MP Board Class 12 Animal Husbandry Components of Animal Feed and Their Functions पशु आहार के अवयव और उनके कार्य

Animal Husbandry Components of Animal Feed and Their Functions : एमपी बोर्ड कक्षा 12 पशुपालन (Animal Husbandry) के छात्रों के लिए ‘इकाई 1: आहार और पोषण – 1’ के अंतर्गत ‘पशु आहार के अवयव और उनके कार्य’ (Components of Animal Feed and Their Functions) पर एक अत्यंत विस्तृत और संपूर्ण लेख। इस लेख में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज, विटामिन और जल के कार्यों, स्रोतों और कमी के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। यह Animal Husbandry Components of Animal Feed and Their Functions लेख बोर्ड परीक्षाओं (Board Exams) और कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं (PAT, ICAR) के लिए सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शिका है।

एमपी बोर्ड कक्षा 12 पशुपालन (Animal Husbandry)

इकाई 1: आहार और पोषण – 1 (Diet and Nutrition – 1)

अध्याय: पशु आहार के अवयव और उनके कार्य (Components of Animal Feed and Their Functions) – संपूर्ण अध्ययन

1. प्रस्तावना (Introduction)

भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन (Animal Husbandry) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। एक डेयरी किसान या पशुपालक का मुख्य उद्देश्य अपने पशुओं से अधिकतम दुग्ध (Milk), मांस (Meat), ऊन (Wool) या कृषि कार्य प्राप्त करना होता है। लेकिन, पशुओं से यह उत्पादन तभी प्राप्त किया जा सकता है जब उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ रखा जाए।

पशुओं को स्वस्थ रखने, उनके शारीरिक विकास, और उत्पादन क्षमता को बनाए रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक ‘आहार और पोषण’ (Diet and Nutrition) है। जिस प्रकार एक मशीन को चलाने के लिए ईंधन (Fuel) की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार पशु के शरीर रूपी मशीन को चलाने के लिए ‘पशु आहार’ (Animal Feed) की आवश्यकता होती है।

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मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) के कक्षा 12 के ‘पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, मुर्गीपालन एवं मत्स्य पालन’ (Animal Husbandry and Dairying) विषय के अंतर्गत ‘इकाई 1: आहार और पोषण – 1’ सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। बोर्ड परीक्षाओं में इस अध्याय से वस्तुनिष्ठ (Objective), लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions) अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। इस विस्तृत लेख में हम पशु आहार के विभिन्न अवयवों (पोषक तत्वों) और पशु शरीर में उनके महत्वपूर्ण कार्यों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

2. पशु आहार और राशन का अर्थ (Meaning of Animal Feed and Ration)

पशु आहार (Animal Feed / Food):

वह सभी ठोस या तरल सामग्री जिसे पशु अपनी भूख मिटाने के लिए खाता या पीता है, और जो पचने के बाद पशु के शरीर को पोषण (Nutrition) प्रदान करती है, शरीर की वृद्धि करती है और कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत करती है, उसे ‘पशु आहार’ कहा जाता है। (जैसे- हरा चारा, भूसा, खली, दाना आदि)।

राशन या खुराक (Ration):

किसी पशु को 24 घंटे (एक दिन-रात) की अवधि में खाने के लिए दिए जाने वाले आहार की कुल मात्रा को ‘राशन’ (Ration) या ‘खुराक’ कहते हैं।

  • संतुलित राशन (Balanced Ration): वह आहार जिसमें पशु की आवश्यकता के अनुसार सभी आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients) उचित मात्रा और सही अनुपात में मौजूद हों, संतुलित राशन कहलाता है।

3. पशु आहार के मुख्य अवयव (Main Components of Animal Feed)

रासायनिक दृष्टिकोण से पशु आहार को मुख्य रूप से 6 आवश्यक अवयवों (Nutrients) में बांटा गया है। एक आदर्श पशु आहार में इन सभी का होना नितांत आवश्यक है:

  1. जल (Water)
  2. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)
  3. प्रोटीन (Proteins)
  4. वसा या चिकनाई (Fats / Lipids)
  5. खनिज लवण (Minerals)
  6. विटामिन (Vitamins)

आइए इन सभी अवयवों के स्रोत, उनके रासायनिक गुण और पशु शरीर में उनके कार्यों का विस्तार से अध्ययन करें।

3.1 जल (Water)

