगी या दैहिक कवकनाशी (Systemic Fungicides)
ये आधुनिक और अत्यंत शक्तिशाली रसायन होते हैं। जब इन्हें पौधे की जड़ या पत्तियों पर डाला जाता है, तो ये पौधे द्वारा अवशोषित (Absorbed) कर लिए जाते हैं और संवहन ऊतकों (Xylem and Phloem) के माध्यम से पौधे के पूरे तंत्र (System) में फैल जाते हैं।
- विशेषता: ये पौधे के अंदर गहराई में छिपे हुए कवक (Internal infection) को भी ढूंढकर मार देते हैं। इन पर बारिश का कोई असर नहीं होता, क्योंकि ये पौधे के अंदर सुरक्षित रहते हैं। इनका उपयोग निवारक (Preventive) और उपचारात्मक (Curative) दोनों रूपों में किया जाता है।
- प्रमुख उदाहरण: कार्बेन्डाजिम (Carbendazim), प्रोपिकोनाज़ोल (Propiconazole), मेटालैक्सिल (Metalaxyl)।
प्रमुख कवकनाशियों की प्रारंभिक जानकारी (Basic Information of Major Fungicides)
कृषि छात्रों को उन प्रमुख कवकनाशियों की जानकारी होनी चाहिए जो भारतीय किसानों द्वारा सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं:
1. मैन्कोजेब (Mancozeb)
- व्यापारिक नाम (Trade Name): डाइथेन एम-45 (Dithane M-45), इंडोफिल एम-45।
- प्रकृति (Nature): यह एक बहुत ही प्रसिद्ध ‘संपर्क कवकनाशी’ (Contact Fungicide) है। यह डाइथायोकार्बामेट (Dithiocarbamate) समूह का रसायन है, जिसमें मैंगनीज (Mn) और जिंक (Zn) तत्व पाए जाते हैं, जो पौधे को अतिरिक्त पोषण भी देते हैं।
- उपयोग (Uses): इसका उपयोग आलू और टमाटर के अगेती तथा पछेती झुलसा (Early and Late Blight), धान के भूरा पत्ती धब्बा, और सेब के स्कैब (Scab) रोग को रोकने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
- मात्रा (Dose): 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव।
2. कार्बेन्डाजिम (Carbendazim)
- व्यापारिक नाम (Trade Name): बाविस्टिन (Bavistin), डेरोसाल।
- प्रकृति (Nature): यह एक अत्यंत लोकप्रिय ‘सर्वांगी कवकनाशी’ (Systemic Fungicide) है।
- उपयोग (Uses): इसका उपयोग बीजोपचार (Seed treatment), मृदा उपचार (Soil treatment) और खड़ी फसल पर छिड़काव, तीनों के लिए किया जाता है। यह अंतः बीजोढ़ (Internally seed-borne) रोगों जैसे गेहूँ के ‘अनावृत कण्डवा’ (Loose smut), चने के ‘उकठा’ (Wilt) और चूर्णी फफूंदी (Powdery mildew) को रोकने के लिए रामबाण है।
- मात्रा (Dose): बीजोपचार के लिए 2 से 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज।
3. थाइरम (Thiram)
- प्रकृति (Nature): यह एक संपर्क कवकनाशी (Contact Fungicide) है।
- उपयोग (Uses): थाइरम का सबसे बड़ा उपयोग बीजोपचार (Seed treatment) के लिए किया जाता है। यह बीज के बाहरी आवरण पर मौजूद कवकों को नष्ट करता है और बीज को मिट्टी में सड़ने (Damping off) से बचाता है। दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई से पहले थाइरम का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है।
- मात्रा (Dose): 2 से 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज।
4. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride – COC)
- व्यापारिक नाम (Trade Name): ब्लाइटॉक्स-50 (Blitox-50), ब्लू कॉपर।
- प्रकृति (Nature): यह तांबा (Copper) युक्त एक संपर्क कवकनाशी है।
- उपयोग (Uses): तांबे के रसायनों की विशेष बात यह है कि ये कवकों के साथ-साथ जीवाणुओं (Bacteria) को भी मारते हैं। इसलिए इसका उपयोग नींबू के कैंकर (Citrus canker), फफूंदी जनित झुलसा, और जड़ गलन (Root rot) में मिट्टी को भिगोने (Drenching) के लिए किया जाता है।
5. प्रोपिकोनाज़ोल (Propiconazole)
- व्यापारिक नाम (Trade Name): टिल्ट (Tilt)।
- प्रकृति (Nature): यह एक आधुनिक सर्वांगी कवकनाशी (Systemic Fungicide) है।
- उपयोग (Uses): इसका सबसे बेहतरीन उपयोग ‘रतुआ’ या गेरुई (Rust diseases) को खत्म करने के लिए किया जाता है। गेहूँ के पीले और काले रतुए के लक्षण दिखते ही इसका छिड़काव फसल को तुरंत ठीक कर देता है।
