MP Board Class 12 Major Insecticides and Their Application Methods प्रमुख कीटनाशी रसायनों की प्रारंभिक जानकारी और प्रयोग विधि

Major Insecticides and Their Application Methods : एमपी बोर्ड कक्षा 12 कृषि विज्ञान (MP Board Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए ‘इकाई 6: पौध संरक्षण – II’ (Unit 6: Plant Protection – II) के अंतर्गत ‘प्रमुख कीटनाशी रसायनों की प्रारंभिक जानकारी और उनकी प्रयोग विधियों’ (Major Insecticides and Their Application Methods) पर एक अत्यंत विस्तृत और विश्लेषणात्मक लेख। इस लेख में कीटनाशकों का वर्गीकरण, प्रमुख रसायनों के गुण, छिड़काव व भुरकाव की विधियाँ और आवश्यक सावधानियों को द्विभाषी (Bilingual) रूप में स्पष्ट किया गया है, जो बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है।

इकाई 6: पौध संरक्षण – II : प्रमुख कीटनाशी रसायनों की प्रारंभिक जानकारी और प्रयोग विधि (Major Insecticides and Their Application Methods) – कक्षा 12 कृषि विज्ञान

1. प्रस्तावना (Introduction)

भारतीय कृषि (Indian Agriculture) में फसलों को हानिकारक कीटों (Harmful Insects) से बचाने के लिए विभिन्न प्रकार की विधियां अपनाई जाती हैं। जैसा कि हमने पिछले अध्याय में पढ़ा, ‘एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन’ (IPM) में सस्य, भौतिक और जैविक नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाती है। परंतु, जब कीटों का प्रकोप ‘आर्थिक क्षति स्तर’ (Economic Threshold Level – ETL) को पार कर जाता है और फसल नष्ट होने की कगार पर होती है, तब फसल को बचाने का एकमात्र और सबसे त्वरित उपाय रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control) ही होता है।

कृषि विज्ञान में जिन जहरीले रासायनिक पदार्थों (Toxic Chemicals) का उपयोग कीटों को मारने या भगाने के लिए किया जाता है, उन्हें कीटनाशक या कीटनाशी (Insecticides) कहते हैं। कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के पाठ्यक्रम में कृषि छात्रों के लिए बाजार में उपलब्ध प्रमुख कीटनाशकों की पहचान, उनके कार्य करने का तरीका (Mode of action), और उनके प्रयोग की सही विधियों (Application methods) का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। इस लेख में हम इसी विषय का वैज्ञानिक और व्यावहारिक (Scientific and Practical) अध्ययन करेंगे।

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2. कीटनाशकों का वर्गीकरण (Classification of Insecticides)

कीटों के शरीर में प्रवेश करने के तरीके (Mode of Entry) के आधार पर कीटनाशकों को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा गया है:

  1. आमाशय विष (Stomach Poison):ये रसायन कीटों के भोजन (पत्तियों या तने) के साथ उनके पेट (Stomach) में जाते हैं और पाचन तंत्र (Digestive System) को नष्ट कर देते हैं।
    • उपयोग: पत्तियों को चबाने और काटने वाले कीटों (जैसे टिड्डी, इल्लियां/Caterpillars) के लिए।
  2. संपर्क विष (Contact Poison):ये कीटनाशक कीट के शरीर की त्वचा (Cuticle) के सीधे संपर्क (Direct contact) में आने पर ही असर करते हैं। ये कीट की त्वचा को भेदकर उसके तंत्रिका तंत्र (Nervous system) को लकवाग्रस्त (Paralyze) कर देते हैं।
    • उपयोग: फुदकने वाले, उड़ने वाले और चबाने वाले कीटों के लिए।
  3. सर्वांगी विष या दैहिक कीटनाशक (Systemic Poison):इन रसायनों को जब पौधे पर छिड़का जाता है, तो ये पौधे के ऊतकों द्वारा अवशोषित (Absorbed) होकर पौधे के रस (Plant sap) में फैल जाते हैं। जब कीट रस चूसता है, तो विष उसके शरीर में जाकर उसे मार देता है।
    • उपयोग: रस चूसने वाले कीटों (जैसे माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स) के लिए।
  4. धूमन रसायन (Fumigants):ये ऐसे रसायन होते हैं जो हवा के संपर्क में आकर जहरीली गैस (Poisonous Gas) बनाते हैं, जो कीटों के श्वसन तंत्र (Respiratory system) में जाकर उन्हें मार देती है।
    • उपयोग: भंडारित अनाज (Stored grains) के कीटों के लिए।

3. प्रमुख कीटनाशी रसायनों की प्रारंभिक जानकारी (Introduction to Major Insecticides)