जल को जीवन का आधार कहा जाता है। यद्यपि जल से पशु को कोई ऊर्जा (Energy) प्राप्त नहीं होती, फिर भी यह शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अवयव है। एक स्वस्थ पशु के शरीर के कुल भार का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा जल ही होता है। दूध में लगभग 87 प्रतिशत जल पाया जाता है।

जल प्राप्ति के स्रोत (Sources of Water):

  1. पीने का पानी (Drinking Water): पशु सीधे तौर पर पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं।
  2. चारे से प्राप्त जल: हरे चारे (Green fodder) में 70% से 90% तक नमी (Moisture) या पानी होता है। साइलेज और जड़ों वाली फसलों में भी प्रचुर पानी होता है।
  3. उपापचयी जल (Metabolic Water): शरीर के अंदर जब कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन का ऑक्सीकरण (Oxidation/पाचन) होता है, तब भी रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप जल बनता है।

पशु शरीर में जल के प्रमुख कार्य (Functions of Water):

  • पाचन और अवशोषण (Digestion and Absorption): जल भोजन को नरम और घुलनशील बनाता है, जिससे चारे का पाचन आसानी से होता है और पचे हुए पोषक तत्व आंतों द्वारा सोख (Absorb) लिए जाते हैं।
  • रक्त का मुख्य भाग: जल रक्त (Blood) और लसीका (Lymph) का मुख्य घटक है, जो पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाता है।
  • तापमान नियंत्रण (Temperature Regulation): जल पसीने (Sweat) और वाष्पीकरण के माध्यम से पशु के शरीर के तापमान (Body temperature) को नियंत्रित रखता है। गर्मियों में यह बहुत आवश्यक है।
  • अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन (Excretion of Wastes): शरीर में बनने वाले जहरीले और व्यर्थ पदार्थों (यूरिया, यूरिक एसिड) को मूत्र (Urine) और गोबर के रूप में शरीर से बाहर निकालने में जल अत्यंत आवश्यक है।
  • दुग्ध उत्पादन (Milk Production): दूध निर्माण के लिए पशु को भारी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। पानी की कमी होने पर दूध का उत्पादन तुरंत गिर जाता है।

3.2 कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

कार्बोहाइड्रेट पशु आहार का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। शाकाहारी पशुओं के आहार का लगभग 70 से 80 प्रतिशत भाग कार्बोहाइड्रेट ही होता है। यह कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), और ऑक्सीजन (O) तत्वों से मिलकर बना एक कार्बनिक यौगिक (Organic compound) है।

पशु आहार में कार्बोहाइड्रेट को दो भागों में बांटा जाता है:

  1. घुलनशील कार्बोहाइड्रेट (NFE – Nitrogen Free Extract): इसमें शर्करा (Sugars) और स्टार्च (Starch) आते हैं। ये आसानी से पच जाते हैं। (स्रोत: दाना, मक्का, गेहूं, जौ, गुड़)।
  2. अघुलनशील कार्बोहाइड्रेट या क्रूड फाइबर (Crude Fiber): इसमें सेल्युलोज (Cellulose), हेमीसेल्यूलोज और लिग्निन आते हैं। जुगाली करने वाले पशु (Ruminants – गाय, भैंस) अपने रुमेन (Rumen) में मौजूद जीवाणुओं की मदद से इस फाइबर को भी आसानी से पचा लेते हैं। (स्रोत: सूखा भूसा, कड़बी, पुआल, घास)।

पशु शरीर में कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख कार्य (Functions of Carbohydrates):

  • ऊर्जा का प्रमुख स्रोत (Primary Source of Energy): पशु शरीर को काम करने, चलने-फिरने और सांस लेने के लिए आवश्यक ऊर्जा सबसे पहले कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीकरण से ही प्राप्त होती है।
  • शरीर का तापमान बनाए रखना (Maintenance of Body Heat): इसके पाचन से उत्पन्न ऊष्मा पशु के शरीर को गर्म रखती है, विशेषकर सर्दियों के मौसम में।
  • वसा का निर्माण (Formation of Fat): जब पशु आवश्यकता से अधिक कार्बोहाइड्रेट खाता है, तो शरीर उसे वसा (Fat) में बदलकर त्वचा के नीचे या ऊतकों में जमा कर लेता है, जो संकट के समय काम आती है।
  • दुग्ध वसा का निर्माण (Milk Fat Production): दुधारू पशुओं में क्रूड फाइबर (Crude Fiber) के पाचन से ‘एसिटिक एसिड’ (Acetic acid) बनता है, जो दूध में फैट (Milk Fat) की मात्रा बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • मांस उत्पादन: सूअर और मांस वाले पशुओं को मोटा करने (Fattening) के लिए कार्बोहाइड्रेट बहुत जरूरी है।

