Fish Feed and Nutrition : MP Board कक्षा 12 पशुपालन इकाई 7 मत्स्य पालन प्रबंध: मछलियों का आहार, प्राकृतिक व पूरक आहार, आहार की आदतें, आहार देने की विधि, महत्वपूर्ण प्रश्न और FAQs सरल हिंदी में।
परिचय (Introduction)
मत्स्य पालन (Fish Farming) कम जगह, कम पूँजी और अच्छे मुनाफ़े वाला व्यवसाय है। तालाब में पल रही मछली तेज़ी से बढ़े और अधिक उत्पादन दे, यह मुख्यतः सही आहार प्रबंधन पर निर्भर करता है। मछली पालन के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा आहार पर ही जाता है, इसलिए यह विषय परीक्षा और व्यवहार दोनों में महत्वपूर्ण है।
MP Board कक्षा 12 के कृषि वर्ग में इकाई 7: मत्स्य पालन प्रबंध के अंतर्गत “मछलियों का आहार” एक प्रमुख पाठ है। इसमें प्राकृतिक आहार, कृत्रिम (पूरक) आहार, मछलियों की भोजन-आदतें, आहार देने की विधि और सावधानियाँ पढ़ी जाती हैं। इस लेख में इन सभी बिंदुओं को परीक्षा की दृष्टि से क्रमबद्ध ढंग से समझाया गया है।

भारतीय मेजर कार्प मछलियाँ – कतला, रोहू और मृगल)
1. मछलियों के आहार का अर्थ (Meaning of Fish Feed)
मछली जो भी भोजन ग्रहण करती है, उसे मछली का आहार कहते हैं। इसका उपयोग शरीर की वृद्धि, ऊर्जा, मरम्मत और प्रजनन के लिए होता है।
मछलियों का आहार दो स्रोतों से मिलता है:
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राकृतिक आहार (Natural Feed) | तालाब में स्वयं उत्पन्न होने वाला भोजन | प्लवक (Plankton), शैवाल, कीड़े |
| कृत्रिम / पूरक आहार (Artificial / Supplementary Feed) | मनुष्य द्वारा बाहर से दिया जाने वाला भोजन | चावल की भूसी, खली, मछली चूर्ण |
2. प्राकृतिक आहार (Natural Food of Fish)
अर्थ
तालाब के पानी और तल में स्वतः उत्पन्न होने वाले जीव-जंतु और पौधे, जिन्हें मछलियाँ खाती हैं, प्राकृतिक आहार कहलाते हैं। स्वस्थ तालाब में यह आहार पर्याप्त मात्रा में तैयार होता है, और इसे बढ़ाने के लिए खाद-उर्वरक डाले जाते हैं।
प्राकृतिक आहार के प्रमुख घटक
(क) प्लवक (Plankton): पानी में तैरने वाले सूक्ष्म जीव। ये दो प्रकार के होते हैं:
| प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| पादप प्लवक (Phytoplankton) | सूक्ष्म पौधे जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं | शैवाल, डायटम, नीले-हरे शैवाल |
| जंतु प्लवक (Zooplankton) | सूक्ष्म जंतु | रोटिफर, कोपेपोड, क्लैडोसेरा |
(ख) तलीय जीव (Benthos): तालाब की तली में रहने वाले कीड़े, घोंघे, केंचुए जैसे जीव।
(ग) जलीय पौधे और वनस्पति: पानी में उगने वाले खरपतवार, काई और सड़ती वनस्पति।
(घ) कीड़े और उनके लार्वा: मच्छर के लार्वा, कीट आदि।
(ङ) अपरद (Detritus): सड़ते-गलते पौधों और जंतुओं के कण।
(चित्र-2 सुझाव: ऊपर दिखाया गया “प्लवक/Plankton” का चित्र यहाँ लगाएँ। Alt text: पादप प्लवक और जंतु प्लवक – मछलियों का प्राकृतिक आहार)
