कक्षा 12 हिन्दी आरोह रघुवीर सहाय: कैमरे में बंद अपाहिज : Class 12 Hindi Raghuveer Sahay Kaimare me Band Apahij

Class 12 Hindi Raghuveer Sahay Kaimare me Band Apahij : ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ रघुवीर सहाय द्वारा रचित एक मार्मिक और विचारोत्तेजक कविता है। यह कविता मीडिया (विशेषकर टेलीविजन) की संवेदनहीनता, व्यावसायिकता और मानवीय संवेदनाओं के शोषण पर करारा व्यंग्य करती है। कवि दिखाता है कि कैसे टेलीविजन पर एक अपाहिज व्यक्ति के दुख को ‘प्रदर्शित’ करके पैसा और लोकप्रियता कमाने की कोशिश की जाती है और इस प्रक्रिया में मानवीय गरिमा और पीड़ा का अनादर होता है।

रघुवीर सहाय

जन्म : सन्‌ 1929, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

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प्रमुख रचनाएँ : अज्ञेय द्वारा संपादित दूसरा सप्तक (1951) में आरंभिक कविताएँ; महत्त्वपूर्ण काव्य-संकलन सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो-हँसो जल्दी हँसो।

पत्रकारिता : ऑल इंडिया रेडियो के हिंदी समाचार विभाग से संबद्ध रहे, फिर हैदराबाद से निकलने वाली पत्रिका कल्पना और उसके बाद दैनिक नवभारत टाइम्स तथा दिनमान से संबद्ध रहे।

सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार

निधन : सन्‌ 1990, दिल्ली में

कुछ होगा / कुछ होगा अगर मैं बोलूंगा / न टूटे न टूटे तिलिस्म सत्ता का / मेरे अंदर एक कायर टूटेगा

रघुवीर सहाय समकालीन हिंदी कविता के संवेदनशील नागरिक चेहरा हैं। सड़क, चौराहा, दफ्तर, अखबार, संसद, बस, रेल और बाज़ार की बेलौस भाषा में उन्होंने कविता लिखी। घर-मुहल्ले के चारित्रों पर कविता लिखकर इन्होंने हमारी चेतना का स्थायी नागरिक बनाया। हत्या-लूटपाट और आगज़नी, राजनैतिक भ्रष्टाचार और छल-छद्म इनकी कविता में उतरकर खोजी पत्रकारिता की सनसनीखेज रपटें नहीं रह जाते, आत्मान्वेषण का माध्यम बन जाते हैं। यह ठीक है कि पेशे से वे पत्रकार थे, लेकिन वे सिर्फ़ पत्रकार ही नहीं, सिद्ध कथाकार और कवि भी थे। कविता को उन्होंने एक कहानीपन और एक नाटकीय वैभव दिया।

जातीय या वैयक्तिक स्मृतियाँ उनके यहाँ नहीं के बराबर हैं। इसलिए उनके दोनों पाँव वर्तमान में ही गड़े हैं। बावजूद इसके, मार्मिक उजास और व्यंग्य-बुझी खुरदरी मुस्कानों से उनकी कविता पटी पड़ी है। छंदानुशासन के लिहाज़ से भी वे अनुपम हैं पर ज़्यादातर बातचीत की सह बतौर पत्रकार और कवि घटनाओं में निहित विडंबना और त्रासदी को भी उन्होंने देखा। रघुवीर सहाय की कविताओं की दूसरी विशेषता है छोटे या लघु की महत्ता का स्वीकार। वे महज़ बड़े कहे जाने वाले विषयों या समस्याओं पर ही दृष्टि नहीं डालते, बल्कि जिनको समाज में हाशिए पर रखा जाता है, उनके अनुभवों को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाते हैं। रघुवीर जी ने भारतीय समाज में ताकतवरों की बढ़ती हैसियत और सत्ता के खिलाफ़ भी साहित्य और पत्रकारिता के पाठकों का ध्यान खींचा। रामदास नाम की उनकी कविता आधुनिक हिंदी कविता की एक महत्त्वपूर्ण रचना मानी जाती है।

