MP Board Class 12 Feed Composition for Calves Dry Milch and Pregnant Cows Bulls and Bullocks

Feed Composition for Calves Dry Milch and Pregnant Cows Bulls and Bullocks : एमपी बोर्ड कक्षा 12 पशुपालन (MP Board Class 12 Animal Husbandry) के छात्रों के लिए ‘विभिन्न पशुओं (बछड़े, शुष्क, दुधारू, गर्भवती गाय, सांड और बैल) के लिए आहार संरचना और प्रबंधन’ पर एक अति विस्तृत और वैज्ञानिक लेख।

इस Feed Composition for Calves Dry Milch and Pregnant Cows Bulls and Bullocks लेख में प्रत्येक पशु की शारीरिक अवस्था, उम्र और कार्य के अनुसार शुष्क पदार्थ, जीवन निर्वाह राशन, उत्पादन राशन और आहार निर्धारण के वैज्ञानिक नियमों (Thumb Rules) का गहराई से अध्ययन किया गया है। यह बोर्ड परीक्षाओं और कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है।

बछड़े, शुष्क, दुधारू और गर्भवती गायों, सांड और बैल के लिए आहार संरचना (Feed Composition for Calves Dry Milch and Pregnant Cows, Bulls and Bullocks) – संपूर्ण अध्ययन (कक्षा 12 पशुपालन)

1. प्रस्तावना (Introduction)

डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) और पशुपालन व्यवसाय की सफलता का मुख्य आधार पशुओं का उचित आहार प्रबंधन है। एक डेयरी फार्म पर विभिन्न आयु वर्ग और अलग-अलग शारीरिक अवस्थाओं वाले पशु एक साथ रहते हैं। नवजात बछड़े (Newborn Calf) के शरीर को तीव्र विकास की आवश्यकता होती है, दुधारू गाय (Milch Cow) को दूध बनाने के लिए भारी पोषण चाहिए, और खेतों में काम करने वाले बैल (Draft Bullock) को अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

यदि इन सभी पशुओं को एक ही प्रकार का और एक समान मात्रा में आहार दिया जाए, तो न केवल पशुओं का स्वास्थ्य गिरेगा बल्कि किसान को भारी आर्थिक नुकसान भी होगा। पशुओं को उनकी उम्र (Age), शारीरिक भार (Body weight), और उत्पादन (Production/Work) के अनुसार आहार देना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।

मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) के कक्षा 12 के ‘पशुपालन’ विषय के अंतर्गत विभिन्न पशुओं के लिए आहार संरचना और उनके राशन का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस विस्तृत लेख में हम एक डेयरी फार्म पर पाए जाने वाले सभी प्रमुख पशुओं— बछड़े, शुष्क गाय, दुधारू गाय, गर्भवती गाय, प्रजनन सांड और बैल—के लिए संतुलित आहार (Balanced Ration) की वैज्ञानिक संरचना का गहन अध्ययन करेंगे।

2. नवजात बछड़े / बछड़ियों का आहार प्रबंधन (Feeding Management of Calves)

डेयरी फार्म का भविष्य उसके बछड़े और बछड़ियों (Calves) पर निर्भर करता है। एक स्वस्थ बछड़ी ही भविष्य की उच्च उत्पादक गाय बनती है। नवजात बछड़े का पाचन तंत्र (Digestive system) अविकसित होता है, इसलिए शुरुआत में वह केवल तरल आहार (Liquid diet) ही पचा सकता है।

2.1 खीस या नवदुग्ध (Colostrum Feeding)

बछड़े के जन्म के तुरंत बाद (1 से 2 घंटे के भीतर) गाय के थनों से निकलने वाला पहला गाढ़ा और पीला दूध ‘खीस’ (Colostrum) कहलाता है।