प्राकृतिक आहार बढ़ाने के उपाय (Pond Fertilization)
| उपाय | उद्देश्य |
|---|---|
| गोबर / जैविक खाद डालना | प्लवक की वृद्धि के लिए पोषक तत्व देना |
| चूना (Lime) डालना | पानी का pH संतुलित करना और जीवाणु-रोग कम करना |
| रासायनिक उर्वरक (जैसे सुपर फॉस्फेट, यूरिया) | नाइट्रोजन, फास्फोरस की पूर्ति |
खाद की मात्रा तालाब के आकार, मिट्टी और स्थानीय सलाह के अनुसार रखें। अपनी पाठ्यपुस्तक में दी मात्रा ही उत्तर में लिखें।
3. कृत्रिम या पूरक आहार (Artificial / Supplementary Feed)
अर्थ
जब तालाब में मछलियों की संख्या अधिक हो या प्राकृतिक आहार उनकी वृद्धि के लिए कम पड़े, तब बाहर से दिया जाने वाला आहार पूरक आहार कहलाता है।
आवश्यकता
- प्राकृतिक आहार अकेला अधिक घनत्व में पर्याप्त नहीं होता।
- तेज़ वृद्धि और अधिक उत्पादन के लिए।
- मछलियाँ कम समय में बाज़ार योग्य आकार तक पहुँचें।
- पोषण की कमी से होने वाले रोगों से बचाव।
पूरक आहार के सामान्य स्रोत
| आहार | मुख्य पोषक तत्व |
|---|---|
| चावल की भूसी / कना (Rice Bran) | कार्बोहाइड्रेट, कुछ प्रोटीन, वसा |
| गेहूँ का चोकर (Wheat Bran) | कार्बोहाइड्रेट, रेशा |
| सरसों की खली (Mustard Oil Cake) | प्रोटीन |
| मूँगफली की खली (Groundnut Cake) | प्रोटीन |
| तिल/सोयाबीन की खली | प्रोटीन |
| मछली चूर्ण (Fish Meal) | उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन |
| रेशम कीट की प्यूपा / अन्य पशु-प्रोटीन | प्रोटीन |
| हरा चारा (जलकुंभी, हाइड्रिला, नेपियर, बरसीम) | शाकाहारी मछलियों के लिए (ग्रास कार्प) |
सामान्य मिश्रण
व्यवहार में चावल की भूसी और सरसों की खली को बराबर अनुपात (1:1) में मिलाकर दिया जाना बहुत प्रचलित है। इसे कई बार पानी के साथ गूँधकर गोले बनाकर दिया जाता है। परीक्षा में अपनी पाठ्यपुस्तक के अनुसार अनुपात लिखें।
(चित्र-3 सुझाव: ऊपर दिखाया गया “फीडिंग/Pond feeding” वाला चित्र यहाँ लगाएँ। Alt text: तालाब में मछलियों को पूरक आहार देना)
4. मछलियों की भोजन-आदतें (Feeding Habits of Fishes)
मछलियाँ अपने भोजन के प्रकार और रहने की जगह के अनुसार अलग-अलग वर्गों में बाँटी जाती हैं।
(अ) भोजन के प्रकार के आधार पर
| वर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| शाकाहारी (Herbivorous) | पौधे और वनस्पति खाने वाली | ग्रास कार्प |
| मांसाहारी (Carnivorous) | अन्य जंतुओं को खाने वाली | मांगुर (कुछ), सिंघी, सौल/सोल (Murrel) |
| सर्वाहारी (Omnivorous) | पौधे और जंतु दोनों खाने वाली | कॉमन कार्प, रोहू (काफ़ी हद तक) |
| प्लवक भक्षी (Planktivorous) | मुख्यतः प्लवक खाने वाली | कतला, सिल्वर कार्प |
| अपरद भक्षी (Detritivorous) | सड़े-गले पदार्थ खाने वाली | मृगल (काफ़ी हद तक) |
(ब) तालाब में निवास-स्थान के आधार पर (Feeding Zone)