कृषि में उपयोग होने वाले कुछ प्रमुख और अत्यंत महत्वपूर्ण कीटनाशक निम्नलिखित हैं:

3.1 क्लोरपाइरीफॉस (Chlorpyrifos)

  • प्रकृति: यह एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम (Broad-spectrum), संपर्क और आमाशय विष (Contact and Stomach poison) है। यह ऑर्गनोफॉस्फेट (Organophosphate) समूह का कीटनाशक है।
  • उपलब्धता: यह बाजार में 20 EC (Emulsifiable Concentrate) और डस्ट (Dust/चूर्ण) के रूप में मिलता है।
  • उपयोग: यह दीमक (Termites) और मिट्टी के अन्य कीटों (White grubs) के नियंत्रण के लिए सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी रसायन है। इसका उपयोग बीजोपचार (Seed treatment) और खड़ी फसल में सिंचाई के पानी के साथ किया जाता है।

3.2 मैलाथियान (Malathion)

  • प्रकृति: यह भी एक ऑर्गनोफॉस्फेट समूह का संपर्क और आमाशय विष है।
  • उपलब्धता: यह पाउडर (5% Dust) और तरल (50 EC) दोनों रूपों में मिलता है।
  • उपयोग: यह स्तनधारियों (मनुष्यों और जानवरों) के लिए अपेक्षाकृत कम जहरीला (Less toxic) होता है, इसलिए इसका उपयोग सब्जियों और घरेलू कीटों को मारने में बहुत किया जाता है। इसका उपयोग माहू (Aphids), गंधी बग (Gundhi bug) और टिड्डियों के नियंत्रण में होता है।

3.3 डाइमेथोएट (Dimethoate / Rogor)

  • प्रकृति: यह एक अत्यंत लोकप्रिय सर्वांगी कीटनाशक (Systemic Insecticide) है।
  • उपलब्धता: यह बाजार में ‘रोगोर’ (Rogor) नाम से 30 EC फॉर्मूलेशन में मिलता है।
  • उपयोग: पौधे के अंदर फैलने के गुण के कारण यह रस चूसने वाले कीटों (Sucking pests) जैसे— माहू (Aphid), सफेद मक्खी (Whitefly), थ्रिप्स और जैसिड को मारने के लिए बहुत ही कारगर दवा है।

3.4 इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid)

  • प्रकृति: यह नियोनिकोटिनोइड (Neonicotinoid) समूह का एक अत्यधिक आधुनिक और शक्तिशाली सर्वांगी कीटनाशक (Systemic Insecticide) है।
  • उपलब्धता: यह 17.8 SL (Soluble Liquid) या 70 WS फॉर्म में मिलता है।
  • उपयोग: इसकी बहुत ही कम मात्रा (1 मिली / 3 लीटर पानी) की आवश्यकता होती है। यह बीजोपचार (Seed treatment) और कपास, टमाटर, सरसों में रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए सर्वोत्तम है।

3.5 क्विनालफॉस (Quinalphos)

  • प्रकृति: यह एक संपर्क और आमाशय विष है।
  • उपयोग: इसका उपयोग कपास की सूंडी (Bollworm), चने की फली छेदक (Gram pod borer) और तना छेदक कीटों के नियंत्रण के लिए किया जाता है। यह बाजार में 25 EC या 1.5% डस्ट के रूप में उपलब्ध है।

3.6 एल्मुनियम फॉस्फाइड (Aluminium Phosphide)

  • प्रकृति: यह एक धूमन रसायन (Fumigant) है।
  • उपलब्धता: यह ‘सल्फास’ (Sulphas) या ‘सेल्फॉस’ (Celphos) के नाम से टेबलेट (Tablets/गोलियों) के रूप में मिलता है।
  • उपयोग: इसका उपयोग केवल बंद कमरों या गोदामों (Warehouses) में भंडारित अनाज (जैसे गेहूं, चना) के कीटों (घुन, खपरा बीटल) को मारने के लिए किया जाता है। यह हवा की नमी से क्रिया करके जहरीली ‘फॉस्फीन गैस’ (Phosphine gas) बनाता है।

4. कीटनाशकों के प्रयोग की प्रमुख विधियाँ (Major Methods of Application of Insecticides)

कीटनाशकों का सही लाभ तभी मिलता है जब उन्हें सही विधि और सही समय पर प्रयोग किया जाए। कीटनाशक प्रयोग की मुख्य विधियां निम्नलिखित हैं:

4.1 भुरकाव (Dusting)