6. बोर्डो मिश्रण (Bordeaux Mixture)
यह दुनिया का सबसे पुराना कवकनाशी है, जिसे 1882 में प्रोफेसर मिलारडेट (Millardet) ने खोजा था।
- घटक (Components): यह कॉपर सल्फेट (नीला थोथा), बुझा हुआ चूना (Slaked lime), और पानी का मिश्रण है। (अनुपात: 5:5:50 या 4:4:50)।
- उपयोग: इसे किसान स्वयं खेत में ताज़ा बनाते हैं। यह अंगूर के डाउनी मिल्ड्यू (Downy mildew) और फलदार वृक्षों की कई बीमारियों को रोकने में अत्यंत कारगर है।
कवकनाशियों के प्रयोग की विधियाँ (Methods of Application of Fungicides)
कवकनाशी का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही विधि और उचित समय पर प्रयोग किया जाए। इसके प्रयोग की मुख्य 4 विधियां हैं:
1. बीजोपचार या बीज शोधन (Seed Treatment)
यह रोग नियंत्रण की सबसे सस्ती, सबसे आसान और सबसे आवश्यक विधि है। बुवाई से पहले बीजों के ऊपर कवकनाशी रसायनों की परत चढ़ाने की क्रिया को बीजोपचार कहते हैं।
- उद्देश्य: यह बीजों के अंदर और बाहर मौजूद फफूंदी को नष्ट करता है और मिट्टी में बोए जाने के बाद बीजों को सड़ने से बचाता है।
- सूखी विधि (Dry Treatment): इसमें रोटरी सीड ट्रेटर (Seed treating drum) में बीज और सूखे कवकनाशी पाउडर (जैसे थाइरम या कार्बेन्डाजिम 2-3 ग्राम/किलो बीज) को डालकर 5-10 मिनट तक घुमाया जाता है, जिससे बीजों पर दवा की परत चढ़ जाती है।
- क्रम का ध्यान (FIR Rule): यदि बीज को तीन चीजों से उपचारित करना हो, तो सबसे पहले F (Fungicide / कवकनाशी), फिर I (Insecticide / कीटनाशक), और अंत में R (Rhizobium / जैविक खाद) मिलाना चाहिए।
2. मृदा उपचार (Soil Treatment)
मिट्टी में रहने वाले कवकों (जैसे Fusarium जो उकठा या Wilt रोग फैलाते हैं) को नष्ट करने के लिए यह विधि अपनाई जाती है।
- ड्रेन्चिंग (Drenching): इसमें कवकनाशी (जैसे कॉपर ऑक्सीक्लोराइड) का घोल बनाकर पौधों की जड़ों के पास मिट्टी को अच्छी तरह भिगो दिया जाता है। यह नर्सरी में ‘डैम्पिंग ऑफ’ (पौध गलन) बीमारी को रोकता है।
- पाउडर मिलाना: बुवाई से पहले खेत की तैयारी के समय पीसीएनबी (PCNB) या कैप्टान पाउडर को मिट्टी में मिला दिया जाता है।
3. पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray)
हवा द्वारा फैलने वाले रोगों (Air-borne diseases) जैसे— रतुआ, झुलसा, और चूर्णी फफूंदी (Powdery mildew) के नियंत्रण के लिए यह सबसे उत्तम विधि है।
- विधि: कवकनाशी (संपर्क या सर्वांगी) की निर्धारित मात्रा को पानी में घोलकर नैपसेक स्प्रेयर (Knapsack Sprayer) या ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर की मदद से खड़ी फसल की पत्तियों पर बारीक बूंदों (Mist) के रूप में छिड़का जाता है।
- समय: छिड़काव हमेशा रोग के लक्षण दिखाई देते ही या निवारक (Preventive) रूप में मौसम खराब होने से पहले कर देना चाहिए।
4. फसल कटाई के बाद का उपचार (Post-Harvest Treatment)
जब फल, सब्जियां या कंद (जैसे आलू, सेब, आम) खेत से कटकर गोदामों में जाते हैं, तो वहां भी वे फफूंदी के कारण सड़ने (Rotting) लगते हैं।
- विधि: फलों और कंदों को बोरियों में भरने से पहले कवकनाशी (जैसे कार्बेन्डाजिम या बोरेक्स) के हल्के घोल में 2-5 मिनट के लिए डुबोकर (Dipping) निकाला जाता है और फिर सुखाकर भंडारित किया जाता है। इससे फल गोदामों में सुरक्षित रहते हैं।
कवकनाशियों का प्रयोग करते समय आवश्यक सावधानियां (Precautions while using Fungicides)
कवकनाशी जहरीले रसायन होते हैं, अतः इनके प्रयोग के दौरान किसानों को निम्नलिखित सावधानियां (Safety measures) अवश्य बरतनी चाहिए:
- सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग (Protective Gear): दवा का घोल बनाते समय और छिड़काव करते समय मुंह पर मास्क, आंखों पर चश्मा और हाथों में रबर के दस्ताने (Gloves) जरूर पहनें। दवा को कभी भी नंगे हाथों से न मिलाएं, लकड़ी के डंडे का प्रयोग करें।