  • मात्रा: बछड़े को उसके शरीर के वजन (Body weight) का 1/10 भाग (दसवां हिस्सा) खीस प्रतिदिन पिलाना चाहिए। (उदाहरण: यदि बछड़े का वजन 25 किलो है, तो उसे 2.5 लीटर खीस प्रतिदिन देना चाहिए, जिसे 2-3 बार में बांट कर दें)।
  • खीस का महत्व:
    1. इसमें एंटीबॉडीज (Antibodies) भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बछड़े को जीवन भर बीमारियों से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) प्रदान करते हैं।
    2. इसमें हल्का रेचक गुण (Laxative property) होता है, जो बछड़े के पेट में जमा पहले मल (Meconium) को बाहर निकालने में मदद करता है।
    3. यह विटामिन A, D और प्रोटीन का अत्यंत सघन स्रोत है। खीस जन्म के 3-4 दिनों तक अवश्य पिलाना चाहिए।

2.2 दुग्ध पान (Milk Feeding)

चौथे दिन से खीस सामान्य दूध में बदल जाता है। बछड़े को लगभग 1 से 2 महीने तक दूध पिलाना चाहिए। शुरुआत में पूर्ण दूध (Whole milk) और बाद में सपरेटा दूध (Skimmed milk) दिया जा सकता है।

2.3 काफ स्टार्टर (Calf Starter)

जब बछड़ा 2-3 सप्ताह का हो जाता है, तो उसे ठोस आहार खाने की आदत डालने के लिए ‘काफ स्टार्टर’ दिया जाता है। यह एक अत्यंत सुपाच्य और प्रोटीन युक्त (20-22% प्रोटीन) दाना मिश्रण होता है।

  • संरचना (Composition of Calf Starter): इसमें पिसी हुई मक्का (40%), मूंगफली/सोयाबीन की खली (30%), गेहूं का चोकर (15%), फिश मील (10%), खनिज मिश्रण (3%), और नमक (2%) मिलाया जाता है।
  • इसके साथ बछड़े को अच्छी गुणवत्ता वाली दलहनी हे (Legume Hay जैसे बरसीम या रिजका) भी खाने को देनी चाहिए ताकि उसके रुमेन (Rumen) का जल्दी विकास हो सके।

3. दुधारू गायों का आहार (Feeding Management of Milch Cows)

एक दुधारू गाय (Milch Cow) को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ भारी मात्रा में दूध का निर्माण भी करना होता है। इसके आहार को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है:

3.1 जीवन निर्वाह राशन (Maintenance Ration)

यह वह आहार है जो गाय को अपने शरीर का वजन स्थिर रखने, अंगों को सुचारू रूप से चलाने और शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए दिया जाता है।

  • एक वयस्क गाय को भरपेट हरा चारा (Green fodder) और सूखा चारा (Dry fodder – भूसा) दिया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त जीवन निर्वाह के लिए 1.0 से 1.5 किलोग्राम दाना मिश्रण (Concentrate mixture) प्रतिदिन देना अनिवार्य है।

3.2 दुग्ध उत्पादन राशन (Production Ration)

यह आहार गाय को केवल दूध उत्पादन के लिए ‘जीवन निर्वाह राशन’ के अतिरिक्त (Extra) दिया जाता है।

  • अंगूठे का नियम (Thumb Rule): भारतीय और संकर गायों को प्रत्येक 2.5 से 3.0 लीटर दूध उत्पादन पर 1 किलोग्राम अतिरिक्त दाना दिया जाना चाहिए।
  • खनिज लवण: दूध में कैल्शियम और फास्फोरस भारी मात्रा में निकलता है। अतः दुधारू गाय के आहार में प्रतिदिन 30-50 ग्राम खनिज मिश्रण (Mineral Mixture) और 30 ग्राम नमक अवश्य मिलाना चाहिए, अन्यथा गाय ‘मिल्क फीवर’ (Milk Fever) का शिकार हो सकती है।
शारीरिक अवस्थाशुष्क पदार्थ (DM) की आवश्यकतादाना (Concentrate) की आवश्यकता
दुधारू गाय2.0 – 2.5 kg प्रति 100 kg शारीरिक भार1.5 kg (निर्वाह) + 1 kg (प्रति 2.5 लीटर दूध पर)

4. शुष्क या सूखी गायों का आहार (Feeding Management of Dry Cows)

शुष्क काल (Dry Period) क्या है?

