Dialogue, Advertisement and Notice Writing : व्यावसायिक दृष्टिकोण से संवाद, विज्ञापन और नोटिस (Dialogue, Advertisement and Notice Writing ) अत्यंत महत्तपूर्ण हैं, व्यावहारिक जगत मे इन सभी का इस्तेमाल किया जाता है।
संवाद लेखन:
- दो मित्रों के बीच परीक्षा की तैयारी पर संवाद।
- श्री राम के द्वारा धनुष तोड़े जाने पर परशुराम क्रोधित होते हैं, लक्ष्मण भी उनसे बातचीत करते हैं। परशुराम व लक्ष्मण के बीच हुई बातचीत या संवाद को अपने शब्दों में लिखिए।
- सूरदास के पद में गोपियों व उद्धव के मध्य हुई बातचीत या संवाद को अपने शब्दों में लिखिए।
- नानी के घर से लौटने के पश्चात अपनी माता के साथ संवाद लिखिए।
विज्ञापन लेखन:
- विज्ञापन लेखन से क्या आशय है?
- अपने किसी पसंदीदा विषय पर विज्ञापन बनाइए।
सूचना लेखन:
- सूचना लेखन क्या है? लिखिए।
संवाद लेखन (Dialogue Writing)
दो मित्रों के बीच परीक्षा की तैयारी पर संवाद 📚
पात्र: रवि और अमित
स्थान: रवि के घर पर
रवि: अरे अमित! आ गया तू? मैं तो कब से तेरा इंतज़ार कर रहा था। बैठ ना।
अमित: हाँ यार, थोड़ा लेट हो गया। क्या चल रहा है? पढ़ाई कैसी चल रही है? परीक्षाएँ सिर पर हैं!
रवि: बस यही सोच रहा था। तैयारी तो ठीक-ठाक है, पर थोड़ी घबराहट हो रही है। खासकर गणित में।
अमित: गणित? तुझे गणित से डर लगता है? मुझे तो लगा था तू गणित में जीनियस है!
रवि: (हँसते हुए) जीनियस नहीं यार, बस अभ्यास करता रहता हूँ। पर कुछ अध्याय अभी भी मुश्किल लग रहे हैं, जैसे त्रिकोणमिति। तूने पूरा कर लिया?
अमित: हाँ, मैंने तो कर लिया। पर मुझे विज्ञान में थोड़ी दिक्कत आ रही है, खासकर भौतिकी वाले हिस्से में। मुझे लगता है कुछ टॉपिक्स अभी क्लियर नहीं हुए हैं।
रवि: अच्छा, तो फिर एक काम करते हैं। क्यों न हम एक-दूसरे की मदद करें? मैं तुझे भौतिकी समझा दूँगा और तू मुझे गणित में मदद कर दे।
अमित: ये तो शानदार विचार है! इससे हम दोनों को फायदा होगा। कब से शुरू करें?
रवि: आज शाम से ही शुरू करते हैं। पहले हम दोनों अपने-अपने नोट्स मिला लेते हैं और देखते हैं कि कहाँ-कहाँ हमें ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है।
अमित: ठीक है। मैं अपने नोट्स ले आता हूँ। और हाँ, क्या तूने पिछले साल के प्रश्न-पत्र देखे हैं? उनसे बहुत मदद मिलती है। रवि: हाँ, मैंने कुछ देखे हैं। हमें उन्हें भी हल करना चाहिए। और टाइम मैनेजमेंट का भी ध्यान रखना होगा। हर विषय के लिए पर्याप्त समय देना ज़रूरी है।
अमित: बिल्कुल! अब जब हम मिलकर तैयारी कर रहे हैं, तो मुझे लगता है हम अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।
रवि: हाँ यार, उम्मीद तो यही है। चलो, पहले कुछ चाय-कॉफी हो जाए और फिर पढ़ाई में जुट जाते हैं!
अमित: डन!