3.3 प्रोटीन (Proteins)

प्रोटीन शरीर की आधारशिला (Building Blocks) है। यह कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के साथ-साथ नाइट्रोजन (Nitrogen – लगभग 16%) से मिलकर बना एक अत्यंत जटिल कार्बनिक यौगिक है। कुछ प्रोटीनों में सल्फर (S) और फास्फोरस (P) भी पाया जाता है।

प्रोटीन का निर्माण अमीनो अम्लों (Amino Acids) से होता है। पशुओं के लिए 10 अमीनो अम्ल अत्यंत आवश्यक (Essential Amino Acids) माने जाते हैं।

प्रोटीन प्राप्ति के स्रोत (Sources of Protein):

  • वनस्पति स्रोत: दलहनी हरा चारा (जैसे- बरसीम, रिजका / Lucerne, लोबिया), सभी प्रकार की खली (Oil cakes – जैसे सरसों की खली, मूंगफली की खली, सोयाबीन मील), दालों की चूरी।
  • जंतु स्रोत: फिश मील (मछली का चूरा), मीट मील, ब्लड मील, और दूध।

पशु शरीर में प्रोटीन के प्रमुख कार्य (Functions of Protein):

  • शरीर की वृद्धि और विकास (Growth and Development): बढ़ते हुए बछड़े-बछड़ियों और छोटे पशुओं के शरीर की कोशिकाओं, मांसपेशियों (Muscles) और ऊतकों के निर्माण के लिए प्रोटीन नितांत आवश्यक है।
  • टूट-फूट की मरम्मत (Repair of Tissues): शरीर में प्रतिदिन जो पुरानी कोशिकाएं नष्ट होती हैं या जो चोट लग जाती है, उसकी मरम्मत का काम प्रोटीन ही करता है।
  • दुग्ध, मांस और ऊन उत्पादन (Production): दूध में ‘केसीन’ (Casein) नामक प्रोटीन होता है। इसी प्रकार ऊन और बाल (केराटिन), तथा अंडे का सफेद भाग शुद्ध प्रोटीन हैं। इनके उत्पादन के लिए आहार में प्रोटीन अनिवार्य है।
  • भ्रूण का विकास (Development of Fetus): गाभिन (Pregnant) पशुओं के गर्भ में पल रहे बच्चे के सही विकास के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है।
  • हार्मोन और एंजाइम का निर्माण: शरीर की जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करने वाले सभी एंजाइम (Enzymes) और अधिकांश हार्मोन (Hormones) रासायनिक रूप से प्रोटीन ही होते हैं।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): बीमारियों से लड़ने वाले एंटीबॉडीज (Antibodies) प्रोटीन के ही बने होते हैं।

प्रोटीन की कमी के प्रभाव (Deficiency Symptoms):

पशु की वृद्धि रुक जाना, दूध उत्पादन में भारी गिरावट, पशु का कमजोर होना, और गाभिन पशुओं में बच्चे का गिर जाना या कमजोर पैदा होना।

3.4 वसा या चिकनाई (Fats / Lipids)

वसा भी कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बनती है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट की तुलना में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है और कार्बन-हाइड्रोजन अधिक होते हैं।

विशेषता: वसा ऊर्जा का सबसे सघन स्रोत (Dense source of energy) है। 1 ग्राम वसा के पाचन से 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन की तुलना में 2.25 गुना अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

वसा प्राप्ति के स्रोत (Sources of Fats):

  • तिलहन के बीज (Oilseeds – जैसे बिनौला/Cottonseed, सरसों, सोयाबीन, मूंगफली)।
  • विभिन्न खली (Oil cakes)।
  • धान की पॉलिश (Rice bran)।

पशु शरीर में वसा के प्रमुख कार्य (Functions of Fats):