अत्यंत साधारण और अनायास-सी प्रतीत होनेवाली शैली में समाज की दारुण विडंबनाओं को पकड़ने की जो कला रघुवीर सहाय की कविताओं में मिलती है, उसका प्रतिनिधि उदाहरण है यहाँ प्रस्तुत कविता कैमरे में बंद अपाहिज जो लोग भूल गये हैं संग्रह से ली गई है। शारीरिक चुनौती को झेलते व्यक्ति से टेलीविज़न-कैमरे के सामने किस तरह के सवाल पूछे जाएँगे और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए उससे कैसी भंगिमा की अपेक्षा की जाएगी—इसका लगभग सपाट तरीके से बयान करते हुए कवि ने एक तरह से पीड़ा के साथ दृश्य-संचार माध्यम के संबंध को रेखांकित किया है। किसी की पीड़ा को बहुत बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाने वाले व्यक्ति को उस पीड़ा के प्रति स्वयं संवेदनशील होने और दूसरों को संवेदनशील बनाने का दावेदार होना चाहिए। पर विडंबना यह है कि आप जब पीड़ा को पर्दे पर उभारने का प्रयास करते हैं, तब कारोबारी दबावों के तहत आपका रवैया संबेदनहीन हो जाता है। सहाय जी की यह कविता टेलीविजन स्टूडियो के भीतर की दुनिया को उजागर ज़रूर है, लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि इसे सिर्फ टेलीविजन माध्यम से जोड़कर देखा जाए। अपनी व्यंजना में यह कविता हर ऐसे व्यक्ति की ओर इशारा करती है, जो दुख-दर्द, यातना-वेदना को बेचना चाहता है।

इस कविता को शारीरिक चुनौती झेलते लोगों के प्रति संवेदनशील नज़रिया अपनाने के लिए प्रेरित करते पाठ के रूप में भी देखा जा सकता है। इसके लिए कवि ने धुर संवेदनहीनता को रेखांकित करने का तरीका अपनाया है। वह दिखलाता है कि किस तरह करुणा जगाने के मकसद से

कैमरे में बंद अपाहिज

हम दूरदर्शन पर बोलेंगे
हम समर्थ शक्तिवान
हम एक दुर्बल को लाएँगे
एक बंद कमरे में
उससे पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज हैं?
आप क्यों अपाहिज हैं?
आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगा
देता है?
(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)
हाँ तो बताइए आपका दुख क्या है
जल्दी बताइए वह दुख बताइए
बता नहीं पाएगा
सोचिए
बताइए
आपको अपाहिज होकर कैसा लगता है
कैसा
यानी कैसा लगता है
(हम खुद इशारे से बताएँगे कि क्या ऐसा?)
सोचिए
बताइए
थोड़ी कोशिश करिए.
(यह अवसर खो देंगे?)
आप जानते हैं कि कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते

हम पूछ-पूछकर उसको रुला देंगे
इंतजार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का
करते हैं?
(यह प्रश्न पूछा नहीं जाएगा)

फिर हम परदे पर दिखलाएँगे
फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर
बहुत बड़ी तसवीर
और उसके होंठों पर एक कसमसाहट भी
(आशा है आप उसे उसकी अपंगता की पीड़ा मानेंगे)

एक और कोशिश
दर्शक
धीरज रखिए.
देखिए
हमें दोनों एक संग रुलाने हैं
आप और वह दोनों
(कैमरा
बस करो
नहीं हुआ
रहने दो
परदे पर वक़्त की कीमत है)

अब मुसकुराएँगे हम
आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम
(बस थोड़ी ही कसर रह गई)
धन्यवाद

कविता पर आधारित प्रश्न–उत्तर

1. कविता में कुछ पंक्तियाँ कोष्ठकों में रखी गई हैं — इसका औचित्य क्या है?

➡️ कोष्ठक (Brackets) में दी गई पंक्तियाँ कवि द्वारा प्रस्तुत दृश्य की आड़ में छिपे कटाक्ष और विडंबना को उजागर करती हैं। ये पंक्तियाँ ऐसा लगता है जैसे कैमरे के पीछे की आवाज़ या निर्देश हों, लेकिन वास्तव में वे समाज के कृत्रिम संवेदनात्मक प्रदर्शन पर तंज करती हैं। यह दर्शाता है कि संवेदना अब “स्टेज निर्देशों” जैसी बन गई है — यानी नाटकीय और बनावटी।

2. “कैमरे में बंद अपाहिज करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है इस पंक्ति पर विचार कीजिए।

