MP Board Class 12 Crop Production Complex Fertilizers : कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के छात्रों के लिए जटिल उर्वरक या यौगिक उर्वरक (Complex Fertilizers) पर एक विस्तृत और संपूर्ण लेख। इस लेख में जटिल उर्वरकों की परिभाषा, प्रकार (Types), प्रमुख उदाहरण जैसे DAP, महत्व (Importance), विशेषताएँ (Features), उपयोग (Uses), और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) का गहन अध्ययन किया गया है। यह लेख बोर्ड परीक्षाओं और कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं (Agricultural Competitive Exams) के लिए अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक है।
MP Board Class 12 Crop Production Complex Fertilizers
1. प्रस्तावना (Introduction)
आधुनिक कृषि (Modern Agriculture) में बढ़ती हुई जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए फसल उत्पादन में वृद्धि करना अत्यंत आवश्यक है। फसलों के अधिकतम उत्पादन के लिए मृदा (Soil) में पोषक तत्वों (Nutrients) का सही और संतुलित मात्रा में होना अनिवार्य है। कृषि विज्ञान में उर्वरकों का वर्गीकरण कई प्रकार से किया गया है। इनमें से जटिल उर्वरक (Complex Fertilizers), जिन्हें यौगिक उर्वरक (Compound Fertilizers) भी कहा जाता है, का भारतीय कृषि में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
जब हम बात कक्षा 12 कृषि विज्ञान (Class 12 Agriculture) के पाठ्यक्रम की करते हैं, तो उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Management) एक मुख्य विषय है। पिछले लेख में हमने ‘मिश्रित उर्वरक’ (Mixed Fertilizers) के बारे में पढ़ा था, जो केवल एक भौतिक मिश्रण होता है। इसके विपरीत, जटिल उर्वरक रासायनिक प्रतिक्रियाओं (Chemical Reactions) के परिणामस्वरूप कारखानों में तैयार किए जाते हैं। इस लेख में हम जटिल उर्वरकों के हर पहलू का विस्तार से अध्ययन करेंगे, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2. जटिल उर्वरक क्या है? (What is a Complex Fertilizer?)
जटिल उर्वरक (Complex Fertilizer) वह उर्वरक है जिसमें प्राथमिक पोषक तत्वों (Primary Nutrients)—नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटैशियम (K)—में से कम से कम दो या तीन तत्व रासायनिक रूप से (Chemically) संयुक्त होते हैं।
चूंकि इनका निर्माण कारखानों (Factories) में विभिन्न कच्चे मालों (Raw Materials) के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) कराकर किया जाता है, इसलिए इनके प्रत्येक दाने (Granule) का रासायनिक संगठन (Chemical Composition) बिल्कुल एक समान होता है। इसका अर्थ यह है कि यदि आप जटिल उर्वरक का एक भी दाना (Single Granule) उठाएंगे, तो उसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का वही अनुपात मिलेगा जो पूरे बोरे (Bag) में लिखा हुआ है।
उदाहरण के लिए: डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP – Di-Ammonium Phosphate) एक सबसे प्रसिद्ध जटिल उर्वरक है। इसके प्रत्येक दाने में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस रासायनिक बंधों (Chemical Bonds) द्वारा आपस में जुड़े होते हैं।
3. जटिल उर्वरक और मिश्रित उर्वरक में मूलभूत अंतर (Basic Difference Between Complex and Mixed Fertilizer)
