Classification and Composition of Animal Feed : एमपी बोर्ड कक्षा 12 पशुपालन (MP Board Class 12 Animal Husbandry) के छात्रों के लिए ‘पशु आहार का वर्गीकरण और संगठन’ (Classification and Composition of Animal Feed) पर एक अत्यंत विस्तृत और विश्लेषणात्मक Classification and Composition of Animal Feed लेख।
इस लेख में चारे (Roughages), दाने (Concentrates), आहार के रासायनिक संगठन (Chemical Composition) और प्रॉक्सिमेट विश्लेषण का द्विभाषी (Bilingual) रूप में गहराई से वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। यह बोर्ड परीक्षाओं (Board Exams) और कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं (PAT, ICAR) के लिए एक सर्वश्रेष्ठ और संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
पशु आहार का वर्गीकरण और संगठन (Classification and Composition of Animal Feed) – संपूर्ण अध्ययन (कक्षा 12 पशुपालन)
1. प्रस्तावना (Introduction)
भारतीय कृषि प्रणाली (Indian Agricultural System) में पशुपालन (Animal Husbandry) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभकारी व्यवसाय है। एक सफल डेयरी फार्म (Dairy Farm) की सफलता मुख्य रूप से पशुओं के स्वास्थ्य, उनके प्रजनन और उनके उत्पादन (दूध, मांस, ऊन) पर निर्भर करती है। पशुओं से यह अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए उनके आहार और पोषण (Diet and Nutrition) का उचित प्रबंधन नितांत आवश्यक है।
एक अनुमान के अनुसार, डेयरी व्यवसाय में कुल खर्च का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल पशुओं के आहार (Cost of Feeding) पर खर्च होता है। इसलिए, एक सफल पशुपालक और कृषि छात्र के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि पशु आहार कितने प्रकार का होता है और उसके अंदर कौन-कौन से रासायनिक तत्व पाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश (MP Board) और अन्य राज्य बोर्डों के कक्षा 12 पशुपालन (Class 12 Animal Husbandry) के पाठ्यक्रम में ‘पशु आहार का वर्गीकरण और संगठन’ (Classification and Composition of Animal Feed) एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। बोर्ड परीक्षाओं में इस विषय से चारे और दाने में अंतर (Difference between roughage and concentrate) तथा आहार के रासायनिक संघटन से संबंधित प्रश्न हर वर्ष पूछे जाते हैं। इस विस्तृत लेख में हम इन सभी पहलुओं का वैज्ञानिक और व्यावहारिक (Scientific and Practical) अध्ययन करेंगे।
2. पशु आहार का वर्गीकरण (Classification of Animal Feed)
पशुओं को खिलाए जाने वाले आहार को उनकी भौतिक प्रकृति (Physical nature), उसमें मौजूद फाइबर (Crude Fiber) और पचने वाले कुल पोषक तत्वों (Total Digestible Nutrients – TDN) की मात्रा के आधार पर मुख्य रूप से तीन बड़े वर्गों में विभाजित किया गया है:
- चारा या मोटा आहार (Roughages)
- दाना या सांद्र मिश्रण (Concentrates)
- आहार पूरक एवं योजक (Feed Supplements and Additives)
आइए इन सभी वर्गों का विस्तार से अध्ययन करें।
2.1 चारा या मोटा आहार (Roughages)
चारा पशु आहार का वह हिस्सा है जो मुख्य रूप से पशु का पेट भरने (Bulky in nature) के काम आता है। जुगाली करने वाले पशुओं (Ruminants – जैसे गाय, भैंस) के आहार का यह सबसे बड़ा भाग होता है।