➡️ यह कथन इस कविता की आत्मा है। कवि ने दिखाया है कि समाज व मीडिया अपाहिज व्यक्ति को करुणा के प्रतीक के रूप में मंच पर लाकर अपने संवेदनशील होने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में यह करुणा की आड़ में उसका शोषण है। कविता इस प्रकार की दिखावटी करुणा और छिपी हुई क्रूरता को उजागर करती है — कैमरे की आड़ में भावनाओं का बाज़ारीकरण।

3. “हम समर्थ शक्तिवान हैं, और हम एक दुर्बल को लाएँगे इसमें कवि ने क्या व्यंग्य किया है?

➡️ कवि इस पंक्ति के माध्यम से सामाजिक श्रेष्ठता बोध पर कटाक्ष करता है। जब कोई मंच संचालक यह कहता है कि “हम समर्थ हैं और दुर्बल को लाएँगे”, तो यह सहयोग नहीं, अहंकार और उपकार जताने की मानसिकता का प्रतीक बन जाती है। यह सहानुभूति नहीं बल्कि सशक्त बनने का दिखावा है।

4. यदि शारीरिक रूप से चुनौती का सामना कर रहे व्यक्ति और दर्शक, दोनों ही रोने लगें— तो प्रश्नकर्ता का क्या उद्देश्य पूरा होगा?

➡️ कवि का इशारा है कि मंच पर बैठा व्यक्ति यदि रोने लगे और दर्शक भी रो पड़ें, तो यह भावनात्मक प्रदर्शन पूरी तरह सफल माना जाएगा। यानी समाज करुणा को सच्चे बदलाव की जगह, भावुक मनोरंजन में बदल देता है। प्रश्नकर्ता चाहता है कि साक्षात्कार “भावनात्मक रूप से हिट” हो — यह भावनाओं का मंचन है, संवेदन नहीं

5. “परदे पर वक्त की कीमत है यह कहकर कवि का नज़रिया क्या दर्शाता है?

➡️ इस वाक्य के माध्यम से कवि ने पूरे साक्षात्कार को एक नियोजित कार्यक्रम, एक टीवी शो की तरह दिखाया है। समय की कीमत का बहाना बनाकर मंच पर बैठे व्यक्ति को जल्दी हटाना, इस बात का संकेत है कि करुणा का समय निर्धारित होता है, और जब वो “काम की नहीं” रहती, तो उसे हटा दिया जाता है। यह निरंकुश और उपेक्षात्मक रवैये की तीव्र आलोचना है।

🌐 कविता के आसपास (सृजनात्मक प्रश्नों के उत्तर)

1. यदि आपको शारीरिक चुनौती का सामना कर रहे किसी मित्र का परिचय करवाना हो, तो कैसे करवाएँगे?

➡️ “मिलिए मेरे उस मित्र से जो चुनौतियों को मुस्कान से हराता है, जिसके जीवन में साहस, आत्मबल और प्रेरणा की गाथा है। ये वो इंसान हैं जो केवल बाधाएँ नहीं पार करते, बल्कि रास्ते बनाते हैं — हम सबके लिए।” 👉 इस तरह का परिचय उस व्यक्ति की क्षमता और गरिमा को सामने रखता है, न कि उसकी कमी को।

2. सामाजिक उद्देश्य से युक्त ऐसे कार्यक्रम को देखकर कैसा महसूस होता है? संक्षेप में लिखिए।

➡️ यदि ऐसा कार्यक्रम सम्मानजनक और संवेदनशील ढंग से किया गया हो, तो वह प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद होता है। लेकिन यदि वह केवल भावनात्मकता भुनाने या प्रचार के लिए किया जाए, तो वह लज्जाजनक और असंवेदनशील प्रतीत होता है। 👉 ऐसे कार्यक्रमों को किसी की दुर्बलता नहीं, उसकी संपूर्णता को सम्मान देने का माध्यम बनना चाहिए

MCQs from Raghuvir Sahay’s Poem ‘कैमरे में बंद अपाहिज’

Instructions: Choose the best option for each question. The correct answer is marked with a checkmark (✓).