छात्रों को अक्सर इन दोनों में भ्रम होता है।
- मिश्रित उर्वरक (Mixed Fertilizer): यह विभिन्न उर्वरकों का केवल एक भौतिक मिश्रण (Physical Mixture) है। इसे फावड़े से हाथ से भी मिलाया जा सकता है। इसके घटकों को भौतिक रूप से अलग किया जा सकता है।
- जटिल उर्वरक (Complex Fertilizer): यह एक रासायनिक यौगिक (Chemical Compound) है। इसे कारखाने में रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) द्वारा बनाया जाता है। इसके तत्वों को भौतिक रूप से अलग नहीं किया जा सकता।
4. जटिल उर्वरकों के प्रकार (Types of Complex Fertilizers)
जटिल उर्वरकों को उनमें उपस्थित प्राथमिक पोषक तत्वों (Primary Nutrients) की संख्या के आधार पर मुख्य रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है:
(A) अपूर्ण जटिल उर्वरक या द्विक तत्वीय उर्वरक (Incomplete Complex or Binary Fertilizers)
वे जटिल उर्वरक जिनमें तीन प्राथमिक तत्वों (N, P, K) में से केवल दो ही तत्व (Two Elements) रासायनिक रूप से मौजूद होते हैं। भारत में सबसे ज्यादा उपयोग इसी श्रेणी के उर्वरकों का होता है।
- नाइट्रोजन-फॉस्फोरस (NP) उर्वरक: इनमें केवल नाइट्रोजन और फॉस्फोरस होता है।उदाहरण: DAP (18:46:0), MAP (11:52:0)।
- नाइट्रोजन-पोटैशियम (NK) उर्वरक: इनमें नाइट्रोजन और पोटैशियम होता है। (भारत में इनका उपयोग कम होता है)।
- फॉस्फोरस-पोटैशियम (PK) उर्वरक: इनमें फॉस्फोरस और पोटैशियम होता है।
(B) पूर्ण जटिल उर्वरक या त्रिक तत्वीय उर्वरक (Complete Complex or Ternary Fertilizers)
वे जटिल उर्वरक जिनमें तीनों प्राथमिक तत्व—नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटैशियम (K)—एक साथ रासायनिक रूप से संयुक्त होते हैं।
- उदाहरण: NPK 12:32:16, NPK 10:26:26, NPK 15:15:15, NPK 19:19:19 (जल में घुलनशील)।
5. भारत में उपयोग होने वाले प्रमुख जटिल उर्वरक (Major Complex Fertilizers used in India)
कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में अक्सर कुछ प्रमुख जटिल उर्वरकों के बारे में विस्तार से पूछा जाता है। यहाँ कुछ सबसे महत्वपूर्ण जटिल उर्वरकों का वर्णन है:
1. डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP – Di-Ammonium Phosphate)
यह भारत में यूरिया के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला उर्वरक है।
- संगठन (Composition): इसमें 18% नाइट्रोजन (Nitrogen) और 46% फॉस्फोरस (Phosphorus –
) होता है। - विशेषताएँ: इसमें मौजूद पूरी नाइट्रोजन ‘अमोनियाकल रूप’ (Ammoniacal form) में होती है, जो मिट्टी में आसानी से निक्षालित (Leached) नहीं होती। इसका फॉस्फोरस पानी में घुलनशील (Water-soluble) होता है, जिससे पौधे इसे तुरंत ग्रहण कर लेते हैं।
- उपयोग: इसे मुख्य रूप से बुवाई के समय आधार उर्वरक (Basal Dose) के रूप में बीज के नीचे दिया जाता है। यह दलहनी फसलों (Leguminous Crops) के लिए सर्वोत्तम है।
2. मोनो-अमोनियम फॉस्फेट (MAP – Mono-Ammonium Phosphate)
- संगठन (Composition): इसमें 11% नाइट्रोजन और 52% फॉस्फोरस होता है।
- विशेषताएँ: DAP की तुलना में इसमें फॉस्फोरस अधिक होता है और यह मिट्टी को कम क्षारीय (Alkaline) बनाता है। यह अत्यधिक घुलनशील (Highly Soluble) होता है, इसलिए ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) में इसका उपयोग तरल उर्वरक के रूप में बहुत होता है।