एक दुधारू गाय को उसके अगले ब्यांत (Next Calving) से लगभग 60 दिन (2 महीने) पहले दूध दूहना बंद कर दिया जाता है। इस अवधि को ‘शुष्क काल’ (Dry Period) कहते हैं, और ऐसी गाय को शुष्क या सूखी गाय (Dry Cow) कहा जाता है।

4.1 शुष्क काल का महत्व

गाय को सुखाना इसलिए आवश्यक है ताकि उसके थनों (Udder) के ऊतकों को आराम मिल सके, वह अपने शरीर में खोए हुए पोषक तत्वों की भरपाई कर सके, और अगले ब्यांत में अधिकतम दूध उत्पादन कर सके।

4.2 आहार संरचना

शुष्क गायों को भारी दाना मिश्रण की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वे दूध नहीं दे रही होती हैं।

  • चारा: इन्हें उत्तम गुणवत्ता का हरा चारा (Green fodder) और सूखा चारा भरपेट देना चाहिए। यदि हरा चारा प्रचुर मात्रा में (लगभग 20-25 किलो) उपलब्ध है, तो दाने की आवश्यकता बहुत कम हो जाती है।
  • दाना: केवल जीवन निर्वाह और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए 1.0 से 1.5 किलोग्राम दाना प्रतिदिन देना पर्याप्त है।
  • सावधानी: शुष्क गाय को अत्यधिक दाना खिलाकर बहुत मोटा (Over-fattening) नहीं करना चाहिए, अन्यथा ब्याते समय (Calving) जटिलताएं आ सकती हैं।

5. गर्भवती गायों का आहार (Feeding Management of Pregnant Cows)

गर्भावस्था (Pregnancy) गाय के जीवन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवस्था है। गाभिन (Pregnant) गाय को न केवल अपने शरीर के लिए, बल्कि अपने गर्भ (Uterus) में पल रहे बच्चे (Fetus) के शारीरिक विकास के लिए भी आहार की आवश्यकता होती है।

5.1 गर्भावस्था राशन (Pregnancy Allowance)

भ्रूण (Fetus) का लगभग 70 से 80 प्रतिशत विकास गर्भावस्था के अंतिम 3 महीनों (Last Trimester) में बहुत तेजी से होता है।

  • इस समय गाभिन गाय को उसके सामान्य निर्वाह आहार के अतिरिक्त 1.0 से 1.5 किलोग्राम अतिरिक्त दाना (Pregnancy Allowance) प्रतिदिन दिया जाना चाहिए।
  • स्टीमिंग अप (Steaming Up): ब्याने से 6 सप्ताह पहले गाभिन गाय के आहार (विशेषकर दाने) की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाने की प्रक्रिया को ‘स्टीमिंग अप’ कहते हैं। इससे गाय के शरीर में ऊर्जा का भंडार बन जाता है, बच्चा स्वस्थ और मजबूत पैदा होता है, और अगले ब्यांत में गाय का दूध उत्पादन बढ़ जाता है।
  • खनिज: गाभिन गाय को कैल्शियम (Ca) और फास्फोरस (P) भरपूर मात्रा में देना चाहिए ताकि बच्चे की हड्डियां मजबूत बन सकें।
  • हल्का रेचक आहार: ब्याने के 1-2 सप्ताह पहले गाय के दाने में ‘गेहूं का चोकर’ (Wheat bran) और अलसी की खली (Linseed cake) मिला देनी चाहिए। इसमें हल्का रेचक (Laxative) गुण होता है, जो गाय को कब्ज (Constipation) से बचाता है और ब्याने (Parturition) में आसानी होती है।

6. सांड (प्रजनन बैल) का आहार (Feeding Management of Breeding Bulls)