परशुराम व लक्ष्मण के बीच संवाद (धनुष भंग के बाद) 🏹
पात्र: परशुराम, लक्ष्मण (और श्री राम)
स्थान: सीता स्वयंवर सभा (धनुष भंग के बाद)
(श्री राम द्वारा शिव धनुष तोड़ने के बाद परशुराम अत्यंत क्रोध में सभा में प्रवेश करते हैं)
परशुराम: (क्रोधित स्वर में, गर्जना करते हुए) अरे! किस दुष्ट ने मेरे आराध्य शिव के धनुष को तोड़ने का दुस्साहस किया है? सहस्त्रबाहु की भुजाएँ काटने वाला मेरा यह फरसा अभी भी शांत नहीं हुआ है! जिसने भी यह अपराध किया है, वह मेरे सामने आए, नहीं तो मैं इस सभा में उपस्थित सभी राजाओं का वध कर डालूँगा!
लक्ष्मण: (मुस्कुराते हुए, व्यंग्य से) हे मुनिवर! बचपन में तो हमने बहुत से धनुष तोड़े हैं, तब तो किसी ने क्रोध नहीं किया। इस पुराने धनुष के टूटने पर आपको इतना क्रोध क्यों आ रहा है? यह तो स्पर्श करते ही टूट गया होगा।
परशुराम: (अत्यधिक क्रोध में, लक्ष्मण की ओर देखते हुए) रे मूर्ख बालक! तूने मुझे साधारण मुनि समझा है? यह कोई साधारण धनुष नहीं था, यह शिव का पिनाक था! और तू इसकी तुलना बचपन के धनुषों से कर रहा है? लगता है काल तेरे निकट है, तभी तू ऐसी अनर्गल बातें कर रहा है!
लक्ष्मण: (अविचलित, व्यंग्य जारी रखते हुए) मुनिवर! आप तो बड़े क्रोधी स्वभाव के लगते हैं। यहाँ तो मुझे कोई ऐसा वीर नहीं दिख रहा जो आपसे डरता हो। आप अपने फरसे की इतनी डींगें क्यों हाँक रहे हैं? हमने भी बहुत से युद्ध देखे हैं।
परशुराम: (आग बबूला होते हुए) अरे! तू तो मेरा काल बन गया है! बालक समझकर मैं तुझे छोड़ रहा हूँ, पर तू अपनी मृत्यु को आमंत्रण दे रहा है। मेरे इस फरसे को देख! मैं तुझे अभी अपने हाथों से यमलोक भेज सकता हूँ। मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ और अत्यंत क्रोधी हूँ, मुझसे बात करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई?
लक्ष्मण: (हँसते हुए) मुनिवर! आप तो अपने आप को बहुत बड़े योद्धा समझते हैं। पर हमें तो ये सब बातें सुनकर बस हँसी ही आती है। लगता है आपको अपने शौर्य का बहुत गुमान है। आप व्यर्थ में ही चिल्ला रहे हैं। हम भी कोई चूहे नहीं हैं जो आपकी धमकियों से डर जाएँगे।
परशुराम: (फरसा उठाते हुए) ठहर! अब तो मैं तेरा अंत करके ही रहूँगा! तू तो मेरे सामने ही मेरे क्रोध को भड़का रहा है!