3. नाइट्रो-फॉस्फेट (Nitro-phosphates)
- संगठन (Composition): इन्हें रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate) को नाइट्रिक एसिड (Nitric Acid) के साथ उपचारित (Treat) करके बनाया जाता है।
- विशेषताएँ: इसमें नाइट्रोजन दो रूपों में मौजूद होती है—नाइट्रेट रूप (Nitrate form) जो पौधों को तुरंत उपलब्ध होती है, और अमोनियाकल रूप (Ammoniacal form) जो धीरे-धीरे उपलब्ध होती है। इसमें मौजूद फॉस्फोरस आंशिक रूप से जल में घुलनशील और आंशिक रूप से साइट्रेट में घुलनशील (Citrate soluble) होता है।
4. यूरिया अमोनियम फॉस्फेट (UAP – Urea Ammonium Phosphate)
- संगठन (Composition): यह 28:28:0, 14:35:14 आदि ग्रेडों में मिलता है।
- विशेषताएँ: यह यूरिया और अमोनियम फॉस्फेट का रासायनिक मिश्रण है। इसमें नाइट्रोजन की मात्रा उच्च होती है। यह उन फसलों के लिए उत्तम है जिनमें प्रारंभिक अवस्था में अधिक वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative growth) की आवश्यकता होती है।
6. जटिल उर्वरकों की प्रमुख विशेषताएँ (Key Characteristics of Complex Fertilizers)
कृषि विज्ञान के दृष्टिकोण से जटिल उर्वरकों में निम्नलिखित भौतिक और रासायनिक विशेषताएँ पाई जाती हैं:
- उच्च विश्लेषण (High Analysis):जटिल उर्वरकों में पोषक तत्वों का कुल प्रतिशत बहुत अधिक होता है (प्रायः 30% से अधिक)। उदाहरण के लिए, DAP में कुल पोषक तत्व 18 + 46 = 64% होते हैं। उच्च विश्लेषण के कारण इनका परिवहन (Transportation) और भंडारण (Storage) सस्ता पड़ता है।
- समान रासायनिक संगठन (Uniform Chemical Composition):चूँकि इनका निर्माण कारखानों में होता है, इसलिए इनके हर दाने (Granule) में पोषक तत्वों का अनुपात बिल्कुल समान होता है। इससे खेत में पोषक तत्वों का वितरण (Distribution) एकदम समान (Uniform) होता है।
- दानेदार स्वरूप (Granular Form):जटिल उर्वरक हमेशा दानेदार (Granular or Prilled) रूप में बनाए जाते हैं। इसके कारण इन्हें खेत में मशीन (Seed drill) या हाथ (Broadcasting) से बिखेरना बहुत आसान होता है और हवा में इनके उड़ने का नुकसान नहीं होता।
- कम आद्रताग्राही (Low Hygroscopicity):ये एकल उर्वरकों (जैसे यूरिया) की तुलना में हवा से कम नमी सोखते हैं। इसलिए बरसात के दिनों में भी इनमें आसानी से ढेले (Caking) नहीं बनते और ये लंबे समय तक सुरक्षित भंडारित (Stored) किए जा सकते हैं।
- धीमी गति से घुलनशीलता (Controlled/Slow Release):कुछ जटिल उर्वरक मिट्टी में धीरे-धीरे घुलते हैं, जिससे पौधों को उनके जीवन चक्र (Life Cycle) के दौरान लगातार पोषक तत्व मिलते रहते हैं।
7. जटिल उर्वरकों का महत्व और लाभ (Importance and Advantages of Complex Fertilizers)
भारतीय कृषि में जटिल उर्वरकों को ‘वरदान’ (Boon) माना जाता है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- श्रम और समय की बचत (Saves Labor and Time):किसान को नाइट्रोजन और फॉस्फोरस देने के लिए अलग-अलग उर्वरक खरीदने और खेत में डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक ही बार में (Single Application) दो या तीन पोषक तत्व खेत में पहुँच जाते हैं, जिससे खेती की लागत (Cost of Cultivation) घटती है।