- वैज्ञानिक परिभाषा (Scientific Definition): “वह आहार जिसमें क्रूड फाइबर (Crude Fiber / कच्चा रेशा) की मात्रा 18% से अधिक हो और कुल पाचक पोषक तत्वों (TDN) की मात्रा 60% से कम हो, उसे चारा (Roughage) कहते हैं।”
चारे को उसमें मौजूद नमी (Moisture) की मात्रा के आधार पर दो उप-वर्गों में बांटा गया है:
(A) सूखा चारा (Dry Roughages):
सूखे चारे में नमी की मात्रा बहुत कम (लगभग 10 से 15 प्रतिशत) होती है। इन्हें लंबे समय तक भंडारित (Stored) किया जा सकता है। इनमें विटामिन और प्रोटीन अपेक्षाकृत कम होते हैं।
- अनाज का भूसा (Cereal Straws): जैसे— गेहूं का भूसा (Wheat straw), धान का पुआल (Paddy straw), जौ और जई का भूसा। इनमें पोषण बहुत कम होता है।
- कड़बी या डंठल (Stovers): मक्का (Maize), ज्वार (Sorghum) और बाजरा की सूखी कड़बी।
- हे (Hay): यह हरे चारे को सुखाकर बनाया गया उत्तम सूखा चारा है। इसमें नमी कम होती है लेकिन हरे चारे के सभी पोषक तत्व (जैसे प्रोटीन) सुरक्षित रहते हैं। (जैसे— बरसीम की हे, रिजका की हे)।
(B) रसीला या हरा चारा (Succulent / Green Roughages):
इनमें नमी (Moisture) की मात्रा बहुत अधिक (60 से 90 प्रतिशत तक) होती है। ये पशुओं को बहुत स्वादिष्ट (Palatable) लगते हैं, आसानी से पचते हैं और इनमें कैरोटीन (विटामिन A का स्रोत) भरपूर होता है। इन्हें दो भागों में बांटा गया है:
- दलहनी हरा चारा (Leguminous Green Fodder): इनमें प्रोटीन (Protein) और कैल्शियम (Calcium) बहुत अधिक होता है। इनकी जड़ों में नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जीवाणु पाए जाते हैं।
- उदाहरण: बरसीम (Berseem), रिजका (Lucerne), लोबिया (Cowpea), ग्वार।
- अदलहनी हरा चारा (Non-leguminous Green Fodder): इनमें कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) अधिक होता है और प्रोटीन कम होता है।
- उदाहरण: मक्का (Maize), ज्वार (Sorghum), बाजरा, नेपियर घास (Napier grass), सूडान घास।
- साइलेज (Silage): हरे चारे (विशेषकर मक्का और ज्वार) को बिना हवा वाले स्थान (Anaerobic condition) में किण्वन (Fermentation) द्वारा सुरक्षित रखकर बनाया गया रसीला चारा साइलेज कहलाता है। इसमें नमी 60-70% होती है।
2.2 दाना या सांद्र मिश्रण (Concentrates)
दाना पशु आहार का वह सघन हिस्सा है जो पशुओं को अतिरिक्त ऊर्जा (Energy) और प्रोटीन (Protein) प्रदान करने के लिए दिया जाता है। इसका मुख्य कार्य दुग्ध उत्पादन, मांस उत्पादन और शारीरिक वृद्धि को बढ़ाना है।
- वैज्ञानिक परिभाषा (Scientific Definition): “वह आहार जिसमें क्रूड फाइबर (Crude Fiber) की मात्रा 18% से कम हो और कुल पाचक पोषक तत्वों (TDN) की मात्रा 60% से अधिक हो, उसे दाना (Concentrate) कहते हैं।”
पोषक तत्वों की अधिकता के आधार पर दाने को दो उप-वर्गों में बांटा गया है:
(A) ऊर्जा दायक दाना (Energy-rich Concentrates):
इनमें कार्बोहाइड्रेट (ऊर्जा) की मात्रा बहुत अधिक होती है और क्रूड प्रोटीन (Crude Protein – CP) 18% से कम होता है।
- अनाज (Cereal Grains): मक्का (Maize), जौ (Barley), जई (Oats), गेहूं (Wheat), बाजरा। मक्का को पशु आहार का ‘राजा’ माना जाता है क्योंकि इसमें ऊर्जा सर्वाधिक होती है।
- अनाज के उपोत्पाद (Cereal By-products): गेहूं का चोकर (Wheat bran), धान की पॉलिश (Rice bran)। चोकर में हल्का रेचक (Laxative) गुण होता है जो पशु का पेट साफ रखता है।