कवि और कविता से संबंधित प्रश्न

1. ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के कवि कौन हैं?

a) हरिवंश राय बच्चन

b) आलोक धन्वा

c) कुँवर नारायण

d) रघुवीर सहाय (✓)

2. ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता रघुवीर सहाय के किस काव्य संग्रह से ली गई है?

a) सीढ़ियों पर धूप में

b) आत्महत्या के विरुद्ध

c) हँसो-हँसो जल्दी हँसो

d) लोग भूल गये हैं (✓)

3. रघुवीर सहाय पेशे से क्या थे, जिसका प्रभाव उनकी कविताओं में भी दिखता है?

a) अध्यापक

b) वकील

c) पत्रकार (✓)

d) डॉक्टर

4. रघुवीर सहाय की कविताओं की एक प्रमुख विशेषता क्या है?

a) जातीय स्मृतियों का वर्णन

b) दार्शनिक गूढ़ता

c) छोटे या लघु की महत्ता का स्वीकार (✓)

d) रोमांटिक प्रेम का चित्रण

5. ‘रामदास’ नाम की कविता किसकी एक महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है?

a) हरिवंश राय बच्चन की

b) आलोक धन्वा की

c) कुँवर नारायण की

d) रघुवीर सहाय की (✓)

कविता ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ पर आधारित प्रश्न

6. दूरदर्शन पर समर्थ-शक्तिवान कौन हैं?

a) दर्शक

b) अपाहिज व्यक्ति

c) दूरदर्शन के कार्यक्रम निर्माता/संचालक (✓)

d) कवि

7. दूरदर्शन पर एक दुर्बल व्यक्ति को कहाँ लाया जाता है?

a) खुले मैदान में

b) एक बंद कमरे में (✓)

c) अस्पताल में

d) अपने घर में

8. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संचालक अपाहिज व्यक्ति से क्या अपेक्षा करते हैं?

a) उसके ज्ञान की

b) उसकी हंसी की

c) उसकी पीड़ा और रोने की भंगिमा की (✓)

d) उसके विचारों की

9. कवि ने कैमरे में बंद अपाहिज को ‘करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता’ क्यों कहा है?

a) क्योंकि कार्यक्रम में अपाहिज पर करुणा नहीं दिखाई जाती।

b) क्योंकि कार्यक्रम बनाने वाले दयालु नहीं होते।

c) क्योंकि वे दूसरों की पीड़ा को व्यावसायिक लाभ के लिए प्रदर्शित करते हैं। (✓)

d) क्योंकि अपाहिज व्यक्ति स्वयं क्रूर होता है।

10. कार्यक्रम निर्माता दर्शक और अपाहिज दोनों को एक साथ क्यों रुलाना चाहते हैं?

a) यह एक मानवीय संवेदना का क्षण है।

b) कार्यक्रम को अधिक रोचक और प्रभावशाली बनाने के लिए। (✓)

c) दोनों की पीड़ा को समझने के लिए।

d) यह एक सामाजिक उद्देश्य है।

11. ‘परदे पर वक़्त की कीमत है’ कहकर कवि ने क्या व्यंग्य किया है?

a) समय का महत्व

b) दूरदर्शन के व्यावसायिक और संवेदनहीन दृष्टिकोण पर (✓)

c) अपाहिज व्यक्ति के धीरे बोलने पर

d) दर्शक के धैर्यहीन होने पर

12. ‘आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगा, देता है?’ – ऐसे प्रश्न पूछने का क्या उद्देश्य है?

a) अपाहिज व्यक्ति की सच्ची भावना जानना।

b) उसकी पीड़ा को कुरेदना और कैमरे के सामने लाना। (✓)

c) दर्शकों को जानकारी देना।

d) कार्यक्रम को सामाजिक बनाना।

13. कविता में ‘फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर’ और ‘कसमसाहट’ दिखाने का उद्देश्य क्या है?

a) अपाहिज की शारीरिक स्थिति दर्शाना।

b) दर्शकों में करुणा और सहानुभूति जगाना (व्यावसायिक लाभ के लिए)। (✓)

c) उसकी आंतरिक भावनाओं को समझना।

d) कैमरे की गुणवत्ता दिखाना।

14. कवि ने इस कविता के माध्यम से किस पर व्यंग्य किया है?

a) केवल अपाहिज व्यक्तियों पर

b) केवल दर्शकों पर

c) दृश्य-संचार माध्यमों की संवेदनहीनता पर (✓)

d) समाज की उदासीनता पर

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