MP Board 9th Mathematics troduction to Euclid’s Geometry

MP Board 9th Mathematics troduction to Euclid’s Geometry

यहाँ कक्षा 9 के छात्रों के लिए “यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय” (Introduction to Euclid’s Geometry) विषय पर अत्यंत सरल और परीक्षा-उपयोगी नोट्स दिए गए हैं। आप इन्हें आसानी से पढ़ और समझ सकते हैं:

कक्षा 9 गणित: यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय (Introduction to Euclid’s Geometry)

गणित में आकृतियों, आकारों और स्थानों के मापन का अध्ययन करने वाली शाखा को ‘ज्यामिति’ कहा जाता है। आइए जानते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई और यूक्लिड का इसमें क्या योगदान था।

1. ‘ज्यामिति’ (Geometry) का अर्थ क्या है?

‘ज्यामिति’ (Geometry) शब्द यूनानी (Greek) भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है:

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  • ‘जियो’ (Geo): इसका अर्थ है ‘पृथ्वी’ या ‘भूमि’।
  • ‘मीट्रिन’ (Metrein): इसका अर्थ है ‘मापना’।

निष्कर्ष: अर्थात्, ज्यामिति का प्रारंभिक अर्थ ‘भूमि को मापना’ था। प्राचीन काल में मिस्र, बेबीलोन और भारत जैसे देशों में इसका उपयोग भवन निर्माण, पिरामिड बनाने और खेतों की सीमाएँ मापने के लिए किया जाता था।

2. यूक्लिड कौन थे? (Who was Euclid?)

  • यूक्लिड मिस्र (Egypt) के अलेक्जेंड्रिया (Alexandria) नामक शहर में गणित के एक शिक्षक थे।
  • उन्हें “ज्यामिति का जनक” (Father of Geometry) कहा जाता है।
  • यूक्लिड से पहले भी ज्यामिति का ज्ञान लोगों को था, लेकिन वह बिखरा हुआ और अव्यवस्थित था। यूक्लिड ने उस समय तक ज्ञात सभी गणितीय ज्ञान को इकट्ठा किया और उसे एक तार्किक (logical) और व्यवस्थित रूप दिया।

3. यूक्लिड की प्रसिद्ध पुस्तक: “एलिमेंट्स” (Elements)

  • यूक्लिड ने अपने द्वारा इकट्ठे किए गए सभी ज्ञान को एक बहुत ही प्रसिद्ध पुस्तक में लिखा, जिसका नाम “एलिमेंट्स” (Elements) है।
  • उन्होंने इस पुस्तक को 13 अध्यायों में बाँटा।
  • इन 13 अध्यायों में से प्रत्येक को एक ‘पुस्तिका’ (Book) कहा जाता है। इस पुस्तक ने पूरी दुनिया की ज्यामिति की समझ को हमेशा के लिए बदल दिया।

4. यूक्लिड की कुछ बुनियादी परिभाषाएँ (Euclid’s Definitions)

यूक्लिड ने अपनी पुस्तक ‘एलिमेंट्स’ में ज्यामिति को समझने के लिए कुछ बुनियादी परिभाषाएँ दीं। उनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:

  1. बिंदु (Point): एक बिंदु वह है जिसका कोई भाग (हिस्सा) नहीं होता है। (अर्थात् इसकी कोई लंबाई, चौड़ाई या मोटाई नहीं होती)।
  2. रेखा (Line): एक रेखा चौड़ाई-रहित (बिना चौड़ाई की) लंबाई होती है।
  3. रेखा के सिरे (Ends of a line): एक रेखा के सिरे (किनारे) हमेशा बिंदु होते हैं।
  4. पृष्ठ या तल (Surface): पृष्ठ वह है जिसकी केवल लंबाई और चौड़ाई होती है, मोटाई नहीं।

(नोट: आधुनिक गणित में ‘बिंदु’, ‘रेखा’ और ‘तल’ को अपरिभाषित (undefined) शब्द माना जाता है, क्योंकि यूक्लिड की परिभाषाओं को पूरी तरह से साबित करना संभव नहीं है, फिर भी हम इन्हें समझने के लिए उपयोग करते हैं।)

5. अभिगृहीत (Axioms) और अभिधारणाएँ (Postulates)

यूक्लिड ने ज्यामिति के निर्माण के लिए कुछ ऐसे गुणों को बिना सिद्ध किए ‘सच’ मान लिया, जो पूरी दुनिया में हमेशा सत्य (Universal Truths) होते हैं। इन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती। यूक्लिड ने इन मान्यताओं को दो भागों में बाँटा:

  • अभिधारणाएँ (Postulates): ये वे कल्पनाएँ या नियम थे जिनका उपयोग केवल ज्यामिति (Geometry) से संबंधित था।
  • अभिगृहीत (Axioms): ये वे सामान्य नियम थे जिनका उपयोग गणित के सभी भागों (जैसे बीजगणित) में किया जाता है, न कि केवल ज्यामिति में।

उदाहरण के लिए एक अभिगृहीत: “वे वस्तुएँ जो एक ही वस्तु के बराबर हों, वे एक-दूसरे के भी बराबर होती हैं।” (अगर A = C और B = C है, तो A = B होगा)।


छात्रों के लिए टिप: इस अध्याय के परिचय में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह समझना है कि यूक्लिड ने किस प्रकार बिखरे हुए गणितीय ज्ञान को एक सूत्र में पिरोया और सिद्ध करने (प्रमाण देने) की परंपरा की शुरुआत की।

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