- फसलों का एकसमान विकास (Uniform Crop Growth):चूँकि प्रत्येक दाने में समान पोषक तत्व होते हैं, इसलिए खेत के हर हिस्से में पौधों को समान पोषण मिलता है। इससे फसल की वृद्धि एकसमान होती है और उपज (Yield) में भारी वृद्धि होती है।
- उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि (High Fertilizer Use Efficiency – FUE):जब नाइट्रोजन और फॉस्फोरस एक ही रासायनिक यौगिक में उपस्थित होते हैं, तो जड़ों द्वारा इनका अवशोषण (Absorption) बहुत तेजी से और प्रभावी ढंग से होता है। नाइट्रोजन की उपस्थिति फॉस्फोरस के अवशोषण को बढ़ा देती है (Synergistic Effect)।
- परिवहन और भंडारण में आसानी (Easy Transport and Storage):इनके उच्च विश्लेषण (High Analysis) के कारण, 100 किलोग्राम पोषक तत्व ले जाने के लिए कम बोरों (Bags) की आवश्यकता होती है। इससे माल ढुलाई (Freight) और गोदाम (Godown) का खर्च बचता है।
- मृदा स्वास्थ्य पर कम दुष्प्रभाव (Less Adverse Effect on Soil Health):एकल उर्वरक जैसे अमोनियम सल्फेट मिट्टी को अत्यधिक अम्लीय (Acidic) बना देते हैं। जटिल उर्वरकों को इस प्रकार डिज़ाइन किया जाता है कि उनका मृदा के पीएच (Soil pH) पर बहुत कम या शून्य अवशिष्ट प्रभाव (Residual Effect) पड़े।
8. जटिल उर्वरकों की हानियां या सीमाएँ (Disadvantages or Limitations)
प्रत्येक कृषि तकनीक की कुछ सीमाएँ होती हैं। जटिल उर्वरकों के भी कुछ नुकसान हैं जिन्हें जानना छात्रों के लिए आवश्यक है:
- निश्चित पोषक तत्व अनुपात (Fixed Nutrient Ratio):जटिल उर्वरकों का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इनमें पोषक तत्वों का अनुपात कारखाने द्वारा निश्चित (Fixed) कर दिया जाता है। यदि किसी मिट्टी में केवल नाइट्रोजन की कमी है और फॉस्फोरस पर्याप्त है, फिर भी यदि किसान DAP डालेगा, तो अनावश्यक रूप से फॉस्फोरस भी खेत में जाएगा, जो धन की बर्बादी (Wastage of Money) है।
- लचीलेपन का अभाव (Lack of Flexibility):किसान अपनी मर्जी से खेत की मिट्टी की जांच (Soil Testing) रिपोर्ट के अनुसार पोषक तत्वों का अनुपात नहीं बदल सकता। उसे बाजार में उपलब्ध ग्रेड (Available Grades) पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
- प्रारंभिक उच्च लागत (High Initial Cost):इन उर्वरकों के निर्माण में भारी रासायनिक संयंत्रों (Chemical Plants) और जटिल तकनीकों की आवश्यकता होती है। इसलिए प्रति बोरी इनकी कीमत एकल उर्वरकों की तुलना में अधिक होती है।
- खड़ी फसल में प्रयोग कठिन (Not Suitable for Top Dressing):जटिल उर्वरकों में फॉस्फोरस और पोटाश होता है। इन तत्वों को जड़ों के पास गहराई में देना आवश्यक होता है। यदि इन्हें खड़ी फसल (Standing crop) में ऊपर से बिखेरा (Top dressing) जाए, तो ये मिट्टी की ऊपरी सतह पर ही पड़े रह जाते हैं और जड़ों तक नहीं पहुँचते।
9. जटिल उर्वरकों के उपयोग की विधियां (Methods of Application)
कृषि विज्ञान में उर्वरक देने की विधि का बहुत महत्व है। जटिल उर्वरकों का प्रयोग निम्नलिखित विधियों से किया जाता है:
- आधार उर्वरक के रूप में (Basal Dose / Application):यह जटिल उर्वरकों (विशेषकर DAP और NPK) के प्रयोग की सबसे उत्तम विधि है। बुवाई से ठीक पहले या बुवाई के समय हल के पीछे (Behind the plough) या सीड-ड्रिल मशीन (Seed Drill) द्वारा इसे बीज से 2-3 सेंटीमीटर नीचे और बगल में डाला जाता है। इसे संस्थापन विधि (Placement Method) भी कहते हैं।