- शीरा या राब (Molasses): यह चीनी मिलों का सह-उत्पाद है। यह ऊर्जा का बहुत सस्ता स्रोत है और आहार को स्वादिष्ट बनाता है।
(B) प्रोटीन दायक दाना (Protein-rich Concentrates):
इनमें क्रूड प्रोटीन (Crude Protein) की मात्रा 18% से अधिक होती है। ये दुधारू और बढ़ते हुए पशुओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
- वानस्पतिक स्रोत (Plant Origin):
- खली (Oil Cakes): तेल निकालने के बाद बचा हुआ हिस्सा खली कहलाता है। इनमें 20% से 45% तक प्रोटीन होता है। उदाहरण: सरसों की खली (Mustard cake), मूंगफली की खली (Groundnut cake), सोयाबीन मील (Soybean meal), बिनौला की खली (Cottonseed cake)।
- दालों की चूरी (Pulses By-products): चना, मूंग, उड़द और अरहर की चूरी।
- जंतु स्रोत (Animal Origin):
- इनमें प्रोटीन बहुत उच्च गुणवत्ता (High Biological Value) का होता है। उदाहरण: फिश मील (मछली का चूरा – 50-60% प्रोटीन), मीट मील (Meat meal), ब्लड मील (Blood meal)।
2.3 आहार पूरक एवं योजक (Feed Supplements and Additives)
यद्यपि चारे और दाने से पशु को मुख्य पोषण मिल जाता है, फिर भी उत्पादन को अधिकतम करने और बीमारियों से बचाने के लिए आहार में कुछ बाहरी चीजें बहुत ही सूक्ष्म मात्रा (Trace amounts) में मिलाई जाती हैं:
- खनिज लवण मिश्रण (Mineral Mixtures): कैल्शियम, फास्फोरस, कोबाल्ट, तांबा और आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए। (प्रतिदिन 30-50 ग्राम/पशु)।
- विटामिन (Vitamins): विटामिन A, D, और E के सप्लीमेंट्स।
- एंटीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स (Antibiotics and Probiotics): पाचन तंत्र के मित्र जीवाणुओं को स्वस्थ रखने और हानिकारक जीवाणुओं को मारने के लिए।
- हार्मोन (Hormones): पशु की वृद्धि दर (Growth rate) बढ़ाने के लिए।
3. पशु आहार का रासायनिक संगठन (Chemical Composition of Animal Feed)
एक कृषि छात्र को यह जानना आवश्यक है कि जब कोई पशु चारा या दाना खाता है, तो रासायनिक दृष्टिकोण से वह किन तत्वों को ग्रहण कर रहा है। पशु आहार के रासायनिक संघटन का विश्लेषण एक विशेष विधि द्वारा किया जाता है जिसे ‘वीन्डे विश्लेषण प्रणाली’ (Weende System of Proximate Analysis) कहा जाता है। इसे जर्मनी के वीन्डे रिसर्च स्टेशन में विकसित किया गया था।
इस प्रणाली के अनुसार किसी भी पशु आहार को मुख्य रूप से 6 रासायनिक अवयवों में बांटा जाता है:
1. नमी या जल (Moisture / Water)
किसी भी आहार को 100°C से 105°C तापमान पर ओवन (Oven) में सुखाने पर जो वजन कम होता है, वह उस आहार की नमी (Moisture) कहलाती है।
- हरे चारे में नमी 70-90% होती है, जबकि सूखे भूसे या दाने में नमी केवल 10-12% होती है। जल पोषक तत्वों के पाचन और अवशोषण (Absorption) के लिए आवश्यक है।
2. शुष्क पदार्थ (Dry Matter – DM)
नमी के उड़ जाने के बाद आहार का जो सूखा हिस्सा बचता है, उसे शुष्क पदार्थ (Dry Matter) कहते हैं। किसी भी पशु का राशन बनाते समय गणना हमेशा शुष्क पदार्थ के आधार पर ही की जाती है।
शुष्क पदार्थ को आगे दो भागों में बांटा जाता है:
- कार्बनिक पदार्थ (Organic Matter): यह जलने पर नष्ट हो जाता है (प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन)।
- अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic Matter): यह जलने के बाद राख (Ash) के रूप में बचता है (खनिज लवण)।
3. क्रूड प्रोटीन (Crude Protein – CP)