इस विधि में कीटनाशक के सूखे पाउडर (Dust formulation – जैसे मैलाथियान 5% डस्ट) को डस्टर मशीन (Duster/Rotary Duster) या मलमल के कपड़े की थैली की मदद से फसल की पत्तियों पर भुरका (Blowing) जाता है।

  • सही समय: भुरकाव हमेशा सुबह के समय (Early morning) करना चाहिए। सुबह के समय पत्तियों पर ओस (Dew) होती है, जिससे पाउडर पत्तियों पर अच्छी तरह चिपक जाता है और तेज हवा न होने के कारण उड़ता भी नहीं है।

4.2 छिड़काव (Spraying)

यह कीटनाशक प्रयोग की सबसे प्रचलित और प्रभावी विधि है। इसमें तरल रसायनों (Liquid – EC) या घुलनशील पाउडर (WP) को पानी में मिलाकर एक घोल (Solution) तैयार किया जाता है और उसे स्प्रेयर मशीन (Knapsack Sprayer या Tractor Mounted Sprayer) की मदद से फसल पर बारीक बूंदों (Mist) के रूप में छिड़का जाता है।

  • सही समय: छिड़काव हमेशा शाम के समय (Late afternoon/Evening) करना चाहिए। तेज धूप में दवा वाष्पीकृत (Evaporate) हो सकती है या पत्तियों को जला सकती है (Phytotoxicity)।

4.3 बीजोपचार (Seed Treatment)

बुवाई से पहले बीजों को कीटनाशक रसायनों की परत से ढकने की क्रिया को बीजोपचार कहते हैं।

  • लाभ: इससे अंकुरित होते हुए बीजों और छोटे पौधों की मिट्टी के अंदर रहने वाले कीटों (जैसे दीमक, कटवर्म) और रस चूसने वाले कीटों से रक्षा होती है। इसके लिए क्लोरपाइरीफॉस या इमिडाक्लोप्रिड का उपयोग किया जाता है।

4.4 मृदा उपचार (Soil Application)

मिट्टी में रहने वाले कीटों (Soil pests – सफेद लट, दीमक, निमेटोड) को नष्ट करने के लिए दानेदार कीटनाशकों (Granular Insecticides – जैसे कार्बोफ्यूरान 3G या फोरेट 10G) को बुवाई से पहले या सिंचाई के साथ सीधे मिट्टी में मिला दिया जाता है।

4.5 धूमन (Fumigation)

यह विधि भंडारित अनाज के कीटों (Stored grain pests) और चूहों को मारने के लिए बंद स्थानों पर प्रयोग की जाती है। इसमें गैस बनाने वाले रसायनों (जैसे एल्मुनियम फॉस्फाइड) का प्रयोग किया जाता है। ध्यान रहे, धूमन के लिए गोदाम का एयर-टाइट (Air-tight) होना आवश्यक है, ताकि गैस बाहर न निकल सके।

5. कीटनाशकों का प्रयोग करते समय आवश्यक सावधानियां (Precautions during the application of Insecticides)

कीटनाशक मनुष्य और पालतू जानवरों के लिए भी अत्यंत जहरीले होते हैं। अतः इनके प्रयोग में निम्नलिखित सावधानियां (Safety measures) बरतना अनिवार्य है:

  1. सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग (Use of Protective Gear): छिड़काव करते समय किसान को अपने मुंह पर मास्क (Mask), आंखों पर चश्मा (Goggles), और हाथों में रबर के दस्ताने (Gloves) अवश्य पहनने चाहिए।
  2. हवा की दिशा का ध्यान (Wind Direction): कीटनाशक का छिड़काव हमेशा हवा की दिशा में (In the direction of wind) करना चाहिए। विपरीत दिशा में छिड़कने से दवा उड़कर छिड़काव करने वाले व्यक्ति की आंखों और शरीर पर गिर सकती है।
  3. सही समय का चुनाव (Right Time of Application): तेज धूप या बारिश के समय छिड़काव नहीं करना चाहिए। भुरकाव सुबह के समय और छिड़काव शाम के समय करना सर्वोत्तम होता है।
  4. डिब्बों का सुरक्षित निपटान (Safe Disposal of Containers): खाली कीटनाशक की बोतलों या डिब्बों को कभी भी नदी, तालाब या कुएं के पास नहीं फेंकना चाहिए। उन्हें तोड़कर जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर गाड़ देना चाहिए।
  5. खाने-पीने पर रोक (No Eating/Smoking): दवा छिड़कते समय कुछ भी खाना-पीना, गुटखा चबाना या बीड़ी-सिगरेट (Smoking) नहीं पीना चाहिए। छिड़काव के बाद साबुन से अच्छी तरह नहाना चाहिए।
  6. भंडारण (Safe Storage): कीटनाशकों को बच्चों और जानवरों की पहुंच से दूर, ताले में बंद (Under lock and key) और खाद्य पदार्थों से अलग रखना चाहिए।

