Class 11 Agriculture Definition Branches and Importance
कृषि की परिभाषा शाखाएँ एवं महत्व
कृषि मानव सभ्यता का आधारस्तंभ है जिसने हमें भोजन, वस्त्र और आश्रय प्रदान किया है। यह केवल फसलें उगाने या पशु पालने से कहीं अधिक है; यह एक जटिल विज्ञान, एक महत्वपूर्ण आर्थिक चालक और एक संपन्न व्यवसाय भी है।
1. कृषि की परिभाषा (Definition of Agriculture)
कृषि वह कला और विज्ञान है जिसमें पौधों (फसलों) को उगाना, पशुधन का पालन-पोषण करना और वानिकी व मत्स्य पालन सहित विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके भोजन, फाइबर, ईंधन और अन्य उत्पाद तैयार करना शामिल है। यह मानव आवश्यकताओं को पूरा करने और सभ्यताओं के विकास को संभव बनाने वाली प्राथमिक गतिविधि है। सरल शब्दों में यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के लिए प्राकृतिक पर्यावरण को संशोधित करता है।
2. कृषि विज्ञान की शाखाएँ (Branches of Agricultural Science)
कृषि विज्ञान एक विशाल क्षेत्र है जिसमें कई विशिष्ट शाखाएँ शामिल हैं, जो कृषि के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित हैं:
- सस्य विज्ञान (Agronomy): यह फसल उत्पादन और मृदा प्रबंधन का विज्ञान है। इसमें बुवाई के तरीके, उर्वरकों का उपयोग, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और फसल चक्र जैसी विधियों का अध्ययन किया जाता है।
- बागवानी (Horticulture): यह फलों, सब्जियों, फूलों और सजावटी पौधों की खेती से संबंधित है।
- कृषि कीट विज्ञान (Agri Entomology): यह कृषि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और उनके प्रबंधन के तरीकों का अध्ययन करता है।
- पादप आनुवंशिकी (Plant Genetics): यह फसलों की नई और बेहतर किस्में विकसित करने के लिए पौधों के आनुवंशिक गुणों में सुधार का अध्ययन करता है, जो अधिक उपज, रोगों के प्रति प्रतिरोध और बेहतर गुणवत्ता प्रदान कर सकें।
- मृदा रसायन विज्ञान (Soil Chemistry): यह मिट्टी के रासायनिक गुणों, पोषक तत्वों की उपलब्धता, उर्वरकों के प्रभाव और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के तरीकों का अध्ययन करता है।
- कृषि अभियांत्रिकी (Agricultural Engineering): यह कृषि मशीनों, उपकरणों, सिंचाई प्रणालियों, कटाई के बाद की प्रौद्योगिकियों और ग्रामीण ऊर्जा समाधानों के डिजाइन, विकास और सुधार पर केंद्रित है।
- मृदा संरक्षण (Soil Conservation): यह मिट्टी के कटाव को रोकने और मिट्टी के स्वास्थ्य व उर्वरता को बनाए रखने के तरीकों और प्रथाओं का अध्ययन करता है।
- कृषि विस्तार (Agricultural Extension): यह कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित नई तकनीकों और ज्ञान को किसानों तक पहुँचाने का कार्य करता है ताकि वे उन्हें अपना सकें।
- पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान (Animal Husbandry and Veterinary Science): यह पशुधन जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी, मुर्गी आदि के प्रजनन, पालन-पोषण, प्रबंधन और उनके रोगों के निदान व उपचार से संबंधित है, ताकि दूध, मांस, अंडे, ऊन और अन्य उत्पाद प्राप्त किए जा सकें।
- डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming): विशेष रूप से दूध उत्पादन के लिए मवेशियों के पालन-पोषण पर केंद्रित है।
- कुक्कुट पालन (Poultry Farming): अंडे और मांस के लिए मुर्गियों, बत्तखों, टर्की आदि के पालन पर केंद्रित है।
- मधुमक्खी पालन (Bee Keeping): शहद और मोम के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों के पालन पर केंद्रित है।
- रेशम कीट पालन (Sericulture): रेशम के उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों के पालन पर केंद्रित है।
- लाख पालन (Lac Culture): लाख उत्पादन के लिए लाख कीटों के पालन पर केंद्रित है।
- मत्स्य पालन (Pisciculture): मछली के उत्पादन के लिए मछली के पालन पर केंद्रित है।
- सुअर पालन (Pig Farming): मांस उत्पादन के लिए सूअरों के पालन पर केंद्रित है।
3. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में खेती का महत्व (Importance of Farming in National Economy)