प्रोटीन शरीर की वृद्धि (Growth) और दूध निर्माण के लिए आवश्यक है। आहार में मौजूद नाइट्रोजन (Nitrogen) की मात्रा को मापकर उसमें 6.25 का गुणा करके क्रूड प्रोटीन निकाला जाता है (क्योंकि सामान्य प्रोटीन में लगभग 16% नाइट्रोजन होती है; 100/16 = 6.25)।
क्रूड प्रोटीन में दो चीजें शामिल होती हैं:
- सच्ची प्रोटीन (True Protein): जो अमीनो अम्लों (Amino acids) से बनी होती है।
- गैर-प्रोटीन नाइट्रोजन (NPN – Non-Protein Nitrogen): जैसे यूरिया (Urea) और एमाइड्स। जुगाली करने वाले पशु (Ruminants) अपने पेट के जीवाणुओं की मदद से यूरिया (NPN) को भी प्रोटीन में बदल लेते हैं।
4. ईथर एक्सट्रेक्ट या क्रूड वसा (Ether Extract – EE / Crude Fat)
आहार का वह हिस्सा जो ईथर (Ether) नामक रसायन में घुल जाता है, उसे ईथर एक्सट्रेक्ट या वसा कहते हैं।
- यह ऊर्जा का सबसे सघन स्रोत (Dense source of energy) है। 1 ग्राम वसा से 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट की तुलना में 2.25 गुना अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह विटामिन A, D, E, K के अवशोषण के लिए भी आवश्यक है।
5. क्रूड फाइबर (Crude Fiber – CF / कच्चा रेशा)
आहार के कार्बोहाइड्रेट का वह भाग जो कमजोर एसिड (Acid) और कमजोर क्षार (Alkali) में उबालने के बाद भी नहीं घुलता (Undigested रहता है), क्रूड फाइबर कहलाता है।
- इसमें मुख्य रूप से सेल्युलोज (Cellulose), हेमीसेल्यूलोज और लिग्निन (Lignin) शामिल होते हैं।
- जुगाली न करने वाले पशु (जैसे सूअर, कुत्ता) इसे नहीं पचा सकते, लेकिन गाय और भैंस अपने रुमेन (Rumen) के सूक्ष्मजीवों की मदद से इसे पचा लेते हैं। यह दूध में ‘फैट’ (Milk Fat) बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। भूसे में क्रूड फाइबर सबसे अधिक (30-40%) होता है।
6. नाइट्रोजन मुक्त अर्क (Nitrogen Free Extract – NFE)
यह कार्बोहाइड्रेट का वह भाग है जो आसानी से पच जाता है (Highly digestible)।
- इसमें मुख्य रूप से स्टार्च (Starch) और शर्करा (Sugars) आते हैं। दाने (Concentrates) जैसे मक्का, गेहूं और गुड़ में NFE की मात्रा बहुत अधिक होती है। यह पशु को तुरंत काम करने के लिए ऊर्जा (Energy) प्रदान करता है।
7. राख या भस्म (Ash / Mineral Matter)
आहार के शुष्क पदार्थ को भट्टी (Muffle Furnace) में 600°C तापमान पर जलाने के बाद जो अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic residue) बच जाता है, उसे राख (Ash) कहते हैं।
- यह राख वास्तव में आहार में मौजूद खनिज लवणों (Minerals) का प्रतिनिधित्व करती है। इसमें कैल्शियम (Ca), फास्फोरस (P), लोहा (Fe), तांबा (Cu), मैग्नीशियम (Mg) आदि शामिल होते हैं, जो हड्डियों के निर्माण और रक्त के लिए आवश्यक हैं।
4. चारा और दाना में अंतर (Difference between Roughage and Concentrate)
कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में यह प्रश्न सबसे अधिक बार पूछा गया है। कृषि छात्रों को यह अंतर स्पष्ट रूप से याद होना चाहिए:
| क्र.सं. | विशेषता (Feature) | चारा या मोटा आहार (Roughages) | दाना या सांद्र आहार (Concentrates) |
| 1. | क्रूड फाइबर (Crude Fiber) | इसमें फाइबर की मात्रा 18% से अधिक होती है। | इसमें फाइबर की मात्रा 18% से कम होती है। |
| 2. | पाचक पोषक तत्व (TDN) | इसमें कुल पाचक पोषक तत्वों (TDN) की मात्रा 60% से कम होती है। | इसमें कुल पाचक पोषक तत्वों (TDN) की मात्रा 60% से अधिक होती है। |