6. निष्कर्ष (Conclusion)

आधुनिक कृषि में कीटनाशक रसायन (Insecticides) फसल सुरक्षा के लिए एक ब्रह्मास्त्र की तरह हैं, जो संकट के समय तुरंत राहत प्रदान करते हैं। कक्षा 12 के कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए बाजार में उपलब्ध इन रसायनों की प्रकृति (संपर्क, आमाशय, या सर्वांगी) और उनकी सही प्रयोग विधि (छिड़काव, भुरकाव, धूमन) को समझना एक कुशल कृषक और कृषि अधिकारी बनने की दिशा में पहला कदम है।

हालांकि, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि कीटनाशकों का अंधाधुंध और गलत प्रयोग पर्यावरण प्रदूषण (Environmental pollution), कीटों में प्रतिरोधक क्षमता (Pest resistance) और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है। इसलिए, रसायनों का उपयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में, सही मात्रा (Recommended dose) में और पूरी सुरक्षा सावधानियों के साथ ‘एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन’ (IPM) के तहत ही किया जाना चाहिए।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

प्रश्न 1: ‘सर्वांगी कीटनाशक’ (Systemic Insecticide) क्या है? एक उदाहरण दें।

उत्तर: सर्वांगी कीटनाशक वे रसायन हैं जो पौधे की पत्तियों या जड़ों द्वारा सोख लिए जाते हैं और पूरे पौधे के सिस्टम (रस) में फैल जाते हैं। जब रस चूसने वाले कीट पौधे का रस चूसते हैं, तो विष उनके अंदर जाकर उन्हें मार देता है। उदाहरण: डाइमेथोएट (रोगोर) और इमिडाक्लोप्रिड।

प्रश्न 2: दीमक (Termite) के नियंत्रण के लिए किस कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर: दीमक के नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफॉस (Chlorpyrifos 20 EC) नामक कीटनाशक सबसे अधिक प्रभावी है। इसका उपयोग बीजोपचार के लिए या खड़ी फसल में सिंचाई के पानी के साथ किया जाता है।

प्रश्न 3: भुरकाव (Dusting) और छिड़काव (Spraying) करने का सबसे सही समय क्या है?

उत्तर:

  • भुरकाव (Dusting): सुबह के समय (जब पत्तियों पर ओस हो और हवा शांत हो) किया जाना चाहिए ताकि पाउडर पत्तियों पर चिपक जाए।
  • छिड़काव (Spraying): शाम के समय (Late afternoon) किया जाना चाहिए ताकि तेज धूप के कारण दवा वाष्पीकृत (Evaporate) न हो और पौधों को नुकसान (जलने) से बचाया जा सके।

प्रश्न 4: धूमन (Fumigation) विधि का प्रयोग कहाँ और क्यों किया जाता है?

उत्तर: धूमन विधि का प्रयोग मुख्य रूप से बंद कमरों और गोदामों (Warehouses) में भंडारित अनाज (जैसे गेहूं, चना) को घुन और खपरा बीटल जैसे कीटों से बचाने के लिए किया जाता है। इसमें ‘एल्मुनियम फॉस्फाइड’ (सल्फास) का प्रयोग होता है, जो जहरीली ‘फॉस्फीन गैस’ बनाकर कीटों को मार देती है।

प्रश्न 5: कीटनाशकों पर EC और WP लिखा होता है, इसका क्या अर्थ है?

उत्तर:

  • EC (Emulsifiable Concentrate): यह तरल (Liquid) कीटनाशक होता है जो पानी में मिलने पर दूधिया रंग (Milky emulsion) का घोल बनाता है।
  • WP (Wettable Powder): यह सूखे पाउडर के रूप में होता है, जो पानी में घुलनशील होता है और छिड़काव के लिए घोल बनाने के काम आता है।

प्रश्न 6: कीटनाशकों का छिड़काव हमेशा हवा की दिशा में ही क्यों करना चाहिए?

उत्तर: कीटनाशक जहरीले होते हैं। यदि हम हवा की विपरीत दिशा (Against the wind) में छिड़काव करेंगे, तो दवा उड़कर छिड़काव करने वाले व्यक्ति की आंखों, त्वचा और सांस के माध्यम से शरीर में चली जाएगी, जिससे गंभीर जहर फैलने का खतरा (Poisoning) होता है। इसलिए छिड़काव हमेशा हवा की दिशा (In the direction of wind) में करना चाहिए।