डेयरी फार्म पर प्रजनन सांड (Breeding Bull) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि “एक सांड आधा झुंड होता है” (A bull is half the herd)। यदि सांड स्वस्थ और चुस्त होगा, तो उससे पैदा होने वाली संतति (Progeny) भी उत्तम होगी।

6.1 आहार संरचना और आवश्यकता

सांड को दूध नहीं देना होता, लेकिन उसमें तीव्र कामेच्छा (Libido), वीर्य (Semen) की उच्च गुणवत्ता और शारीरिक स्फूर्ति बनाए रखने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और खनिज युक्त आहार की आवश्यकता होती है।

  • हरा चारा: सांड को प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 किलोग्राम हरा चारा (विशेषकर दलहनी चारा जैसे बरसीम या रिजका) और भरपेट सूखा चारा देना चाहिए।
  • दाना (Concentrate): सांड को उसके विशाल शरीर के जीवन निर्वाह और प्रजनन कार्यों के लिए 2.0 से 3.0 किलोग्राम दाना मिश्रण प्रतिदिन देना चाहिए।
  • दाने का संगठन: सांड के दाना मिश्रण में प्रोटीन की मात्रा (18-20%) अच्छी होनी चाहिए। इसमें मक्का, जौ, सरसों या मूंगफली की खली और चना शामिल होना चाहिए।
  • सावधानी: सांड को कभी भी इतना अधिक आहार (विशेषकर कार्बोहाइड्रेट) नहीं देना चाहिए कि वह बहुत मोटा (Obese) हो जाए। मोटा सांड आलसी हो जाता है और प्रजनन (Mating) के योग्य नहीं रहता। अतः सांड को आहार के साथ-साथ प्रतिदिन 1-2 घंटे का व्यायाम (Exercise) अवश्य कराना चाहिए।

7. काम करने वाले बैलों का आहार (Feeding Management of Draft Bullocks)

भारतीय कृषि में बैलों (Bullocks) का उपयोग खेत की जुताई (Ploughing), बोझा ढोने (Carting), और सिंचाई के कार्यों में किया जाता है। बैलों का आहार मुख्य रूप से उनके द्वारा किए जाने वाले काम की कठोरता (Intensity of work) पर निर्भर करता है। कार्य करते समय बैलों की ऊर्जा (Energy) बहुत तेजी से खर्च होती है।

7.1 कार्य के आधार पर राशन का निर्धारण (Work Allowance)

काम करने वाले बैलों को उनके जीवन निर्वाह (Maintenance – 1.0 से 1.5 किलो दाना) के अतिरिक्त उनके काम के अनुसार अतिरिक्त दाना दिया जाता है:

  1. हल्का काम (Light Work): (जैसे खाली बैलगाड़ी खींचना या प्रतिदिन 2-3 घंटे काम करना)
    • निर्वाह राशन के अतिरिक्त 1.0 से 1.5 किलोग्राम अतिरिक्त दाना प्रतिदिन देना चाहिए।
  2. मध्यम काम (Medium Work): (जैसे खेत की सामान्य जुताई करना या 4-6 घंटे काम करना)
    • निर्वाह राशन के अतिरिक्त 2.0 से 2.5 किलोग्राम अतिरिक्त दाना प्रतिदिन देना चाहिए।
  3. भारी काम (Heavy Work): (जैसे भरी हुई बैलगाड़ी खींचना, गहरी जुताई, या 8 घंटे से अधिक काम करना)
    • निर्वाह राशन के अतिरिक्त 3.0 से 4.0 किलोग्राम अतिरिक्त दाना प्रतिदिन देना चाहिए।