श्री राम: (आगे आते हुए, विनम्रता से) हे मुनिवर! यह बालक अज्ञानी है, क्षमा करें। धनुष तोड़ने वाला आपका दास ही होगा। कृपया शांत हो जाएँ। (संवाद यहीं समाप्त होता है, क्योंकि श्री राम हस्तक्षेप करते हैं)
सूरदास के पद में गोपियों व उद्धव के मध्य संवाद
पात्र: उद्धव (कृष्ण के दूत), गोपियाँ
स्थान: ब्रजभूमि
(कृष्ण द्वारा भेजे गए उद्धव ब्रजभूमि में गोपियों को योग का संदेश देने आते हैं)
उद्धव: (गर्व से) हे गोपियों! मैं तुम्हारे प्रिय कृष्ण का दूत हूँ। वे मथुरा जाकर तुम्हें भूल नहीं गए हैं, बल्कि उन्होंने मुझे तुम्हारे लिए एक विशेष संदेश भेजा है। योग का संदेश! वे चाहते हैं कि तुम सब अपने प्रेम के बंधन को तोड़ो और निराकार ब्रह्म का ध्यान करो, योग साधना में लीन हो जाओ। इससे तुम्हें मुक्ति मिलेगी।
गोपियाँ: (व्यंग्यपूर्ण मुस्कान के साथ) हे उद्धव! तुम तो बड़े भाग्यशाली हो, जो कृष्ण के इतने निकट हो, फिर भी प्रेम के बंधन से अछूते रहे। तुम उस कमल के पत्ते के समान हो जो जल में रहकर भी जल से निर्लिप्त रहता है, या तेल की गगरी के समान जिस पर पानी की एक बूँद भी नहीं ठहरती।
उद्धव: (कुछ असमंजस में) यह तुम क्या कह रही हो गोपियों? मैं तो तुम्हें ज्ञान का मार्ग दिखाने आया हूँ। यह योग का संदेश तुम्हारे लिए ही है, ताकि तुम कृष्ण के प्रेम में व्याकुल न हो, बल्कि परम सुख को प्राप्त करो।
गोपियाँ: (उलाहना देते हुए) उद्धव! हमारे मन में तो बस एक ही कृष्ण समाए हुए हैं। हमारा प्रेम तो अनन्य है। हमारे लिए योग का संदेश वैसा ही है जैसे किसी कड़वी ककड़ी को निगलना। हमने तो सोते-जागते, दिन-रात सिर्फ कृष्ण का नाम जपा है। हमें योग की बातें मत बताओ, जो हमने न कभी सुनी, न देखी और न कभी अनुभव की।
उद्धव: (प्रयास करते हुए) गोपियों! कृष्ण ने तुम्हें योग इसलिए भेजा है ताकि तुम अपनी इस व्याकुलता से मुक्त हो सको। यह निराकार ब्रह्म का मार्ग है, जो सभी बंधनों से परे है।
गोपियाँ: (गुस्से और व्यंग्य में) हे उद्धव! यह योग का संदेश तो उन लोगों को जाकर दो जिनका मन अस्थिर हो, जिनका चित्त भटकता हो। हमारा मन तो सदा कृष्ण में ही लगा है। हमारा मन तो अडिग है, वह कहीं और नहीं जा सकता। हमें योग साधना की कोई आवश्यकता नहीं है। जिसने कृष्ण से प्रेम किया है, उसे योग की ज़रूरत क्या? हमारा प्रेम तो अटूट है।
नानी के घर से लौटने के पश्चात माता के साथ संवाद 🏡
पात्र: माँ और बेटी (रिया)
स्थान: घर वापस लौटने के बाद
रिया: (खुशी से घर में घुसते हुए) माँ! मैं आ गई! नानी के घर से!
माँ: (रिया को गले लगाते हुए) अरे मेरी बेटी! कैसी है? आ गई मेरी रानी! कितना इंतज़ार था मुझे तेरा। कैसी रही यात्रा?
रिया: यात्रा तो अच्छी रही, माँ। पर मैं नानी के घर से वापस नहीं आना चाहती थी! वहाँ बहुत मज़ा आया!
माँ: (मुस्कुराते हुए) अच्छा? ऐसा क्या मज़ा आया वहाँ जो यहाँ नहीं है? बता तो सही।
रिया: अरे, नानी ने सुबह-सुबह मुझे खेत घुमाने ले गईं, वहाँ मैंने आम तोड़े! फिर नानी ने अपने हाथों से ककड़ी और नींबू पानी बनाया। और शाम को खूब सारी कहानियाँ सुनाईं। रात में तो नींद ही नहीं आती थी, बस बातें करते रहते थे।
माँ: (हँसते हुए) ओह! तो मेरी बेटी को वहाँ बहुत लाड़-प्यार मिला है। और कुछ खाया-पिया? नानी ने तेरी पसंदीदा चीज़ें बनाईं होंगी ना?