  • अत्यधिक ऊर्जा प्रदान करना: भारी काम करने वाले बैल और उच्च दुग्ध उत्पादन वाली गाय-भैंसों को तुरंत और अधिक ऊर्जा देने के लिए वसा अत्यंत उपयोगी है।
  • विटामिनों का संवहन (Carrier of Vitamins): वसा में घुलनशील विटामिन— विटामिन A, D, E, और K—को शरीर में अवशोषित (Absorb) करने और विभिन्न अंगों तक पहुँचाने का काम वसा ही करती है। वसा के बिना शरीर इन विटामिनों का उपयोग नहीं कर सकता।
  • शरीर की सुरक्षा: त्वचा के नीचे वसा की एक परत जमा हो जाती है, जो पशु के आंतरिक अंगों की बाहरी चोटों से रक्षा करती है और भयंकर सर्दियों में शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है (Insulation)।
  • चमक और सुंदरता: आहार में उचित वसा होने से पशु की त्वचा (Skin) और बालों (Hair) में चमक (Luster) और चिकनाहट बनी रहती है। त्वचा रूखी नहीं होती।

3.5 खनिज लवण (Minerals)

खनिज लवण अकार्बनिक तत्व (Inorganic elements) होते हैं। जब किसी चारे या दाने को भट्टी में जलाया जाता है, तो जो राख (Ash) बचती है, वह खनिज लवण ही होती है। पशु शरीर के कुल भार का लगभग 3 से 5 प्रतिशत हिस्सा खनिज लवण होते हैं।

मात्रा की आवश्यकता के आधार पर खनिज लवणों को दो भागों में बांटा गया है:

  1. मुख्य खनिज (Macro Minerals): जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। (जैसे- कैल्शियम-Ca, फास्फोरस-P, सोडियम-Na, पोटेशियम-K, क्लोरीन-Cl, मैग्नीशियम-Mg, सल्फर-S)।
  2. सूक्ष्म खनिज (Micro / Trace Minerals): जिनकी शरीर को बहुत ही कम (मिलीग्राम) मात्रा में आवश्यकता होती है। (जैसे- लोहा-Fe, तांबा-Cu, कोबाल्ट-Co, जिंक-Zn, आयोडीन-I, मैंगनीज-Mn)।

खनिज प्राप्ति के स्रोत (Sources):

  • हड्डी का चूरा (Bone meal), नमक (Common salt), खनिज मिश्रण (Mineral mixture powder), हरा चारा (विशेषकर बरसीम और रिजका)।

पशु शरीर में खनिज लवणों के प्रमुख कार्य (Functions of Minerals):

  • कैल्शियम (Ca) और फास्फोरस (P): ये दोनों खनिज पशु के शरीर की हड्डियों (Bones) और दांतों (Teeth) के निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। दूध में कैल्शियम भारी मात्रा में निकलता है। कैल्शियम की कमी से दुधारू गायों में ‘मिल्क फीवर’ (Milk Fever / दुग्ध ज्वर) नामक भयानक बीमारी हो जाती है। फास्फोरस की कमी से पशुओं में ‘पिका’ (Pica) रोग हो जाता है (जिसमें पशु अखाद्य वस्तुएं जैसे मिट्टी, कपड़े, हड्डी चबाने लगता है)।
  • लोहा (Iron – Fe) और तांबा (Copper – Cu): ये दोनों खनिज रक्त में लाल रक्त कणिकाओं (RBC) और हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इनकी कमी से पशुओं में एनीमिया (Anemia / रक्ताल्पता) रोग हो जाता है।
  • आयोडीन (Iodine): यह थायराइड ग्रंथि (Thyroid gland) के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से पशुओं में ‘घेंघा’ (Goiter) रोग हो जाता है।
  • सोडियम और क्लोरीन (Na & Cl): ये रक्त के ऑस्मोटिक दबाव (Osmotic pressure) को बनाए रखते हैं और भोजन की पाचन क्रिया (HCl के निर्माण) में मदद करते हैं।
  • कोबाल्ट (Cobalt): यह जुगाली करने वाले पशुओं के रुमेन में विटामिन B-12 के निर्माण के लिए आवश्यक है।

3.6 विटामिन (Vitamins)

विटामिन ऐसे जटिल कार्बनिक यौगिक (Complex organic compounds) हैं जिनकी शरीर को बहुत ही सूक्ष्म मात्रा (Trace amounts) में आवश्यकता होती है, लेकिन शरीर की वृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन रक्षा के लिए ये अत्यंत अनिवार्य हैं। ये उत्प्रेरक (Catalysts) की तरह काम करते हैं।