7.2 बैलों के आहार की विशेषताएं

  • बैलों के आहार में ऊर्जा (Energy / Carbohydrates) की मात्रा अधिक होनी चाहिए, जो उन्हें मक्का (Maize), जौ, बाजरा, और गुड़ (Jaggery) से मिलती है।
  • काम के दौरान बैलों के शरीर से पसीने के रूप में बहुत सा नमक (Salt) बाहर निकल जाता है। अतः बैलों के आहार में नमक (Common salt) की अतिरिक्त मात्रा (लगभग 50 ग्राम प्रतिदिन) अवश्य मिलानी चाहिए।
  • काम पर ले जाने से ठीक पहले बैलों को बहुत अधिक पेट भरकर हरा चारा नहीं खिलाना चाहिए, अन्यथा उन्हें काम करने में (सांस फूलने की) दिक्कत होती है।

8. एक आदर्श दाना मिश्रण की संरचना (Composition of an Ideal Concentrate Mixture)

उपरोक्त सभी पशुओं (गाय, बैल, सांड) को जो दाना दिया जाता है, उसका एक आदर्श संगठन (100 किलो दाने के लिए) इस प्रकार होना चाहिए:

अवयव (Ingredients)प्रतिशत मात्रा (%)कार्य (Function)
अनाज (मक्का, जौ, गेहूं, बाजरा)35% – 40%कार्बोहाइड्रेट (ऊर्जा) प्रदान करना।
खली (सरसों, मूंगफली, बिनौला की खली)25% – 30%उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन (DCP) प्रदान करना।
चोकर (गेहूं का चोकर, धान की पॉलिश)25% – 30%विटामिन B, फास्फोरस और रेचक (Laxative) गुण।
खनिज मिश्रण (Mineral Mixture)2%कैल्शियम, फास्फोरस व सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति।
साधारण नमक (Common Salt)1%पाचन दुरुस्त रखना और पसीने से हुए नमक की भरपाई।

9. आहार प्रबंधन के महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points for Feed Management)

  • समयबद्धता (Timeliness): पशुओं को आहार हमेशा एक निश्चित समय (Fixed time) पर देना चाहिए। इससे पशुओं की जैविक घड़ी (Biological clock) और पाचक रसों का स्राव सही रहता है।
  • स्वच्छ पेयजल (Clean Drinking Water): आहार के साथ-साथ पशु के सामने 24 घंटे स्वच्छ पानी उपलब्ध होना चाहिए। 1 लीटर दूध बनाने के लिए गाय को लगभग 3-4 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
  • अचानक परिवर्तन न करें: पशु के राशन में (जैसे भूसे से हरे चारे पर आना) अचानक परिवर्तन नहीं करना चाहिए। नया चारा हमेशा 4-5 दिनों में धीरे-धीरे मिलाना चाहिए ताकि रुमेन (Rumen) के जीवाणु नए चारे के अनुकूल हो सकें।
  • आहार का भारीपन: जुगाली करने वाले पशुओं का पेट भरने (Bulkiness) के लिए आहार में शुष्क पदार्थ (Dry matter) का 2/3 हिस्सा हमेशा चारे (Roughage) से ही पूरा किया जाना चाहिए।

10. निष्कर्ष (Conclusion)

मध्य प्रदेश बोर्ड के पशुपालन पाठ्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग और कार्य क्षमता वाले पशुओं के आहार का यह वर्गीकरण अत्यंत वैज्ञानिक है। एक सफल डेयरी फार्म (Dairy Farm) उसी को माना जाता है जहाँ बछड़े को उत्तम ‘काफ स्टार्टर’ मिले ताकि वह जल्दी बड़ा हो, दुधारू गाय को ‘उत्पादन राशन’ मिले ताकि दूध की नदियां बहें, गर्भवती गाय को ‘स्टीमिंग अप’ मिले ताकि अगली पीढ़ी स्वस्थ हो, और बैल को ‘एनर्जी राशन’ मिले ताकि खेती सुचारू रूप से चले।

यदि एक पशुपालक इन वैज्ञानिक ‘अंगूठे के नियमों’ (Thumb Rules) का पालन करते हुए अपने पशुओं को उनके शारीरिक भार और आवश्यकता के अनुसार राशन (Ration Formulation) देता है, तो वह न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकता है, बल्कि चारे की बर्बादी को रोककर अपने व्यवसाय को आर्थिक रूप से अत्यधिक लाभदायक (Highly Profitable) बना सकता है।

11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

प्रश्न 1: नवजात बछड़े को ‘खीस’ (Colostrum) पिलाना क्यों आवश्यक है?