भारतीय मेजर कार्प मछलियाँ तालाब की अलग-अलग गहराइयों में भोजन करती हैं, इसलिए मिश्रित मत्स्य पालन (Composite Fish Culture) में एक साथ पाली जा सकती हैं।
| आहार क्षेत्र | मछली | आहार |
|---|---|---|
| सतह (Surface feeder) | कतला (Catla) | जंतु प्लवक |
| सतह (Surface feeder) | सिल्वर कार्प | पादप प्लवक |
| मध्य जल / स्तंभ (Column feeder) | रोहू (Rohu) | प्लवक, सड़ती वनस्पति और तल व सतह दोनों से भोजन |
| तल (Bottom feeder) | मृगल (Mrigal) | सड़ा-गला पदार्थ, अपरद, तलीय जीव |
| तल (Bottom feeder) | कॉमन कार्प | कीड़े, घोंघे, अपरद (सर्वाहारी) |
| वनस्पति भक्षी | ग्रास कार्प | जलीय पौधे, हरा चारा |
याद रखने की ट्रिक: सतह पर कतला, बीच में रोहू, तल में मृगल। इस तरह तालाब के सभी स्तरों का भोजन उपयोग हो जाता है और उत्पादन बढ़ता है।
5. मछलियों के आहार के पोषक तत्व (Nutrients in Fish Feed)
संतुलित आहार में ये पोषक तत्व सही अनुपात में होने चाहिए:
| पोषक तत्व | कार्य | स्रोत |
|---|---|---|
| प्रोटीन (Protein) | शरीर की वृद्धि, मरम्मत, ऊतक निर्माण | खली, मछली चूर्ण, सोयाबीन |
| कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) | ऊर्जा का सस्ता स्रोत | चावल की भूसी, चोकर |
| वसा (Fat/Lipid) | ऊर्जा, आवश्यक वसा अम्ल | तेल, मछली का तेल, खली में उपस्थित वसा |
| विटामिन (Vitamins) | रोग प्रतिरोधक क्षमता, चयापचय | हरा चारा, विटामिन मिश्रण |
| खनिज (Minerals) | हड्डी, शल्क और शरीर-क्रियाओं के लिए | कैल्शियम, फास्फोरस, खनिज मिश्रण |
| जल (Water) | सभी जैविक क्रियाओं के लिए | तालाब का पानी |
कार्प मछलियों के आहार में प्रोटीन की मात्रा सामान्यतः मध्यम (लगभग एक-चौथाई से एक-तिहाई तक) रखी जाती है। सटीक प्रतिशत अपनी पुस्तक से मिला लें।
6. आहार देने की विधियाँ (Methods of Feeding)
| विधि | विवरण |
|---|---|
| छिड़काव विधि (Broadcasting) | आहार को तालाब के किनारे या कई स्थानों पर पानी में बिखेर देना |
| थैला विधि (Bag Feeding) | आहार थैले में भरकर तालाब में लटकाना या डुबोना, मछलियाँ धीरे-धीरे खाती हैं |
| गोला/गूँधी हुई विधि (Dough Balls) | आहार को गूँधकर गोले बनाकर निश्चित स्थानों पर रखना |
| फीडिंग ट्रे (Feeding Tray) | निश्चित स्थानों पर रखी ट्रे में आहार देना, ताकि खाई गई मात्रा देखी जा सके |
| स्वचालित आहार यंत्र (Automatic Feeder) | मशीन द्वारा निश्चित समय पर आहार देना (बड़े फ़ार्म में) |
आहार देने का नियम
- आहार प्रतिदिन एक निश्चित समय और स्थान पर दें, ताकि मछलियाँ आदी हो जाएँ।
- सामान्यतः मछलियों के शरीर भार का लगभग 2 से 5 प्रतिशत प्रतिदिन आहार दिया जाता है (मात्रा आयु, तापमान और घनत्व के अनुसार बदलती है)।
- मछलियों का वज़न बढ़ने पर आहार की मात्रा समय-समय पर समायोजित करें।
- आहार सुबह (और आवश्यकता हो तो शाम) को दें।
7. आहार प्रबंधन में सावधानियाँ (Precautions in Feeding)