घुलनशीलता के आधार पर विटामिन दो प्रकार के होते हैं:

  1. वसा में घुलनशील विटामिन (Fat-Soluble Vitamins): विटामिन A, D, E, और K।
  2. जल में घुलनशील विटामिन (Water-Soluble Vitamins): विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और विटामिन C। (नोट: गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे जुगाली करने वाले पशु (Ruminants) अपने रुमेन में जीवाणुओं की मदद से विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और विटामिन C का निर्माण स्वयं कर लेते हैं, इसलिए इन्हें आहार में अलग से देने की आवश्यकता नहीं होती है।)

प्रमुख विटामिनों के कार्य और कमी के प्रभाव:

  • विटामिन A (Retinol):
    • कार्य: यह आंखों की रोशनी, त्वचा के स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है। यह हरे चारे (कैरोटीन के रूप में) से प्रचुर मात्रा में मिलता है।
    • कमी: इसकी कमी से पशुओं में रतौंधी (Night blindness) और आंखों का अंधापन हो जाता है। गाभिन पशुओं में गर्भपात (Abortion) हो सकता है।
  • विटामिन D (Calciferol):
    • कार्य: यह शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण (Absorption) और हड्डियों के निर्माण के लिए आवश्यक है। यह सूर्य के प्रकाश (Sunlight) और सूखी घास (Hay) से मिलता है।
    • कमी: छोटे बछड़ों में रिकेट्स (Rickets / सूखा रोग) और बड़े पशुओं में ‘ऑस्टियोमलेशिया’ (हड्डियों का कमजोर होना) हो जाता है।
  • विटामिन E (Tocopherol):
    • कार्य: इसे ‘एंटी-स्टेरिलिटी’ (Anti-sterility) विटामिन कहते हैं। यह पशुओं की प्रजनन क्षमता (Reproduction capacity) को बनाए रखता है।
    • कमी: नर पशुओं में नपुंसकता और मादा पशुओं में बांझपन (Infertility) आ जाता है।
  • विटामिन K (Phylloquinone):
    • कार्य: यह चोट लगने पर रक्त का थक्का (Blood clotting) जमाने में मदद करता है, जिससे खून का बहना रुकता है।

4. एक आदर्श राशन की विशेषताएं (Characteristics of an Ideal Ration)

कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में आदर्श राशन के गुण अक्सर पूछे जाते हैं:

  1. संतुलित (Balanced): इसमें सभी पोषक तत्व (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, खनिज, विटामिन) पशु की आवश्यकतानुसार उचित अनुपात में होने चाहिए।
  2. सुपाच्य (Digestible): आहार आसानी से पचने वाला होना चाहिए।
  3. स्वादिष्ट (Palatable): आहार में कोई दुर्गंध नहीं होनी चाहिए। इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए थोड़ा नमक या गुड़ मिलाया जा सकता है।
  4. स्थान घेरने वाला (Bulky): जुगाली करने वाले पशुओं का पेट बड़ा होता है, इसलिए आहार में सूखे चारे और फाइबर की उचित मात्रा होनी चाहिए ताकि पशु का पेट भर सके और उसे संतुष्टि मिले।
  5. सस्ता और स्थानीय (Economical and Local): आहार बनाने में उपयोग की जाने वाली सामग्री स्थानीय स्तर पर और सस्ते दामों पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि पशुपालन घाटे का सौदा न बने।
  6. विषाक्तता रहित (Free from Toxins): आहार में कोई फफूंदी, जहरीले खरपतवार या कंकड़-पत्थर नहीं होने चाहिए।

5. निष्कर्ष (Conclusion)

पशु आहार के विभिन्न अवयवों (Components of Animal Feed) और उनके कार्यों का गहराई से अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई भी एक चारा या दाना अपने आप में पूर्ण नहीं होता। दुधारू पशुओं से अधिकतम और लगातार उत्पादन प्राप्त करने के लिए उन्हें सूखा चारा, हरा चारा, दाना मिश्रण और खनिज लवणों का एक वैज्ञानिक और संतुलित मिश्रण (Balanced Diet) देना नितांत आवश्यक है। एक शिक्षित और जागरूक पशुपालक (Dairy Farmer) ही यह समझ सकता है कि कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा देगा, प्रोटीन दूध और मांस बनाएगा, और विटामिन व खनिज पशु को बीमारियों से बचाएंगे। यही विज्ञान ‘इकाई 1: आहार और पोषण’ का मूल आधार है।

6. बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions for Board Exams)

(A) वस्तुनिष्ठ / अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Objective / Very Short Answer Type):

  1. ऊर्जा का सबसे सघन स्रोत कौन सा है? (उत्तर: वसा / Fats)
  2. वसा में घुलनशील विटामिनों के नाम लिखिए। (उत्तर: विटामिन A, D, E, K)
  3. ‘मिल्क फीवर’ (दुग्ध ज्वर) रोग किस खनिज की कमी से होता है? (उत्तर: कैल्शियम)
  4. प्रोटीन का निर्माण किन इकाइयों से होता है? (उत्तर: अमीनो अम्ल / Amino Acids)
  5. 1 ग्राम वसा से 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट की तुलना में कितनी अधिक ऊर्जा मिलती है? (उत्तर: 2.25 गुना)

(B) लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type):

  1. पशु शरीर में जल के कोई तीन महत्वपूर्ण कार्य लिखिए।
  2. कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत और कार्य क्या हैं?
  3. मुख्य खनिज और सूक्ष्म खनिज (Macro and Micro minerals) में अंतर स्पष्ट कीजिए और उदाहरण दीजिए।
  4. संतुलित राशन (Balanced Ration) किसे कहते हैं? एक आदर्श राशन की चार विशेषताएं लिखिए।

(C) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type):

  1. पशु आहार के मुख्य अवयव कौन-कौन से हैं? पशु शरीर में ‘प्रोटीन’ और ‘खनिज लवणों’ के कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  2. विटामिन क्या हैं? पशु आहार में विटामिन A, D और E की कमी से होने वाले रोगों और उनके कार्यों का सविस्तार वर्णन कीजिए।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

प्रश्न 1: क्रूड फाइबर (Crude Fiber) क्या है और यह जुगाली करने वाले पशुओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: चारे का वह कठोर भाग जो आसानी से नहीं पचता (जैसे सेल्युलोज और लिग्निन), क्रूड फाइबर कहलाता है। जुगाली करने वाले पशु (गाय, भैंस) अपने रुमेन में उपस्थित जीवाणुओं की मदद से इसे पचा लेते हैं। यह उनके पेट को भरने, जुगाली करने (Rumination) को प्रेरित करने और दूध में वसा (Milk Fat) की मात्रा बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न 2: जुगाली करने वाले पशुओं (गाय/भैंस) के आहार में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स (Vitamin B-complex) अलग से मिलाने की आवश्यकता क्यों नहीं होती है?

उत्तर: गाय और भैंस जैसे जुगाली करने वाले पशुओं के आमाशय के प्रथम भाग (रुमेन / Rumen) में करोड़ों की संख्या में मित्र जीवाणु (Beneficial Bacteria) और प्रोटोजोआ पाए जाते हैं। ये सूक्ष्मजीव चारे के किण्वन (Fermentation) के दौरान विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और विटामिन C का निर्माण स्वयं कर लेते हैं। इसलिए इन्हें आहार में बाहर से देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

प्रश्न 3: पशु आहार में ‘दाना’ (Concentrate) और ‘चारा’ (Roughage) में क्या अंतर है?

उत्तर: दाना (Concentrate) वह आहार है जिसमें नमी और फाइबर (Crude Fiber) 18% से कम होता है, लेकिन इसमें ऊर्जा और प्रोटीन बहुत अधिक होता है (जैसे- मक्का, खली, चूरी)। चारा (Roughage) वह आहार है जिसमें फाइबर 18% से अधिक होता है और ऊर्जा कम होती है, इसका मुख्य काम पशु का पेट भरना है (जैसे- भूसा, हरा चारा)।

प्रश्न 4: गाभिन (Pregnant) पशुओं के आहार में प्रोटीन की मात्रा क्यों बढ़ा देनी चाहिए?

उत्तर: गाभिन पशुओं को न केवल अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए, बल्कि गर्भ (Uterus) में पल रहे बच्चे (Fetus) के शारीरिक अंगों, हड्डियों और मांसपेशियों के तेजी से विकास के लिए अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता होती है। यदि प्रोटीन कम दिया जाएगा, तो बच्चा कमजोर पैदा होगा और पशु के अगले ब्यांत में दूध उत्पादन गिर जाएगा।