कृषि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है, विशेषकर भारत जैसे विकासशील देश में। इसका महत्व कई प्रमुख बिंदुओं से स्पष्ट होता है:
- खाद्य सुरक्षा (Food Security): कृषि सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह बढ़ती जनसंख्या के लिए अनाज, दालें, फल, सब्जियां, दूध और मांस जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों का उत्पादन करती है, जिससे आत्मनिर्भरता आती है और आयातक पर निर्भरता कम होती है।
- रोजगार सृजन (Employment Generation): भारत में, कृषि क्षेत्र अभी भी आबादी के एक बड़े हिस्से, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, के लिए आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान: यद्यपि कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि का प्रतिशत समय के साथ घटा है (द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों के विकास के कारण), यह अभी भी एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है। 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का योगदान लगभग 18.11% रहा।
- कच्चे माल की आपूर्ति (Supply of Raw Materials): कृषि कई उद्योगों के लिए कच्चे माल का स्रोत है, जैसे कपड़ा उद्योग (कपास, जूट), चीनी उद्योग (गन्ना), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (फल, सब्जियां, अनाज), तेल उद्योग (तिलहन) आदि।
- निर्यात आय (Export Earnings): कृषि उत्पाद भारत के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। चावल, मसाले, चाय, कॉफी और समुद्री उत्पाद जैसे कृषि उत्पाद विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद करते हैं, जिससे देश का व्यापार संतुलन बेहतर होता है।
- ग्रामीण विकास (Rural Development): कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। कृषि उत्पादन में वृद्धि से ग्रामीण आय बढ़ती है, जिससे गरीबी कम होती है और ग्रामीण बाजारों को बढ़ावा मिलता है।
- उद्योगों को प्रोत्साहन (Stimulus to Industries): कृषि क्षेत्र की प्रगति से कृषि उपकरण, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई उपकरण और परिवहन जैसे सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।
4. कृषि एक व्यवसाय के रूप में (Agriculture as a Business)
पारंपरिक रूप से, भारत में कृषि को अक्सर जीविकोपार्जन के साधन के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब यह तेजी से एक संगठित और लाभदायक व्यवसाय के रूप में उभर रही है।
- बाजार-उन्मुखीकरण (Market-Orientation): किसान अब केवल अपने उपभोग के लिए उत्पादन नहीं कर रहे हैं, बल्कि बाजार की मांग और मूल्य रुझानों के आधार पर फसलें उगा रहे हैं। वे अब उन फसलों की खेती कर रहे हैं जिनकी बाजार में अधिक मांग है और जो बेहतर मूल्य दिला सकती हैं।
- मूल्य संवर्धन (Value Addition): कच्चे कृषि उत्पादों को सीधे बेचने के बजाय, किसान या कृषि-उद्यमी अब उन्हें संसाधित करके मूल्य जोड़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, टमाटर से सॉस बनाना, फलों से जैम बनाना, दूध से डेयरी उत्पाद बनाना।
- विपणन और ब्रांडिंग (Marketing and Branding): किसान अब अपनी उपज को सीधे उपभोक्ताओं या बड़े खरीदारों तक पहुंचाने के लिए बेहतर विपणन रणनीतियों का उपयोग कर रहे हैं। जैविक उत्पादों, विशेष फसलों और विशिष्ट कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग की जा रही है।
- आधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग (Use of Modern Technologies): कृषि को व्यवसाय बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे प्रेसिजन कृषि, ड्रिप सिंचाई, संरक्षित खेती (पॉलीहाउस/नेट हाउस), कृषि ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ रहा है।
- कृषि-आधारित व्यवसाय (Agro-based Businesses): कृषि केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, इसमें कई संबद्ध व्यवसाय भी शामिल हैं जैसे:
- डेयरी फार्मिंग, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन।
- खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ।
- केंचुआ खाद उत्पादन।
