राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व Importance of Agriculture in National Economy
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होती है:
- खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता (Food Security and Self-sufficiency):
- कृषि का सबसे महत्वपूर्ण योगदान देश की बढ़ती आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- यह अनाज, दालें, फल, सब्जियां, दूध और मांस जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों का उत्पादन करके भारत को खाद्य पदार्थों के लिए आयात पर निर्भरता से बचाता है, जिससे राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
- रोजगार सृजन (Employment Generation):
- कृषि क्षेत्र भारत में सबसे बड़ा नियोक्ता बना हुआ है।
- यह देश की लगभग 42% (आर्थिक समीक्षा 2022-23 के अनुसार) से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका प्रदान करता है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ अधिकांश जनसंख्या कृषि गतिविधियों से जुड़ी है।
- यह ग्रामीण गरीबी को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान (Contribution to GDP):
- यद्यपि स्वतंत्रता के बाद से कृषि का सकल घरेलू उत्पाद में प्रतिशत योगदान घटा है (उद्योग और सेवा क्षेत्रों के विकास के कारण), यह अभी भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
- आर्थिक समीक्षा 2022-23 के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 18.11% का योगदान है। यह योगदान देश की समग्र आर्थिक वृद्धि में सहायक है।
- औद्योगिक क्षेत्र को कच्चे माल की आपूर्ति (Supply of Raw Materials to Industries):
- कृषि कई प्रमुख उद्योगों के लिए कच्चे माल का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
- उदाहरण के लिए, चीनी उद्योग गन्ने पर, सूती वस्त्र उद्योग कपास पर, जूट उद्योग जूट पर, और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग फल, सब्जियों और अनाजों पर निर्भर करते हैं।
- कृषि उत्पादों की उपलब्धता इन उद्योगों के सतत विकास को सुनिश्चित करती है।
- निर्यात आय (Export Earnings):
- कृषि उत्पाद भारत के कुल निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जिससे देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
- चावल (विशेषकर बासमती), मसाले, चाय, कॉफी, समुद्री उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ प्रमुख कृषि निर्यात उत्पाद हैं।
- वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 7% बढ़कर $5.96 बिलियन तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय आय में सकारात्मक योगदान दे रहा है।
- ग्रामीण विकास और जीवन स्तर में सुधार (Rural Development and Improvement in Living Standards):
- कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। कृषि उत्पादन और आय में वृद्धि सीधे तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करती है।
- यह ग्रामीण बाजारों को बढ़ावा देती है और ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ाती है, जिससे समग्र आर्थिक विकास को गति मिलती है।
- पूंजी निर्माण में योगदान (Contribution to Capital Formation):
- कृषि क्षेत्र अपनी बचत और निवेश के माध्यम से पूंजी निर्माण में भी योगदान देता है।
- कृषि अधिशेष को अन्य क्षेत्रों में निवेश किया जा सकता है, जिससे समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- बाजारों का विस्तार (Expansion of Markets):
- कृषि की बढ़ती आय से ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक उत्पादों की मांग बढ़ती है, जिससे उद्योगों के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध होता है।
- यह कृषि उपकरण, उर्वरक, कीटनाशक और उपभोक्ता वस्तुओं के उद्योगों को बढ़ावा देता है।
संक्षेप में, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। इसकी स्थिरता और विकास न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि बड़ी आबादी को रोजगार प्रदान करता है, उद्योगों को समर्थन देता है, और देश के समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।