- हवा की दिशा (Wind Direction): छिड़काव हमेशा हवा की दिशा में (In the direction of wind) करें। हवा के विपरीत छिड़कने पर दवा उड़कर आपके चेहरे या शरीर पर गिर सकती है।
- सही मौसम का चुनाव (Weather Condition): तेज धूप या बारिश के समय छिड़काव न करें। दवा का छिड़काव सुबह ओस सूखने के बाद या शाम के समय करना सबसे अच्छा रहता है।
- बोतलों का सुरक्षित निपटान (Safe Disposal): खाली कवकनाशी के डिब्बों या थैलियों को कभी भी तालाब या नहर के पास न फेंकें। उन्हें तोड़कर जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर गाड़ दें।
- लेबल पढ़ना (Read the Label): दवा के डिब्बे पर लिखे निर्देशों (Instructions) और संस्तुत मात्रा (Recommended dose) का कड़ाई से पालन करें। अधिक मात्रा डालने से फसल जल सकती है (Phytotoxicity)।
आधुनिक कृषि में कवकनाशी रसायन फसल सुरक्षा के लिए एक संजीवनी का काम करते हैं। जब मौसम अचानक खराब होता है और महामारियां (Epidemics) तेजी से फैलती हैं, तब केवल ये रसायन ही फसल को रातों-रात नष्ट होने से बचा सकते हैं। हालांकि, एक कुशल कृषि विशेषज्ञ को यह सदैव याद रखना चाहिए कि इन रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग पर्यावरण, मृदा स्वास्थ्य और मित्र सूक्ष्मजीवों के लिए हानिकारक है। इसलिए, कवकनाशियों का उपयोग हमेशा बीज उपचार, उचित फसल चक्र और ‘एकीकृत रोग प्रबंधन’ (Integrated Disease Management – IDM) के अंतर्गत अंतिम हथियार के रूप में ही किया जाना चाहिए, ताकि हमारी खेती स्थायी (Sustainable) और सुरक्षित बनी रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: ‘संपर्क कवकनाशी’ (Contact Fungicide) और ‘सर्वांगी कवकनाशी’ (Systemic Fungicide) में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: संपर्क कवकनाशी पौधे के अंदर प्रवेश नहीं करते, वे केवल पौधे की बाहरी सतह पर रहकर उसे सुरक्षा देते हैं (जैसे मैन्कोजेब)। जबकि सर्वांगी कवकनाशी पौधे की पत्तियों या जड़ों द्वारा सोख लिए जाते हैं और पूरे पौधे के रस में फैलकर अंदर छिपे कवक को भी मार देते हैं (जैसे कार्बेन्डाजिम)।
प्रश्न 2: बीजोपचार (Seed Treatment) के लिए सबसे अधिक किस कवकनाशी का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: बीजोपचार के लिए सबसे अधिक थाइरम (Thiram) और कार्बेन्डाजिम (Carbendazim / Bavistin) का उपयोग किया जाता है। दलहनी फसलों में 2 से 3 ग्राम दवा प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाई जाती है।
प्रश्न 3: बीजोपचार में FIR क्रम (FIR Rule) का क्या अर्थ है?
उत्तर: जब किसी बीज को तीन अलग-अलग चीजों से उपचारित करना हो, तो उन्हें एक निश्चित क्रम में मिलाना चाहिए जिसे FIR कहते हैं।
F = Fungicide (सबसे पहले कवकनाशी मिलाएं),
I = Insecticide (उसके बाद कीटनाशक मिलाएं),
R = Rhizobium (सबसे अंत में जैविक खाद/राइजोबियम मिलाएं)।
प्रश्न 4: गेहूँ के रतुआ (Rust) रोग को रोकने के लिए किस कवकनाशी का छिड़काव किया जाता है?
उत्तर: गेहूँ के रतुआ रोग के लक्षण दिखाई देते ही प्रोपिकोनाज़ोल (Propiconazole 25 EC – टिल्ट) या मैन्कोजेब का पानी में घोल बनाकर पर्णीय छिड़काव (Foliar spray) करना सबसे प्रभावी होता है।
प्रश्न 5: बोर्डो मिश्रण (Bordeaux Mixture) क्या है?
उत्तर: बोर्डो मिश्रण एक बहुत ही प्रसिद्ध और ऐतिहासिक कवकनाशी है। इसे कॉपर सल्फेट (नीला थोथा), बुझा हुआ चूना (Lime) और पानी को एक निश्चित अनुपात (जैसे 5:5:50) में मिलाकर तैयार किया जाता है। यह अंगूर, सेब और नींबू की बीमारियों के लिए बहुत उपयोगी है।
प्रश्न 6: ड्रेन्चिंग (Drenching) विधि क्या है और यह कब उपयोग की जाती है?
उत्तर: ड्रेन्चिंग का अर्थ है कवकनाशी दवा (जैसे कॉपर ऑक्सीक्लोराइड) का घोल बनाकर उसे पौधों की जड़ों के पास मिट्टी में डालना, ताकि मिट्टी अच्छी तरह भीग जाए। इसका उपयोग नर्सरी में ‘पौध गलन’ (Damping off) या ‘जड़ गलन’ जैसे मृदा जनित रोगों (Soil-borne diseases) को रोकने के लिए किया जाता है।