रिया: हाँ! नानी ने मेरे लिए बेसन के लड्डू और जलेबियाँ बनाई थीं! और मैंने अपनी मौसी के बच्चों के साथ ढेर सारे खेल खेले। हम सबने मिलकर घर-घर खेला, और लुका-छिपी भी खेली।
माँ: अच्छा, अच्छा। तभी तो तू इतनी तंदुरुस्त लग रही है। और नानी कैसी हैं? उन्होंने कुछ कहा?
रिया: नानी बिल्कुल ठीक हैं, माँ। उन्होंने तुम्हें बहुत याद किया और कहा कि तुम जल्दी उनसे मिलने आओ। और हाँ, उन्होंने तुम्हारे लिए यह लड्डू का डिब्बा भेजा है।
माँ: अरे वाह! बहुत-बहुत धन्यवाद। अब तू फ्रेश हो जा, और फिर मुझे सारी बातें विस्तार से बताना। मुझे भी तेरी बहुत याद आ रही थी।
रिया: ठीक है माँ! पर अगली गर्मियों की छुट्टियों में मैं फिर नानी के घर जाऊँगी!
माँ: (हँसते हुए) हाँ-हाँ, ज़रूर जाएगी। पहले अभी तो अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे।
विज्ञापन लेखन: Advertisement Writing
विज्ञापन लेखन से क्या आशय है?
विज्ञापन लेखन से आशय किसी उत्पाद, सेवा, विचार या व्यक्ति को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया एक सार्वजनिक संदेश है। इसका मुख्य उद्देश्य लक्षित दर्शकों (target audience) का ध्यान आकर्षित करना, उनमें रुचि जगाना, और उन्हें उस उत्पाद या सेवा को खरीदने, उस विचार को अपनाने या उस व्यक्ति का समर्थन करने के लिए प्रेरित करना है। विज्ञापन विभिन्न माध्यमों (जैसे समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट, होर्डिंग्स) के ज़रिए प्रकाशित या प्रसारित किए जाते हैं।
अपने किसी पसंदीदा विषय पर विज्ञापन बनाइए।
✨ स्वच्छ भारत अभियान: एक जन-विज्ञापन ✨
(एक स्वच्छ और सुंदर भारत के निर्माण हेतु जन-जागरूकता)
क्या आप एक स्वच्छ और स्वस्थ भारत की कल्पना करते हैं? 🇮🇳
आइए, मिलकर अपने सपनों को हकीकत में बदलें!
स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक संस्कृति है!
यह हमारे स्वास्थ्य, हमारे वातावरण और हमारे भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
🗑️ कचरा कूड़ेदान में ही डालें! 💧 पानी बचाएं, जीवन बचाएं! 🌳 वृक्ष लगाएं, पर्यावरण को हरा-भरा बनाएं! 🏡 अपने आस-पास को साफ रखें, यह आपकी जिम्मेदारी है! 🤝 दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करें!
छोटे-छोटे प्रयास, बड़ा बदलाव लाते हैं!
याद रखें, “एक कदम स्वच्छता की ओर!”
आपकी सहभागिता ही स्वच्छ भारत की नींव है। स्वच्छ रहें, स्वस्थ रहें, देश को आगे बढ़ाएं!
