खाद: परिभाषा और मृदा उर्वरता में योगदान
Manures Definition and Role of Manures in Soil Fertility
खाद की परिभाषा (Definition of Manure)
Manures Definition and Role of Manures in Soil Fertility : खाद वे जैविक पदार्थ होते हैं जो पौधों, पशुओं, पक्षियों, और कृषि अपशिष्टों के विघटन से प्राप्त होते हैं। इनका प्रयोग मृदा में मिलाकर उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए किया जाता है। खाद में पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है, लेकिन यह मृदा की भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों को सुधारती है।
मुख्य विशेषताएँ:
- प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त
- ह्यूमस की मात्रा बढ़ाती है
- सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि करती है
- दीर्घकालिक पोषण प्रदान करती है
- पर्यावरण के लिए सुरक्षित
🌾 मृदा उर्वरता बढ़ाने में खाद की भूमिका (Role of Manures in Soil Fertility)
खाद का प्रयोग मृदा की उर्वरता को सुधारने के लिए एक प्राकृतिक, टिकाऊ और बहुपरिणामी उपाय है। यह मृदा के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों को बेहतर बनाकर फसल उत्पादन को बढ़ाता है।
✅ 1. मृदा में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाना
- खाद मृदा में ह्यूमस की मात्रा बढ़ाती है, जो मिट्टी को भुरभुरी बनाता है।
- इससे जल धारण क्षमता, वायु संचार, और जड़ों की गहराई तक पहुँच में सुधार होता है।
- जैविक पदार्थ मृदा को संरचनात्मक रूप से मजबूत बनाते हैं, जिससे मृदा अपरदन (erosion) कम होता है।
उदाहरण: गोबर की खाद और कम्पोस्ट खाद मृदा में जीवांश बढ़ाकर उसकी संरचना सुधारते हैं।
✅ 2. सूक्ष्मजीवों की संख्या और गतिविधि में वृद्धि
- खाद सूक्ष्मजीवों को पोषण प्रदान करती है जिससे उनकी संख्या और क्रियाशीलता बढ़ती है।
- ये सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों को विघटित करके पोषक तत्वों को पौधों के लिए उपलब्ध रूप में बदलते हैं।
- इससे मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फोरस घुलनशीलता, और पोटेशियम की उपलब्धता बढ़ती है।
उदाहरण: वर्मी कम्पोस्ट में पाए जाने वाले केंचुए और सूक्ष्मजीव मृदा की जैविक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं।
✅ 3. पोषक तत्वों की दीर्घकालिक आपूर्ति
- खाद में पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है लेकिन ये धीरे-धीरे पौधों को उपलब्ध होते हैं।
- इससे पौधों को लगातार पोषण मिलता है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।
- खाद में सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक, आयरन, बोरॉन भी होते हैं जो पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
उदाहरण: नीम खली और मांस-हड्डी की खाद में उच्च मात्रा में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस होते हैं।
✅ 4. मृदा की भौतिक संरचना में सुधार
- खाद मिट्टी को भुरभुरी और हल्की बनाती है जिससे जड़ें आसानी से फैलती हैं।
- यह जल निकासी और वायु प्रवाह को बेहतर बनाती है।
- मिट्टी की संपीड़न क्षमता कम होती है जिससे पौधों को स्थायित्व मिलता है।
उदाहरण: भारी जैविक खाद जैसे गोबर खाद मिट्टी को ढीला और जल-संवेदनशील बनाती है।
✅ 5. रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता में कमी
- खाद के प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों की मात्रा घटाई जा सकती है।
- इससे मृदा प्रदूषण, जल स्रोतों की अशुद्धता, और फसल पर अवशेषों का प्रभाव कम होता है।
- यह जैविक खेती को बढ़ावा देता है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखता है।
उदाहरण: हरी खाद जैसे ढैंचा और मूँग खेत में उगाकर मिट्टी में मिलाने से नाइट्रोजन की पूर्ति होती है और रासायनिक उर्वरक की आवश्यकता घटती है।
✅ 6. मृदा की दीर्घकालिक उत्पादकता में वृद्धि
- खाद मृदा को संतुलित पोषण प्रदान करती है जिससे उसकी उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है।
- यह फसल चक्र को संतुलित करती है और भूमि की थकावट को रोकती है।
- खाद के नियमित प्रयोग से मृदा की पुनर्जीवन क्षमता बनी रहती है।
उदाहरण: कम्पोस्ट खाद का वार्षिक प्रयोग मृदा को पुनः जीवंत बनाता है और फसल उत्पादन को स्थिर रखता है।
📌 परीक्षा उपयोगी बिंदु (Exam-Ready Points)
- खाद मृदा में ह्यूमस और जीवांश बढ़ाकर उसकी संरचना सुधारती है।
- खाद सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर पोषक तत्वों को उपलब्ध रूप में बदलती है।
- खाद धीरे-धीरे पोषक तत्व छोड़ती है जिससे दीर्घकालिक पोषण मिलता है।
- खाद मृदा को भुरभुरी बनाकर जड़ों के विकास में सहायक होती है।
- खाद के प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता घटती है और पर्यावरणीय प्रदूषण कम होता है।