| 3. | नमी (Moisture) | हरे चारे में नमी बहुत अधिक (60-90%) होती है। | दाने में नमी बहुत कम (10-12%) होती है। |
| 4. | पेट भरना (Bulkiness) | यह अधिक स्थान घेरता है और पशु का पेट भरने के काम आता है। | यह कम स्थान घेरता है और मुख्य रूप से पोषण देने के काम आता है। |
| 5. | पाचनशीलता (Digestibility) | इसकी पाचनशीलता कम होती है, इसे पचने में समय लगता है। | यह आसानी से और शीघ्र पच जाता है (Highly Digestible)। |
| 6. | मुख्य कार्य (Main Function) | यह जीवन निर्वाह (Maintenance) के लिए आवश्यक है। | यह दुग्ध, मांस उत्पादन और शारीरिक वृद्धि (Production) के लिए आवश्यक है। |
| 7. | उदाहरण (Examples) | गेहूं का भूसा, बरसीम, मक्का की कड़बी, साइलेज। | मक्का, गेहूं का चोकर, सरसों की खली, फिश मील। |
5. पशु आहार के वर्गीकरण और संगठन के अध्ययन का महत्व (Importance of Studying Classification and Composition of Animal Feed)
एक पशुपालक और कृषि छात्र के लिए चारे और दाने के संगठन का ज्ञान होना निम्नलिखित कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- संतुलित आहार तैयार करना (Formulation of Balanced Ration): जब तक हमें यह नहीं पता होगा कि मक्के में कितनी ऊर्जा है और सरसों की खली में कितना प्रोटीन है, तब तक हम पशु के लिए एक आदर्श और संतुलित आहार (Balanced Diet) तैयार नहीं कर सकते।
- उत्पादन लागत कम करना (Reducing Production Cost): आहार के वर्गीकरण का ज्ञान होने से किसान महंगे दानों की जगह सस्ते और स्थानीय कृषि उपोत्पादों (Agri-byproducts) का उपयोग कर सकता है, जिससे दूध उत्पादन की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है।
- पशु के स्वास्थ्य की रक्षा (Maintaining Animal Health): चारे के रासायनिक संगठन का ज्ञान होने से पशुपालक यह जान पाता है कि किस चारे में फास्फोरस कम है या विटामिन ए अधिक है, जिससे वह बीमारियों (जैसे मिल्क फीवर, पिका) से पशु को बचा सकता है।
- जीवन निर्वाह और उत्पादन में अंतर: किसान यह समझ पाता है कि चारे से केवल पशु का पेट भरा जा सकता है (निर्वाह राशन), लेकिन अधिक दूध प्राप्त करने के लिए ‘उत्पादन राशन’ के रूप में दाना (Concentrate) देना अनिवार्य है।
- जुगाली करने वाले पशुओं की विशेषता समझना: संगठन के ज्ञान से यह स्पष्ट होता है कि गाय-भैंस फाइबर (भूसा) को क्यों पचा सकते हैं, जिससे किसान सूखे चारे का उचित प्रबंधन कर पाता है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) के ‘पशुपालन’ (Animal Husbandry) विषय के अंतर्गत ‘पशु आहार का वर्गीकरण और संगठन’ मात्र एक किताबी अध्याय नहीं है, बल्कि यह एक सफल डेयरी व्यवसाय (Profitable Dairy Farming) की नींव है।
एक उन्नत किसान वही है जो यह जानता है कि उसे अपनी दुधारू गाय को हरा चारा (विटामिन और पेट भरने के लिए), सूखा चारा (फाइबर और फैट बढ़ाने के लिए), और दाना-खली (ऊर्जा और प्रोटीन के लिए) किस निश्चित और वैज्ञानिक अनुपात में देना है। प्रॉक्सिमेट विश्लेषण (Proximate Analysis) हमें चारे के अंदर छिपे पोषण को मापने की दृष्टि देता है। इस विज्ञान को अपनाकर ही हम भारत की पशुधन संपदा (Livestock wealth) से अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर सकते हैं।
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: कुल पाचक पोषक तत्व (TDN – Total Digestible Nutrients) क्या है?