- अधिक आहार न दें। बचा आहार सड़कर पानी को प्रदूषित करता है और ऑक्सीजन घटाता है।
- आहार की गुणवत्ता ठीक रखें। फफूँद लगा या सड़ा आहार न दें।
- बादल/कम ऑक्सीजन वाले दिनों में आहार की मात्रा कम करें।
- पानी का तापमान, pH और ऑक्सीजन नियमित जाँचें।
- आहार का रिकॉर्ड रखें (कितना दिया, कब दिया)।
- रोगी मछलियों में आहार की मात्रा घटा दें।
- आहार सूखी और साफ़ जगह पर रखें।
- समय-समय पर नमूना मछली पकड़कर वृद्धि जाँचें।
8. आहार से जुड़ी महत्वपूर्ण शब्दावली (Important Terms)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्लवक (Plankton) | पानी में तैरने वाले सूक्ष्म पौधे और जंतु |
| पादप प्लवक | Phytoplankton – सूक्ष्म शैवाल |
| जंतु प्लवक | Zooplankton – सूक्ष्म जंतु |
| अपरद (Detritus) | सड़े-गले जैविक कण |
| पूरक आहार | बाहर से दिया जाने वाला अतिरिक्त आहार |
| आहार रूपांतरण अनुपात (FCR) | मछली का 1 किग्रा वज़न बढ़ाने में लगा आहार |
| मिश्रित मत्स्य पालन | एक तालाब में अलग-अलग आहार-क्षेत्र वाली कई मछलियाँ पालना |
9. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Exam Important Points)
- मछली के आहार के दो स्रोत: प्राकृतिक और कृत्रिम/पूरक।
- प्राकृतिक आहार का मुख्य घटक प्लवक है (पादप प्लवक + जंतु प्लवक)।
- पूरक आहार का लोकप्रिय मिश्रण: चावल की भूसी + सरसों की खली।
- कतला = सतह, रोहू = मध्य जल, मृगल = तल में भोजन करने वाली मछली।
- ग्रास कार्प शाकाहारी है और कॉमन कार्प सर्वाहारी।
- अधिक आहार देने से पानी प्रदूषित और ऑक्सीजन कम होती है।
- आहार प्रतिदिन निश्चित समय व स्थान पर देना चाहिए।
संभावित प्रश्न (Expected Questions)
अति लघु उत्तरीय (1 अंक):
- प्लवक किसे कहते हैं?
- कतला मछली किस आहार-क्षेत्र की मछली है?
- पूरक आहार का एक उदाहरण दीजिए।
लघु उत्तरीय (2-3 अंक):
- मछलियों के प्राकृतिक आहार के नाम लिखिए।
- पूरक आहार की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
- आहार देने की कोई दो विधियाँ लिखिए।
दीर्घ उत्तरीय (4-5 अंक):
- मछलियों के आहार का वर्णन कीजिए तथा प्राकृतिक और कृत्रिम आहार में अंतर बताइए।
- मछलियों की भोजन-आदतों को उदाहरण सहित समझाइए।
- मछलियों को आहार देते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
10. प्राकृतिक और कृत्रिम आहार में अंतर (Difference)
| आधार | प्राकृतिक आहार | कृत्रिम / पूरक आहार |
|---|---|---|
| स्रोत | तालाब में स्वयं उत्पन्न | बाहर से दिया गया |
| लागत | कम (खाद पर खर्च) | अधिक |
| उदाहरण | प्लवक, कीड़े, अपरद | खली, भूसी, मछली चूर्ण |
| पोषण | सीमित मात्रा में | नियंत्रित और अधिक |
| उत्पादन | सामान्य | अधिक |
| प्रबंधन | खाद, चूना डालना | मात्रा, समय और विधि तय करना |
11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1. मछलियों का आहार क्या है?