- बैंड प्लेसमेंट (Band Placement):कतारों (Rows) में बोई जाने वाली फसलों जैसे मक्का (Maize), गन्ना (Sugarcane), और कपास (Cotton) में पौधों की कतारों के साथ एक पट्टी (Band) बनाकर उसमें जटिल उर्वरक डाला जाता है।
- पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray):आजकल जल में पूर्णतया घुलनशील (100% Water Soluble) जटिल उर्वरक (जैसे NPK 19:19:19 या 0:52:34) बाजार में उपलब्ध हैं। इन्हें पानी में घोलकर खड़ी फसल की पत्तियों पर स्प्रे मशीन (Sprayer) द्वारा छिड़का जाता है। इससे पोषक तत्व तुरंत पत्तियों द्वारा सोख लिए जाते हैं।
- फर्टिगेशन (Fertigation):आधुनिक कृषि में ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) के पानी के साथ घुलनशील जटिल उर्वरकों (जैसे MAP) को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाया जाता है। इसे फर्टिगेशन कहते हैं। यह सबसे प्रभावी विधि है।
10. जटिल उर्वरक के प्रयोग में सावधानियां (Precautions while using Complex Fertilizers)
- मृदा परीक्षण (Soil Testing):जटिल उर्वरक का चयन हमेशा मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर करना चाहिए। जिस ग्रेड (Grade) की मिट्टी को आवश्यकता हो, वही उर्वरक खरीदें।
- बीज से सीधा संपर्क न होने दें (Avoid Direct Contact with Seeds):जटिल उर्वरकों को बीज के बिल्कुल सटाकर नहीं डालना चाहिए। इनके रासायनिक लवणों (Chemical Salts) की सांद्रता के कारण बीज का अंकुरण (Seed Germination) खराब हो सकता है या नवजात जड़ें जल सकती हैं।
- नमी की आवश्यकता (Moisture Requirement):जटिल उर्वरकों को मिट्टी में घुलने और पौधों तक पहुँचने के लिए पर्याप्त नमी (Adequate Moisture) की आवश्यकता होती है। इसलिए सूखे खेत में इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए; प्रयोग के बाद सिंचाई (Irrigation) अवश्य करें।
- सही समय (Right Time):इन्हें हमेशा फसल की प्रारंभिक अवस्था (Early Stage) में दें क्योंकि फॉस्फोरस की आवश्यकता जड़ों के प्रारंभिक विकास के लिए सबसे अधिक होती है।
11. जटिल उर्वरक और एकल उर्वरक में तुलना (Comparison: Complex vs Straight Fertilizers)
| क्र.सं. | विशेषता (Feature) | जटिल उर्वरक (Complex Fertilizer) | एकल उर्वरक (Straight Fertilizer) |
| 1. | पोषक तत्वों की संख्या | इसमें कम से कम 2 या 3 प्राथमिक पोषक तत्व (N,P,K) होते हैं। | इसमें केवल 1 प्राथमिक पोषक तत्व (जैसे केवल N या केवल P) होता है। |
| 2. | उदाहरण (Examples) | DAP (18:46:0), NPK (12:32:16) | यूरिया (46% N), SSP (16% P) |
| 3. | पोषक तत्व सघनता | ये उच्च विश्लेषण (High Analysis) वाले होते हैं। | ये प्रायः निम्न या मध्यम विश्लेषण वाले होते हैं। |
| 4. | प्रयोग का समय | मुख्य रूप से बुवाई के समय आधार उर्वरक (Basal Dose) के रूप में। | बुवाई के समय और टॉप ड्रेसिंग (Top Dressing) दोनों में (विशेषकर यूरिया)। |
| 5. | मिट्टी पर प्रभाव | मिट्टी के पीएच (pH) पर दुष्प्रभाव बहुत कम होता है। | लगातार उपयोग से मिट्टी अम्लीय या क्षारीय हो सकती है। |
12. निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्षतः, कक्षा 12 के कृषि छात्रों को यह समझना चाहिए कि जटिल उर्वरक (Complex Fertilizers) आधुनिक और व्यावसायिक कृषि (Commercial Agriculture) की रीढ़ हैं। ये उर्वरक न केवल रसद (Logistics) और श्रम की लागत को कम करते हैं, बल्कि फसलों को एक संतुलित आहार (Balanced Diet) प्रदान करके बंपर पैदावार (Bumper Yield) सुनिश्चित करते हैं।
हालांकि, इनके उपयोग में एक निश्चित अनुपात (Fixed Ratio) की सीमा होती है, लेकिन मृदा परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर सही ग्रेड के जटिल उर्वरक का चुनाव करके इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जटिल उर्वरकों का वैज्ञानिक और विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
प्रश्न 1: जटिल उर्वरक (Complex Fertilizer) और मिश्रित उर्वरक (Mixed Fertilizer) में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: जटिल उर्वरक कारखाने में रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical reaction) द्वारा बनाए जाते हैं और इसके हर दाने का रासायनिक संगठन समान होता है (जैसे DAP)। जबकि मिश्रित उर्वरक दो या दो से अधिक उर्वरकों का केवल भौतिक मिश्रण (Physical mixing) होता है, जिसमें कोई रासायनिक बंध नहीं होता।
प्रश्न 2: भारत में सबसे अधिक उपयोग होने वाला जटिल उर्वरक कौन सा है?
उत्तर: भारत में सबसे अधिक उपयोग होने वाला जटिल उर्वरक डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP – Di-Ammonium Phosphate) है। इसमें 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है।
प्रश्न 3: क्या जटिल उर्वरकों का प्रयोग खड़ी फसल (Top Dressing) में किया जा सकता है?
उत्तर: सामान्यतः ठोस जटिल उर्वरकों (जैसे दानेदार DAP या NPK) का प्रयोग खड़ी फसल में ऊपर से छिड़क कर (Top Dressing) नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद फॉस्फोरस मिट्टी में स्थिर (Immobile) हो जाता है और जड़ों तक नहीं पहुँच पाता। हालांकि, जल में 100% घुलनशील (Water-soluble) जटिल उर्वरकों का पर्णीय छिड़काव (Foliar spray) खड़ी फसल पर किया जा सकता है।
प्रश्न 4: ‘उच्च विश्लेषण उर्वरक’ (High Analysis Fertilizer) किसे कहते हैं?
उत्तर: जिन उर्वरकों में प्राथमिक पोषक तत्वों (N, P, K) की कुल मात्रा 25% या 30% से अधिक होती है, उन्हें उच्च विश्लेषण उर्वरक कहते हैं। अधिकांश जटिल उर्वरक इसी श्रेणी में आते हैं। इससे भंडारण और परिवहन लागत बचती है।
प्रश्न 5: जटिल उर्वरकों में पोषक तत्वों का अनुपात (Nutrient Ratio) निश्चित होने से क्या नुकसान है?
उत्तर: इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि किसान इसे अपनी खेत की मिट्टी की विशिष्ट आवश्यकता के अनुसार बदल नहीं सकता। यदि खेत में पहले से ही पोटाश पर्याप्त है, लेकिन किसान NPK (12:32:16) डालता है, तो पोटाश भी खेत में जाएगा, जिससे पैसे की बर्बादी होगी।
प्रश्न 6: फर्टिगेशन (Fertigation) क्या है और इसमें किन जटिल उर्वरकों का प्रयोग होता है?
उत्तर: ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) के पानी के साथ उर्वरकों को घोलकर सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाने की विधि को फर्टिगेशन कहते हैं। इसमें पूरी तरह से जल में घुलनशील जटिल उर्वरकों जैसे MAP (12:61:0) या NPK 19:19:19 का प्रयोग किया जाता है।