जनहित में जारी – भारत सरकार
सूचना लेखन: Notice Writing
सूचना लेखन क्या है? लिखिए।
सूचना लेखन (Notice Writing) एक औपचारिक (formal) और संक्षिप्त (concise) लेखन होता है जिसका उद्देश्य किसी विशिष्ट जानकारी, घटना, घोषणा या निर्देश को एक बड़े समूह या लक्षित दर्शकों (target audience) तक पहुँचाना होता है। यह आमतौर पर स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, आवासीय समितियों और विभिन्न संगठनों द्वारा सार्वजनिक रूप से जानकारी प्रसारित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
सूचना लेखन का उद्देश्य:
सूचना लेखन का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हो सकते हैं:
- किसी घटना (जैसे बैठक, कार्यक्रम, छुट्टी) की जानकारी देना।
- किसी नियम, परिवर्तन या निर्णय की घोषणा करना।
- किसी विशिष्ट कार्य (जैसे रक्तदान शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम में भागीदारी) के लिए लोगों को आमंत्रित करना।
- किसी महत्वपूर्ण विषय पर जागरूकता बढ़ाना।
- किसी खोई हुई या पाई गई वस्तु के बारे में सूचित करना।
सूचना लेखन की मुख्य विशेषताएँ:
एक प्रभावी सूचना लेखन के लिए निम्नलिखित विशेषताओं का ध्यान रखना आवश्यक है:
- संक्षिप्तता और स्पष्टता: सूचना हमेशा संक्षिप्त होनी चाहिए और उसमें केवल आवश्यक जानकारी ही होनी चाहिए। भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि हर कोई उसे आसानी से समझ सके।
- औपचारिकता: इसकी भाषा औपचारिक होनी चाहिए। इसमें व्यक्तिगत बातों या भावनाओं का कोई स्थान नहीं होता।
- तारीख और शीर्षक: सूचना लिखने की तारीख और एक स्पष्ट, आकर्षक शीर्षक (heading) होना चाहिए जो सूचना के विषय को दर्शाता हो।
- लक्षित दर्शक: यह स्पष्ट होना चाहिए कि सूचना किसके लिए है (जैसे छात्रों के लिए, कर्मचारियों के लिए, निवासियों के लिए)।
- आवश्यक जानकारी का समावेश: इसमें ‘क्या’ (What), ‘कब’ (When), ‘कहाँ’ (Where), ‘किसके द्वारा’ (By Whom) और ‘क्यों’ (Why) जैसे प्रश्नों के उत्तर होने चाहिए। यदि आवश्यक हो तो ‘कैसे’ (How) भी शामिल करें।
- जारी करने वाले का नाम और पद: सूचना जारी करने वाले व्यक्ति या प्राधिकरण का नाम और पद सूचना के अंत में लिखा जाना चाहिए।
- बॉक्स में बंद: सूचना को अक्सर एक बॉक्स (चौकोर) के अंदर लिखा जाता है ताकि वह अलग से दिखाई दे और लोगों का ध्यान आकर्षित करे।
सूचना लेखन का प्रारूप (Format):
आमतौर पर सूचना लेखन का प्रारूप इस प्रकार होता है:
[संगठन/विद्यालय का नाम]
[पता/शहर]
**सूचना**
**[तारीख]**
**[आकर्षक शीर्षक - विषय का उल्लेख]**
[मुख्य विवरण: क्या, कब, कहाँ, क्यों/कैसे (2-3 पैराग्राफ में, 50-60 शब्दों में)]
[अतिरिक्त जानकारी/निर्देश, यदि कोई हो]
[जारी करने वाले का नाम]
[जारी करने वाले का पद]
उदाहरण: (विद्यालय में खेलकूद प्रतियोगिता के लिए सूचना)
दिल्ली पब्लिक स्कूल
नई दिल्ली
**सूचना**
**12 अगस्त, 2025**
**वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन**
सभी छात्रों को सूचित किया जाता है कि विद्यालय की वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन [तारीख] को [समय] से [स्थान] पर किया जा रहा है। इसमें विभिन्न प्रकार के खेल जैसे दौड़, लंबी कूद, ऊँची कूद, फुटबॉल आदि शामिल होंगे।
इच्छुक छात्र 20 अगस्त, 2025 तक अपने कक्षा अध्यापक के पास अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। सभी छात्रों की भागीदारी अपेक्षित है।
[प्रिंसिपल का नाम]
प्रधानाचार्य
यह प्रारूप और बिंदु आपको सूचना लेखन को बेहतर ढंग से समझने और लिखने में मदद करेंगे।
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