- बीज उत्पादन और नर्सरी।
- कृषि उपकरण किराए पर देना।
- शीत भंडारण सुविधाएँ।
- जैविक खेती।
- उद्यमिता और निवेश (Entrepreneurship and Investment): युवा उद्यमी कृषि क्षेत्र में नए व्यवसाय मॉडल और स्टार्ट-अप ला रहे हैं। सरकार भी कृषि को व्यवसाय के रूप में बढ़ावा देने के लिए नीतियां और ऋण सहायता प्रदान कर रही है।
5. भारत में फसल उत्पादन के लक्ष्य और उपलब्धियाँ (Targets and Achievements of Crop Production in India)
भारत ने स्वतंत्रता के बाद से फसल उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, मुख्य रूप से हरित क्रांति के कारण।
ऐतिहासिक लक्ष्य और उपलब्धियाँ:
- खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता: स्वतंत्रता के समय, भारत खाद्यान्न के लिए आयातक देशों पर बहुत अधिक निर्भर था, लेकिन हरित क्रांति (1960 के दशक) के माध्यम से, भारत ने उच्च उपज वाली किस्मों (HYVs) के बीज, उर्वरकों, कीटनाशकों और सिंचाई के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया।
- रिकॉर्ड उत्पादन: 1950-51 में लगभग 50 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन से बढ़कर, भारत ने 2022-23 में 323.55 मिलियन टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन किया है।
- विभिन्न क्रांतियाँ:
- श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड): दूध उत्पादन में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बनाया।
- पीली क्रांति: तिलहन उत्पादन में वृद्धि।
- नीली क्रांति: मत्स्य पालन में उल्लेखनीय वृद्धि।
- स्वर्ण क्रांति: बागवानी (फल, सब्जियां, फूल) के उत्पादन में वृद्धि।
वर्तमान लक्ष्य (Recent Targets):
भारत सरकार विभिन्न योजनाओं और नीतियों के माध्यम से कृषि उत्पादन को और बढ़ाने और किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखती है। प्रमुख लक्ष्य क्षेत्रों में शामिल हैं:
- निरंतर उच्च खाद्यान्न उत्पादन: बढ़ती आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद्यान्न उत्पादन में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना।
- दालों और तिलहन का उत्पादन बढ़ाना: आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दालों और तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना।
- बागवानी उत्पादन में वृद्धि: फलों, सब्जियों और फूलों की मांग को पूरा करना और निर्यात के अवसरों का लाभ उठाना।
- उत्पादकता में सुधार: प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां उत्पादकता अभी भी कम है (विकसित देशों की तुलना में)।
- फसल विविधीकरण (Crop Diversification): किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर अधिक लाभदायक और जलवायु-लचीली फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना।
- कम लागत वाली और टिकाऊ कृषि (Low-cost and Sustainable Agriculture): जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और जल-कुशल सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देना।
- किसानों की आय बढ़ाना: केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाकर उनकी आय में वृद्धि करना।
वर्तमान उपलब्धियाँ (Current Achievements):
- भारत वर्तमान में दूध, दालों और जूट का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- चावल, गेहूं, कपास, फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- पिछले कुछ वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन लगातार रिकॉर्ड स्तर पर रहा है, जिससे भारत एक खाद्य-अधिशेष और खाद्य-निर्यात करने वाला देश बन गया है।
- विभिन्न सरकारी योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और ई-नाम (e-NAM) किसानों को सशक्त बना रही हैं।
चुनौतियाँ:
हालांकि भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी कई चुनौतियां हैं जैसे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, पानी की कमी, मिट्टी के स्वास्थ्य का बिगड़ना, छोटे और खंडित भूमि-धारण और किसानों की बाजार तक पहुंच। इन चुनौतियों का समाधान करना भविष्य के कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा।