एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली
(Integrated Nutrient Management System – INM)
परिचय
Integrated Nutrient Management System INM : एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) एक व्यापक और समग्र दृष्टिकोण है जिसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता और पौधों के पोषक तत्वों की आपूर्ति को इस तरह से प्रबंधित करना है जिससे उच्च फसल उत्पादकता सुनिश्चित हो सके और साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर न्यूनतम नकारात्मक प्रभाव पड़े। यह एक ऐसी प्रणाली है जो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने के लिए विभिन्न स्रोतों जैसे रासायनिक उर्वरकों, जैविक खादों (गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद), जैव-उर्वरकों (जैसे राइजोबियम, एजोटोबैक्टर), और फसल अवशेषों को एक साथ एकीकृत करती है।
सरल शब्दों में, INM केवल रासायनिक खाद डालने से कहीं अधिक है। यह पौधों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करने के बारे में है, ताकि मिट्टी की दीर्घकालिक उत्पादकता बनी रहे और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुँचे।
महत्व
एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली का महत्व कई गुना है, जो कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है:
- मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार (Improved Soil Health):
- INM रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खादों के उपयोग को बढ़ावा देता है। जैविक पदार्थ मिट्टी की संरचना में सुधार करते हैं, जल धारण क्षमता बढ़ाते हैं, और मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
- पोषक तत्वों की दक्षता में वृद्धि (Increased Nutrient Use Efficiency):
- यह विभिन्न पोषक तत्वों के स्रोतों को इस तरह से जोड़ता है कि पौधे उन्हें अधिक कुशलता से उपयोग कर सकें। उदाहरण के लिए, जैविक खाद रासायनिक उर्वरकों से पोषक तत्वों के निक्षालन (लीचिंग) को कम कर सकती है, जिससे पौधों को अधिक पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं।
- रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी (Reduced Dependence on Chemical Fertilizers):
- जैविक और जैव-उर्वरकों के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है। यह न केवल किसानों के लिए लागत कम करता है बल्कि रासायनिक अवशेषों के कारण होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण को भी कम करता है।
- उच्च और स्थिर फसल उत्पादन (Higher and Stable Crop Production):
- संतुलित पोषक तत्व आपूर्ति के कारण पौधों को उनकी वृद्धि के लिए आवश्यक सभी तत्व सही मात्रा में मिलते हैं, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है और उत्पादन में स्थिरता आती है।
- पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability):
- रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले जल प्रदूषण (नाइट्रेट और फास्फेट का लीचिंग), ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (नाइट्रस ऑक्साइड) और मिट्टी के क्षरण को कम करने में मदद करता है। यह कृषि को अधिक टिकाऊ बनाता है।
- किसानों की आय में वृद्धि (Increased Farmers’ Income):
- रासायनिक उर्वरकों पर कम निर्भरता से उत्पादन लागत कम होती है। साथ ही, बेहतर फसल स्वास्थ्य और उच्च उपज से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
- मृदा सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल वातावरण (Favorable Environment for Soil Microbes):
- जैविक पदार्थ और जैव-उर्वरकों का उपयोग मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों जैसे बैक्टीरिया और कवक के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाता है, जो पोषक तत्वों के चक्रण और पौधों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
संक्षेप में, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली आधुनिक कृषि के लिए एक अनिवार्य घटक है जो उच्च उत्पादकता, पर्यावरणीय संरक्षण और आर्थिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह भविष्य की खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि प्रथाओं के लिए महत्वपूर्ण है।