उत्तर: मछलियाँ जो भोजन अपनी वृद्धि, ऊर्जा और जीवन-क्रियाओं के लिए ग्रहण करती हैं, उसे मछलियों का आहार कहते हैं। यह प्राकृतिक और कृत्रिम दो प्रकार का होता है।
प्रश्न 2. मछलियों का प्राकृतिक आहार क्या है?
उत्तर: तालाब में स्वयं उत्पन्न होने वाले पादप प्लवक, जंतु प्लवक, तलीय जीव, जलीय पौधे, कीड़े और अपरद मछलियों का प्राकृतिक आहार हैं।
प्रश्न 3. पूरक आहार की ज़रूरत क्यों पड़ती है?
उत्तर: जब मछलियों की संख्या अधिक हो और प्राकृतिक आहार कम पड़े, तब तेज़ वृद्धि और अधिक उत्पादन के लिए बाहर से आहार देना ज़रूरी होता है।
प्रश्न 4. पूरक आहार में कौन-कौन सी चीज़ें दी जाती हैं?
उत्तर: चावल की भूसी, गेहूँ का चोकर, सरसों व मूँगफली की खली, मछली चूर्ण और शाकाहारी मछलियों के लिए हरा चारा।
प्रश्न 5. कतला, रोहू और मृगल में आहार के आधार पर क्या अंतर है?
उत्तर: कतला सतह पर जंतु प्लवक खाती है, रोहू मध्य जल में भोजन करती है, और मृगल तल में सड़ा-गला पदार्थ व तलीय जीव खाती है।
प्रश्न 6. ग्रास कार्प क्या खाती है?
उत्तर: ग्रास कार्प शाकाहारी मछली है, जो जलीय पौधे और हरा चारा खाती है।
प्रश्न 7. मछलियों को दिन में कितना आहार देना चाहिए?
उत्तर: सामान्यतः मछलियों के शरीर भार का लगभग 2 से 5 प्रतिशत, जो आयु, तापमान और तालाब की स्थिति के अनुसार बदल सकता है। सटीक मात्रा अपनी पुस्तक या स्थानीय मत्स्य विभाग से मिला लें।
प्रश्न 8. अधिक आहार देने से क्या हानि होती है?
उत्तर: बचा हुआ आहार सड़कर पानी को प्रदूषित करता है, घुली ऑक्सीजन कम करता है और मछलियों में रोग व मृत्यु का कारण बन सकता है।
प्रश्न 9. मिश्रित मत्स्य पालन में अलग-अलग मछलियाँ क्यों पाली जाती हैं?
उत्तर: क्योंकि वे तालाब के अलग-अलग स्तरों पर अलग भोजन करती हैं, इसलिए आपस में भोजन की प्रतिस्पर्धा कम होती है और पूरे तालाब का भोजन उपयोग होने से उत्पादन बढ़ता है।
12. निष्कर्ष (Conclusion)
मछलियों का आहार मत्स्य पालन की सफलता की कुंजी है। प्राकृतिक आहार तालाब में खाद-चूना डालकर बढ़ाया जाता है, और पूरक आहार तेज़ वृद्धि के लिए दिया जाता है। कतला, रोहू और मृगल जैसी मछलियाँ अलग-अलग स्तर पर भोजन करती हैं, इसलिए मिश्रित मत्स्य पालन लाभदायक रहता है। साथ ही आहार की मात्रा, समय और गुणवत्ता का ध्यान रखना ज़रूरी है, वरना पानी बिगड़ता है और नुकसान होता है।
परीक्षा के लिए इन बातों का अभ्यास करें:
- प्राकृतिक और कृत्रिम आहार की तालिका बनाना।
- कतला-रोहू-मृगल के आहार-क्षेत्र याद करना।
- आहार देने की विधियाँ और सावधानियाँ बिंदुवार लिखना।