उत्तर: किसी पशु आहार (Feed) में मौजूद सभी पचने योग्य पोषक तत्वों— पाचक प्रोटीन, पाचक कार्बोहाइड्रेट (CF + NFE), और पाचक वसा (वसा x 2.25)—के योग (Sum) को कुल पाचक पोषक तत्व (TDN) कहा जाता है। यह आहार की ऊर्जा (Energy value) को मापने का एक तरीका है। दाने में TDN > 60% और चारे में TDN < 60% होता है।
प्रश्न 2: साइलेज (Silage) और हे (Hay) में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: ‘हे’ (Hay) हरे चारे (जैसे बरसीम) को धूप में सुखाकर बनाया गया सूखा चारा है जिसमें नमी 10-15% होती है। जबकि ‘साइलेज’ (Silage) हरे चारे (जैसे मक्का/ज्वार) को हवा की अनुपस्थिति (गड्ढों में) सड़ाकर या किण्वित करके बनाया गया रसीला चारा है, जिसमें नमी 60-70% बनी रहती है।
प्रश्न 3: पशु आहार में ‘शीरा’ (Molasses) क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर: शीरा (राब) चीनी मिलों का एक सह-उत्पाद है। यह बहुत ही मीठा होता है और कार्बोहाइड्रेट (ऊर्जा) का अत्यंत सस्ता स्रोत है। इसे पशु आहार में मिलाने से आहार का स्वाद (Palatability) बढ़ जाता है, उड़ने वाली धूल कम हो जाती है, और इसमें हल्का रेचक (Laxative) गुण होता है जो पशु का पेट साफ रखता है।
प्रश्न 4: जुगाली करने वाले पशु (Ruminants) यूरिया (Urea) से प्रोटीन कैसे बना लेते हैं?
उत्तर: जुगाली करने वाले पशुओं (गाय, भैंस) के पेट के सबसे बड़े भाग (रुमेन/Rumen) में करोड़ों सूक्ष्मजीव (Bacteria और Protozoa) पाए जाते हैं। जब पशु यूरिया (NPN) खाता है, तो ये जीवाणु यूरिया की नाइट्रोजन का उपयोग करके अपने शरीर की प्रोटीन (Microbial Protein) बनाते हैं। बाद में जब ये जीवाणु आगे आंतों में जाते हैं, तो पशु इन्हें पचाकर वह प्रोटीन प्राप्त कर लेता है।
प्रश्न 5: नाइट्रोजन मुक्त अर्क (NFE) और क्रूड फाइबर (CF) में क्या अंतर है?
उत्तर: NFE और CF दोनों ही कार्बोहाइड्रेट हैं। लेकिन NFE (Nitrogen Free Extract) में मुख्य रूप से स्टार्च और शर्करा आते हैं जो आसानी से और तेजी से पच जाते हैं (जैसे मक्के में)। जबकि CF (Crude Fiber) में सेल्युलोज और लिग्निन आते हैं, जो बहुत कठोर होते हैं और इन्हें पचने में बहुत समय लगता है (जैसे भूसे में)।
प्रश्न 6: खली (Oil Cakes) को प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत क्यों माना जाता है?
उत्तर: तिलहन बीजों (जैसे सरसों, सोयाबीन, मूंगफली) से जब तेल निकाल लिया जाता है, तो बचे हुए हिस्से (खली) में प्रोटीन की सांद्रता बहुत अधिक (20% से 45% तक) हो जाती है। यह प्रोटीन दुधारू पशुओं में दूध निर्माण और शारीरिक वृद्धि के लिए अत्यंत सुपाच्य और उत्कृष्ट माना जाता है।