उत्तर: जन्म के तुरंत बाद बछड़े को गाय का पहला दूध (खीस) पिलाना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसमें ‘एंटीबॉडीज’ (Antibodies) होते हैं, जो बछड़े में बीमारियों से लड़ने की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पैदा करते हैं। इसके अलावा, खीस में हल्का रेचक (पेट साफ करने वाला) गुण होता है, जो बछड़े के पेट से पहला मल (Meconium) बाहर निकालने में मदद करता है।

प्रश्न 2: ‘स्टीमिंग अप’ (Steaming Up) प्रक्रिया क्या है और यह क्यों की जाती है?

उत्तर: गाभिन (Pregnant) गाय के ब्याने (Calving) से लगभग 6 सप्ताह पहले उसके आहार में (विशेषकर दाने में) धीरे-धीरे वृद्धि करने की प्रक्रिया को स्टीमिंग अप कहते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गाय के शरीर में ऊर्जा और पोषक तत्वों का पर्याप्त भंडार बन सके, गर्भ में पल रहे बच्चे का तेजी से विकास हो सके, और ब्याने के बाद गाय तुरंत अधिक दूध देने के लिए तैयार रहे।

प्रश्न 3: दुधारू गाय और काम करने वाले बैल के दाना मिश्रण में क्या मुख्य अंतर होना चाहिए?

उत्तर: दुधारू गाय के दाना मिश्रण में दूध (और उसमें मौजूद केसीन) के निर्माण के लिए प्रोटीन (Protein / खली) की मात्रा अधिक होनी चाहिए। जबकि काम करने वाले बैल (Draft bullock) की ऊर्जा खेतों में हल चलाने में खर्च होती है, इसलिए उसके दाना मिश्रण में कार्बोहाइड्रेट (Energy / मक्का, गुड़, जौ) की मात्रा अधिक होनी चाहिए।

प्रश्न 4: शुष्क गाय (Dry Cow) किसे कहते हैं और इसे आहार में दाना कम क्यों दिया जाता है?

उत्तर: वह गाभिन गाय जिसे उसके अगले ब्यांत से लगभग 2 महीने (60 दिन) पहले दूध दूहना बंद कर दिया जाता है, उसे शुष्क गाय कहते हैं। चूंकि यह गाय दूध नहीं दे रही होती, इसलिए इसे भारी उत्पादन राशन की आवश्यकता नहीं होती। इसे अधिक दाना देने से यह बहुत मोटी (Obese) हो सकती है, जिससे ब्याते समय (Dystocia) परेशानी आ सकती है। अतः इसे केवल निर्वाह और गर्भावस्था के लिए ही दाना दिया जाता है।

प्रश्न 5: सांड (प्रजनन बैल) के आहार में किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: सांड के आहार में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन (दलहनी चारे से) और खनिज लवण (Mineral mixture) पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए ताकि उसके वीर्य (Semen) की गुणवत्ता उत्तम बनी रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सांड को अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट (अनाज) खिलाकर मोटा नहीं करना चाहिए, अन्यथा वह आलसी हो जाएगा और प्रजनन (Mating) के योग्य नहीं रहेगा।

प्रश्न 6: ‘काफ स्टार्टर’ (Calf Starter) क्या है?

उत्तर: यह 2-3 सप्ताह की उम्र के बछड़े-बछड़ियों को दूध छुड़ाकर ठोस आहार पर लाने के लिए दिया जाने वाला एक विशेष दाना मिश्रण है। यह अत्यधिक सुपाच्य होता है और इसमें 20-22% क्रूड प्रोटीन पाया जाता है (जैसे पिसी मक्का, खली, और फिश मील का मिश्रण)। यह बछड़े के रुमेन (पेट) का जल्दी विकास करता है।